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भारत की प्राचीन व्यवस्थाएं दुनिया में सर्वश्रेष्ठ

श्री धर्मपाल जी की गणना भारत के महान गांधीवादी चिन्तकों में की जाती है। उनका जन्म 1922 में कांधला (जिला मुजफ्फरनगर, उ.प्र.) में हुआ था। 1942 में वे भारत छोड़ो आन्दोलन में सक्रिय हुए और उन्हें जेल यात्रा करनी पड़ी। शासन ने उनके दिल्ली प्रवेश पर भी प्रतिबन्ध लगा दिया। अतः गांधी जी की प्रेरणा से वे उनकी एक विदेशी शिष्या मीरा बहन द्वारा ऋषिकेष में किये जा रहे भारतीय खेती के प्रयोगों से जुड़ गये।

1949 तक धर्मपाल जी वहीं काम करते रहे। इसके बाद मीरा बहन ने उन्हें इंग्लैण्ड होते हुए इसराइल जाकर ग्राम विकास के किबुंज प्रयोग का अध्ययन करने को कहा। इंग्लैण्ड में उनकी भेंट एक महिला समाजसेवी फिलिस से हुई। आगे चलकर दोनों ने विवाह कर लिया और भारत आ गये।

अब धर्मपाल जी को परिवार चलाने के लिए भी कुछ उद्यम करना था। उनकी पत्नी मसूरी में अध्यापन कार्य करने लगी। कालान्तर में उन्हें एक पुत्र और दो पुत्रियों की प्राप्ति हुई। 1957 में परिवार सहित दिल्ली आकर वे गांधीवादी संस्थाओं में काम करने लगे। इस दौरान उनका सम्पर्क अनेक लोगों से हुआ। इनमें से सीताराम गोयल, रामस्वरूप तथा धर्मपाल जी ने अपने मित्रधर्म का आजीवन पालन किया।

धर्मपाल जी एक बार मद्रास प्रान्त में पंचायत व्यवस्था के अध्ययन के लिए अभिलेखागारों को खंगाल रहे थे। उनकी दृष्टि वहाँ भारत में अंग्रेजी राज्य से पूर्व की पंचायत व्यवस्था सम्बन्धी अभिलेखों पर पड़ी। उन्होंने पाया कि भारतीय पंचायत व्यवस्था बहुत अच्छी थी, जिसे धूर्त अंग्रेजों ने जानबूझ कर नष्ट किया। इससे उनकी सोच की दिशा बदल गयी।

अब उन्होंने अपना पूरा समय भारत की प्राचीन न्याय, शिक्षा, कृषि, विज्ञान, उद्योग….आदि प्रणालियों के अध्ययन में लगा दिया। इसके लिए उन्हें भारत तथा विदेशों के अनेक अभिलेखागारों में महीनों बैठना पड़ा। निष्कर्ष यह निकला कि अंग्रेजों का 250 साल का काल भारत की सब आधारभूत व्यवस्थाओं की बर्बादी का काल है। उस पर भी तुर्रा यह कि अंग्रेजों ने शिक्षित भारतीयों के मन मस्तिष्क में यह बात बैठा दी कि अंग्रेजों ने आकर जंगली भारतीयों को सभ्य बनाया।

धर्मपाल जी का निष्कर्ष था कि मुस्लिम काल में ये व्यवस्थाएँ नष्ट नहीं हो पायीं; पर अंग्रेजों ने इनका गहन अध्ययन किया और फिर षड्यन्त्रपूर्वक इन्हें तोड़कर सदा के लिए भारतीय मस्तिष्क को गुलाम बना लिया। उनके अध्ययन पर आधारित पुस्तकें जब प्रकाशित हुईं, तो सर्वत्र हलचल मच गयी। गांधी जी के नाम पर सत्ता भोग रहे कांग्रेसी और उनके कम्यूनिस्ट पिट्ठू अंग्रेजी शासन को देश के लिए वरदान मानते थे। अतः उन्होंने धर्मपाल जी से दूरी बना ली।

धर्मपाल जी गांधी जी के भक्त थे, कांग्रेस के नहीं। इसीलिए जब सोनिया गांधी ने प्रधानमन्त्री बनने का प्रयास किया, तो उसके विरुद्ध उन्होंने दिल्ली में प्रदर्शन किया। जीवन के अन्तिम कुछ वर्षों में कांग्रेस और कम्यूनिस्टों से उनका मोहभंग हो गया और वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से प्रभावित हो गये। नागपुर में आयोजित संघ शिक्षा वर्ग (तृतीय वर्ष) के सार्वजनिक समापन कार्यक्रम में वे अध्यक्षता करने गये। दीनदयाल शोध संस्थान में भी कई बार उनके भाषण हुए। 24 अक्तूबर, 2006 को गांधी जी की तपःस्थली सेवाग्राम में 84 वर्षीय इस मनीषी का देहान्त हो गया।

