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धारा 370 हटने के बाद से पाकिस्तान की अवस्था विकट हो गई है। युद्ध के इशारे में कोई दम नहीं है, इसका अनुमान जब इमरान खान को हो गया तब 16 सितंबर को उन्होंने अपने देश सेना एवं पाकिस्तान के पास उपलब्ध हथियारों की बखिया उधेडनी शुरू की। भारत के साथ पारंपारिक या आमने सामने के युद्ध में पाकिस्तान टिक नहीं पायेगा और वह मुंह के बल गिर जायेगा इसकी स्वीकारोक्ति इमरान खान ने की। इसी से स्पष्ट होता है कि पाकिस्तान अब आतंकवादी, आत्मघाती, फिदायीन,जिहादी हमले कर सकता है। परंतु यदि ऐसा कुछ हुआ तो इमरान को अपना देश भी बचाना मुश्किल हो जायेगा यह निश्चित है।

काश्मीर में अन्याय एवं अत्याचारों की झूठी कहानियां गढ़ने वाले पाकिस्तान को बलुचिस्तान, पख्तुनिस्तान एवं सिंध में भी झांककर देखना चाहिये। चीन में उर्दूगर मुसलमानों की हालत भी वही है। काश्मीर की चिंता करने वाले इम्रान खान को उर्दूगर मुस्लिम कौन और चीन उनपर कैसे अत्याचार कर रहा है, क्या पता नहीं है? चीन सरकार के जुल्मोंसितम के कारण दबे हुए उर्दूगरों के समाचार पेपर में नहीं आते एवं इसके कारण उन्हें इस बाबत कुछ भी पता नहीं है, ऐसा इमरान खान कहते हैं।

इस्लामी को ऑपरेशन परिषद मे मिला धक्का

‘ऑर्गनाईजेश फॉर इस्लामिक को ऑपरेशन”(ओ आई सी) नामक संगठन के साथ भारत ने घनिष्ठ राजनैतिक, व्यापारिक और आर्थिक संबध प्रस्थापित किये हैं। फिर भी पाकिस्तान ने इस्लाम की एकजुटता का राग अलापते हुए भारत के विरोध में प्रस्ताव रखा। परंतु वास्तव में प्रस्ताव का मूल्य शून्य ही था। इस प्रश्न पर एक भी मुस्लिम देश ने पाकिस्तान को सहयोग नहीं दिया। इससे पाकिस्तानी शासकों को धक्का पहुंचा।
पाकिस्तान के पारंपारिक समर्थक खाडी के देशों में से किसी ने भी भारत के राज्य विभाजन के निर्णय का विरोध नहीं किया न ही धारा 370 हटाने पर कोई सवाल खडे किये। यह पाकिस्तान के लिये दु:खद था। दूसरी ओर भारत का विरोध करने के बजाय कुछ मुस्लिम देशों ने मोदीजी को सम्मानित किया। वह भी ऐसे समय जब कश्मीर से धारा 370 हटा दी गई थी। पाकिस्तानी समाचारपत्र के अनुसार कश्मीर के घटनाक्रम पर चर्चा के दौरान एक प्रमुख सिनेटर ने सिनेट में मजबूती के साथ कहा कि “अब समय आ गया है कि पाकिस्तान को ओआईसी से बाहर निकल आना चाहिये।” वर्तमान समय में इस्लामी मुल्कों में पाकिस्तान एक बहुत बडी सामरिक ताकत है एवं उसके पास अण्विक अस्त्र हैं। परंतु, पाकिस्तान में राजनितिक अस्थिरता, पाक सेना की अकार्यक्षमता और दिवालिया आर्थिक स्थिति उसे काश्मीर पर दु:साहस नहीं करने दे रही है। 19 तारीख को संयुक्त राष्ट्रसंघ का अधिवेशन शुरु हो रहा है। 27 तारीख को भारत एवं पाकिस्तान दोनों के प्रधानमंत्री अधिवेशन को संबोधित करेंगे। इस समय में संयुक्त राष्ट्रसंघ में होने वाला घटनाक्रम महत्वपूर्ण होगा।

काश्मीर के संबंध में पाकिस्तान का पक्ष सुनने को चीन तथा तुर्की को छोड़कर, विश्व का कोई भी देश राजी नहीं है। पाकिस्तान जनता को अन्य देशों से तो कोई आशा नहीं थी परंतु खाडी देशों से थी। सउदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात इ. देशों का समर्थन उनको मिलेगा इस विषय में वे आश्वस्त थे। परंतु वहां से सहानुभूति का एक शब्द भी उन्हे नहीं मिला। इसके उलट यह भारत का आंतरिक मामला है, इस प्रकार का उत्तर प्राप्त हुआ। तब पाकिस्तानी जनता अचंभित रह गई क्योंकि पाकिस्तानी जनता का अरब देशों से आध्यात्मिक लगाव है।

