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इस बार की दीपावली बहुत ही खास है क्योंकि पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय नागरिक चीनी सामानों का पूर्ण बहिष्कार कर रहें है और स्वदेशी सामानों को खरीदने में रूचि ले रहें है. प्लास्टिक और थर्माकोल से बने सामानों पर रोक लगने से स्वदेशीकरण को अधिक बल मिला है और इसके साथ ही कुम्हारों को भी आर्थिक लाभ मिल रहा है. देशवासियों और कुम्हारों ने स्वदेशी आन्दोलन का स्वागत किया है. दरअसल पहले चीन के बने आकर्षक व सस्ते दीयों की विक्री ज्यादा होती थी, इस कारण भारतीय कुम्हारों द्वारा बनाये गए दीयों की विक्री पर विपरीत प्रभाव होता था. चीनी सामानों और पटाखों में हानिकारक तत्व पाए जाने तथा पर्यावरण को नुकसान पहुचाने के कारण अवैध रूप से आने वाले चीनी पटाखों व सामानों पर प्रतिबन्ध लगाया गया है. इसलिए भी बाजारों में स्वदेशी की रौनक दिखाई दें रहीं है. किसी देशभक्त कवि की यह कविता – राष्ट्रहित का गला घोटकर,

                                                     छेद न करना थाली में…

                                      मिट्टी वाले दियें जलाना,

                                                   अबकी बार दीवाली में…

ने देश में स्वदेशी के प्रति जन जागरूकता फ़ैलाने में अहम योगदान दिया है. क्या देश में फिर से एक बार स्वदेशी क्रांति होनी चाहिए और विदेशी चीनी सामानों का व्यापक रूप से बहिष्कार किया जाना चाहिए ? अपनी बेबाक राय दें

 

 

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विगत 6 वर्षों से देश में हो रहे आमूलाग्र और सशक्त परिवर्तनों के साक्षी होने का भाग्य हमें प्राप्त हुआ है। भ्रष्ट प्रशासन, दुर्लक्षित जनता और असुरक्षित राष्ट्र के रूप में निर्मित देश की प्रतिमा को सिर्फ 6 सालों में एक सामर्थ्यशाली राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत करने में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की अभूतपूर्ण भूमिका रही है।

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