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 दुनिया में हिंदुत्व की विजयी पताका फहराने वाला योद्धा

भारत में अनेक मनीषी ऐसे हुए हैं, जिन्होंने दुनिया के अन्य देशों में जाकर भारतीय धर्म एवं संस्कृति का प्रचार किया। बहुमुखी प्रतिभा के धनी डा. हरवंशलाल ओबराय ऐसे ही एक विद्वान् थे, जो एक दुर्घटना के कारण असमय ही दुनिया छोड़ गये।

डा. हरवंशलाल का जन्म 1926 में वर्तमान पाकिस्तान के एक गाँव में हुआ था। प्रारम्भ से ही उनकी रुचि हिन्दू धर्म के अध्ययन के प्रति अत्यधिक थी। 1947 में देश विभाजन के बाद वे अपनी माता जी एवं छह भाई-बहिनों सहित भारत आ गये। यहाँ उन्होंने सम्मानपूर्वक हिन्दी साहित्य, भारतीय संस्कृति (इण्डोलॉजी) एवं दर्शनशास्त्र में एम.ए. किया। इसके बाद 1948 में उन्होंने दर्शनशास्त्र में पी-एच.डी. पूर्ण की। इस दौरान उनका स्वतन्त्र अध्ययन भी चलता रहा और वे प्राच्य विद्या के अधिकारी विद्वान माने जाने लगे।

सामाजिक क्षेत्र में वे ‘अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद’ से जुड़े और 1960 एवं 61 में उसके अध्यक्ष रहे। 1963 में यूनेस्को के निमन्त्रण पर वे यूरोप, अमरीका, कनाडा और एशियाई देशों में भारतीय संस्कृति पर व्याख्यान देने के लिए गये। इसके बाद भी उनका विदेश यात्राओं का क्रम चलता रहा।

उन्होंने 105 देशों की यात्रा की। हर यात्रा में वे उस देश के प्रभावी लोगों से मिले और वहाँ भारतीय राजाओं, संन्यासियों एवं धर्माचार्याें द्वारा किये कार्यों को संकलित किया। इस प्रकार ऐसे शिलालेख, भित्तिचित्र और प्रकाशित सामग्री का एक अच्छा संग्रह उनके पास हो गया।

एक बार अमरीका में उनका भाषण सुनकर बिड़ला प्रौद्योगिकी संस्थान, राँची के श्री चन्द्रकान्त बिड़ला ने उन्हें अपने संस्थान में काम करने का निमन्त्रण दिया। 1964 में वहाँ दर्शन एवं मानविकी शास्त्र का विभाग खोलकर डा. ओबराय को उसका अध्यक्ष बनाया गया। उनके सुझाव पर सेठ जुगलकिशोर बिड़ला ने छोटा नागपुर में ‘सरस्वती विहार’ की स्थापना कर भारतीय संस्कृति के शोध, अध्ययन एवं प्रचार की व्यवस्था की।

सेठ जुगलकिशोर बिड़ला को इस बात का बहुत दुःख था कि वनवासी क्षेत्र में ईसाई मिशनरियाँ सक्रिय हैं तथा वे निर्धन,  अशिक्षित लोगों को छल-बल से ईसाई बना रही हैं। यह देखकर डा. ओबराय ने ‘सरस्वती विहार’ की गतिविधियों में ऐसे अनेक आयाम जोड़े, जिससे धर्मान्तरण को रोका जा सके। इसके साथ ही उन्होंने शुद्धीकरण के काम को भी तेज किया।

डा. ओबराय हिन्दी, संस्कृत, पंजाबी, उर्दू, अंग्रेजी तथा फ्रेंच के विद्वान थे। सम्पूर्ण भागवत, रामायण, गीता एवं रामचरितमानस उन्हें कण्ठस्थ थे। उनके सैकड़ों शोध प्रबन्ध देश-विदेश की प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में छपे। अनेक भारतीय एवं विदेशी छात्रों ने उनके निर्देशन में शोध कर उपाधियाँ प्राप्त कीं। उनकी विद्वत्ता देखकर देश-विदेश के अनेक मठ मन्दिरों से उनके पास गद्दी सँभालने के प्रस्ताव आये; पर उन्होंने विनम्रतापूर्वक सबको मना कर दिया।

