कलाम का द़ृष्टिकोण : एक बेहतर भविष्य की प्रेरणा

आज दुनिया एक मुश्किल दौर से गुजर रही है। इससे उबरने के लिए देश-विदेश की सारी संस्थाएं कर्इ मोर्चों पर परस्पर सहयोग कर रही हैं। संघर्ष के इस समय में, डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की यह बात मानवजाति के लिए एक मार्गदर्शक की तरह है कि यह धरती ही एक मात्र उपग्रह है, जहां जीवन संभव है। मानवजाति को इसकी रक्षा और संरक्षण का दायित्व निभाना ही होगा। हमारा समाज और हमारी शासन प्रणाली अब पहले से कहीं अधिक संजीदा है क्योंकि मामूली सी देरी से भी अपूरणीय क्षति हो सकती है। इन परिस्थितियों ने मनुष्य की चेतना को झकझोर दिया है क्योंकि ये परिस्थितियां प्रा.तिक संसाधनों के दोहन की व्यथा-कथा बयां कर रही हैं। भविष्य को ध्यान में रखते हुए इन संसाधनों के संतुलित उपयोग की बात पर कभी अमल किया ही नहीं गया, हालांकि, दुनिया भर की संस्थाओं ने स्वीकार किया है कि ऐसा किया जाना चाहिए।

भारतीय मूल्य और लोक व्यवहार धरती को सुरक्षित बनाए रखने और इसके संरक्षण की भावना से अनुप्राणित रहे हैं। आज इस धरती को जितना खतरा दुनिया भर में बढ़ते तापमान और प्रदूषण से है, उतना ही खतरा मानव-निर्मित कारकों से भी पैदा हुआ है। भारत में बेहतर शासन प्रणाली के साथ-साथ जनांकिकी लाभ भी है क्योंकि यहां 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम उम्र की है जो भारत को एक ऐसा विकसित देश बनाने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं जिनसे विश्व समुदाय भी धरती को रहने योग्य बनाए रखने की कला सीख सकता है। भावी पीढ़ी के लिए इस धरती पर बेहतर जीवन छोड़ने की आकांक्षा से कर्इ प्रज्ञापुरुषों ने अपने ज्ञान और बुद्धिमत्ता से समाज को प्रेरित किया है। पूर्व राष्ट्रपति और भारत रत्न डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का जीवन भी प्र.ति के संरक्षण की दिशा में हमें काफी कुछ सीख देने वाला है। आज उनकी 5वी पुण्यतिथि का यह अवसर रोजमर्रा के जीवन में कलाम की बुद्धिमत्ता का स्मरण और अंगीकरण ही उस महान आत्मा के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

उन्होंने अपनी काव्यात्मक शैली में, हमें व्यक्तिगत और सामूहिक- दोनों स्तरों पर भारत को 2020 तक विकसित बनाने के लिए प्रेरित किया था। 27 जुलार्इ, 2015 को शिलंग में, भारतीय प्रबंधन संस्थान में क्रिएटिंग अ लिवेबल प्लैनेट अर्थ विषय पर अपने व्याख्यान में उन्होंने विकास की जद्दोजहद में पृथ्वी के पारिस्थितिकी तंत्र को हो रहे नुकसान के प्रति आगाह किया था। उन्होंने प्र.ति को बचाने के लिए भावी कार्ययोजना की रुपरेखा भी सामने रखी थी।

डॉ. कलाम ने सबसे पहले 2 नवम्बर,2012 को चीन में पेर्इचिंग फोरम में इस ओर ध्यानाकर्षण किया था कि धरती को रहने योग्य बनाए रखना कितना जरुरी है। पेर्इचिंग फोरम से उन्होंने कहा:”मानव जाति को अपने सभी संघर्षों को दरकिनार कर पूरी दुनिया के नागरिकों के लिए शांति और खुशहाली का साझा लक्ष्य रखना होगा। हमें एक ”रमणीक धरा“ के लिए वैश्विक .ष्टि विकसित करनी होगी। मानवजाति के लिए इससे अधिक कल्याणकारी कुछ नहीं हो सकता।“

