राजनीति तो मंच है समाज सेवा का

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भारतीय जनता पार्टी को कई कर्मठ राजनेता दिये हैं। इन्हीं नेताओं में से एक हैं‡ मुंबई के चारकोप विधान सभा क्षेत्र के विधायक योगेश सागर। बचपन से संघ की विचारधारा और कार्यशैली में रचे-बसे योगेश ने एक नगरसेवक से विधायक बनने का लंबा सफर तय किया है। उनसे ‘हिन्दी विवेक’ के प्रतिनिधि विजय वर्मा से हुई बातचीत के अंश –

नगरसेवक से विधायक बनने का अब तक का राजनीतिक सफर कैसा रहा है?

मैं अपने राजनीतिक कैरियर को इस नजरिए से नहीं देखता। मैं राजनीति में आया और जिस मकसद से आया वह पूरा कर रहा हूं। नगरसेवक या विधायक बनना तो इसका एक पहलू मात्र है। मैंने तो विधायक क्या, नगरसेवक तक बनने का सपना नहीं देखा था- मगर अब हो गया हूं, तो हूं।

आप राजनीति में किस मकसद से आये?

देखिए, भाजपा का दर्शन है: 20 फीसदी राजनीति और 80 फीसदी समाज सेवा। मैं सच-सच बता रहा हूं कि राजनीति में जब शुरू में आया था, तो मैंने कतई नहीं सोचा था कि यहां रहते समाज सेवा हो सकती है। लेकिन धीरे-धीरे मुझे पता चला कि यह समाज सेवा का एक सबसे बड़ा मंच है- और ऐसा ही हुआ है। आज मुझे लगता है कि रात न होती शायद उस समय भी समाज सेवा लग जाता। आज मैं खुश हूं कि समाज सेवा का अपना पसंदीदा काम पूरी तन्मयता के साथ कर पा रहा हूं।

चारकोप विधान सभा क्षेत्र (कांदिवली) मुंबई महानगर का हिस्सा है। इसकी ऐसी कौन-सी समस्याएं हैं जिनको सुलझाया जाना बहुत जरूरी है। एक विधायक के रूप में आप कितना कुछ कर पाये हैं?

मुंबई महागर की समस्या और चारकोप विधान सभा क्षेत्र की समस्या को अलग कर नहीं देखा जा सकता। जैसे-जैसे मुंबई महानगर की समस्याएं सुलझेंगी, वैसे-वैसे हमारे विधान सभा क्षेत्र की समस्याएं भी सुलझेगी। इस क्षेत्र का भी मुंबई के दूसरे हिस्सों की तरह तेजी से विकास और विस्तार हो रहा है। यहां की जनसंख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है। ऊंचे-ऊंचे टावर्स बन रहे हैं। इन सबका बोझ बुनियादी ढांचे पर पड़ रहा है। बिजली, पानी, सड़कों, जल-मल निकास सिस्टम, मेरे कुल कहने का मतलब नागरिक सुविधाओं की जरूरत बढ़ गयी है। इनसे हर हालत में मुहैया कराना है। मुझे विधायक बने अभी मुश्किल से दो साल हुए हैं, तो विकास कार्यों का कोई लेखा-जोखा दे पाना ठीक नहीं होगा। हां, इन समस्याओं को सुलझाने के लिए मैं काम कर रहा हूं। वैसे यह कार्य मैं नगरसेवक था, तब भी कर रहा था।

मुंबई महानगर के आम-नागरिकों की हमेशा से शिकायत रही है कि सार्वजनिक खुली जगहों पर अतिक्रमण हो रहा है, जिससे बाग-बगीचों, मनोरंजन केंद्रों, खेल के मैदानों, पार्कों पर खतरा मंडराने लगा है। आप इसके लिए क्या कर रहे हैं?

मेरे विधान-सभा क्षेत्र या कहें कांदिवली में अतिक्रमण जैसी कोई बात नहीं है। मुझे जनता की समस्याओं का पूरा भान है। दरअसल इस समस्या को इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत से जोड़कर ही देखा जाना चाहिए। एक विधायक के रूप में नागरिको की जरूरतों को पूरा करने के लिए काम कर रहा हूं। सड़कों को चौड़ा करने, नये रास्तों, म्युजिकल वाटर फाउंटेन पार्क के निर्माण पर मैं ध्यान दे रहा हूं। मैं कांदिवली में एक नाट्यगृह के निर्माण के अलावा कांदिवली और बोरिवली के बीच एक बड़ा भूखंड है, जिस पर एक स्टेडियम की योजना पर भी काम शुरू हो गया है।

अपने विधान सभा क्षेत्र के विकास के लिए विधायक-निधि के रूप मेें 2 करोड़ रुपये मिलते हैं। आप इस धनराशि का उपयोग किस तरह कर रहे हैं?

मैं अपने क्षेत्र के मतदाताओं को आश्वस्त करना चाहता हूं कि इस धन का सही-सही उपयोग हो रहा है। एक तरफ इससे समाज कल्याण मंदिर, झोपड़पट्टी इलाकों में रास्तों के निर्माण किया जा रहा है, तो दूसरी तरफ चारकोप में डिंगेश्वर तालाब का सौंदर्यीकरण किया जा रहा है। चारकोप और मालवाणी विलेज में श्मशान-भूमि के निर्माण भी काम हो रहा है। बड़ी सोसायटियों में हम बोरिंग करवाते हैं। लेकिन इस शर्त के साथ कि सोसायटी को वर्षा के पानी को एकत्र करने की प्रणाली विकसित करनी होगी।

अपने सामाजिक कार्यों की जिम्मेदारी का निर्वाह आप किस हद तक पूरा कर पा रहे हैं?

पंडित दीनदयाल उपाध्यायजी कहा करते थे – हमारे हर काम का लाभ समाज के सबसे अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। राजनीति मेरे लिए अपना सामाजिक कार्य करने का एक बढ़िया मंच साबित हुआ है। इसकी वजह से आर्थिक रूप से कमजोर मगर प्रतिभावान विद्यार्थियों को मदद मुहैया कराते हैं। हम हर साल अंत्योदय कार्यक्रम के अनुसार सवा लाख कापियां मुफ्त वितरित करते हैं। निराश्रित महिलाओं को खाद्यान्न-सामग्री उपलब्ध कराते हैं। ट्रस्टों के माध्यम से हम हृदय, आंख से संबंधित बीमारियों में बीमार को मुफ्त चिकित्सकीय सहायता प्रदान करते हैं।
आम मतदाताओं की शिकायत रहती है कि एक बार विधायक (या सांसद) बनने के बाद उनके जन-प्रतिनिधि उन्हें भूल जाते हैं।

ऐसा वे 60 फीसदी लोग कहते हैं, जोकि मतदान ही नहीं करते। क्या 40 फीसदी मतदान से कहीं जन-प्रतिनिधि चुने जाते हैं। इसके लिए विधायक और मतदाता दोनों जिम्मेदार होते हैं।

मुंबई महानगरपालिका का चुनाव शीघ्र ही होने जा रहा है। आपके क्षेत्र में भाजपा की क्या संभावना है? मनसे का कितना असर पड़ेगा?

भाजपा की जीत होगी। क्योंकि हमने काम का किया है। मनसे के प्रभाव से इनकार नहीं किया जा सकता लेकिन उससे निपटने की रणनीति पार्टी बना रही है।

भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए काफी कुछ कहा-सुना जा रहा है। एक विधायक के रूप में आप क्या कहेंगे?

भ्रष्टाचार से सबको मिलकर लड़ना चाहिए। भ्रष्टाचार का शिकार और भ्रष्टाचार दोनों दोषी हैं। यह व्यवस्था का हिस्सा बन चुका है। मोमबत्ती जलाने या फिर सिर्फ अण्णा हजारे के आंदोलन से यह नहीं मिटनेवाला है।

आपका राजनीति में आना कैसे हुआ? आप अपने कामकाज और पारिवारिक जिम्मेदारियों का निर्वाह कैसे कर पाते हैं?

मैं इसके बारे में भला क्या बताऊं। मेरे पिताजी संघ में थे, तो पांच साल की उम्र में ही संघ से जुड़ाव हो गया। इसी क्रम में मुझे 1989 में संघ ने राजनीति की तरफ अग्रसर कर दिया। भाजपा में ऐसे लोग भी हैं, जो राजनीति में पारिवारिक पृष्ठभूमि से आते हैं, लेकिन मेरे पास ऐसी कोई पृष्ठभूमि नहीं थी। मैं आरएसएस के माध्यम से यहां हूं।

जहां तक कामकाज और पारिवारिक जिम्मेदारियों की बात है, तो बताऊं कि सबसे ज्यादा खामियाजा परिवार को भुगतना पड़ता है। राजनीति ही क्यों दूसरे क्षेत्रों में भी ऐसा होता है। समय न देने के कारण उनकी नाराजगी तो झेलनी ही पड़ती है।

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