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श्रमिकों के हित के लिए प्रदर्शन और आन्दोलन तो कई लोग करते हैं; पर ऐसे व्यक्तित्व कम ही हैं, जिन्होंने इस हेतु अच्छे वेतन और सुख सुविधाओं वाली नौकरी ही छोड़ दी। रमण भाई शाह ऐसी ही एक महान विभूति थे। रमण भाई का जन्म पुणे के पास ग्राम तलेगाँव दाभाड़े में श्री गिरधर शाह के घर में 31 दिसम्बर, 1926 को हुआ था। पुणे में पढ़ते समय ही वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सम्पर्क में आये और तृतीय वर्ष तक का शिक्षण लिया।

बी.एस-सी. कर वे दो वर्ष तक संघ के प्रचारक रहे। फिर उन्होंने गृहस्थ जीवन में प्रवेश किया और मुम्बई के एक प्रसिद्ध रबड़ उद्योग में नौकरी कर ली। यहाँ उन्होंने एक राष्ट्रवादी मजदूर यूनियन की स्थापना की। मजूदरों को अपने परिवार का सदस्य मानने के कारण यह यूनियन शीघ्र ही लोकप्रिय हो गयी।

1953 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की योजना से भोपाल (मध्य प्रदेश) में भारतीय मजदूर संघ की स्थापना हुई। श्री दत्तोपन्त ठेंगड़ी को इस काम में लगाया गया। ठेंगड़ी जी ने उनकी रुचि और योग्यता देखकर उन्हें अपने साथ जोड़ लिया। इस प्रकार प्रारम्भ से ही उन्हें श्री ठेंगड़ी का सान्निध्य मिला।

जब मजदूर संघ का काम बढ़ने लगा, तो इसके लिए पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं की आवश्यकता हुई। ऐसे में रमण भाई ने सहर्ष अपनी नौकरी छोड़ दी और भारतीय मजदूर संघ के लिए समर्पित हो गये। इसके बाद उन्हें जब जैसा दायित्व दिया गया, उसके अनुसार वे पूरे मनोयोग से काम में लगे रहे। इस प्रकार वे दत्तोपन्त जी के दाहिने हाथ बन गये।

मजदूर संघ के काम के लिए रमण भाई को पूरे देश में प्रवास करना होता था। उनके कोई सन्तान भी नहीं थी। अतः उन्होंने अपने साले विपिन को अपने घर रखा, जिससे उनकी पत्नी पन्ना बेन को कष्ट न हो। 1960 में घरेलू सम्पत्ति के बँटवारे से रमण भाई को एक बड़ी राशि मिली; पर उन्होंने वह सब मजदूर संघ को दे दी। उन्होंने रेल में कभी प्रथम श्रेणी में यात्रा नहीं की। उनका मत था कि साधारण श्रेणी में ही यात्रा करने से ही देश के आम आदमी के जीवन को निकट से देखा और समझा जा सकता है।

रमण भाई यों तो मजदूर हित के लिए सदा संघर्षरत रहते थे; पर उन्हें प्रसिद्धि तब मिली, जब 20 अगस्त, 1963 को उन्होंने मुम्बई बन्द का नेतृत्व किया। 1972 में वे मजदूर संघ के तृतीय अखिल भारतीय अधिवेशन में हजारों कामगार महिलाओं को लेकर पहुँचे थे। मुम्बई में असंगठित रूप से घरेलू काम करने वाली महिलाएँ पहली बार इतनी बड़ी संख्या में एकत्र हुईं थीं। रमण भाई के इस प्रयास की सराहना अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर भी हुई।

रमण भाई ने मजदूर संघ में छोटे से लेकर बड़े तक अनेक दायित्व निभाये। वे अखिल भारतीय कोषाध्यक्ष और फिर 1993 से 2002 तक अखिल भारतीय अध्यक्ष भी रहे। उनके अध्यक्ष काल में ही भारतीय मजदूर संघ भारत का सबसे बड़ा श्रमिक संगठन घोषित हुआ।

दत्तोपन्त ठेंगड़ी के देहावसान के बाद रमण भाई ही मजदूर संघ के मार्गदर्शक रहे। उनकी सादगी, सरलता और मधुर स्वभाव के कारण विरोधी विचारों वाले मजदूर संगठनों के नेता भी उनसे विभिन्न विषयों पर परामर्श करने आते थे। श्रमिक क्षेत्र में उनकी भूमिका अजातशत्रु जैसी थी।

रमण भाई ने श्रमिकों के हित के लिए सैकड़ों प्रतिनिधि मंडलों में सहभागिता कर उचित निर्णय कराये। यह उनके लिए व्यक्तिगत हित से बढ़कर था। स्वास्थ्य ढीला होने पर उन्होंने भारतीय मजदूर संघ में अध्यक्ष का दायित्व छोड़ दिया और कार्यकारिणी के सदस्य के नाते काम करते रहे। एक अगस्त, 2007 को पुणे में ही उन्होंने अन्तिम साँस ली।

