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वामपंथी पत्रकार कैसे बना राष्ट्रवादी ?

पत्रकारिता के क्षेत्र में प्रतिष्ठा वही पाते हैं, जो भयभीत हुए बिना अपने सिद्धान्तों के पक्ष में खड़े रहें। रूसी करंजिया लम्बे समय तक वामपन्थ के समर्थक रहे; पर उसका खोखलापन समझ आने पर वे उसके प्रबल विरोधी भी हो गये।

मुम्बई में 15 सितम्बर, 1912 को एक पारसी परिवार में जन्मे रूसी खुरशेदजी करंजिया ने पत्रकारिता का प्रारम्भ‘टाइम्स ऑफ़ इण्डिया’ से किया। उसमें उनकी टिप्पणियों की सर्वत्र सराहना होती थी। खोजी पत्रकारिता की ओर रुझान होने पर उन्होंने व्यवस्था को चोट पहुँचानेवाले हर समाचार को ढूँढकर प्रकाशित करने के लिए अंग्रेजी में एक फरवरी, 1941 से ‘ब्लिट्ज’ समाचार पत्र प्रारम्भ किया। थोड़े ही समय में ब्लिट्ज ने अपनी पहचान बना ली।

उस समय देश में नेहरूवाद अर्थात् वामपन्थ और रूस समर्थन की लहर बह रही थी। नेहरूवादी होते हुए भी वे शासन की कमियों और विफलताओं को सामने लाये। ‘ब्लिट्ज’ का अर्थ ही है आक्रमण या चढ़ाई। श्री करंजिया ने अपने पत्र की ऐसी ही प्रतिष्ठा बनाई। उसके मुखपृष्ठ का लाल रंग उनके वामपन्थी विचारों को स्पष्ट दर्शाता था। उनका विश्व के तत्कालीन सब बड़े नेताओं से सम्पर्क था। वे उनसे सीधा संवाद कर उसे अपने पत्र ‘ब्लिट्ज’ में छापते थेे। छोटे से छोटे और बड़े से बड़े व्यक्ति से मिलने में वे कभी संकोच नहीं करते थे। ब्लिट्ज के मालिक होने के बाद भी वे द्वितीय विश्व युद्ध के समाचार संकलन के लिए स्वयं असम एवं बर्मा गये। इन्हीं गुणों के कारण वे लगभग 50 साल तक समाचार जगत में छाये रहे।

श्री करंजिया के जीवन के उत्तरार्ध में एक भारी मोड़ आया। वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा के कट्टर विरोधी थे। इन्दिरा गांधी ने उन्हें विदेश विभाग से सम्बद्ध कर चीन से सम्बन्ध सुधारने के काम में लगाया। इसके लिए उन्होंने कई बार चीन का प्रवास किया। जब आपात्काल के बाद दिल्ली में मोरारजी भाई के नेतृत्व में जनता पार्टी की सरकार बनी, तो श्री करंजिया अपना त्यागपत्र लेकर तत्कालीन विदेश मन्त्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी के पास पहुँचे। अटल जी ने कहा कि आपका काम देशहित में ही था। अतः अपना काम करते रहें, त्यागपत्र देने की आवश्यकता नहीं है।

अटल जी की इस बात ने उनका जीवन बदल दिया। उन्होंने अटल जी की न जाने कितनी बार घटिया आलोचना की थी; पर संघ परिवार के इस व्यक्ति का मन इतना उदार होगा, ऐसी उन्हें कल्पना नहीं थी। उन्हें अपनी वामपन्थी विचारधारा और जीवन लक्ष्य के बारे में फिर से सोचना पड़ा। उन्हें लगा कि जिस विचार से वह पिछले 60 साल से जुड़े थे, वह निरर्थक है। कुछ समय बाद ‘ब्लिट्ज’ भी बन्द हो गया। 1980 में उन्होंने ‘द डेली’ नामक दैनिक पत्र निकाला; पर वह अधिक नहीं चल पाया।

60 साल की अवस्था में वे भारतीय योग की ओर आकर्षित हुए और कठिन योग, यहाँ तक कि कुंडलिनी साधने में भी सफल हुए। वे बिहार स्थित परमहन्स योगानन्द विद्यालय के अनुयायी बने और कुंडलिनी योग पर एक पुस्तक भी लिखी। एक समय वे संसद की अवमानना के दोषी ठहराये गये थे; पर बाद में वे राज्यसभा के सदस्य भी बने। वे अपने समाचार पत्र के लाभांश में से सब कर्मचारियों को हिस्सा देते थे तथा किसी कर्मचारी के असामयिक निधन होने पर उसके परिवार की हरसम्भव सहायता करते थे। इस प्रकार उन्होंने हर काम पूर्णता से करने का प्रयास किया।

95 वर्ष की दीर्घ अवस्था में एक फरवरी, 2008 को इस प्रखर, निर्भीक एवं सत्यान्वेषी पत्रकार का मुम्बई में ही देहान्त हुआ।

