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महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनावों में सभी एक्जिट पोल ने एकतरफा भाजपा के जीतने का अनुमान लगाया है. उम्मीद जताई जा रहीं है कि एक बार फिर मोदी लहर में विपक्ष बह जायेगा और दोनों ही राज्यों में भाजपा पहले से अधिक शक्तिशाली पार्टी बन कर उभरेगी. हालांकि असली नतीजे जानने के लिए २४ अक्टूबर का इंतजार करना होगा. पांच प्रमुख एक्जिट पोल के अनुसार महाराष्ट्र की २८८ सीटों में से भाजपा – शिवसेना गठबंधन को २०० से अधिक सीटों पर जीत निश्चित मानी जा रहीं है और कांग्रेस – राकांपा को ४० से लेकर अधितकतम ८० सीटों पर विजय मिलने का अनुमान लगाया गया है. वहीँ दूसरी ओर हरियाणा में अधिकांश एक्जिट पोल ने ९० विधानसभा सीटों में से लगभग ७५ सीटें भाजपा, कांग्रेस को १० और अन्य को ५ सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि धारा ३७० हटाने और जम्मू – कश्मीर और लद्दाख को केन्द्रशासित प्रदेश बनाने के मोदी  सरकार के निर्णय का जनता पर व्यापक प्रभाव हुआ है और जनता जनार्दन का भाजपा के प्रति विश्वास बढ़ा है, उसी का सबसे अधिक लाभ इस चुनाव में मिला है और आगे भी अन्य राज्यों के विधानसभा चुनावों में मिलता रहेगा. क्या वर्ष २०२१ तक पश्चिम बंगाल, बिहार, दिल्ली, झारखण्ड और अन्य राज्यों के विधानसभा चुनावों में भी भाजपा राष्ट्रवाद के रथ पर आरूढ़ होकर अपना विजयी अभियान बरक़रार रख पाएगी ? क्या एक्जिट पोल का अनुमान असल नतीजों में परिवर्तित हो पाएगा ? मोदी सरकार की लगातार जीत के क्या प्रमुख कारण है और क्या इस बार विपक्षियों को चारों खाने चित्त कर भाजपा एकतरफा भारी बहुमतों से जीत पाएगी ? अपनी बेबाक राय दें 

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विगत 6 वर्षों से देश में हो रहे आमूलाग्र और सशक्त परिवर्तनों के साक्षी होने का भाग्य हमें प्राप्त हुआ है। भ्रष्ट प्रशासन, दुर्लक्षित जनता और असुरक्षित राष्ट्र के रूप में निर्मित देश की प्रतिमा को सिर्फ 6 सालों में एक सामर्थ्यशाली राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत करने में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की अभूतपूर्ण भूमिका रही है।

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