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क्या संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद पाकिस्तान की दोगली व आतंकी नीति का संज्ञान लेगा ?
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में आज भारत, आतंकी देश पाकिस्तान की पोल दुनिया के सामने खोलने वाला है। बताया जाता है कि विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी पाक की ओर से हर बार की तरह मानवाधिकार की आड़ लेकर कश्मीर मुद्दा उठाएंगे। वहीं भारत की ओर से इसका कड़ा जवाब दिया जाएगा। जिस देश का समाज, सरकार और सेना गैरमुस्लिम अल्पसंख्यक विरोधी हो, और  उसके मानव अधिकारों का हनन करते हुए प्रताड़ित करती हो, कत्लेआम करती हो, उसके मुंह से भारत के आंतरिक मामलों पर दखल देना शोभा नहीं देता। गौरतलब है कि पाकिस्तान के अल्पसंख्यक हिन्दू, सिख, इसाई और अन्य समाज के लोग शांति से रह नहीं सकते। दशकों से अल्पसंख्यकों के साथ दुश्मनों की तरह व्यवहार किया जाता है। पाकिस्तान की सरकार, सेना और वहां का जिहादी कट्टरपंथी समाज भी अल्पसंख्यकों के धार्मिक, सामाजिक आदि मानव अधिकारों का हनन करते हुए उन्हें प्रतिदिन प्रताड़ित करता है। अल्पसंख्यक समाज के लिए पाकिस्तान नरक से भी भयानक है। पाकिस्तान का सामाजिक तानाबाना पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है। कुछ वर्ष पूर्व पाक के अल्पसंख्यक मंत्री शहबाज भट्टी की भी निर्मम हत्या की गई थी। पाकिस्तान में ईशनिंदा कानून की आड़ में अल्पसंख्यकों के दमन, जुर्माना,जेल और मृत्युदण्ड की सजा दी जाती है। अल्पसंख्यकों के लिए काम करने वाली अंतर्राष्ट्रीय संगठन ‘माइनॉरिटी ग्रुप इंटरनेशनल’ के अनुसार अल्पसंख्यकों पर खतरों में अधिक वृद्धि वाले देशों में पाकिस्तान शीर्ष पर है। अल्पसंख्यकों के लिए सबसे खतरनाक 10 देशों की सूची में पाकिस्तान 7 वें पायदान पर है। सोमालिया, सूडान, अफगानिस्तान, इराक, म्यांमार और कांगो के बाद पाकिस्तान को दुनिया का सबसे खतरनाक देश घोषित किया गया है। अपने ही देश में मानवाधिकार का उल्लंघन करने वाला पाकिस्तान बदनीयत से भारत के आंतरिक मामले में मानवाधिकार के नाम पर हस्तक्षेप कर रहा है। दुनिया कह रही है कि आतंकी समाज और देश का नाम पाकिस्तान है। क्या संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद पाकिस्तान की दोगली और आतंकी नीति का संज्ञान लेगा ? अपनी बेबाक राय दें.

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