24 अक्टूबर की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ –

  • चौथे सिख गुरु रामदास ने अमृतसर शहर की स्थापना 1577 में की, शहर का नाम तालाब अमृत सरोवर के नाम पर रखा गया।
  • जेसुइट पादरी एस जे थामस भारत आने वाले पहले अंग्रेज थे, वह पुर्तग़ाली नौका से 1579 कोगोवा पहुंचे।
  • मुग़ल शासकजहाँगीर ने 1605 को आगरा में गद्दी संभाली थी।
  • प्रॉस-ऑस्ट्रियास्वीडन और फ्रांस के मध्य वेस्टफ़ाली समझौते पर 1648 में हस्ताक्षर हुए थे। जिससे प्रोटेस्टेंट और कैथोलिक ईसाइयों की रक्तरंजित लड़ाइयों पर विराम लग गया।
  • कल्याण और भिवंडी के शासन के 1657 को अाधीन आए।
  • पोलैंड को 1795 मेंऑस्ट्रिया, प्रशिया और रूस के बीच विभाजित किया गया।
  • कलकत्ता और डायमंड हार्बर के बीच पहली टेलीग्राफ लाइन 1851 में शुरु हुई।
  • कैलिफोर्निया के जस्टिस स्टीफन जे फील्ड ने 1861 में अमेरिकी राष्ट्रपति लिंकन को पहला अंतरमहाद्वीपीय टेलीग्राफ संदेश भेजा।
  • अमेरिकी शहर न्यूयॉर्क में 25 हजार महिलाओं ने 1915 में मतदान के अधिकार के लिए प्रदर्शन किया।
  • ब्रिटिश विदेश कार्यालय ने 1924 में ज़िनोवी का पत्र प्रकाशित किया।
  • द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के एक महीने बाद ही विश्व में शांति कायम करने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ (यूएनओ) की स्थापना 1945 में की गई।
  • रॉकेट द्वारा पहली बार 1946 में धरती का अंतरिक्ष से चित्र लिया गया।
  • जम्मू कश्मीर पर पाकिस्तानी कबाइलियों ने 1947 में हमला किया।
  • बर्नार्ड बारूक ने 1948 में सीनेट युद्ध की जांच समिति के समक्ष एक भाषण में पहली बार ‘शीत युद्ध’ शब्द का इस्तेमाल किया।
  • न्यूयार्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय की आधारशिला 1949 में रखी गई।
  • उत्री रोडेशिया जांबिया गणतंत्र बना कैनेथ कौंडा वहाँ के पहले राष्ट्रपति 1964 में बने थे।
  • बंधुआ मजदूर प्रथा को समाप्त करने के लिए 1975 में एक अध्यादेश लाया गया और अगले दिन से यह प्रभाव में आ गया।
  • सुधा माधवन मैराथन में 1982 को दौड़ने वाली पहली महिला एथलीट बनी।
  • काेलकाता में एस्प्लेनेड और भवानीपुर के बीच पहली मेट्रो ट्रेन (भूमिगत ट्रेन) 1984 में शुरु।
  • दक्षिण कोरिया द्वारा लम्बी दूरी की मिसाइलों का परीक्षण न करने की घोषणा 2000 में की।
  • नासा के 2001 मार्स ओडिसी अंतरिक्ष यान ने सफलतापूर्वक मंगल ग्रह के चारों ओर कक्षा में प्रवेश किया।
  • लंदन में 2003 को आखिरी वाणिज्यिक सुपरसोनिक कॉनकॉर्ड विमान उतरा।
  • ब्राजील ने 2004 को अंतरिक्ष में पहला सफल राकेट परीक्षण किया।
  • न्यूजीलैंड-भारत 2005 में नया हवाई सेवा समझौता करने पर सहमत।

24 अक्टूबर को जन्मे व्यक्ति – 

  • जम्मू-कश्मीर के एक नेता प्रेमनाथ डोगरा का जन्म 1884 में हुआ।
  • भारत के प्रसिद्ध राजनीतिज्ञों में से एक, समाजवादी नेता, सांसद तथा विचारक अशोक मेहता का जन्म 1911 में हुआ।
  • स्वतंत्रता सेनानीऔर समाजसेविका लक्ष्मी सहगल का जन्म 1914 में हुआ।
  • हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता जीवन का जन्म 1915 में हुआ।
  • सुप्रसिद्ध कार्टूनिस्ट आर. के. लक्ष्मण का जन्म 1921 में हुआ।
  • महान फुटबाल खिलाड़ी पेले का जन्म 1940 में हुआ।
  • भारत के प्रसिद्ध अंतरिक्ष वैज्ञानिक कृष्णास्वामी कस्तूरीरंगन का जन्म 1940 में हुआ।
  • ऑस्ट्रेलियाके 29वें प्रधानमंत्री मैल्कम टर्नबुल का जन्म 1954 में हुआ।
  • वेस्टइंडीज के पूर्व तेज गेंदबाज और मौजूदा कमेंटेटर इयान विशप का 1967 में जन्म हुआ।
  • हिन्दी फ़िल्म अभिनेत्री मल्लिका शेरावत का जन्म 1972 में हुआ।

24 अक्टूबर को हुए निधन – 

  • स्वतंत्रता सेनानी और राजनीतिज्ञ रफ़ी अहमद क़िदवई का निधन 1954 में हुआ।
  • भारत की प्रसिद्ध उर्दू साहित्यकार इस्मत चुग़ताई का निधन 1991 में हुआ।
  • संयुक्त राष्ट्र के प्रथम महासचिव के चुनाव तक कार्यवाहक महासचिव ग्लेडविन जेब का निधन 1996 में हुआ।
  • भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राजनीतिज्ञों में से एक सीताराम केसरी का निधन 2000 में हुआ।
  • भारत के एक महान् गांधीवादी, विचारक, इतिहासकार एवं दार्शनिक धरमपाल का निधन 2006 में हुआ।
  • भारत सरकार ने इन्हें सन 2005 में कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित मन्ना डे का निधन 2013 में हुआ।
  • प्रसिद्ध ठुमरी गायिका गिरिजा देवी का निधन 2017 में हुआ।

 

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