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***गोपाल खेमानी*** 
      सिंधी समाज में काम करनेवाली संस्थाओं में इस वक्त भारतीय सिंधु सभा ही एक ऐसी संस्था है जो सबसे पुरानी है और साथ ही लगातार प्रगति भी कर रही है। संगठन की उत्तरोत्तर तरक्की के परिणामस्वरूप संगठन के कार्यकर्ताओं और नेताओं को भी समाज सेवा व देश सेवा का अवसर मिला है।
      संस्था के प्रथम महामंत्री हरिराम सामताणी एवं संगठन मंत्री छत्रसाल मुक्ता ने विभिन्न शहरों में जाकर भारतीय सिंधु सभा की शाखाएं खोलीं और इसके सदस्य बनाए। उनकी मेहनत के फलस्वरूप ही एक नन्हा सा पौधा आज वटवृक्ष का रूप धारण कर चुका है। भारत में सभा की करीब २५० शाखाएं विभिन्न शहरों में कार्यरत हैं।
     संगठन के कार्यकर्ता केवल मलकाणी पांडिचेरी के गवर्नर बने। दादा झमटमल वाधवाणी ने संगठन के सैकड़ों कार्यकर्ताओं के विचारों और सिद्धांतों को मजबूत किया। इन दोनों ने एन. सी. पी. एस. एल. को भी एक मजबूत रूप दिया जिस वजह से सैकड़ों लोग जो सिंधी नहीं जानते थे, उन्हें सिंधी भाषा की शिक्षा मिली।
        माताओं एवं बहनों के साथ व सहकार के बिना सिंधी भाषा एवं सिंधीयत का काम अधूरा ही रहेगा। यही सोचकर ‘भारतीय सिंधु सभा’ की महिला शाखा का निर्माण किया गया। कालांतर में यह एक महिला संगठन बना और विभिन्न शहरों में महिला सम्मेलनों का आयोजन कर ‘स्त्री शक्ति’ एवं ‘मातृ शक्ति’ में जागृति का निर्माण किया। श्रीमती शीला इदानी एवं श्रीमती वीणा भाटिया का नाम उल्लेखनीय है। हमारे समाज की युवा पीढ़ी भी समाजसेवा एवं देश सेवा के कार्य में आगे आए इस उद्देश्यपूर्ति हेतु सभा ने युवा मंच की स्थापना की, जिसकी कई प्रांतों में शाखाएं भी खुली हैं। एक राष्ट्रीय स्तर का युवा सम्मेलन भी हो चुका है। सभा के पास अनेकों समर्पित शिक्षक-शिक्षिकाओं की टीम है, जो बच्चों एवं युवाओं को अपनी भाषा की शिक्षा देते हैं। समर कैंप और विंटर कैंप लगाकर बच्चों को पढ़ाना, सिन्धी क्लासेस शुरू करवाकर एवं चलाकर भारत के भविष्य का निर्माण किया जा रहा है।
       भारतीय सिंधु सभा द्वारा सिंधुपति सम्राट दाहिरसेन का १२०० वां बलिदान दिवस गत वर्ष बड़े पैमाने पर देश भर में मनाया गया व पूरे समाज को ऐतिहासिक गौरव की जानकारी दी गई। अजमेर में स्मारक पर आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहनजी भागवत का मार्गदर्शन हासिल हुआ। संस्था द्वारा स्वामी विवेकानंद की १५० वीं जयंती मनाई गई, जिसमें गुजरात के करीब ८००० लोगों को जोड़ा गया।
     ऐसा नहीं है कि सभा सिर्फ भारत के ही सिंधी हिन्दुओं को एक सूत्र में बांध रही है, अपितु सिंध के हिन्दुओं के हकों की खातिर भी प्रयास करती आ रही है। भारत में हाल ही में बसे सिंधी बंधुओं के अधिकारों की रक्षा के लिए उनको भारतीय नागरिकता दिलाने के शांतिपूर्ण तरीके से प्रवास किए जा रहे हैं।
      राष्ट्रीय स्तर पर एक मासिक पत्रिका ‘न्यू लेटर’ निकाली जाती है, जिसकी करीब ४५०० प्रतियां प्रकाशित होती हैं। अखण्ड भारत के विचार को ध्यान में रखते हुए हर वर्ष १४ अगस्त को ‘सिंध स्मृति दिवस’ मनाया जाता है। शहीद हेमू कलाणी का शहीदी दिवस कई शहरों में सभा द्वारा मनाया जाता है। चेटीचंड का मेला, रक्षाबंधन एवं अन्य सिंधी त्योहारों के समय बच्चों की विभिन्न प्रतिभाओं को सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से उभारने का प्रयास किया जाता है।
     सिंधी विषय में उच्चांक पाने वाले विद्यार्थियों का सम्मान किया जाता है। उसी तरह मेरिट में आने वाले व ८०% से अधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों का भी विभिन्न समारोहों में सम्मानित किया जाता है। मुंबई शाखा द्वारा इंजीनियरिंग कोर्स करने के लिए विद्यार्थियों को ‘एजूकेशन लोन’ भी दिया जाता है। स्वास्थ्य सहायता दी जाती है।
      सिर्फ सिंधी भाषा एवं सिंधीयत के लिए ही नहीं, बल्कि देश और धर्म की रक्षा के लिए संस्कार देने का काम करती है ‘भारतीय सिंधु सभा’….!
सिंधी भाषा बचाएंगे, सिंधीयत को बढ़ाएंगे….
धर्म पर कायम रहकर सदा, राष्ट्रभक्त कहलाएंगे।

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