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२२ युद्ध जीतकर मिली ‘विक्रमादित्य’ की उपाधि

अपने शौर्य से इतिहास की धारा मोड़ने वाले वीर हेमू का जन्म दो अक्तूबर, 1501 (विजयादशमी) को ग्राम मछेरी (अलवर, राजस्थान) में हुआ था। उनके पिता राय पूरणमल पहले पुरोहित थे; पर फिर वे रिवाड़ी (हरियाणा) आकर नमक और बारूद में प्रयुक्त होने वाले शोरे का व्यापार करने लगे। हेमू ने यहां आकर शस्त्र के साथ ही संस्कृत, हिन्दी, फारसी, अरबी तथा गणित की शिक्षा ली। इसके बाद वह आगरा आ गये और तत्कालीन अफगान सुल्तान सलीम शाह के राज्य में बाजार निरीक्षक की नौकरी करने लगे।

जब सलीम के बेटे फिरोजशाह को मारकर मुहम्मद आदिल सुल्तान बना, तो हेमू की उन्नति होती चली गयी और वह कोतवाल, सामन्त, सेनापति और फिर प्रधानमन्त्री बन गये। जब भरे दरबार में सिकन्दर खां लोहानी ने आदिलशाह को मारना चाहा, तो हेमू ने ही उसकी रक्षा की। इससे वह आदिलशाह का विश्वासपात्र हो गये। उन्होंने कई युद्धों में भाग लिया और सबमें विजयी हुए। इससे उनकी गणना भारत के श्रेष्ठ वीरों में होने लगी। उन्होंने इब्राहीम खां, मुहम्मद खां गोरिया, ताज कर्रानी, रुख खान नूरानी आदि अनेक विद्रोहियों को पराजित कर पंजाब से लेकर बिहार और बंगाल तक अपनी वीरता के झंडे गाड़ दिये। यद्यपि ये अभियान उन्होंने दूसरों के लिए ही किये थे; पर उनके मन में अपना स्वतन्त्र हिन्दू राज्य स्थापित करने की प्रबल इच्छा विद्यमान थी।

हुमायूं की मृत्यु के बाद घटनाक्रम तेजी से बदला। अतः हेमू ने आगरा पर धावा बोल दिया। वहां का मुगल सूबेदार इस्कंदर खान उजबेक तो उनका नाम सुनते ही मुख्य सेनापति तर्दीबेग के पास दिल्ली भाग गया। हेमू ने अब दिल्ली को निशाना बनाया। भयंकर मारकाट के बाद तर्दीबेग भी मैदान छोड़ गया। इस प्रकार हेमू की इच्छा पूरी हुई और वह सात अक्तूबर, 1556 को हेमचन्द्र विक्रमादित्य के नाम से दिल्ली के सिंहासन पर आरूढ़ हुए। उस समय कुछ अफगान और पठान सूबेदारों का समर्थन भी उन्हें प्राप्त था।

उस समय राजनीतिक दृष्टि से भारत विभक्त था। बंगाल, उड़ीसा और बिहार में आदिलशाह द्वारा नियुक्त सूबेदार राज्य कर रहे थे। राजस्थान की रियासतें आपस में लड़ने में ही व्यस्त थीं। गोंडवाना में रानी दुर्गावती, तो दक्षिण में विजयनगर साम्राज्य प्रभावी था। उत्तर भारत के अधिकांश राज्य भी स्वतन्त्र थे। अकबर उस समय केवल नाममात्र का ही राजा था। ऐसे में दिल्ली और आगरा का शासक होने के नाते हेमू का प्रभाव काफी बढ़ गया। मुगल अब उसे ही अपना शत्रु क्रमांक एक मानने लगे। अकबर ने अपने संरक्षक बैरम खां के नेतृत्व में सम्पूर्ण मुगल शक्ति को हेमू के विरुद्ध एकत्र कर लिया।

पांच नवम्बर, 1556 को पानीपत के मैदान में दूसरा युद्ध हुआ। हेमू के डर से अकबर और बैरमखां युद्ध से दूर ही रहे। प्रारम्भ में हेमू ने मुगलों के छक्के छुड़ा दिये; पर अचानक एक तीर उनकी आंख को वेधता हुआ मस्तिष्क में घुस गया। हेमू ने उसे खींचकर आंख पर साफा बांध लिया; पर अधिक खून निकलने से वह बेहोश होकर हौदे में गिर गये। यह सूचना पाकर बैरमखां ने अविलम्ब अकबर के हाथों उनकी हत्या करा दी। उनका सिर काबुल भेज दिया गया और धड़ दिल्ली में किले के द्वार पर लटका दिया। इसके बाद दिल्ली में अकबर ने भयानक नरसंहार रचा और मृत सैनिकों तथा नागरिकों के सिर का टीला बनाया। हेमू के पुतले में बारूद भरकर उसका दहन किया गया। फिर अकबर ने हेमू की समस्त सम्पत्ति के साथ आगरा पर भी अधिकार कर लिया।

इस प्रकार साधारण परिवार का होते हुए भी हेमचंद्र ने 22 युद्ध जीतकर ‘विक्रमादित्य’ उपाधि धारण की और दिल्ली में हिन्दू साम्राज्य स्थापित किया। कई इतिहासकारों ने उन्हें ‘मध्यकालीन भारत का नेपोलियन’, तो अत्यधिक घृणा के कारण मुगलों के चाटुकार इतिहासकारों ने उन्हें ‘हेमू बक्काल’ कहा है।

