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शस्त्र और शास्त्र को भारत में सबसे अधिक महत्व दिया जाता है. हजारों वर्षो की परम्परा के अनुरूप विजयादशमी के शुभ अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने फ़्रांस में राफेल लड़ाकू विमान की पूरे विधि विधान से पूजा अर्चना की. इसके पूर्व भी वह विजयादशमी को शस्त्र पूजा करते रहें है. बावजूद इसके कांग्रेस ने इस पर आपत्ति जताई और कांग्रेस महासचिव मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि यह एक तमाशा है, दिखावा है, हमने कभी दिखावा कर के विदेशों से हथियार नहीं लाए. वहीँ दूसरी ओर कांग्रेस के संदीप  दीक्षित ने शस्त्र पूजा को ड्रामा करार दिया. कुछ नेताओं का कहना है कि भारत एक सेक्युलर देश है इसलिए ऐसा नहीं करना चाहिए. संजय निरुपम ने खड़गे पर निशाना साधते हुए कहा कि शस्त्र पूजा हमारी पुरानी परम्परा है, यह कोई अन्धविश्वास नहीं है. वर्षो से दशहरा पर शस्त्र पूजा की जाती रही है. खड़गे नास्तिक है, इसलिए उन्हें यह सब तमाशा जैसा लगता है. इस पर गृह मंत्री अमित शाह ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि इन्हें इटली की संस्कृति ज्यादा मालूमात है और भारतीय संस्कृति की जानकारी जरा कम है. बता दें कि कांग्रेस पहले से ही अनवरत भारतीय संस्कृति, सभ्यता व परम्परा का विरोध करती रहीं है. कांग्रेस ने राष्ट्रपुरुष मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम को भी काल्पनिक पात्र बताया था और रामसेतु को तोड़ने का षड्यंत्र भी किया था. क्या कांग्रेस के कहे अनुसार शस्त्र पूजा तमाशा या ड्रामा है ? आख़िरकार क्यों कांग्रेस दुनिया की सबसे प्राचीन भारतीय संस्कृति – सभ्यता को निचा दिखाने पर तुली हुई है ? अपनी बेबाक राय दें …

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