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त्रिपुरा हाई कोर्ट ने राज्य के सभी मंदिरों में पशुओं एवं पक्षियों की बलि पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिससे बवाल मचा हुआ है और लोग चर्चा कर रहे है कि क्या न्यायपालिका इसी तर्ज पर बकरी ईद में पशु बलि पर प्रतिबंध लगाने का साहसिक फैसला दे पाएगी और उसे अमल में ला पाएगी ? मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायमूर्ति अरिंदम लोध की एक खंडपीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया. इसके साथ ही अपने आदेश को अमल में लाने के लिए सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को इस आदेश का क्रियान्वयन सुनिश्चित करने हेतु दिशा निर्देश भी दिए. ज्ञात हो कि इसके पूर्व वर्ष २०१४ में हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने भी मंदिरों में पशुओं की बलि पर प्रतिबंध लगाया था. कोर्ट ने कहा था कि ईश्वर को खुश करने के नाम पर बर्बर तरीके से पशु वध करने की मंजूरी नहीं दी जा सकती. क्या इसी आधार पर न्यायपालिका बकरी ईद के दौरान करोड़ो पशुओं की होने वाली बर्बर – निर्मम हत्या पर भी पूरी तरह प्रतिबंध लगा पाएगी ? अपनी बेबाक राय दें 

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