हिंदी विवेक : WE WORK FOR A BETTER WORLD...

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने दूसरे कार्यकाल में देश की अर्थव्यवस्था को ५ ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी बनाने का लक्ष्य रखा है. इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने १० सरकारी बैंको के विलय की घोषणा की है, इन्हें मिलाकर ४ बैंक बनाया जाएगा. मोदी सरकार के इस निर्णय के बाद सरकारी बैंको की संख्या घटकर १२ रह जाएगी. वर्ष २०१७ में इनकी संख्या २७ थी. वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने और देश की अर्थव्यवस्था को रफ़्तार देने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है. सरकारी बैंको को पूंजी आधार मजबूत बनाने के लिए १० सरकारी बैंको को ५५,२५० करोड़ रूपये पूंजी मुहैया कराने का ऐलान भी किया है. पीएनबी, ओरिएण्टल बैंक ऑफ़ कोमर्स और यूनाइटेड बैंक ऑफ़ इंडिया का विलय होगा. यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया, आंध्रा बैंक और कोर्पोरेशन बैंक का विलय होगा. केनरा बैंक और सिंडिकेट बैंक तथा इंडियन बैंक और इलाहाबाद बैंक का विलय होगा. आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार बैंको की बैलेंसशीट मजबूत करने और कर्ज देने की क्षमता बढ़ाने के लिए सरकार ने सुधार करने की पहल की है. वर्तमान समय में सार्वजनिक क्षेत्र की सभी बैंक एक दूसरे से आगे बढ़ने की होड़ में लगी हुई है. जिससे उनका खर्च बढ़ता जाता है. विलय होने से इन खर्चों में भारी कमी होगी और मुनाफा बढ़ेगा. पूंजी आधार मजबूत होने पर उद्योगों को आसानी से कर्ज मिलेगा और उनका दायरा भी बढ़ेगा. क्या सुधार प्रक्रिया जारी रखकर ५ ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी का लक्ष्य मोदी सरकार हासिल कर पाएगी ? अपनी बेबाक राय दें 

आपकी प्रतिक्रिया...

Close Menu

विगत 6 वर्षों से देश में हो रहे आमूलाग्र और सशक्त परिवर्तनों के साक्षी होने का भाग्य हमें प्राप्त हुआ है। भ्रष्ट प्रशासन, दुर्लक्षित जनता और असुरक्षित राष्ट्र के रूप में निर्मित देश की प्रतिमा को सिर्फ 6 सालों में एक सामर्थ्यशाली राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत करने में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की अभूतपूर्ण भूमिका रही है।

स्वंय के लिए और अपने परिजनों के लिए ग्रंथ का पंजियन करें!
ग्रंथ का मूल्य 500/-
प्रकाशन पूर्व मूल्य 400/- (30 नवम्बर 2019 तक)

पंजियन के लिए कृपया फोटो पर क्लिक करें

%d bloggers like this: