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एक कहावत है कि जो रोता जाता है मरे की खबर लाता है. परंतु साहसी सैकड़ों आफतों को झेल जाता है। अर्थात जो व्यक्ति पहले से ही हिम्मत हार चुका है, निराशाग्रस्त है, वह कभी उत्साहित होकर नहीं जाता है। वह तो पहले से सदमाग्रस्त होकर रोता हुआ जाता है एवं जब आता है तो मरे हुए की खबर लेकर आता है। परंतु जो हिम्मतवर एवं साहसी होता है वह भले ही सैकड़ों मुसीबते आ जाए, उनका डटकर मुकाबला करता है तथा सफलता का वरण करके लौटता है।

एतरेय ब्राह्यण ग्रंथ में कहा है इन्द्र इच्चरतः सखा। अर्थात जो साहसपूर्वक चलता है प्रभु स्वयं उसकी मदद करने को तत्पर रहते हैं। एक उर्दू शायर ने कहा है कि हिम्मत ए मर्दा, मदद दे खुदा। अर्थात साहसी पुरूष की स्वयं खुदा (भगवान) मदद करते हैं।

जापान के सुप्रसिद्ध प्रधान सेना नायक नोबुनागा बडे निडर, साहसी एवं संकल्प के धनी सुभट वीर पुरूष थे। खतरों से खेलना, उनका डटकर मुकाबला करना एवं मनोबल को उच्च रखना ये तीनो ऐसे गुण थे जो उनके खून में घुलमिल कर जीवन प्रवाह को संचालित करते थे।

एक बार उनका मुकाबला चीन की विशाल सेना से था। लड़ते-लड़ते उनके सैनिक संख्या में कुछ कम रह गए थे। शाम को जब लडाई बंद हुई तो वह अपने समस्त सैन्यबल को एक बौद्ध मंदिर में ले गए। उनके पास तीन सिक्के थे। उन्होंने कहा- इनमें एक तरफ जिधर तस्वीर है उस तरफ जापान के बादशाह की तस्वीर है। इन तीनों सिक्को को मैं एक-एक कर उछालूंगा। यदि दो बार इन सिक्कों में हमारे सम्राट की तस्वीर वाला हिस्सा दिखा तो हमारी विजय निश्चित है। उन्होने ये तीनों सिक्के एक-एक करके उछाले एवं तीनों ही सिक्के चित्त गिरे याने हर बार बादशह के अंकित चित्र वाला सिक्के का हिस्सा ऊपर रहा। उन्होंने कहा- सैनिक मित्रों- हमारी विजय अब 125 प्रतिशत सुनिश्चित है। अब चीनी फौज तो क्या स्वयं परमेश्वर भी हमें हरा नहीं सकता। कल का युद्ध निर्णायक रूप से लड़ा जाए एवं विजयश्री का वरण करके ही हम अपने खेमे में लौटेंगे।

सारे सैनिक असीम उत्साह एवं आत्मविश्वास से भर गए एवं दूसरे दिन वह इतनी बहादुरी, शूरवीरता तथा पराक्रमपूर्वक लड़े कि दुश्मन की सेना कई गुना अधिक होने पर भी युद्ध का मैदान छोड़कर भागने को मजबूर हो गई।

अगले दिन जब विजय समारोह आयोजित हुआ तो प्रधान सेनापति नोबुनागा ने अपने सैनिको की बहादुरी, पराक्रम एव्ं शौर्य की भरपूर प्रशंसा करते हुए कहा कि मित्रो! जीत मनोबल की होती है। मेरे द्वारा उछाले गए तीनों सिक्के के दोनों तरफ ही बादशाह की तस्वीर खुदी थी। तुम्हारा मनोबल बढ़ाने हेतु ऐसा करना पडा। क्योंकि, दृढ़ संकल्प ही सिद्धि का वरण कराता है।

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