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विद्या सिन्हा  उन्नीस सौ अस्सी के दशक की एक ऐसी मशहूर अभिनेत्री रहीं जिन्होंने देश के हर सिनेमा प्रेमी को अपनी सादगी और बेहतरीन अदाकारी का दीवाना बना दिया था। विशेष रूप से मध्यम वर्गीय परिवारों के सदस्यों को विद्या अपने बीच ही रहने वाली कोई मोहक स्त्री लगती थीं।

विद्या सिंह का जन्म मुम्बई में फ़िल्म निर्माता श्री राणा प्रताप सिंह के घर हुआ था। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत मॉडलिंग से की और एक सौंदर्य प्रतियोगिता जीतकर ‘मिस बॉम्बे’ का ख़िताब भी जीता।

इसके बाद उनीस सौ चौहत्तर में उन्होंने फिल्मों में एक अभिनेत्री के रूप में कदम रखा। ‘राजा काका’ नाम की इस फ़िल्म में उनके साथ थे किरण कुमार। हालाँकि इस फ़िल्म ने कोई खास बिज़नेस नहीं किया लेकिन विद्या की अदाकारी की चर्चा ज़रूर हुई। और फिर सन उन्नीस सौ चौहत्तर में ही आई फ़िल्म “रजनीगंधा” से उन्होंने अपने सफ़ल फ़िल्मी करियर की शुरुआत की और इसी फिल्म से जनता की सबसे लोकप्रिय अभिनेत्री बन गईं। ये फ़िल्म काफी हिट हुई। इस फ़िल्म   में अमोल पालेकर के साथ उनकी जोड़ी हिट हुई और अमोल पालेकर के साथ उन्हें एक बार फिर फ़िल्म “छोटी सी बात” में भी लिया गया। ये फ़िल्म भी ज़बरदस्त हिट साबित हुई।

अपने करियर की शुरुआत से ही विद्या फ़िल्म इंडस्ट्री पर छा गईं। इनकी लोकप्रियता इतनी बढ़ी की सन उन्नीस सौ सतत्तर में इनकी छह फिल्में एक साथ मार्किट में आईं।

उनकी सादगी, मासूमियत और बेहतरीन अदाकारी उनकी पहचान बन गई। नेचुरल एक्टर का ख़िताब इन्हें हासिल हो गया। उस दौर में लगभग हर फ़िल्ममेकर उनके साथ फ़िल्म बनाने के लिए उत्सुक था। उनकी सादगी और मासूमियत सभी को पसंद थी। विद्या सिन्हा बहुत सी फिल्मों में काम किया , जैसे की, “रजनीगंधा”, “छोटी सी बात”,  “मुक्ति”, “मगरूर”, “सफेद झूठ”, “पति पत्नी और वो”, “तुम्हारे लिए”, “स्वयंवर” इत्यादि।

एक ऐसे दौर में जब रेखा, ज़ीनत अमान और परवीन बॉबी जैसी अभिनेत्रियां बॉक्स आफिस पर राज कर रहीं थीं, विद्या सिन्हा अपनी सादगी से जनता के दिलों पर अपना स्थापत्य सिद्ध कर गईं। उनके सादा भाव और सादा लुक्स उनकी अनूठी पहचान बन गए। जब ग्लैमर अपने चरम पर था तब विद्या सिन्हा की सादगी भी चरम पर थी। हालाँकि उन्होंने बहुत कम उम्र में एक मॉडल के रूप में भी काम किया लेकिन उनका ये मॉडलिंग करियर बहुत कमउम्र था। उनकी सूती और फूलों के प्रिंट से सजी साड़ियां हर स्त्री की पहली पसंद बन गई। विद्या सिन्हा ने इस वर्ष अगस्त माह में मुंबई के अस्पताल में अंतिम सांस ली और इस संसार को अलविदा कह दिया लेकिन उनके चाहने वालों की संख्या आज भी बरकरार है जो इस बात का प्रमाण है कि उनके प्रति लोगों का प्रेम रजनीगंधा के फूलों की तरह सदा महकेगा।

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