संघ के योगदान से जब बदली देश की तस्वीर

सांप्रदायिक, हिंदूवादी, फांसीवादी और हिन्दू आतंकवाद सहित ना जाने कितने नामों से इसे पुकारा गया लेकिन यह संगठन कभी पीछे नहीं हटा। जनसेवा और देशसेवा को हमेशा अपनी प्राथमिकता बनाए रखा और समय समय पर देश के लिए योगदान भी दिया है। डाक्टर केशव बलिराम हेडगेवार ने सन 1925 में विजयादशमी के दिन इस संगठन की स्थापना की थी जिसके बाद से यह संगठन लगातार तेजी से आगे बढ़ता गया और आज यह दुनिया का सबसे बड़ा संगठन बन गया है। संघ का किसी भी राजनीतिक पार्टी से कोई संबंध नहीं है और ना ही संघ ने कभी किसी पार्टी से राजनीति फायदा लिया है हालांकि कुछ विरोधी दल बीजेपी को संघ की परछाईं बताते है। 

संघ तमाम आलोचनाओं को सुनते हुए करीब 100 साल की उम्र पूरी करने जा रहा है। शुरु से ही संघ का विरोध हुआ है क्योंकि संघ ने किसी परिवार या राजनीतिक दल का साथ नहीं दिया इसलिए इस पर समय समय पर पाबंदियां भी लगाने की कोशिश की गयी थी लेकिन वह सफल नहीं हुए। दुनिया में शायद ही कोई ऐसा संगठन होगा जिसकी इतनी आलोचना हुई होगी वह भी बिना किसी आधार के। संघ पर आरोप लगाने वालों के खिलाफ भी संघ ने कभी जवाब नहीं दिया और जनता सेवा और राष्ट्र सेवा में हर दिन काम करता रहा। देश के इतिहास को देखेंगे तो ऐसी तमाम घटनाएँ मिलेंगी जहां संघ का योगदान सबसे बड़ा रहा है हालांकि यह भी सच है कि संघ की हर घटना का जिक्र इतिहास में नहीं मिलेगा क्योंकि संघ कभी अपनी तारीफ या प्रचार नहीं करता है लेकिन हम आप के सामने संघ के कुछ बड़े योगदान का जिक्र कर रहे है जिससे यह पता चलेगा कि संघ ने देश के लिए क्या क्या किया है। 
 
कश्मीर सीमा पर निगरानी
अक्टूबर 1947 में विभाजन के बाद पाकिस्तानी सेना घुसपैठ की कोशिश में लगातार लगी रहती थी और बदले की भावना से पाकिस्तान किसी भी हद तक जा सकता था। तत्कालीन नेहरु सरकार पाक-कश्मीर सीमा की निगरानी करने में कम रुचि ले रही थी जिसकी वजह से पाक सैनिक आसानी से भारत की सीमा में प्रवेश कर रहे थे जिसके बाद स्वंय सेवकों ने बिना किसी प्रशिक्षण के ही सैनिकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर देश सेवा करनी शुरु की और इस दौरान कई कई स्वंय सेवकों ने देश प्रेम में अपने प्राण भी दे दिये। 
 
भारत-पाक विभाजन पीड़ितो को आश्रय 
भारत और पाकिस्तान के विभाजन के बाद दोनों तरफ खून की होली देखने को मिली रही थी इस दौरान भारत में लोगों को आश्रय देने का काम तेजी से चल रहा था जिसमें सरकार और कई बड़े राजघराने भी शामिल थे लेकिन फिर भी सरकार की सहायता जरुरतमंदों के लिए कम पड़ रही थी। राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ की तरफ से 3 हजार से अधिक राहत शिविर लगाए गये थे जिसमें पाकिस्तान से आये लोगों को शरण दी गयी थी। इसके अलावा भी विभाजन के दौरान स्वंय सेवको ने सराहनीय योगदान दिया था। 
 
भारत चीन युद्ध 1962
सीमा विवाद को लेकर चीन ने अक्टूबर 1962 को भारत पर आक्रमण कर दिया था। इस हमले से पहले ही तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु ने चीन का दौरा किया था और हिन्दी चीनी भाई भाई का नारा भी दिया था। भारत चीन के बीच हुए युद्ध में स्वंय सेवक संघ के तमाम कार्यकर्ता चीन सीमा पर पहुंचे और सेना की मदद की इस दौरान कुछ स्वंय सेवकों ने प्रशासन को भी सहयोग दिया। सैनिक आवागमन मार्ग की निगरानी, राशन और गोला बारुद पहुंचाने में मदद और शहीद परिवारों को भी हर तरह की मदद पहुंचाने का काम किया। 1962 की लड़ाई में संघ के योगदान को देखते हुए प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु ने 26 जनवरी 1963 की परेड में स्वंय सेवकों को भी आमंत्रित किया था जिसमें 3500 स्वंय सेवकों ने गणवेश में परेड किया था। नेहरु सरकार की तरफ से यह निमंत्रण बहुत अंतिम समय में दिया गया था लेकिन फिर भी स्वंय सेवकों ने पूरी तैयारी की और परेड किया। 
 