15 सितंबर की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ 

  • नेपोलियन के नेतृत्व में 1812 को फ्रांसीसी सेना मास्को के क्रैमलिन पहुंची।
  • प्योंगयांग की लड़ाई में 1894 कोजापान ने चीन को करारी मात दी।
  • प्रथम विश्व युद्ध में 1916 को पहली बार सोम्मे की लड़ाई में टैंक का इस्तेमाल किया गया।
  • गांधी-इरविन समझौता 1931 हुआ।
  • द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान ब्रिटेन की वायुसेना ने 1940 में दावा किया कि इसनेहिटलर की जर्मन वायुसेना को शिकस्त दे दी है।
  • स्वतंत्र भारत का पहला ध्वजपोत आईएनएस 1948 में दिल्ली बंबई (अब मुंबई) के बंदरगाह पर पहुंचा।
  • रूसी नेता निकिता ख्रुश्चेव 1959 मेंअमेरिका की यात्रा करने वाले सोवियत संघ के पहले नेता बने।
  • भारत की राष्ट्रीय प्रसारण सेवा दूरदर्शन की शुरुआत 1959 में हुई।
  • हरी-भरी और शांति पूर्ण दुनिया के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध ग्रीन पीस की स्थापना 1971 में की गई।
  • वानुअतु संयुक्त राष्ट्र संघ का सदस्य 1981 में बना।
  • लेबनान के निर्वाचित राष्ट्रपति बशीर गेमायेल की पदासीन होने के पूर्व ही 1982 को बम बिस्फोट में हत्या।
  • सिडनी में 27वें ओलम्पिक खेलों का शुभारम्भ 2000 में हुआ।
  • अमेरिकी सीनेट ने 2001 में राष्ट्रपति कोअफ़ग़ानिस्तान पर सैनिक कार्यवाही की मंजूरी दी।
  • न्यूयार्क में 2002 को संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के अवसर पर भारत, चीनएवं रूस के विदेश मंत्रियों की बैठक आयोजित, थाईलैंड के सट्टाहिम मेंश्रीलंकासरकार व लिट्टे के बीच सीधी वार्ता शुरू।
  • सिंगापुरके मुद्दे पर 2003 में विकासशील देशों के भड़क उठने से डब्ल्यूटीओ वार्ता विफल।
  • ब्रिटिश नागरिक गुरिंदर चड्ढा को 2004 में ‘वूमैन आफ़ द ईयर’ सम्मान।
  • क्राम्पटन गीब्स ने 2008 मेंअमेरिका की एमएसआई ग्रुप कंपनी का अधिग्रहण किया।
  • अमरीका के सबसे बड़े बैंकों में से एक लीमैन ब्रदर्स ने 2008 में अपने आप को दिवालिया घोषित कर दिया। यह अब तक की अमरीकी इतिहास कि दिवालिया होने की सबसे बड़ी घटना थी।
  • बंगलूर के मुंदिर शिवराजी ने 2009 में सब जूनियर बिलियर्ड्स का ख़िताब जीता। पेनसुला फाउंडेशन के चेयरमैन सुब्रतो चटोपाध्याय 2009-10 के लिए ‘आडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशन’ के अध्यक्ष चुने गये।
  • कासीनी अंतरिक्ष यान 2017 में शनि के उपग्रह टाइटन से टकरा गया।

15 सितंबर को जन्मे व्यक्ति – 

  • फ़ारसी विद्वान् लेखक, वैज्ञानिक, धर्मज्ञ तथा विचारक अलबेरूनी का जन्म 973 को हुआ था।
  • इंजीनियर, वैज्ञानिक और निर्मातामोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया का जन्म 1861 को हुआ था।
  • भारतीय उपन्यासकार शरत चंद्र चट्टोपाध्याय का जन्म 1876 को हुआ था।
  • हरक्‍यूल पॉयरॉट, मिस मार्पल और पार्क पाइन जैसे जासूसी किरदारों में जान डालने वाली अगाथा क्रिस्‍टी का जन्‍म 1890 में हुआ था।
  • भारत प्रसिद्ध हिन्दी साहित्यकार डॉ. रामकुमार वर्मा का जन्म 1905 को हुआ था।
  • तमिलनाडुके प्रसिद्ध नेता और भूतपूर्व मुख्यमंत्री सी. एन. अन्नादुराई का जन्म 1909 को हुआ था।
  • परमवीर चक्र सम्मानित भूतपूर्व भारतीय सैनिक लांस नायक करम सिंह का जन्म 1915 को हुआ था।
  • अमेरिकी अभिनेता और निर्देशक जैकी कूपर का जन्म 1922 में हुआ।
  • प्रसिद्ध कवि एवं साहित्यकार सर्वेश्वर दयाल सक्सेना का जन्म 1927 को हुआ था।
  • भारतीय अर्थशास्त्री, शैक्षणिक, और राजनीतिज्ञ, कानून मंत्री और न्यायमूर्ति भारत के लिए सुब्रमण्यम स्वामी का जन्म 1939 में हुआ।
  • मुम्बई की झुग्गी बस्तियों के लिए संघर्ष करने वाले व्यक्ति जॉकिन अर्पुथम का जन्म 1946 में हुआ।
  • भारतीय अभिनेत्री राम्या कृष्णन का जन्म 1967 में हुआ।

15 सितंबर को हुए निधन – 

  • राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पाँचवें सरसंघचालक के एस सुदर्शन का निधन 2012 को हुआ था।

15 सितंबर के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव 

  • अभियन्ता दिवस
  • संचायिका दिवस

 

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