7 अक्टूबर

  • मुग़ल सेना ने 1586 को कश्मीर में प्रवेश किया।
  • बंगाल में 1737 को 20 हजार छोटे जहाज के समुद्र में 40 फुट नीचे डूबने से तीन लाख लोगों की मौत।
  • विलेम द्वितीय नीदरलैंड का राजा 1840 में बना।
  • अमेरिका में कोर्नोल विश्वविद्यालय 1868 को खुला। इसमें 412 विद्यार्थियों का नामांकन हुआ था जो उस समय की सबसे बड़ी संख्या थी।
  • गांधीजी की ‘नवजीवन’ पत्रिका 1919 में प्रकाशित।
  • द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान एक व्यापक सैन्य कार्रवाई में 1940 को रोमानिया जर्मनी के नियंत्रण में चला गया।
  • अमेरिका और ब्रिटिश सरकार ने 1942 में संयुक्त राष्ट्र की स्थापना की घोषणा की।
  • पूर्वी जर्मनी, डेमोक्रेटिक सरकार के अस्तित्व में आने के साथ एक अलग देश 1949 को बना।
  • चीन में 1950 को कम्युनिस्ट शासन की स्थापना के एक वर्ष बाद इस देश की सेना ने तिब्बत पर आक्रमण कर के उसे अपने नियंत्रण में कर लिया।
  • मदर टेरेसाने 1950 को कोलकाता में मिशनरीज ऑफ़ चैरिटी की स्थापना की थी।
  • चंडीगढ़ 1952 मेंपंजाब की राजधानी बनी।
  • सोवियत संघ के अंतरिक्ष यान लूनर-3 द्वारा चंद्रमा के छिपे हिस्से की तस्वीर 1959 को ली गई।
  • सोवियत संघ ने 1977 में चौथे संविधान को अंगीकार किया।
  • भारत में त्वरित कार्यवाइ बल का गठन 1992 में किया गया था। इसका गठन विशेष रूप से सांप्रदायिक दंगों से सहानुभूति पूर्वक और विशेषज्ञतापूर्वक निबटने के लिए हुआ था। प्रकृतिक आपदाओं से निबटने में भी यह बल नागरिक प्रशासन की मदद करता है।
  • रैपिड एक्शन फोर्स की स्थापना 1992 में की गई।
  • सूर्य बहादुर थापा द्वारा 1997 मेंनेपाल के नये प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण, भारत और रूस सुरक्षा सहयोग 2010 तक बढ़ाने के लिए सहमत।
  • डब्ल्यूडब्ल्यूएफ – इंडिया ने पहला राजीव गांधी वन्यजीव संरक्षण पुरस्कार 2000 में हासिल किया।
  • जापानमें मानव क्लोनिंग दंडनीय अपराध 2000 में घोषित किया।
  • आतंकवाद के ख़िलाफ़अमेरिका का ऑपरेशन ‘एड्योरिंग फ़्रीडम’ 2001 को शुरू हुआ।
  • पाकिस्तानके राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ़ ने कट्टरपंथियों के ख़िलाफ़ अभियान जारी रखने की घोषणा 2003 को की।
  • जर्मनीने सुरक्षा परिषद में 2004 को भारत की दावेदारी का समर्थन किया।
  • फलस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास 2008 को चार दिन की राजकीया यात्रा पर भारत पहुँचे।
  • लाइबेरिया की राष्ट्रपति एलेन जानसन सरलीफ और शांति व महिला अधिकार कार्यकर्ता लीमेह जीबोई तथा यमन की तवाकुल करमान को शांति के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार देने की घोषणा 2011 में की गई।

7 अक्टूबर को जन्मे व्यक्ति 

  • स्वतंत्रता सेनानी तथामहात्मा गाँधी के निकट सहयोगी नरहरि पारिख का जन्म 1891 में हुआ।
  • भारत के स्वतंत्रता संग्राम में क्रान्तिकारियों की प्रमुख सहयोगी दुर्गा भाभी का जन्म 1907 में हुआ।
  • प्रसिद्ध ग़ज़ल और ठुमरी गायिका बेगम अख़्तर का जन्म 1914 में हुआ।
  • प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी एवं पूर्व लोकसभा अध्यक्ष बली राम भगत का जन्म 1922में हुआ।
  • प्रसिद्ध कवि एवं आलोचक विजयदेव नारायण साही का जन्म 1924 में हुआ।
  • रूसी राजनीतिज्ञ व्लादिमीर पुतिन का जन्म 1952 में हुआ।
  • प्रसिद्ध भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी जहीर खान का जन्म 1978 में हुआ।
  • भारतीय मॉडल, अभिनेत्री एवं मिस वर्ल्ड युक्ता मुखी का जन्म 1979 में हुआ।

7 अक्टूबर को हुए निधन 

  • सिक्खों के गुरु गुरु गोविंद सिंह का निधन 1708 में हुआ।
  • प्रसिद्ध क्रांतिकारी व्यक्ति केदारेश्वर सेन गुप्ता का निधन 1961 में हुआ।
  • केरलके प्रसिद्ध राष्ट्रवादी नेता, स्वतन्त्रता सेनानी और समाज सुधारक के. केलप्पन का निधन 1971 में हुआ।

 

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