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१४ भाषाओँ के ज्ञाता और सैकड़ों ग्रन्थ कंठस्थ

किसी भी व्यक्ति के जीवन में नेत्रों का अत्यधिक महत्व है। नेत्रों के बिना उसका जीवन अधूरा है; पर नेत्र न होते हुए भी अपने जीवन को समाज सेवा का आदर्श बना देना सचमुच किसी दैवी प्रतिभा का ही काम है। जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज ऐसे ही व्यक्तित्व हैं।

स्वामी जी का जन्म ग्राम शादी खुर्द (जौनपुर, उ.प्र.) में 14 जनवरी, 1950 को पं. राजदेव मिश्र एवं शचीदेवी के घर में हुआ था। जन्म के समय ज्योतिषियों ने भविष्यवाणी की कि यह बालक अति प्रतिभावान होगा; पर दो माह की अवस्था में इनके नेत्रों में रोहु रोग हो गया। नीम हकीम के इलाज से इनकी नेत्र ज्योति सदा के लिए चली गयी। पूरे घर में शोक छा गया; पर इन्होंने अपने मन में कभी निराशा के अंधकार को स्थान नहीं दिया।

चार वर्ष की अवस्था में ये कविता करने लगे। 15 दिन में गीता और श्रीरामचरित मानस तो सुनने से ही याद हो गये। इसके बाद इन्होंने सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय से नव्य व्याकरणाचार्य, विद्या वारिधि (पी-एच.डी) व विद्या वाचस्पति (डी.लिट) जैसी उपाधियाँ प्राप्त कीं। छात्र जीवन में पढ़े एवं सुने गये सैकड़ों ग्रन्थ उन्हें कण्ठस्थ हैं। हिन्दी, संस्कृत व अंग्रेजी सहित 14 भाषाओं के वे ज्ञाता हैं।

अध्ययन के साथ-साथ मौलिक लेखन के क्षेत्र में भी स्वामी जी का काम अद्भुत है। इन्होंने 80 ग्रन्थों की रचना की है। इन ग्रन्थों में जहाँ उत्कृष्ट दर्शन और गहन अध्यात्मिक चिन्तन के दर्शन होते हैं, वहीं करगिल विजय पर लिखा नाटक ‘उत्साह’ इन्हें समकालीन जगत से जोड़ता है। सभी प्रमुख उपनिषदों का आपने भाष्य किया है। ‘प्रस्थानत्रयी’ के इनके द्वारा किये गये भाष्य का विमोचन श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने किया था।

बचपन से ही स्वामी जी को चौपाल पर बैठकर रामकथा सुनाने का शौक था। आगे चलकर वे भागवत, महाभारत आदि ग्रन्थों की भी व्याख्या करने लगे। जब समाजसेवा के लिए घर बाधा बनने लगा, तो इन्होंने 1983 में घर ही नहीं, अपना नाम गिरिधर मिश्र भी छोड़ दिया।

स्वामी जी ने अब चित्रकूट में डेरा लगाया और श्री रामभद्राचार्य के नाम से प्रसिद्ध हो गये। 1987 में इन्होंने यहाँ तुलसी पीठ की स्थापना की। 1998 के कुम्भ में स्वामी जी को जगद्गुरु तुलसी पीठाधीश्वर घोषित किया गया।

तत्कालीन राष्ट्रपति डा. शंकरदयाल शर्मा के आग्रह पर स्वामी जी ने इंडोनेशिया में आयोजित अंतरराष्ट्रीय रामायण सम्मेलन में भारतीय शिष्टमंडल का नेतृत्व किया। इसके बाद वे मारीशस, सिंगापुर, ब्रिटेन तथा अन्य अनेक देशों के प्रवास पर गये।

स्वयं नेत्रहीन होने के कारण स्वामी जी को नेत्रहीनों एवं विकलांगों के कष्टों का पता है। इसलिए उन्होंने चित्रकूट में विश्व का पहला आवासीय विकलांग विश्विविद्यालय स्थापित किया। इसमें सभी प्रकार के विकलांग शिक्षा पाते हैं। इसके अतिरिक्त विकलांगों के लिए गोशाला व अन्न क्षेत्र भी है। राजकोट (गुजरात) में महाराज जी के प्रयास से सौ बिस्तरों का जयनाथ अस्पताल, बालमन्दिर, ब्लड बैंक आदि का संचालन हो रहा है।

विनम्रता एवं ज्ञान की प्रतिमूर्ति स्वामी रामभद्राचार्य जी अपने जीवन दर्शन को निम्न पंक्तियों में व्यक्त करते हैं।

मानवता है मेरा मन्दिर, मैं हूँ उसका एक पुजारी
हैं विकलांग महेश्वर मेरे, मैं हूँ उनका एक पुजारी।

