अमेरिकी समाज में हिंदू विचार क्यों हुआ इतना प्रतिष्ठित

कई अमेरिकी राज्यों ने अक्टूबर माह को हिंदू विरासत माह घोषित किया है। उनका मानना है कि हिंदू धर्म ने अपनी अद्वितीय विरासत से अमेरिका के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। 1960 के दशक में बहुत से अमेरिकियों का हिंदू धर्म से परिचय ‘ध्यान’ व ‘साधना’ के माध्ये से हुआ। बीसवीं सदर के आरंभ में अमेरिका में हिंदुओं की संख्या 2000 से भी कम थीख् आज उनकी संख्या 23 लाख से ज्यादा है। पहली बार अमेरिकी जनता ने औपचारिक रूप से हिंदू धर्म के बारे में विश्व धर्म संसद के माध्यम से परिचय प्राप्त किया। 1893 में शिकागो में हुई इस धर्मसंसद को स्वामी विवेकानंद ने अपने ऐतिहासिक उद्बोधन से हिंदू धर्म  का परिचय करवाया। हिंदू धर्म का प्रतिनिधित्व करने वाले एक युवा संन्यायी विवेकानंद ने अपने भाषण की शुरुआत अपने मेजबानों को “अमेरिका के भाइयों और बहनों” के रूप में करते हुए की। एक  परिवार के रूप में संबोधित होना अमेरिकियों के लिए नया भी था और असासमान्य भी, खासकर ऐसे समय में जब समाज विभिाजित थे और नस्लीय श्रेष्ठता जीवन का एक स्वीकृत हिस्सा थी। विवेकानंद के उद्बोधन का स्वागत खडत्रे होकर करतल ध्वनि से किया गया।  एक अमेरिकी पत्रकार ने लिखा:

“संसद के समक्ष विवेकानंद का संबोधन हमारे ऊपर विराजमान स्वर्ग  की तरहं व्यापक था, सभी धर्मों में सर्वश्रेष्ठ को गले लगाते हुए, परम सार्वभौमिक धर्म के रूप में – पूरी मानव जाति के लिए कल्याण की कामना करते हुए…” विवेकानंद ने योग और ध्यान के आध्यात्मिक लाभों के बारे में   अमेरिकियों को विस्तार से बताया। उन्होंने  यह बताते हुए कहा कि ये केवन हिंदअुों के लिए ही नहीं बल्कि सभी मनुष्यों के कल्याण के लिए उपलब्ध हैं। ” वास्तव में, विश्व धर्म संसद से बहुत पहले, अमेरिकी चिंतकों राल्फ वॉल्डो एमर्सन और हेनरी थोरो ने अपनी कविताओं और निबंधों में हिंदू ग्रंथों के प्रति अपने आकर्षण का प्रदर्शन किया था। एमर्सन ने अपनी पत्रिकाओं में हिंदू ग्रंथों के लंबे अंशों की नकल की और भगवद्गीता को एक ऐसी कितब कहा जो राष्ट्रों की सीमाओं से परे है।  एमर्सन की कविताएं, “ब्रह्मा” और “हमत्रेय”, हिंदू ग्रंथों के अंशों पर आधारित हैं, जो जीवन की अस्थिरता और मानव आत्मा की अमरता के बारे में बताती हैं। वास्तव में, उनकी प्रशंसा ने यह सुनिश्चित किया कि संयुक्त राज्य अमेरिका के अधिकांश बड़े पुस्तकालयों में भगवद्गीता की प्रतियां उपलब्ध रहें।

अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के अनुमान बताते हैं कि 1.8 करोड़ से अधिक अमेरिकी ध्यान करते हैं और लगभग 2.1 करोड़ से अधिक अमेरिकी वयस्क तथा 17 लाख से अधिक  बच्चे नियमित रूप से योग का अभ्यास करते हैं। प्रसिद्ध अमेरिकी फिल्म उद्योग ने अपनी फिल्मों ने भी हिंदू विचारों को अपनाया है। उदाहरण के लिए, “स्टार वार्स” में “द फोर्स”  तथा “द मैट्रिक्स”  में हिंदू दार्शनिक विचारों जैसे ब्राह्मण, सर्वोच्च शक्ति, ब्रह्मांड का सर्वोच्च सिद्धांत, माया आदि की अवधारणाओं का उपयोग किया गया।   यह कोई संयोग नहीं है कि स्टार वार्स के निर्माता जॉर्ज लुकास के गुरू जोसेफ कैंपबेल थे जो हिंदू-वेदांत दर्शन के विद्यार्थी थे।
संयुक्त राज्य अमेरिका में सभी धार्मिक समुदायों के बीच हिंदू-अमेरिकियों की शैक्षिक उपलब्धि उच्चतम स्तर की है। इसका एक कारण संभवत: अमेरिकी आव्रजन नीतियां भी हैं जो शिक्षित और उच्च कुशल प्रवासियों के पक्ष में हैं।  हिंदू धर्म की कई अवधारणाएं, जैसे ध्यान, कर्म, आयुर्वेद, पुनर्जन्म और योग, मुख्यधारा की अमेरिकी स्थानीय भाषा में प्रवेश कर चुके हैं। प्यू फोरम ऑन रिलिजन एंड पब्लिक लाइफ सर्वे 2009 के अनुसार, 24% अमेरिकी पुनर्जन्म में विश्वास करते हैं, जो हिंदू धर्म की एक मूल अवधारणा है। इसके अलावा, शाकाहार और अहिंसा के हिंदू मूल्य लोकप्रियता में बढ़ रहे हैं। सितंबर 2021 में, न्यू जर्सी राज्य ने अक्टूबर को हिंदू विरासत माह के रूप में घोषित करने के लिए विश्व हिंदू परिषद के साथ गठबंधन किया। ‘ओम’ संयुक्त राज्य अमेरिका में एक अत्यंत लोकप्रिय मंत्र है, विशेष रूप से उन युवाओं के बीच में जो योग का अभ्यास करते हैं और नए युग के दर्शन को मानते हैं।

मई 2011 में अमेरिकी सेना में पहले हिंदू पुजारी की नियुक्ति हुई। अमेरिकी कांग्रेस में चुुच कर आने वाली तुलसी गबार्ड पहली हिंदू सांसद थीं जो 2012 में अमेरिकी संसद के इस सदन में पहुंची। अमेरिका में 450 से अधिक हिंदू मंदिर हैं जहां सभी पंथों के लोगों का स्वागत किया जाता है। विश्व हिंदू परिषद, हिंदू अमेरिकन फाउंउेशन, वल्र्ड हिंदू युनिवर्सिटी, हिंदू स्वयंसेवक संघ जैयी कई  हिंदी—अमेरिकी संस्थाएं हैं जो किसी भी प्राकृतिक आपदा के समय अमेरिकी जनता की सहायता में अग्रणी रहती हैं। सेवा इंटरनेशनल जैसी संस्थाओं ने कोरोना काल में अमेरिका में राहत कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई बार यह कहा कि वह हिंदुओं के बहुत बड़े प्रशंसक हैं। पिछले लगभग दो दशक से अमेरिकी राष्ट्रपति निवास व कार्यालय व्हाइट हाउस में हर साल दीपावली का पर्व  मनाया जाता है। मई 2020 में अमेरिका के ‘राष्ट्रीय प्रार्थना दिवस’ के अवसर पर व्हाइट हाउस में वैदिक शांति पाठ का आयोजन किया गया था। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि अमेरिका में बसे लगभग 15 लाख हिंदू अमेरिका की सफलता का ही हिस्सा नहीं हैं बल्कि वह उसके समाज के आध्यात्मिक व सांस्कृतिक पक्ष को मजबूत करने के प्रयासों का भी अभिन्न अंग हैं। ऐसे में यह स्वाभाविक ही है कि बड़ी संख्या में अमेरिकी प्रांत हिंदू विरासत के इस महत्व को रेखांकित करते हुए अक्टूबर माह को हिंदू विरासत  माह के रूप में मना रहे हैं। हिंदू विचार के अंतर्गत ‘वसुधैव कुटृंबकम’ के साकार होने की दिशा में यह एक और महत्वपूर्ण कदम है।

आपकी प्रतिक्रिया...