एक बार वे रेल से इन्दौर जा रहे थे। मार्ग में रायपुर स्टेशन पर उनके एक परिचित मिल गये। उनसे वे बात कर ही रहे थे कि गाड़ी चल दी। डा. ओबराय ने दौड़कर गाड़ी में बैठना चाहा; पर अचानक ठोकर खाकर वे गिर पड़े। उन्हें तत्काल राँची लाया गया; पर चोट इतनी घातक थी कि उन्हें बचाया नहीं जा सका। इस प्रकार सैकड़ों देशों में हिन्दुत्व की विजय पताका फहराने वाला योद्धा 20 सितम्बर, 1983 को चल बसा।

20 सितंबर घटनाएँ –

  • फ्रांसने 1792 में प्रशिया को वाल्मी में हराया।
  • भाप से चलने वाली पहली बस 1831 में बनाई गयी। 30 लोगों की क्षमता तथा अत्यंत धीमी गति से चलने वाली इस बस के अविष्कारक गोर्डन ब्रान्ज़ थे जिनका संबंध ब्रिटेन से था। आज पेट्रोल और डीज़ल से चलने वाली बसें जन परिवहन का एक महत्वपूर्ण साधन बन गयी हैं।
  • नीदरलैंड(एम्सटेर्डम-हारलेम) में 1839 को पहला रेल रोड खुला।
  • अलमा का युद्ध: क्रीमियाई युद्ध की पहली बड़ी लड़ाई में ब्रिटेन और फ्रांस के गठबंधन ने 1854 में रूस को पराजित किया।
  • मद्रास (अब चेन्नई) का समाचार पत्र ‘द हिन्दू जी एस अय्यर के संपादकीय नेतृत्व में साप्ताहिक अंक के रूप में 1857 को पहली बार प्रकाशित हुआ।
  • ब्रिटिश सैनिकों ने 1857 में विद्रोहियों से दिल्ली को मुक्त कराकर फिर उस पर कब्जा किया।
  • मद्रास का अखबार द हिंदू पहली बार जी.एस.एस अय्यर के संपादन में 1878 को सप्ताहिकी के रूप में प्रकाशित।
  • पहला कांत फिल्म समारोह 1946 को आयोजित।
  • रूसी प्रोब ने 1970 में चांद के सतह से कुछ चट्टानें इकट्ठा की।
  • दुनिया के मशहूर ‘बैटल ऑफ सक्सेज’ में 1973 को बिली जीन किंग ने जीत दर्ज की।
  • एप्पल उपग्रह ने 1983 में कार्य करना बंद किया।
  • लेबनान की राजधानी बेरूत में 1984 को स्थित अमेरिकी दूतावास पर आत्मघाती हमला किया था।
  • संयुक्त राज्य महासभा का 50वाँ अधिवेशन 1995 में प्रारम्भ।
  • क्लिंटन दम्पत्ति 2000 में ‘व्हाइट वाटर कांड’ के आरोपों से मुक्त।
  • अमेरिकाने 2001 में 150 लड़ाकू विमान खाड़ी में उतारे।
  • संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2003 में एक प्रस्ताव पारित कर इस्रायल से यासिर अराफ़ात की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा।
  • इंडोनेशिया में 2004 को राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए मतदान।
  • ब्रिटेन के रॉयल बॉटैनिक गार्डन्स के वैज्ञानिकों को 2006 में 200 वर्ष पुराने बीज उगाने में कामयाबी मिली।
  • फ़्राँसकी सबसे वृद्ध महिला सिमोन कैपोन की 2007 में 113 की अवस्‍था में मृत्‍यु हो गई।
  • मराठी फ़िल्म ‘हरिशचन्द्राची फैक्ट्री’ को 2009 में आस्कर अवार्ड्स की विदेशी फ़िल्म कैटिगरी में भारत की एंट्री के तौर पर चुना गया।
  • अफगानिस्तानके पूर्व राष्ट्रपति और तालिबान से वार्ता के लिए गठित सरकारी शांति परिषद के शीर्ष वार्ताकार बुरहानुद्दीन रब्बानी की 2011 को काबुल में अमेरिकी दूतावास के समीप स्थित निवास पर, पगड़ी में विस्फोटक छिपाए, आत्मघाती हमलावर द्वारा हत्या कर दी गई।
  • पाकिस्तानमें 2011 को शिया तीर्थयात्रियों को लेकर प्रांतीय राजधानी क्वेटा से सीमावर्ती शहर ताफतान जा रही बस को बलूचिस्तान के मस्तांग जिले में बंदूकधारियों ने रुकवा कर 26 लोगों को गोली मार दी।