उनके इस स्वप्न को साकार करने के लिए हमारी सबसे पहली प्राथमिकता यह होनी चाहिए कि हम प्र.ति से सीखें। आज प्रौद्योगिकी ने दुनिया को विश्वग्राम बना दिया है जहां सीमाएं टूट रही हैं और लोग अपनी उन्नति के लिए इस लक्ष्य की दिशा में अनूठे तरीकों से योगदान कर रहे हैं। हमें अपने दैनिक जीवन में प्रदूषणरहित चीजों को अपनाना होगा। एक व्यक्ति और व्यवस्था के अंग के रुप में, यह आवश्यक है कि हम चीजों को दोबारा उपयोग योग्य बनाने, अपशिष्ट प्रबंधन, ऊर्जा दक्षता, प्रदूषणरहित रुपरेखा, कागजरहित कार्यालय, अभिलेखों के उचित रखरखाव, पर्यावरणीय उपयोग, कर्मचारियों की आवाजाही और यात्रा को अधिकतम करने, प्रा.तिक रोशनी के प्रभावी उपयोग और शुद्ध वायु की सुविधा, धरती को रहने योग्य बनाने के प्रति लोगों को शिक्षित करने अथवा अन्य संगत कदम उठाने के लिए अपने प्रयास बढ़ाएं ताकि इस विश्व .ष्टि को अमली जामा पहनाया जा सके। यह समय की मांग है कि हम पारम्परिकता को अपनाएं और समाज की मौलिक तरीकों से सेवा के नए अवसर ढूंढें।

आधुनिक समय की जटिलताओं के समाधान और भारत को 21वीं सदी का अग्रणी देश बनाने के प्रयास तेज करने के लिए हमें समस्या का समाधान करने की कला सीखनी होगी ताकि वह विकराल रुप न धारण कर ले। समकालीन और भावी चुनौतियों का समाधान करने तथा भारत को विकासशील से विकसित देश बनाने की दिशा में भारत की परिवर्तनकारी यात्रा की .ष्टि से, मिसाइल मैन के नाम से प्रसिद्ध और आमजन में जनता के राश्ट्रपति नाम से प्रसिद्ध डॉ. कलाम के विचार राष्ट्र के लिए हमेशा प्रासंगिक बने रहेंगे। अंतरिक्ष विज्ञान एवं तकनीकि क्षेत्र में डॉ. कलाम का योगदान सदैव अविस्मरणीय एवं अतुलनीय रहेगा। हमें भौतिकवाद के स्थान पर न्यूनतम आवश्यक संसाधनों के साथ जीना सीखना होगा, जीवन में करुणा तथा दया को अधिक जगह देनी होगी और अपने छिटपुट तथा बिखरे प्रयासों को सामूहिक प्रयासों में तब्दील करना होगा ताकि यह पर्यावरण सभी प्राणियों के लिए अनुकूल रहे। अपने सभी सेमीनारों में डॉ. कलाम का यह सामान्य व्यवहार था कि वे सभी को अपने कार्य के प्रति मूल्य, सत्यनिश्ठा, सिद्धान्त व गौरव के साथ कार्य करने की प्रतिज्ञा दिलाते थे, जो बेहतर समाज के निर्माण के लिए व्यक्तियों को स्वमूल्यांकन के लिए प्ररित करती थी। जैन मुनि आचार्य महाप्रज्ञ जी के साथ लिखी गर्इ उनकी पुस्तक ‘परिवार एवं राश्ट्र‘ मूल्य आधारित समाज निर्माण के लिए प्रेरित करती है, जो भारत को एक महान राश्ट्र बनाने का मार्ग प्रशस्त करती है।

स्थानीय से वैश्विक शासन की दिशा में भारत की भ्ाूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। स्थानीय स्व-शासन को सु.ढ़ करने से लेकर संयुक्त राष्ट्र की सुधारात्मक बहुपक्षीयता का प्रस्ताव तक हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए अपनी प्रतिबद्धता और संकल्प का परिचायक है। डॉ. कलाम ने राजनेताओं से अपील की थी कि वे देश के टिकाऊ विकास के लिए राजनीतिक परिपक्वता का परिचय दें और इसे व्यवहार में भी लाएं। डॉ. कलाम ने कहा था कि राष्ट्रीय विकास के मुद्दों के समाधान के लिए सभी को साथ मिलकर काम करना चाहिए। संविधान के अनुच्छेद 79 के अनुसार संसद का निर्माण राश्ट्रपति, लोकसभा एवं राज्यसभा से मिलकर होता है। संसद का एक अंग होने के नाते वे राश्ट्रपति के रूप में संसद में बार-बार होने वाले व्यवधान पर अपनी चिंता व्यक्त करते हैं। भारतीय प्रबंधन संस्थान, शिलॉग में अपने अंतिम वकतव्य में देश के युवाओं का आह्वान करते हुए कहते हैं कि उन्हे नवोन्मेशी विचारों के साथ संसद को और अधिक रचनात्मक तथा जीवंत बनाने के लिए आगे आना चाहिए।