14 जनवरी 4 जनवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ 

  • पोप लियो एक्स ने 1514 में दासता के विरुद्ध आदेश पारित किया।
  • यूनाइटेड ईस्ट इंडिया कंपनी ने 1641 में मलक्का शहर पर विजय प्राप्त की।
  • 1659 में हुए एलवास के युद्ध में पुर्तग़ाल ने स्पेन को पराजित किया।
  • फ्रांसीसी जनरल लेली ने 1760 में पांडिचेरी अंग्रेज़ों के हवाले कर दिया।
  • भारत में मराठा शासकों और अहमदशाह दुर्रानी के बीच 1761 में पानीपत का तीसरा युद्ध हुआ।
  • अमरीका ने ब्रिटेन के साथ 1784 में शांति संधि की पुष्टि की।
  • इंग्लैंड और स्पेन ने 1809 में ‘नेपोलियन बोनापार्ट‘ के ख़िलाफ़ गठबंधन किया।
  • नेपोलियन तृतीय की हत्या की साजिश का 1858 में भंडाफोड़ हुआ।
  • पेरू ने स्पेन के ख़िलाफ़ 1867 में जंग का ऐलान किया।
  • 1907 में हुए जमैका में भूकंप से किंगस्टन शहर तबाह हो गया और लगभग 900 से अधिक लोग मारे गये।
  • रेमंड पोंकारे 1912 में फ्रांस के प्रधानमंत्री बने।
  • फ्रांस के पूर्व प्रधानमंत्री जोसेफ कैलाक्स को 1918 में देशद्रोह के आरोप में गिरफ़्तार किया गया।
  • ईरान में मुहम्मद सईद ने 1950 में सरकार का गठन किया।
  • जगदगुरु कृपालु महाराज ने 1954 में 7 दिनों तक 500 से ज्यादा हिन्दू विद्वानों के समक्ष भाषण दिया। उन्हें पाँचवाँ जगदगुरु चुना गया।
  • अल्जीरियाके शहरों में 1962 में हुए आतंकवादी हमलों में 6 लोग मारे गये।
  • इंडोनेशिया ने 1966 में राष्ट्रसंघ स्थित अपना मिशन बंद कर दिया।
  • 1969 में भारत के दक्षिणी राज्य मद्रास का नाम बदलकर तमिलनाडु किया गया।
  • विश्व फुटबाल लीग की स्थापना 1974 में की गयी।
  • सोवियत संघ ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को 1975 में समाप्त किया।
  • श्रीमतीइंदिरा गाँधी ने 1982 में 20सूत्री कार्यक्रम की घोषणा की।
  • ग्वाटेमाला में विनिसियों केरजो 1986 में 6 वर्षों में पहले असैनिक राष्ट्रपति बने।
  • मध्य अमेरिकी देश ग्वाटेमाला में 1986 में संविधान लागू हुआ।
  • 1989 से इलाहबाद में बारह वर्ष बाद कुम्भ का मेला प्रारम्भ हुआ।
  • इज़रायल ने जार्डन के साथ 1992 में शांतिवार्ता शुरू की।
  • यूक्रेन, रूस तथा संयुक्त राज्य अमेरीका द्वारा मास्को में परमाणु अस्त्र कम करने सम्बन्धी समझौते पर 1994 में हस्ताक्षर।
  • भारत का पहला अत्याधुनिक ‘हवाई यातायात परिसर’, दिल्ली राष्ट्र को 1999 में समर्पित किया गया।
  • कम्प्यूटर के बादशाहबिल गेट्स ने 2000 में स्टीव वाल्मर को विश्व की सबसे बड़ी कम्प्यूटर साफ़्टवेयर कम्पनी सौंपी।
  • नेपाल में अंतरिम संविधान को 2007 में मंजूरी मिली।
  • सरकार ने विदेशी पत्रों के फेसीमाइल (प्रति) संस्करणों से शत-प्रतिशत विदेशी निवेश को मंज़ूरी देने की 2009 में घोषणा की।

14 जनवरी को जन्मे व्यक्ति 

  • 1551 को मुग़ल साम्राज्य मेंअकबर के नवरत्नों में से एक अबुल फ़जल का जन्म हुआ।
  • 1804 में मशहूर संगीतकार जॉन पार्क का जन्म हुआ।
  • 1886 में समाज सुधारक मंगूराम का जन्म हुआ।
  • 1896 में ब्रिटिश शासन के अधीन आई.सी.एस. अधिकारी और स्वतंत्रता के बाद भारत के तीसरे वित्त मंत्री सी. डी. देशमुख का जन्म हुआ।
  • 1905 में हिन्दी व मराठी फ़िल्मों की प्रसिद्ध अभिनेत्री दुर्गा खोटे का जन्म हुआ।
  • 1918 में पुर्तग़ाली साम्राज्यवादियों से गोवा की मुक्ति के स्वतंत्रता संग्राम की प्रमुख नेता सुधाताई जोशी का जन्म हुआ।
  • 1926 में भारत की सामाजिक कार्यकर्ता और लेखिकामहाश्वेता देवी का जन्म हुआ।
  • 1942 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय के 36वें भूतपूर्व मुख्य न्यायाधीश योगेश कुमार सभरवाल का जन्म हुआ।
  • 1967 में अमेरिकी अभिनेत्री एमिली वॉटसन का जन्म हुआ।
  • 1977 में भारत के एकमात्र फ़ॉरमूला वन चालक नारायण कार्तिकेयन का जन्म हुआ।

14 जनवरी को हुए निधन 

  • 1742 में एडमंड हैली का निधन हुआ जो एक प्रसिद्ध खगोलशास्त्री थे।
  • 1937 मेंजयशंकर प्रसाद का निधन हुआ जो हिन्दी साहित्यकार थे।

 

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