हिंदी विवेक : WE WORK FOR A BETTER WORLD...

 मुस्लिम दंगाइयों ने की प्रखर क्रन्तिकारी राष्ट्रभक्त की बर्बर हत्या

श्री गणेशशंकर विद्यार्थी का जन्म प्रयाग के अतरसुइया मौहल्ले में अपने नाना श्री सूरजप्रसाद के घर में 25 अक्तूबर, 1890 को हुआ था। इनके नाना सहायक जेलर थे। इनके पुरखे जिला फतेहपुर (उ.प्र.) के हथगाँव के मूल निवासी थे; पर जीवनयापन के लिए इनके पिता श्री जयनारायण अध्यापन एवं ज्योतिष को अपनाकर जिला गुना, मध्य प्रदेश के गंगवली कस्बे में बस गये। वहीं गणेश को स्थानीय एंग्लो वर्नाक्युलर स्कूल में भर्ती करा दिया गया।

प्रारम्भिक शिक्षा वहाँ से लेने के बाद गणेश ने अपने बड़े भाई के पास कानपुर आकर हाईस्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद उन्होंने प्रयाग में इण्टर में प्रवेश लिया। उसी दौरान उनका विवाह हो गया, जिससे पढ़ाई खण्डित हो गयी; लेकिन तब तक उन्हें लेखन एवं पत्रकारिता का शौक लग गया था, जो अन्त तक जारी रहा। विवाह के बाद घर चलाने के लिए धन की आवश्यकता थी, अतः वे फिर कानपुर भाईसाहब के पास आ गये।

1908 यहाँ उन्हें कानपुर में एक बैंक में 30 रु. महीने की नौकरी मिल गयी। एक साल बाद उसे छोड़कर विद्यार्थी जी पी.पी.एन.हाईस्कूल में अध्यापन कार्य करने लगे। यहाँ भी अधिक समय तक उनका मन नहीं लगा। वे इसे छोड़कर प्रयाग आ गये और वहाँ ‘सरस्वती’ एवं ‘अभ्युदय’ नामक पत्रों के सम्पादकीय विभाग में कार्य किया; पर यहाँ उनके स्वास्थ्य ने साथ नहीं दिया। अतः वे फिर कानपुर लौट गये और 19 नवम्बर, 1918 से कानपुर से साप्ताहिक पत्र ‘प्रताप’ का प्रकाशन प्रारम्भ कर दिया।

अंग्रेजी शासन के विरुद्ध सामग्री से भरपूर प्रताप समाचार पत्र के कार्य में विद्यार्थी जी ने स्वयं को खपा दिया। वे उसके संयोजन, छपाई से लेकर वितरण तक के कार्य में स्वयं लगे रहते थे। अतः प्रताप की लोकप्रियता बढ़ने लगी। दूसरी ओर वह अंग्रेज शासकों की निगाह में भी खटकने लगा। 1920 में विद्यार्थी जी ने प्रताप को साप्ताहिक के बदले दैनिक कर दिया। इससे प्रशासन बौखला गया। उसने विद्यार्थी जी को झूठे मुकदमों में फँसाकर जेल भेज दिया और भारी जुर्माना लगाकर उसका भुगतान करने को विवश किया।

इतनी बाधाओं के बावजूद भी विद्यार्थी जी का साहस कम नहीं हुआ। उनका स्वर प्रखर से प्रखरतम होता चला गया। कांग्रेस की ओर से स्वाधीनता के लिए जो भी कार्यक्रम दिये जाते थे, विद्यार्थी जी उसमें बढ़-चढ़कर भाग लेते थे। इतना ही नहीं, वे क्रान्तिकारियों की भी हर प्रकार से सहायता करते थे। उनके लिए रोटी और गोली से लेकर उनके परिवारों के भरणपोषण की भी चिन्ता वे करते थे। क्रान्तिवीर भगतसिंह ने भी कुछ समय तक विद्यार्थी जी के समाचार पत्र ‘प्रताप’ में काम किया था।

स्वतन्त्रता आन्दोलन में पहले तो मुसलमानों ने अच्छा सहयोग दिया; पर फिर वे पाकिस्तान की माँग करने लगे। भगतसिंह आदि की फांसी का समाचार अगले दिन 24 मार्च, 1931 को देश भर में फैल गया। लोगों ने जुलूस निकालकर शासन के विरुद्ध नारे लगाये। इससे कानपुर में मुसलमान भड़क गये और उन्होंने भयानक दंगा किया। विद्यार्थी जी अपने जीवन भर की तपस्या को भंग होते देख बौखला गये। वे सीना खोलकर दंगाइयों के आगे कूद पड़े।

दंगाई तो मरने-मारने पर उतारू ही थे। उन्होंने विद्यार्थी जी के टुकड़े-टुकड़े कर दिये। उनकी लाश के बदले केवल एक बाँह मिली, जिस पर लिखे नाम से वे पहचाने गये। वह 25 मार्च, 1931 का दिन था, जब धर्मान्धता की बलिवेदी पर भारत माँ के सपूत गणेशशंकर विद्यार्थी का बलिदान हुआ।