कलाम की प्रेरणा से ही संसद रत्न और महारत्न पुरस्कार शुरु किए गए जो विभिन्न संसदीय कार्यों, जैसे- बहस, प्रश्न पूछने, समिति में कार्य निष्पादन आदि जैसी विभिन्न श्रेणियों के लिए सर्वोत्तम सांसद पुरस्कार की शुरुआत की गर्इ। मुझे 15वीं लोकसभा के दौरान संसदीय निष्पादन के लिए यह पुरस्कार प्राप्त हुआ था। मुझे डॉ. कलाम की चर्चित पुस्तक मेनिफेस्टो फॉर चेंज के प्रकाशन से पूर्व, उनके साथ सांसदों की भ्ाूमिका और संसदीय प्रक्रिया पर कर्इ बार चर्चा का सुअवसर मिला था।
विकसित भारत का जो स्वप्न अब्दुल कलाम ने देखा था, मौजूदा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उसे साकार करने की दिशा में बढ़ रहे हैं।

आत्मनिर्भर भारत के लिए प्रधानमंत्रीजी के आह्वान ने हमारे अब तक के प्रयासों को और गति प्रदान की है। अग्रणी क्षेत्रों की पहचान , दुनिया भर की सर्वोत्तम कार्यशैलियों का समन्वय और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना, स्थानीय विनिर्माण को प्रोत्साहित करना आदि भारत को डॉ. कलाम के सपनों का सुपरपावर बनाने की दिशा में ही उठाए गए कुछ ठोस कदम हैं। सरकार की कार्यशैली से स्पष्ट है कि वह विभिन्न क्षेत्रों में देश को पूरी तरह से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बढ़ रही है। राष्ट्र निर्माण के लिए 17वीं लोकसभा में, संसद सदस्यों ने संजीदगी और सक्रियता का परिचय दिया है।

राष्ट्रपति भवन से अपने विदार्इ संबोधन में डॉ. कलाम ने कहा था ”मैं भारत के इस बहु-सांस्.तिक समाज के करोड़ों लोगों के हृदय और मन के तार जोड़ना चाहता हूं और उनमें यह विश्वास भरना चाहता हूं कि हम यह कर सकते हैं। डॉ. कलाम का व्यक्तित्व इतना महाना था कि उन्होंने राश्ट्रपति के रूप में जनता के हृदय तक अपनी पंहूच बना ली थी। उनकी मृत्यु पर लोगों ने उनको श्रद्धाजंलि देते हुए त्प्च् को ‘रिटर्न इफ पॉसीबल‘ कहते हुए सम्बोधित किया था।

कर्मयोगी कलाम एक असाधारण वैज्ञानिक प्रतिभासंपन्न व्यक्ति के अलावा एक कवि, लेखक और कठिन परिश्रम करने वाले व्यक्ति भी थे। उनका कार्य और उनकी बुद्धिमत्ता भारत को विकसित राश्ट्र बनाने की दिशा में एवं हमारी पृथ्वी को जीवन के लिए और सुगम व उपयोगी बनाने की दिशा में सदैव हमारा मार्गदर्शन करती रहेगी। व्यक्ति के स्तर पर किए जा रहे परिवर्तनों को सामूहिक परिवर्तनों में बदले जाने की आवश्यकता है ताकि भारत डॉ. कलाम के सपनों सा विकसित देश बन सके। आज उनकी पुण्यतिथि इस महान आत्मा के विचारों के प्रति संकल्पित होने का दिवस है।
’’’’’’’
-अर्जुन राम मेघवाल,
भारी उद्योग एवं लोक उद्यम और संसदीय कार्य
मंत्री भारत सरकार, तथा सांसद बीकानेर।

आपकी प्रतिक्रिया...