हिंदी विवेक : WE WORK FOR A BETTER WORLD...

घुसपैठ एक नि:शब्द आक्रमण

असम में संघ कार्य सब जिलों तक पहुंचाने वाले श्रीकांत शंकरराव जोशी का जन्म 21 दिसम्बर, 1936 को ग्राम देवरुख (रत्नागिरि, महाराष्ट्र) में हुआ था। उनसे छोटे तीन भाई और एक बहिन थी। मुंबई में बी.ए. करते समय वे स्वयंसेवक बने। कुछ समय जीवन बीमा निगम में काम करने के बाद 1960 में वे तत्कालीन प्रचारक श्री शिवराय तैलंग की प्रेरणा से प्रचारक बने। सर्वप्रथम उन्हें श्री गुरु गोविन्द सिंह जी की पुण्यस्थली नांदेड़ भेजा गया।

तीन वर्ष बाद उन्हें असम में तेजपुर विभाग प्रचारक बनाकर भेजा गया। इसके बाद वे लगातार 25 वर्ष असम में ही रहे। 1967 में विश्व हिन्दू परिषद ने गुवाहाटी में पूर्वोत्तर की जनजातियों का विशाल सम्मेलन किया। सरसंघचालक श्री गुरुजी तथा वि.हि.प. के महासचिव श्री दादासाहब आप्टे भी इसमें आये थे। कुछ समय बाद विवेकानंद शिला स्मारक (कन्याकुमारी) के लिए धन संग्रह हुआ। असम में इन दोनों कार्यक्रमों के संयोजक श्रीकांत जी ही थे।

उनकी संगठन क्षमता देखकर 1971 में उन्हें असम का प्रांत प्रचारक बनाया गया। 1987 तक उन्होंने इस जिम्मेदारी को निभाया। इस दौरान उन्होंने जहां एक ओर विद्या भारती के माध्यम से सैकड़ों विद्यालय खुलवाये, वहां सभी प्रमुख स्थानों पर संघ कार्यालयों का भी निर्माण कराया।

आज का पूरा पूर्वोत्तर उस दिनों असम प्रांत ही कहलाता था। वहां सैकड़ों जनजातियां, उनकी अलग-अलग भाषा, बोली और रीति-रिवाजों के बीच समन्वय बनाना आसान नहीं था; पर श्रीकांत जी ने प्रमुख जनजातियों के नेताओं के साथ ही सब दलों के राजनेताओं से भी अच्छे सम्बन्ध बना लिये।

1979 से 85 तक असम में घुसपैठ के विरोध में भारी आंदोलन हुआ। आंदोलन के कई नेता बंगलादेश से लुटपिट कर आये हिन्दुओं तथा भारत के अन्य राज्यों से व्यापार या नौकरी के लिए आये लोगों के भी विरोधी थे। अर्थात क्षेत्रीयता का विचार राष्ट्रीयता पर हावी हो रहा था। ऐसे माहौल में श्रीकांत जी ने उन्हें समझा-बुझाकर आंदोलन को भटकने से रोका। इस दौरान उनकी लिखी पुस्तक घुसपैठ: एक निःशब्द आक्रमण’ भी बहुचर्चित हुई।

1987 से 96 तक वे सरसंघचालक श्री बालासाहब देवरस के निजी सचिव रहे। अंतिम दो-तीन वर्षों में उन्होंने एक पुत्र की तरह रोगग्रस्त बालासाहब की सेवा की। 1996 से 98 तक वे अ.भा.प्रचार प्रमुख श्री माधव गोविंद वैद्य के सहायक तथा फिर 2004 तक अ.भा.प्रचार प्रमुख रहे।

इस दौरान उन्होंने आपातकाल में सरकारी हस्तक्षेप के कारण मृतप्रायः हो चुकी ‘हिन्दुस्थान समाचार’ संवाद समिति को पुनर्जीवित किया। 2001 में जब उन्होंने यह बीड़ा उठाया, तो न केवल संघ के बाहर, अपितु संघ के अंदर भी इसे समर्थन नहीं मिला; पर श्रीकांत जी ने अपने संकल्प पर डटे रहे। आज ‘हिन्दुस्थान समाचार’ के कार्यालय सभी राज्यों में हैं। अन्य संस्थाएं केवल एक या दो भाषाओं में समाचार देती हैं; पर यह संस्था संस्कृत, सिन्धी और नेपाली सहित भारत की प्रायः सभी भाषाओं में समाचार देती है।

श्रीकांत जी ने भारतीय भाषाओं के पत्रकार तथा लेखकों के लिए कई पुरस्कारों की व्यवस्था कराई। इसके लिए उन्होंने देश भर में घूमकर धन जुटाया तथा कई न्यासों की स्थापना की। एक बार विदेशस्थ एक व्यक्ति ने कुछ शर्ताें के साथ एक बड़ी राशि देनी चाही; पर सिद्धांतनिष्ठ श्रीकांत जी ने उसे ठुकरा दिया। वे बाजारीकरण के कारण मीडिया के गिरते स्तर से बहुत चिंतित थे।

2004 के बाद वे संघ की केन्द्रीय कार्यकारिणी के सदस्य के नाते प्रचार विभाग के साथ ही सहकार भारती, ग्राहक पंचायत, महिला समन्वय आदि को संभाल रहे थे। आठ जनवरी, 2013 की प्रातः मुंबई में हुए भीषण हृदयाघात से उनका निधन हुआ।

