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देश के सभी मस्जिदों में मुस्लिम महिलाओं का प्रवेश वर्जित है. जिसके चलते मुस्लिम महिलाएं मस्जिद के अन्दर नमाज नहीं पढ़ पाती. यह सरासर मुस्लिम महिलाओं के धार्मिक मौलिक अधिकारों का हनन और उल्लंघन है. बता दें कि यास्मीन जुबैर अहमद पीरजादा ने एक याचिका दायर की है. याचिका के द्वारा मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश की अनुमति देने की मांग की गई है. सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिदों में  महिलाओं को प्रवेश देने का अनुरोध करनेवाली याचिका पर केन्द्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय तथा अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय को नोटिस जारी किया है और इस मामले में केंद्र सरकार को भी जवाब तलब किया है. मामले की अगली सुनवाई आगामी ५ नवम्बर को होगी. तीन तलाक पर महिला अधिकारों के लिए जिस तरह से मोदी सरकार ने प्रयास किया क्या उसी तरह मुस्लिम महिलाओं के धार्मिक अधिकारों के लिए भी सरकार ठोस कदम उठायेंगी. क्या सबरीमाला के तर्ज पर सुप्रीम कोर्ट मुस्लिम महिलाओं को मस्जिद में प्रवेश दिला पाएंगी ? अपनी बेबाक राय दें.

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विगत 6 वर्षों से देश में हो रहे आमूलाग्र और सशक्त परिवर्तनों के साक्षी होने का भाग्य हमें प्राप्त हुआ है। भ्रष्ट प्रशासन, दुर्लक्षित जनता और असुरक्षित राष्ट्र के रूप में निर्मित देश की प्रतिमा को सिर्फ 6 सालों में एक सामर्थ्यशाली राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत करने में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की अभूतपूर्ण भूमिका रही है।

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