31 दिसंबर

  • इटली के सिसली क्षेत्र से 1492 में 100,000 यहूदियों को निकाला गया।
  • ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की 1600 में स्थापनी हुई।
  • अमेरिका में 1781 में पहला बैंक ‘बैंक ऑफ नॉर्थ अमेरिका’ में खुला।
  • पेशवा बाजीराव द्वितीय को 1802 में ब्रिटिश संरक्षण प्राप्त हुआ।
  • महात्मा गाँधी के नेतृत्व में काँग्रेस के कार्यकर्ताओं ने 1929 में लाहौर में पूर्ण स्वराज्य के लिए आंदोलन शुरू किया।
  • अमेरिकी राज्य उताह के ओगडन में 1944 में रेल दुर्घटना में 48 लोगों की मौत।
  • द्वितीय विश्व युद्ध में हंगरी ने 1944 में जर्मनी के ख़िलाफ़ युद्ध की घोषणा की।
  • विश्व के 18 देशों ने 1949 में इंडोनेशिया को मान्यता दी।
  • हालैंड ने 1962 में दक्षिण पश्चिम प्रशांत महासागर में स्थित द्वीप न्यू गिनी को छोड़ा।
  • इंडोनेशिया को 1964 में संयुक्त राष्ट्र से निष्कासित किया गया।
  • डोनल्ड कैम्पबेल ने 1964 में अपनी स्पीडबोट 71 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ाई और उस वर्ष का दुनिया में पानी पर सबसे तेज़ गति से चलने का रिकॉर्ड तोड़ दिया.
  • घाना में सैनिक क्रान्ति द्वारा 1981 में राष्ट्रपति डाक्टर लिम्मान सत्ताच्युत एवं फ़्लाइट लेफ़्टिनेंट जेरी रालिंग्स ने सत्ता संभाली।
  • ब्रुनेई को 1983 में ब्रिटेन से आजादी मिली।
  • राजीव गाँधी 1984 में 40 वर्ष की उम्र में भारत के सातवें प्रधानमंत्री बने।
  • मो. अज़हरुद्दीन ने 1984 में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ टेस्ट मैच खेलकर अपने अंतर्राष्ट्रीए क्रिकेट जीवन की शुरुआत की। बाद में वे भारतीय टीम के कप्तान भी बने।
  • परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमले रोकने के लिए भारत और पाकिस्तान ने 1988 में एक समझौते पर हस्ताक्षर किया जो 27 जनवरी 1991 से प्रभावी हुआ।
  • मोहम्मद रफ़ीक तरार 1997 में पाकिस्तान के 9वें राष्ट्रपति निर्वाचित।
  • रूस द्वारा 1998 में कज़ाकिस्तान अंतरिक्ष केंद्र से तीन उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण।
  • सन 1999 में इंडियन एयरलाइंस के विमान 814 का अपहरण कर अफ़ग़ानिस्तान के कंधार हवाई अड्डे ले जाया गया। सात दिन के बाद 190 लोगों की सुरक्षित रिहाई के साथ यह बंधक संकट टला।
  • भारत ने 2001 में पाकिस्तान को 20 वांछित अपराधियों की सूची सौंपी; अर्जेन्टीना के राष्ट्रपति फ़र्नांडों रूआ ने अपने पद इस्तीफ़ा दिया।
  • भारत और सार्क के दूसरे देशों के विदेश सचिवों ने 2003 में शिखर सम्मेलन से पहले वार्ता शुरू की।
  • ब्यूनर्स आयर्स (अर्जेन्टीना) के एक नाइट क्लब में 2004 में आग लगने से 175 लोगों की मौत।
  • सुरक्षा कारणों से संयुक्त राज्य अमेरिका ने 2005 में मलेशिया में अपने दूतावास को अनिश्चित काल के लिए बंद किया।
  • म्यांमार की सैन्य सरकार ने 2007 में सात विपक्षी नेताओं को गिरफ़्तार किया।
  • ईश्वरदास रोहिणी को 2008 में दूसरी बार मध्य प्रदेश विधानसभा का अध्यक्ष बनाने की घोषणा हुई।
  • चीन के शंघाई शहर में 2014 में नए साल की पूर्व संध्या पर मची भगदड़ में कम से कम 36 लोग मारे गए और 49 अन्य घायल हो गये।

31 दिसंबर को जन्मे व्यक्ति –

बिहार के मुख्यमंत्री एवं स्वतंत्रता सेनानी कृष्ण बल्लभ सहाय का 1866 में जन्‍म हुआ था।

  • व्यंग्य लेखन के विख्यात साहित्यकार श्रीलाल शुक्ल का 1925 में जन्‍म हुआ था।

31 दिसंबर को हुए निधन

दुनिया के जाने-माने फिजिसिस्‍ट और केमिस्‍ट रॉबर्ट बॉयल का 1691 में निधन हुआ था।

  • प्रसिद्ध भारतीय लेखक, इतिहासकार, श्रेष्ठ वक्ता और विद्वान् विश्वनाथ काशीनाथ राजवाडे का 1926 में निधन हुआ था।
  • मध्य प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री रविशंकर शुक्ल का 1956 में निधन हुआ था।

 

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