पाकिस्तानी सेना की ओर से नाउम्मीद

दूसरा धक्का याने पाकिस्तानी सेना की ओर से नाउम्मीदी। प्रत्येक पाकिस्तानी अपनी सेना को विश्व की श्रेष्ठ सेना मानता है। आण्विक अस्त्र, प्रक्षेपणास्त्र एवं करीब 8 लाख जवानों की सेना जो कुछ भी कर सकती है के दम पर हम भारत को कभी भी झुका सकते हैं यह विश्वास पाकिस्तानी जनता के मन में निर्माण किया है। भारत के साथ हुए चार युद्धों में पाकिस्तान पराजित नहीं हुआ वरन राजनीतिक नेतृत्व द्वारा बीच में ही हिम्मत हारने से पाकिस्तानी सेना को पीछे हटाना पड़ा, ऐसा प्रत्येक पाकिस्तानी के मन में बिम्बित किया गया है। इसके कारण धारा 370 को अप्रभावी कर कश्मीर को केन्द्रशासित प्रदेश बनाने के निर्णय पर हमारी सेना तत्काल कार्रवाई करेगी एवं भारत को झुकने को बाध्य करेगी ऐसी निश्चित आशा प्रत्येक पाकिस्तानी को थी। परंतु वैसा कुछ नहीं हुआ। फिर भी कोई भी पाकिस्तानी अपनी सेना पर दोषारोपण करता नजर नहीं आ रहा है। उनका सारा गुस्सा इमरान खान एवं उसकी सरकार पर निकलता है। नरेंद्र मोदी ने गत पांच वर्ष सतत विश्व भर दौरा कर पाकिस्तान के विरुद्ध ऐसा वातावरण बनाया कि पाकिस्तान विश्व में अकेला पड गया। पांच अगस्त को धारा 370 को निष्प्रभावी करने के बाद पाकिस्तान अरब देशों की ओर मदद हेतु भीख मांग रहा था, वहीं संयुक्त अरब अमीरात मोदी जी को अपने देश में ससम्मान बुलाकर उनके देश का सर्वोच्च सम्मान प्रदान कर रहा था। यह जख्मों पर नमक रगडने जैसा था। पाकिस्तानी जनता को यह समझ ही नहीं आ रहा है कि क्या करें? सारा विश्व पाकिस्तान के इतने विरोध में कैसे चला गया, इसीका वे विचार कर रहे हैं।

देशांतर्गत राजनिती में बड़ी घेराबंदी

इमरान खान की देश के अंदर भी घरोबंदी की जा रही है। भ्रष्टाचारियों को जेल भेजेंगे इस वचन के साथ इमरान खान सत्तारुढ हुए थे। घोषणानुसार उन्होंने भूतपूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ तथा शाहिद खाकन अब्बासी, भूतपूर्ण राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी को जेल भेज दिया है। नवाज शरीफ की पुत्री मरियम सरकार के विरोध में वातावरण बनाने का प्रयास कर रही थी। इन कारगुजारियों से पाकिस्तान की विरोधी पार्टीयों मे बहुत असंतोष है और वे इम्रान खान का किसी भी प्रकार से सहयोग करने को तैयार नहीं है।

इधर भारत ने भी धारा 370 को निष्प्रभावी करने का जो समय चुना वह अचूक था। वर्तमान में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था भिखारी जैसी स्थिति में है। चीन का रोड़ प्रकल्प बीच में ही लटका हुआ है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री विश्व में कटोरा लिये घुम रहे हैं। अब युद्ध होता ही है तो उसका खर्च उठाने की स्थिति में पाकिस्तान नहीं है।

कश्मीर घाटी के संदर्भ में भारत का निर्णय आंतरिक

कश्मीर घाटी के संदर्भ में लिया गया निर्णय भारत का आंतरिक मामला है और इसमें किसी भी देश को हस्तक्षेप की अनुमति नहीं है, यह भारत की निश्चित भूमिका है। इसे करीब करीब सभी देशों ने मान्य किया है। केवल कुछ विदेशी प्रसार माध्यम तथा कुछ देशों के राजदूत यह मांग कर रहे हैं कि घाटी से संचारबंदी हटाकर वहां इंटरनेट सेवायें बहाल की जायें। धारा 370 के विषय में किसी भी देश ने कुछ भी नहीं कहा है। उनकी मांग है कि सभी राजनीतिक बंदियों की रिहाई हो और राज्य मे चुनाव कराये जायें। पाकिस्तान यही मांगे संयुक्त राष्ट्रसंघ के सामने रखनेवाला है।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत को मिलने वाले मान सम्मान से पाकिस्तानी जनता को हमेशा से ही चिढ़ रही है। ऐसा सम्मान पाकिस्तान को क्यों नहीं मिलता इस पर अब विचार विमर्श हो रहा है।एक बात वो निश्चित है कि पाकिस्तान सरकार तथा सेना तो निराश हो ही गये हैं, सामान्य नागरिक भी दिग्मूढ़ (कुछ समझ मे न आनेवाली अवस्था)हो गये हैं। 5 अगस्त के बाद पाक टीव्ही पर रोज होने वाली चर्चा सुनने के बाद पाकिस्तान की अवस्था स्पष्टरुप से समझ में आती है। पाकिस्तान सरकार, मंत्री, सेना के प्रवक्ता सामान्य जनता की भारत के विरुद्ध विषैली भाषा में प्रतिक्रिया सुनने पर यह लगता है कि वे उधार का पराक्रम करने की कोशीश कर रहे हैं। इन सब प्रतिक्रियाओं को बाजू मे रखकर पाकिस्तान मे गत पैतालिस दिनों से जो विचार मंथन चल रहा है उस ओर यदि ध्यान से देखें तो यह समझ मे आता है कि मोदी सरकार ने ये जो कदम उठाया है उससे आनेवाले समय में पाकिस्तानी राजनीति में अतंर्गत एवं बाहरी दोनो बदलाव देखने मिलेंगे।

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