हिंदी विवेक : WE WORK FOR A BETTER WORLD...

समूचे राष्ट्र को एकता के सूत्र में पिरोने में हिंदी भाषा की सबसे बड़ी भूमिका है. समय के साथ आवश्यकताओं के चलते देश के सभी राज्यों ने और नागरिकों ने हिंदी को सहजता से स्वीकार कर लिया है. हालांकि भाषा, प्रान्त की राजनीति के कारण विवाद खड़ा होता रहा है. एक समय ऐसा भी था जब दक्षिण भारत में हिंदी का सर्वाधिक विरोध होता था. आज उसी दक्षिण भारत में हिंदी सिखने के लिए कोचिंग क्लासेस खुले हुए है और जगह – जगह उसके विज्ञापन व बैनर लगे हुए है. हिंदी अब केवल राष्ट्रीय सीमा में सीमित नहीं रही बल्कि राष्ट्र भाषा से वह विश्व भाषा बनने के मार्ग पर निकल चुकी है. दुनिया का सबसे तेज कम्प्यूटर बनाने के लिए संस्कृत भाषा के बाद देवनागरी हिंदी ही सर्वश्रेष्ठ भाषा मानी जाती है. इसके अलावा वैज्ञानिक दृष्टी से भी देवनागरी हिंदी को सर्वश्रेष्ठ भाषा का दर्जा दिया गया है. हिंदी दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी भाषा है. दुनिया के १५० विश्वविद्यालयों में हिंदी भाषा पढाई जाती है. कहा जाता है कि जिस देश के नागरिक अपनी राष्ट्र भाषा का सम्मान नहीं करते उसका सम्मान तो विदेशी भी नहीं करते. भारत जैसे विराट, विशाल व विविधता भरे देश में जिसके बारे में कहा जाता है कि ‘कोस – कोस पर पानी बदले, चार कोस पर वाणी’ उस देश में हिंदी भाषा का लोकप्रिय होना काबिले तारीफ है. क्या हिंदी विश्व भाषा बनने का सामर्थ्य रखती है ? अपनी बेबाक राय दें …

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विगत 6 वर्षों से देश में हो रहे आमूलाग्र और सशक्त परिवर्तनों के साक्षी होने का भाग्य हमें प्राप्त हुआ है। भ्रष्ट प्रशासन, दुर्लक्षित जनता और असुरक्षित राष्ट्र के रूप में निर्मित देश की प्रतिमा को सिर्फ 6 सालों में एक सामर्थ्यशाली राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत करने में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की अभूतपूर्ण भूमिका रही है।

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