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महाराष्ट्र विधानसभा चुनावी परिणाम आने पर साफ हो गया कि महाराष्ट्र की जनता ने फिर एक बार महायुती को सरकार में रहने और राकांपा – कांग्रेस को मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाने हेतु चुना है किंतु जनादेश का सम्मान करने के बजाय महायुती में हो रहीं तकरार ने महाराष्ट्र की जनता को निराश किया है. अब तक सरकार का गठन नहीं होने से महाराष्ट्र की जनता में नकारात्मक संदेश जा रहा है. मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए हो रहीं खींचतान जनता को तनिक भी रास नहीं आ रहीं है. सौदेबाजी की राजनीति महायुती के लिए खतरे की घंटी है. समय की मांग है कि महाराष्ट्र की जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप महायुती जल्द से जल्द समाधान तलाश कर स्थिर सरकार का गठन करें और विकास कार्यों का शुभारंभ करें. भाजपा विधायक दल का नेता चुनने के बाद देवेंद्र फड़णवीस ने शिवसेना और सहयोगी गठबंधन का धन्यवाद देते हुए कहा कि जनादेश महायुती को मिला है. हमारे बीच जो मतभेद है उसे सुलझा कर महायुती की सरकार बनेगी. आज शिवसेना विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद लिए जाने वाले फैसले पर स्थिति साफ हो पाएंगी. अब देखना यह है कि भाजपा – सेना मिलकर तत्काल समाधान निकालते है या सौदेबाजी की राजनीति अभी कुछ दिन और चलेगी. पूरे देश की नजर महाराष्ट्र की राजनीति पर टिकी हुई है. क्या जनता के जनादेश को स्वीकार कर महायुती जल्द से जल्द सरकार स्थापित करेगी ? अपनी बेबाक राय दें

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