21 दिसंबर

जॉन जे 1784 में अमेरिका के पहले विदेश मंत्री बने।

  • रसायन शास्त्री पियरे और मेरी क्यूरी ने 1898 में रेडियम की खोज की।
  • अमेरिका में1914 में पहली मूक हास्य फीचर फिल्म “तिल्लीस पंचर्ड रोमांस” रिलीज हुई।
  • अमेरिकी उच्चतम न्यायालय ने 1921 में धरना प्रदर्शन और काम रोकने को असंवैधानिक घोषित किया।
  • ब्रिटेन के संरक्षित राज्य के दर्जे से मुक्त होकर 1923 मेंनेपाल पूर्ण स्वतंत्र देश बना।
  • अर्थर वेन का बनाया दुनिया का पहला क्रॉसवर्ड 1931 में न्‍यूयॉर्क वर्ल्‍ड अखबार में प्रकाशित हुआ।
  • रंगीन चित्रों और आवाज वाली पहली कार्टून फिल्म-डिजनीस स्नो व्हाईट- का प्रदर्शन 1937 में किया गया।
  • पुर्तग़ाली शासकों ने 1949 में इंडोनेशिया को संप्रभु राष्ट्र घोषित किया।
  • सैफुद्दीन किचलू 1952 में तत्कालीन सोवियत संघ का लेनिन शांति पुरस्कार पाने वाले पहले भारतीय बने।
  • अमरीकी राष्ट्रपति जॉन एफ़ कैनेडी और ब्रितानी प्रधानमंत्री हैरल्ड मैकमिलन ने 1962 में बहामास में बातचीत के बाद एक बहुआयामी नैटो परमाणु बल बनाने का फैसला किया।
  • कर्ट वॉल्डहाइम 1971 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के चौथे महासचिव बने।
  • पनडुब्बी प्रशिक्षण देने वाले देश के पहले पोत आईएनएस सतवाहन को 1974 में आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में जहाजी बेडे में शामिल किया गया।
  • मेडागास्कर में 1975 में संविधान लागू हुआ।
  • स्कॉटलैंड की सीमा के नजदीक लॉकरबी शहर में एक पैन एम का जंबो जेट 1988 में 258 यात्रियों के साथ दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
  • कज़ाकिस्तान की राजधानी अल्मा अता में 1991 में 11 सोवियत गणराज्यों द्वारा राष्ट्रमंडल का गठन।
  • नेपाली प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला का 1998 में इस्तीफ़ा।
  • ब्रिटेन ने 2002 में धमकी के बाद बोगोटा का दूतावास बंद किया।
  • कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधीव बॉलीवुड स्टार शाहरुख ख़ान को 2008 में अमेरिका पत्रिका न्यूज बीक ने दुनिया के 50 शक्तिशाली लोगों की सूची में शामिल किया।
  • “गंगनम स्टाइल” 2012 में यूट्यूब पर एक अरब बार देखे जाने वाला पहला वीडियो बना।

21 दिसंबर को जन्मे व्यक्ति –

  • बादशाह अकबरके प्रमुख राजपूत सरदार मान सिंह का जन्म 1550 हुआ।
  • बहुमुखी प्रतिभा के धनी, सामाजिक क्रांति के अग्रदूत तथाछत्तीसगढ़ राज्य में जन जागरणकर्ता सुन्दरलाल शर्मा का जन्म 1881 हुआ।
  • छत्तीसगढ़ में ‘श्रमिक आन्दोलन’ के सूत्रधार तथा ‘सहकारिता आन्दोलन’ के प्रणेता ठाकुर
    प्यारेलाल सिंह का जन्म 1891 हुआ।
  • संयुक्त राष्ट्र संघ के चौथे महासचिव कुर्त वॉल्डहाइम का जन्म 1918 हुआ।
  • कन्नड़ भाषा के प्रसिद्ध रचनाकार यू. आर. अनंतमूर्ति का जन्म 1932 हुआ।
  • वर्ष 2002 बैंच के वन सेवा अधिकारी और 2015 में ‘रेमन मैग्सेसे पुरस्कार’ प्राप्तकर्ता संजीव चतुर्वेदी का जन्म 1974 हुआ।

21 दिसंबर को हुए निधन – 

 

आपकी प्रतिक्रिया...

Close Menu

विगत 6 वर्षों से देश में हो रहे आमूलाग्र और सशक्त परिवर्तनों के साक्षी होने का भाग्य हमें प्राप्त हुआ है। भ्रष्ट प्रशासन, दुर्लक्षित जनता और असुरक्षित राष्ट्र के रूप में निर्मित देश की प्रतिमा को सिर्फ 6 सालों में एक सामर्थ्यशाली राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत करने में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की अभूतपूर्ण भूमिका रही है।

स्वंय के लिए और अपने परिजनों के लिए ग्रंथ का पंजियन करें!
ग्रंथ का मूल्य 500/-
प्रकाशन पूर्व मूल्य 400/- (30 नवम्बर 2019 तक)

पंजियन के लिए कृपया फोटो पर क्लिक करें

%d bloggers like this: