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कुरीति को ख़त्म करना राजा का कर्तव्य

पूर्वांचल के सात राज्यों में त्रिपुरा भी एक है। 1490 ई. में यहाँ राजा धन्य माणिक्य का शासन था। राजा और उनकी रानी कमला देवी बड़े धार्मिक स्वभाव के थे। उन्होंने काशी और प्रयाग से विद्वानों को बुलाकर अपने राज्य में गंगोत्री, यमुनोत्री, त्रिपुर सुन्दरी, काली माँ आदि के विशाल मन्दिर, तालाब तथा शमशान घाट बनवाये। इस प्रकार वे जनहित के काम में लगे रहते थे।

एक बार रानी एक मन्दिर में पूजा कर रही थी कि उसे एक महिला के रोने का स्वर सुनाई दिया। रानी की पूजा भंग हो गयी, उन्होंने तुरन्त उस महिला को बुलवाया। वह निर्धन महिला थर-थर काँपने लगी। रानी ने उसको पुचकारा, तो वह और जोर से रोने लगी। बहुत समझाने पर उसने बताया कि उसके एकमात्र पुत्र का मैतेयियों ने नरबलि के लिए अपहरण कर लिया है।

रानी सुनकर हैरान रह गयी। वस्तुतः त्रिपुरा में लम्बे समय से नरबलि की परम्परा चल रही थी। शासन की ओर से उस पर कोई रोक भी नहीं थी। महिला ने कहा – रानी जी, मेरा यही एकमात्र पुत्र है। यदि यह मर गया, तो मैं भी अपना जीवन त्याग दूँगी। आपके तो तीन पुत्र हैं, क्या आप अपने एक पुत्र को बलि के लिए देकर मेरे पुत्र की प्राणरक्षा कर सकती हैं ?

रानी स्वयं एक माँ थीं। उन्होंने उस महिला को आश्वासन दिया कि मैं हर स्थिति में तुम्हारे पुत्र की रक्षा करूँगी। महल लौटकर रानी ने राजा से कहा कि क्या हम अपने एक पुत्र को बलि के लिए दे सकते हैं ? राजा ने कहा कि तुम कैसी माँ हो, क्या तुम्हें अपनी सन्तान से कोई प्रेम नहीं है, जो ऐसी बात कह रही हो ? इस पर रानी ने प्रातः मन्दिर वाली पूरी बात उन्हें बताई और नरबलि प्रथा को पूरी तरह बन्द करने का कहा।

राजा बहुत असमंजस में पड़ गया; क्योंकि यह प्रथा बहुत पुरानी थी। इससे राज्य के पंडितों के भी नाराज होने का भय था। रानी ने फिर कहा कि राजा का कर्तव्य केवल कर वसूल करना या नागरिकों की रक्षा करना ही नहीं है। यदि राज्य में कोई कुरीति है, तो उसे मिटाना भी राजा का ही कर्त्तव्य है। इसलिए आपको मेरी बात मानकर इस कुप्रथा का अन्त करना ही होगा।

राजा ने जब रानी के इस दृढ़ निश्चय को देखा, तो उसने तुरन्त ही आज्ञा दी कि आज से नरबलि प्रथा को बन्द किया जाता है। कुछ रूढ़िवादियों ने देवी के नाराज होने का भय दिखाया, तो राजा ने कहा कि जो लोग नरबलि देना चाहते हैं, वे अपनी सन्तानों की बलि देने को स्वतन्त्र हैं; पर छल, बल से अपहरण कर किसी दूसरे की बलि अब नहीं दी जाएगी।

अब इसका विरोध करने का साहस किसमें था ? इस प्रकार इस कुप्रथा का अन्त हुआ और उस निर्धन महिला को उसका एकमात्र पुत्र वापस मिल गया। सारी जनता धन्य-धन्य कह उठी। इसके बाद राजा ने जनता के कल्याणार्थ अनेक काम किये। उन दिनों प्रयाग में अस्थि विसर्जन और गया में पिण्डदान के लिए जाने में बहुत कठिनाई होती थी। राजा ने मकर संक्रान्ति पर गोमती नदी पर मेला प्रारम्भ किया और वहीं अस्थि विसर्जन और पिण्डदान की व्यवस्था करायी। यह मेला आज भी उस परोपकारी राजा और रानी का स्मरण कराता है।

राजा ने अनेक धर्मग्रन्थों का स्थानीय भाषा में अनुवाद भी कराया। 25 नवम्बर, 1520 को राजा और रानी दोनों एक साथ ही स्वर्गवासी हुए।
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25 नवंबर

रूस के उत्तरी कॉकसस क्षेत्र के सेमाखा में 1667 में आये विनाशकारी भूकंप में 80 हजार लोग मारे गये।

  • अमेरिकामें 1716 में पहली बार किसी शेर को प्रदर्शनी में रखा गया।
  • ऑस्ट्रियाकी सेना ने 1744 में पराग्वे के यहूदियों के खिलाफ जान लेवा हमले किये और लूटपाट की।
  • ब्रिटेन ने 1758 में फ्रांस के ड्यूक्वीसन किले पर कब्जा किया।
  • इलाहाबाद उच्च न्यायालय का 1866 में उद्घाटन।
  • अल्फ्रेड नोबल ने 1867 में डायनामाइट का पेटेंट कराया।
  • जापानमें 1930 में एक ही दिन में भूकंप के 690 झटके रिकार्ड किये गये।
  • जर्मनीऔर जापान के बीच 1936 में कोमिंटन (कम्युनिस्ट इंटरनेशनल) विरोधी समझौते पर हस्ताक्षर।
  • फ्रांसकी राजधानी पेरिस में 1937 में विश्व मेले का समापन।
  • लेबनान को 1941 में फ्रांस से आजादी मिली।
  • अमेरिकाकी राजधानी वाशिंगटन डीसी में 1945 में आये बर्फीले तूफान के कारण हुई स्कूल बस दुर्घटना में 15 बच्चों की मौत हो गई।
  • भारत में राष्ट्रीय कैडेट कोर की स्थापना 1948 में हुई।
  • स्वतंत्र भारत के संविधान पर संवैधानिक समिति के अध्यक्ष ने 1949 में हस्ताक्षर किये तथा इसे तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया।
  • अमेरिकी प्रान्त अल्बामा में 1951 में हुए ट्रेन दुघर्टना में 17 लोगों की मौत।
  • जार्ज मेनाय 1952 में आस्ट्रेलियन फुटबाल लीग के अध्यक्ष चुने गये।
  • टेलीफ़ोन की एसटीडी व्यवस्था का भारत में पहली बार कानपुर और लखनऊ के बीच 1960 में प्रयोग किया गया।
  • फ्रांसने 1965 अपना पहला सेटेलाइट लांच किया।
  • ग्रीस में हफ़्तों से फैली अशांति के बीच 1973 में आज ही के दिन वहां की सेना ने तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज पापाडोपोलोस का तख़्ता पलट दिया था.
  • नेपालमें 1974 में एक पुल के ढहने से लगभग 140 लोग मरे।
  • संयुक्त राष्ट्र संघ के पूर्व महासचिव ऊ थांट का 1974 में निधन।
  • सूरीनाम 1975 में आज ही के दिन आजाद हुआ था.
  • पाकिस्तानने 1998 में अंधेरे में भी प्रहार कर सकने में सक्षम ‘भक्तर शिकन’ नामक नव विकसित टैंक-भेदी प्रक्षेपास्त्र का सफल परीक्षण किया।
  • बेनजीर भुट्टो2001 में नई दिल्ली में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से मिलीं।
  • लुसियो गुटेरेज 2002 में इक्वाडोर के राष्ट्रपति निर्वाचित।
  • पाक राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ़ के कश्मीर फ़ार्मूले को पाक-कश्मीर समिति ने 2004 में खारिज किया।
  • कोलंबो द्वारा 2006 में भारतीय पंचायती मॉडल का अध्ययन प्रारम्भ।
  • पाकिस्तानमें आम चुनाव के लिए पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो ने 2007 में लरकाना से अपना पर्चा दाखिल किया।
  • इराक की राजधानी बगदाद के कैफे में 2013 में हुए धमाके में 17 मरे, 37 घायल।

25 नवंबर को जन्मे व्यक्ति – 

  • पारसी रंगमंच शैली के हिन्दी नाटककारों में प्रमुख राधेश्याम कथावाचक का जन्म 1890 में हुयी।
  • भारत के प्रसिद्ध भाषाविद, साहित्यकार तथा विद्याशास्त्री सुनीति कुमार चटर्जी का जन्म 1890 में हुयी।
  • मशहूर फ़िल्म निर्देशक और संगीत में ध्वनि के जानकार देवकी बोस का जन्म 1898 में हुयी।
  • ब्रिटिश अभिनेत्री शेला फ़्रेजर का जन्म 1922 में हुयी।
  • मुस्लिम सूफी, लेखक, आध्यात्मिक नेता रियाद अहमद गौहर शाही का जन्म 1941 में हुयी।
  • ग्यारहवीं और पंद्रहवीं लोकसभा के सदस्य अरविन्द कुमार शर्मा का जन्म 1963 में हुयी।
  • त्रिपुरा के राजनीतिज्ञ एवं त्रिपुरा के 10वें मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब का जन्म 1969 में हुयी।
  • भारत की प्रसिद्ध महिला क्रिकेटर झूलन गोस्वामी का जन्म 1982 में हुयी।

25 नवंबर को हुए निधन –

  • प्रसिद्ध लेखक, शिक्षाविद और भारतीय संस्कृति के प्रचारक टी. एल. वासवानी का निधन 1879 में हुआ।
  • बर्मा के राजनयिक तथा संयुक्त राष्ट्र के तीसरे महासचिव यू. थांट का निधन 1974 में हुआ।
  • हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध निर्माता-निर्देशक और पटकथा लेखक चन्दूलाल शाह का निधन 1975 में हुआ।
  • हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध संगीतकार आर. सी. बोराल का निधन 1981 में हुआ।
  • भारत के पांचवे उपप्रधानमंत्री और महाराष्ट्र के प्रथम मुख्यमंत्री यशवंतराव चव्हाण का निधन 1984 में हुआ।
  • परमवीर चक्र सम्मानित भारतीय सैनिक मेजर रामास्वामी परमेस्वरन का निधन 1987 में हुआ।
  • भारत की प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना सितारा देवी का निधन 2014 में हुआ।

 

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