कश्मीर का विलय
आजादी के बाद कई ऐसे राज्य और रजवाड़े थे जो भारत में विलय करने के लिए तैयार नहीं हो रहे थे। कुछ पाकिस्तान में विलय करना चाहते थे जबकि कुछ किसी भी देश में शामिल होने के लिए तैयार नहीं थे हालांकि इस दौरान लौह पुरुष सरदार बल्लभ भाई पटेल ने अहम भूमिका निभाई थी और सबका भारत में विलय करवाया था। कश्मीर ने महाराजा हरि सिंह भी भारत में विलय को लेकर संशय में थे जिसके बाद बल्लभ भाई पटेल ने संघ की मदद ली और गुरु गोलवलकर जी को कश्मीर के राजा हरि सिंह से मिलने के लिए भेजा। गुरु जी और राजा हरि सिंह की बैठक के बाद राजा ने कश्मीर का भारत में विलय करने के लिए तैयार हो गये और उन्होने नेहरु सरकार को विलय के लिए पत्र भी भेज दिया लेकिन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु ने इस पत्र को स्वीकार नहीं किया।  
गोवा का विलय
संघ ने 21 जुलाई 1954 को दादरा को पुर्तगालियों से मुक्त करवा लिया फिर नरोली और फिर राजधानी सिलवासा को भी पुर्तगालियों से मुक्त करवा लिया गया। दादरा, नागर हवेली और गोवा का भारत में विलय कराने में संघ ने बड़ी भूमिका निभाई थी। 2 अगस्त 1954 को संघ ने पुर्तगाल का झंडा उतारकर भारत का तिरंग लहरा दिया और पूरा दादरा, नागर हावेली और गोवा को पुर्तगालियों से मुक्त करवा भारत सरकार को सौंप दिया। संघ के स्वंय सेवक गोवा मुक्ति संग्राम में पूरी तरह से शामिल हो चुके थे। नेहरु सरकार के इनकार के बाद जगन्नाथ राव जोशी के नेतृत्व में संघ के कार्यकर्ता गोवा पहुंच कर आंदोलन शुरु कर दिया था। जिसके बाद नेहरु सरकार ने संघ के बड़े कार्यकर्ताओं को दस साल की सजा सुना दी थी। 
 
1965 भारत-पाक युद्ध
भारत-चीन युद्ध में संघ ने अपना लोहा मनवाया था जिसके बाद 1965 के पाकिस्तान युद्ध के दौरान प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने खुद संघ को याद किया और मदद की गुहार लगायी। लाल बहादुर शास्त्री ने संघ से कहा कि वह दिल्ली की कानून व्यवस्था और परिवहन व्यवस्था में प्रशासन की मदद करें जिससे कुछ पुलिसकर्मी मुक्त हो जायेगें जिन्हे सेना की मदद के लिए भेजा जायेगा। युद्ध के दौरान घायल होने वाले सैनिकों को खून की जरुरत पड़ने लगी तब स्वंय सेवकों ने सबसे पहले रक्तदान किया था। 
 
आपातकाल में संघ 
सन 1975 से 1977 तक के आपातकाल का दौर कभी भूलाया नहीं जा सकता है। इस दौरान भी संघ के बड़ी भूमिका निभाई थी और सरकार के विरोध में जनता को जागरुक किया था। आपातकाल में जनता पार्टी के गठन में भी संघ ने बड़ी मेहनत की थी। सत्याग्रह के दौरान संघ के कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था बावजूद इसके हजारो स्वंय सेवक भूमिगत रहकर कार्य कर रहे थे। आपातकाल के दौरान संघ के कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ पोस्टर चिपकाने और जनता को जागरुक करने का काम किया था यह काम रात में करना पड़ता था। जेल में बंद नेताओ और कार्यकर्ताओं का संदेश जनता तक पहुंचाने का काम भी संघ के कार्यकर्ताओं ने संभाल रखा था। संघ की इसी मेहनत की वजह से ही सभी दल एक हुए और जनता दल का गठन हुआ। 
 
भारतीय मजदूर संघ
भारतीय मजदूर संघ देश का एक मात्र गैरराजनीतिक संगठन है जो किसी राजनीतिक ईकाई का हिस्सा नही है। इसकी स्थापना स्व दत्तोपन्त ठेंगड़ी जी ने किया था। यह शायद पहला ऐसा संगठन है जो किसी विभाजन के कारण नहीं बना बल्कि किसी एक विचारधारा से प्रेरित लोगों के इक्कट्ठा होने से बना है।कारखानों में विश्वकर्मा पूजा की प्रथा भी इसी संगठन ने शुरु की थी। आज यह दुनिया का पहला ऐसा संगठन है जो शांति के साथ राष्ट्रहित में काम करता है। 
 
संघ का सेवा कार्य
संघ का सेवा कार्य देश और देश के बाहर भी विख्यात है। तमाम आलोचनाओं के बाद भी संघ की तरफ से सेवा कार्य में कभी कमीं नही देखने को मिली। दुर्घटना और विषम परिस्थितियों के दौरान भी संघ सेवा के लिए हमेशा तैयार रहता है भले ही वह स्थान संघ के अनुकूल ना हो। 1971 में उड़ीसा में आये भयंकर चक्रवात, 1984 भोपाल गैस त्रासिदी, 1984 सिख विरोधी दंगे, 2001 गुजरात भूकंप, 2004 सुनामी प्रलय और कारगिल युद्ध सहित तमाम विकट परिस्थितियों में संघ ने अपना योगदान दिया था।
 

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