20 सितंबर को जन्मे व्यक्ति – 

  • मध्यकालीन भारत का एक विद्वान् साहित्यकार और फ़ारसी का प्रसिद्ध कवि फ़ैज़ी का जन्म 1547 में हुआ।
  • भारत के महान संत एवं समाजसुधारक श्री नारायण गुरु का जन्म 1856 में हुआ।
  • मराठी पत्रकार नाना साहब परुलेकर का जन्म 1897 में हुआ।
  • अर्थ, सारांश, नाम जैसी हिंदी कला फिल्में देने वाले निर्माता निर्देशक महेश भट्ट का जन्म 1897 में हुआ।
  • प्रसिद्ध अभिनेत्री सोफिया लोरेन का जन्म 1897 में हुआ।
  • भारतीय आध्यात्मिक नेता श्रीराम शर्मा आचार्य का जन्म 1911 में हुआ।
  • तेलुगु फ़िल्म अभिनेता और फ़िल्म निर्माता ए. नागेश्वर राव का जन्म 1924 में हुआ।
  • भारतीय फिल्म डायरेक्टर, प्रोड्यूसर और स्क्रिप्ट लेखक महेश भट्ट का जन्म 1948 में हुआ।

20 सितंबर को हुए निधन –

  • दिल्ली के सुल्तान फिरोज तुगलक शाह तृतीय का निधन 1388 में हुआ।
  • गोवा के वैज्ञानिक-क्रांतिकारी जोस कसटोडियो फारिया का निधन 1819 में हुआ।
  • भारतीयस्वतंत्रता सेनानी मोहम्मद बरकतउल्ला का निधन 1927 में हुआ।
  • सामाजिक कार्यकर्ता और हिंदुस्‍तान की आजादी के लिए लड़ने वाली अंग्रेज महिलाएनी बेसेंट का निधन 1933 में हुआ था।
  • भारतीय महिला स्वतंत्रता सेनानी कनकलता बरुआ का निधन 1942 में हुआ।
  • प्रसिद्ध साहित्यकार दया पवार का निधन 1996 में हुआ।
  • तमिल सिनेमा की स्वप्न सुंदरी नाम से विख्यात अभिनेत्री राजकुमारी का निधन 1999 में हुआ।
  • हिन्दी सिनेमा में सन 1950-60 की प्रसिद्ध अभिनेत्री शकीला का निधन 2017 में हुआ।
  • हिन्दी भाषा की लब्ध प्रतिष्ठित उपन्यासकार, कवयित्री तथा नारीवादी चिंतक तथा समाज सेविका प्रभा खेतान का निधन 2009 में हुआ।
  • रंगमंच के प्रसिद्ध कलाकार और निर्देशक दिनेश ठाकुर का निधन 2012 में हुआ।

 

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