25 अक्टूबर घटनाएँ –

  • इंग्लैंड ने 1415 को उत्तरी फ्रांस में एजिनकोर्ट की लड़ाई जीती।
  • युद्ध के दौरानअमेरिका फ्रिगेट यूनाइटेड स्टेट्स ने 1812 में ब्रिटिश पोत मैसिडोनिया पर कब्जा कर लिया।
  • बोल्शेविक (कम्युनिस्टों) व्लादिमीर इलिच लेनिन ने 1917 को रूस में सत्ता हथिया ली।
  • भारत में ब्रिटिश अधिकारियों ने 1924 मेंसुभाषचंद्र बोस को गिरफ्तार कर 2 साल के लिए जेल भेज दिया।
  • द्वितिय विश्वयुद्ध के अंत में चीन ने 1945 में ताइवान पर कब्जा किया।
  • भारत में पहले आम चुनाव की शुरूआत 1951 में हुई।
  • अमेरिकी लेखक जॉन स्टीनबेक को साहित्य का नोबेल पुरस्कार 1962 में दिया गया।
  • अवादी कारखाने में पहले स्वदेशी टैंक ‘विजयंत’ का निर्माण 1964 में किया गया।
  • संयुक्त राष्ट्र महासभा में ताइवान को चीन में शामिल करने के लिए 1971 में मतदान हुआ।
  • तत्कालीन प्रधानमंत्रीनरसिम्हा राव ने 1995 में संयुक्त राष्ट्र के 50वें वर्षगांठ सत्र को संबोधित किया।
  • अंतरिक्ष यान डिस्कवरी (यू.एस.ए.) 13 दिन के अभियान के बाद 2000 में सकुशल वापस।
  • ईराक में नये संविधान को जनमत संग्रह में 2005 को बहुमत के साथ मंजूरी मिली।
  • तुर्की के युद्ध विमानों ने 2007 को उत्तरी इराक के पहाड़ी कुर्दिस्तान क्षेत्र में भारी बमबारी की। मध्य इण्डोनेशिया के सुलावेसी द्वीप में माउंट सोपुटान ज्वालामुखी फटा।
  • सिक्किमके पूर्व मुख्यमंत्री नर बहादुर भंडारी को 2008 में छह माह की सज़ा सुनाई गई।
  • बगदाद में 2009 को बम धमाकों से 155 लोगों की मौत तथा 721 घायल।
  • क्यूबा और हैती में 2012 को ‘सैंडी’ तूफान से 65 लोगों की मौत तथा आठ करोड़ डाॅलर का नुकसान हुआ।
  • नाइजीरिया में सेना ने 2013 में आतंकवादी संगठन बोको हराम के 74 आतंकवादियों को मार गिराया।

25 अक्टूबर को जन्मे व्यक्ति –

  • प्रसिद्ध अंग्रेज़ी कवि, निबन्धकार, इतिहासकार तथा राजनीतिज्ञ लॉर्ड मैकाले का जन्म 1800 में हुआ।
  • स्पेन के ख्यातिप्राप्त चित्रकार पाब्लो पिकासो का जन्म 1881 में हुआ।
  • भारत के प्रसिद्ध साहित्यकार तथा लेखक मुकुंदी लाल श्रीवास्तव का जन्म 1896 में हुआ।
  • कर्नाटकसंगीत के गायक मदुराई मणि अय्यर का जन्म 1912 में हुआ।
  • प्रसिद्ध लेखिका मृदुला गर्ग का जन्म 1938 में हुआ।

25 अक्टूबर को हुए निधन –

  • संत ज्ञानेश्वरका निधन 1296 में हुआ।
  • भारतीय गीतकार और कवि साहिर लुधियानवी का निधन 1980 में हुआ।
  • मेघालयके पहले मुख्यमंत्री कैप्टन संगमा का निधन 1990 में हुआ।
  • प्रसिद्ध भारतीय दार्शनिक तथा समाज सुधारक पाण्डुरंग शास्त्री अठावले का निधन 2003 में हुआ।
  • साहित्यकार निर्मल वर्मा का निधन 2005 में हुआ।
  • प्रसिद्ध हास्य अभिनेता जसपाल भट्टी का निधन 2012 में हुआ।

 

आपकी प्रतिक्रिया...

Close Menu

विगत 6 वर्षों से देश में हो रहे आमूलाग्र और सशक्त परिवर्तनों के साक्षी होने का भाग्य हमें प्राप्त हुआ है। भ्रष्ट प्रशासन, दुर्लक्षित जनता और असुरक्षित राष्ट्र के रूप में निर्मित देश की प्रतिमा को सिर्फ 6 सालों में एक सामर्थ्यशाली राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत करने में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की अभूतपूर्ण भूमिका रही है।

स्वंय के लिए और अपने परिजनों के लिए ग्रंथ का पंजियन करें!
ग्रंथ का मूल्य 500/-
प्रकाशन पूर्व मूल्य 400/- (30 नवम्बर 2019 तक)

पंजियन के लिए कृपया फोटो पर क्लिक करें

%d bloggers like this: