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***राकेश खेड़ेकर ***
      

देश में फिलहाल लीग कल्चर का मौसम आ गया है। इस लीग कल्चर से हर क्षेत्र के खिलाड़ियों को फायदा ही फायदा हो रहा है। इस कारण माता-पिता भी अपने बेटे या बेटी को बचपन से ही शिक्षा के साथ खेल के क्षेत्र में बढ़ावा देते नजर आ रहे हैं। क्रिकेट हो या लॉंन टेनिस, हॉकी हो या फुटबॉल हर क्षेत्र में लीग कल्चर ने अपनी जडें मजबूत बना रखी हैं। इस लीग कल्चर में पहली बार एक ग्रामीण खेल ने कदम रखा और अपने पहले ही संस्करण में इस खेल ने करोडों भारतीयों के दिलों में अपनी जगह बनाई। जी हां, आप सही सोच रहे हैं, मैं प्रो-कबड्डी की ही बात कर रहा हूं्। वही प्रो-कबड्डी जिसने डेढ़ महीने तक भारतीयों के दिलों पर राज किया। प्रो-कबड्डी इसका एक जीता-जागता उदाहरण है कि भारतीय ग्रामीण खेलों में भी इस प्रकार का ऐतिहासिक बदलाव हो सकता है।
      देश में क्लब कल्चर ने अपनी पकड़ मजबूत बना रखी है और उसी क्षेत्र में कबड्डी के आने से ग्रामीण से लेकरशहरी लोगों ने इस प्रो- कबड्डी को पसंद किया। अब तक केवल क्रिकेट में ही पैसा और नाम दोनों मिलता था। पर अब हॉकी, फुटबॉल, टेनिस और कबड्डी में भी यह अवसर उपलब्ध होने लगे हैं। अत: कबड्डी में नवोदित खिलाड़ियों की संख्या बढ़ते देख कोई आश्चर्य नहीं होने चाहिए।
      कबड्डी में राष्ट्रीय स्तर पर अनेक खिलाड़ियों ने अपनी छाप छोड़ी है। उसमें अनूप कुमार, राकेश कुमार, नीलेश शिंदे, नवनीत गौतम, मनजीत छिल्लर, नीतिन मदाने जेसै बहुत से नाम लिए जा सकते हैं। ये अपनी राष्ट्रीय टीम के प्रमुख अंग हैं। प्रो-कबड्डी के जनक आनंद महिंद्रा और चारू शर्मा ने जो निर्णय लिया वह काबिले तारिफ रहा। कबड्डी की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए लीग के माध्यम से उसका प्रचार किया जाय, यह सोच भी उपयुक्त है।
      प्रत्येक राज्य में कबड्डी के कई खिला़िड़यों ने अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। इसी को देखते हुए उन्हें अपनी टीम में शामिल करने के लिए उन पर पैसों की बौछार की गई। प्रो-कबड्डी के पहले संस्करण को मिली लोकप्रियता को देखकर युवा वर्ग शालेय जीवन से ही कबड्डी में अपना नाम बनाने के लिए उत्सुक है।
     प्रो-कबड्डी ने कई प्रतिभाशाली युवाओं को एक और खेल में अपना नसीब आजमाने का अवसर दे दिया। बॉलिवुड से लेकर उद्योग-जगत की नामी हस्तियां इस लीग के माध्यम से सामने आए। एक बेहतर लीग, देश के लोगों के दिल को छूनेवाला खेल, जिसे कुछ ही दिनों में भारतवासियों ने अपने सिर पर बिठा लिया। इसका पहला संस्करण इतना प्रसिद्ध रहा कि अगला संस्करण आनेवाले मार्च या अप्रैल में होने की घोषणा भी हो गई। मतलब सिर्फ छह महीने की अवधि के बाद प्रो-कबड्डी फिर से करोड़ों लोगों के दिल को छूने के लिए तैयार होगी। तब तक इस लीग का पहिला संस्करण कैसा रहा, प्रक्रिया क्या थी, किसकी कल्पना थी, इसकी थोडी जानकरी लेते हैं।
     भले ही कबड्डी एशियाई महाद्वीप में प्रसिद्ध हो, फिर भी ओलिम्पिक में इसका समावेश अब तक नहीं हुआ है। सन २०१९ के ओलिम्पिक में कबड्डी का नए वर्ग में समावेश होने की आशा जा रही है।
     

 उद्योगपति आनंद महिंद्रा और खेल कमेंट्रेटर चारू शर्मा की फर्म मशाल स्पोटर्स के संयुक्त प्रयास से प्रो-कबड्डी की नींव रखी गई। लीग शुरू होते ही पहले दिन से ही इसे लोगों का अच्छा प्रतिसाद मिला। हर लीग को लोकप्रिय बनाने हेतु कुछ मार्केटिंग स्ट्रेटेजी आजमानी पड़ती है। अच्छी मार्केटिंग स्ट्रेटेजी के बिना कोई भी दर्शकमैदान तक नहीं आता और न ही लीग को टीवी पर देखना पसंद करता है। मार्केटिंग स्ट्रेटेजी का सबसे बडा पहलू है, लीग में कम से कम एक टीम का मालिक बॉलीवुड से जुड़ा हो। इस पर गौर करें तो बॉलीवुड के बच्चन परिवार ने पहले से ही इस लीग में अपनी टीम खरीद रखी थी। इसका श्रेय चारू शर्मा को जाता है। उन्होंने ही अभिषेक से मुलाकात कर इस लीग केबारे में उन्हें जानकारी दी। अभिषेक ने भी इसमें अपनी रुचि दिखाते हुए जयपुर क्लब को खरीदा। भारतीय कबड्डी टीम के उत्कृष्ट खिलाड़ियों को लाखों की बोली लगाते हुए, टीम मालिकों ने खरीदा। जो प्रसिद्ध खिलाड़ी थे वे अपने क्लब के स्टार बने। उनके नाम पर ही दर्शक दिल थाम कर स्टेडियम में अथवा टीवी पर प्रो-कबड्डी का मजा उठाते दिखाई दिए।
      प्रो-कबड्डी अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार और मैट पर खेली गई। उसमें क्रिकेट की तर्ज पर ही ‘रीप्ले डिसीजन’ का भी प्रावधान था। कोर्ट रैफरी के अलावा टीवी मैच रैफरी भी खिलाड़ी कीअपील के बाद अपना निर्णय सुनाते थे। पहली बार कबड्डी के मैच में डिजिटल स्कोर बोर्ड देखने को मिला। उच्च दर्जें के समलोचक भी इस लीग में मैच के पहले और अंत में नजर आते थे। एक दिन में सिर्फ दो मैच और वह भी रात के समय, काम करके थकान मिटाने हेतु टीवी के सामने बैठा हर कोई प्रो-कबड्डी का आनंद लेता दिखाई दिया। ४०-४० मिनट के दो मैच, वह भी रात ८ बजे से १० बजे तक। इससे खेल प्रेमियों का अच्छा मनोरंजन हो जाता था। सबसे अहम बात यह कि, देश के हर राज्य के स्पोटर्स क्लब में पहली बार बड़े स्क्रीन पर प्रो-कबड्डी के मैचे दिखाए जाने लगे। खेल विश्लेषक बारीकी से हर मैच का निरीक्षण करने लगे। यह कबड्डी में ऐतिहासिक बदलाव ही था।
     कबड्डी में खिलाड़ियों को उनकी मानसिक और शारीरिक क्षमता का उत्तम प्रदर्शन ४० मिनट में करना होता है। सिर्फ शरीर से बलवान होने से कबड्डी का कोई खिलाड़ी सफल नहीं हो सकता, उसे खेल के दौरान चतुराई भी दिखानी पड़ती है। यही उसकी कसौटी होती है और उसी कसौेटी पर खरा उतरने के लिए लीग में हर खिलाड़ी अपना सर्वश्रेष्ठ खेल खेलता नजर आया।
      प्रो-कबड्डी की प्रक्रिया के बारे में सोचें तो, खिलाड़ियों के चयन को पहला स्थान दिया गया। इसमें खेलने वाले ८० प्रतिशत खिलाड़ी भारतीय कबड्डी संघ अथवा राज्य कबड्डी संघ के थे। क्रिकेट के इंडियन प्रीमियर लीग की तर्ज पर प्रो-कबड्डी की नींव भी रखी गई। इस वजह से खिलाड़ियों का चयन करते समय हर राज्य के खिलाड़ी को मौका मिले इस पर ध्यान दिया गया।
      प्रो-कबड्डी के पहले संस्करण में ८ टीमें शामिल थीं। मुंबई, पुणे, बेंगलुरू, चेन्नई, दिल्ली, जयपुर, विशाखापट्टनम और कोलकाता क्लब ने इसमें भाग लिया। इन सभी टीमों में देश के अव्वल खिलाड़ियों को स्थान दिया गया। प्रो-कबड्डी टीम के मालिकों में अनेक प्रसिद्ध बॉलिवुड सितारों सहित उद्योग जगत की बड़ी हस्तीयों के भी नाम हैं। फिल्म प्रोड्युसर और दिग्दर्शक रोनी स्क्रूवाला ने मुंबई (यु मुम्बा) टीम, तो जयपुर (जयपुर पिंक पैंथरर्स) की टीम अभिनेता अभिषेक बच्चन ने खरीदी है। इसी के साथ फ्यूचर ग्रुप के किशोर बियाणी ने कोलकाता (बंगाल वैरियर्स), सुमनलाल शाह ने पुणे (पुणेरी फलटन), यस बैंक के प्रबंधन निदेशक और सीईओ राणा कपूर ने दिल्ली (दबंग दिल्ली), विरा स्पोर्ट्स और कोर ग्रीन ग्रुप ने विशाखापट्टनम (तेलगु टायटन्स), कोस्मिक ग्लोबल ने बेंगलुरू (बेंगलुरू बुल्स) और राजेश शाह ने पटना (पटना पायरेट्स) क्लब खरीदा।
        लीग की रचना करते समय अंतरराष्ट्रीय नियमों का विचार किया गया। आठ टीम मालिक अपनी टीम में १२ खिलाड़ी खरीद सकते थे। इसके लिए ‘ए’,‘बी’ और ‘सी’ श्रेणी का निर्माण किया गया। हर खिलाड़ी के लिए अधिकतम ६० लाख रुपये की मर्यादा दी गई थी। ‘ए’ और ‘बी’श्रेणी के लिए क्रमश: ४ और २ लाख रुपये निश्चित किए गए। मतलब खिलाड़ी को २ लाख या ४ लाख मिलना तय था। जो युवा खिलाड़ी हैं, जो नए स्तर से कबड्डी में अपना भाग्य आजमाना चाहते थे, उनके लिए ‘सी’ श्रेणी बनाई गई। इस श्रेणी के खिलाड़ियों को २५ से ५० हजार देने की अनुमति दी गई थी।
      

 भारतीय कबड्डी संघ के सर्वोत्कृष्ट खिलाड़ी राकेश कुमार की प्रो-कबड्डी की नीलामी में सब से ज्यादा बोली लगी। पटना टीम ने उसे अपनी टीम में १२ लाख ८० हजार की सबसे ज्यादा बोली लगाकर खरीदा। बेंगलुरू बुल्स ने अजय ठाकुर को १२ लाख २० हजार की बोली लगाते हुए अपने टीम में शाामिल किया। भारत सहित १३ देशों के खिलाड़ियों ने इसमें भाग लिया था। ९६ खिलाड़ियों पर बोली लगाई गयी। उसमें ७२ भारतीय और २४ विदेशी खिलाड़ी थे। पटना और बेंगलुरू के बाद दिल्ली ने सुरजित नरवल (१२.२० लाख) और जसमेर सिंह को (११.२० लाख) सब से ज्यादा बोली लगाकर अपनी ओर खींचा।
      प्रो-कबड्डी के शुरुआती दौर में कई बॉलिवुड सितारों ने स्टेडियम में आकर खिलाड़ियों को प्रोत्साहित किया। इनमें अमिताभ बच्चन, अभिषेक बच्चन, ऐश्वर्या रॉय बच्चन, आमीर खान, शत्रुघ्न सिन्हा, विवेक ओबेराय आदि के नाम लिण् जा सकते हैं।
       बॉलिवुड जगत और प्रसिद्ध खिलड़ियों के श्रेष्ठ खेल की वजह से ही दर्शकों ने प्रो-कबड्डी को कुछ ही दिनों में लोकप्रिय बना दिया। एक सकारात्मक बाात यह थी कि, स्टार स्पोर्ट्स जैसे बड़े टीवी चैनल ने इस लीग के प्रदर्शन का जिम्मा उठाया था। एक और बात इस लीग के लिए अच्छी साबित हुई, और वह यह कि विदेशी खिलाड़ियों की प्रो-कबड्डी में रही उपस्थिति। प्रो-कबड्डी में दक्षिण कोरिया, जापान, चीन, बांग्लादेश, कजाकिस्तान, अफगानिस्तान जैसे उपमहाद्वीपों के खिलाड़ियों ने उपस्थिति दर्शाई थी।
      प्रो-कबड्डी का पहले संस्करण में अभिषेक बच्चन की जयपुर पिंक पैंथरर्स ने रॉनी स्क्रुवाला की यु मुंबा टीम को फायनल में ३५.२४ से पराजित किया। पूरी लीग में यु मुंबा और जयपुर का अच्छा प्रदर्शन रहा। तीसरे और चौथे स्थान के मुकाबले में पटना पाइरेट्स ने बेंगलुरू बुल्स को २९.२२ से हराकर तीसरा स्थान हासिल किया।
       प्रो-कबड्डी को मिली सफलता देख, सर्कल स्टाइल पहली वर्ल्ड कबड्डी लीग (डब्लूकेएल) भी ९ अगस्त से शुरू हुई है। लंदन के प्रसिद्ध ओटू अरिनात में इसका पहला संस्करण आयोजित किया गया। भारत सहित इंग्लैण्ड, कनाडा, अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात इन देशों में आगामी चार महीनों में यह लीग खेली जाएगी। भारत में नई दिल्ली, जालंधर, भटिंडा, अमृतसर और मोहाली में इसका आयोजन होगा। पाकिस्तान सहित आठ टीमें इसमें हिस्सा लेंगी। खालसा वैरियर्स, यो यो टायगर्स, वैंकुवर लॉयन्स, पंजाब थंडर, लाहौर लायन्स, यूनायटेड सिंग्ज, कैलिफोर्निया ईगल्स, रॉयल किंग्ज इत्यादि टीमों के नाम है। इसमें से यूनायटेड सिंग्ज बॉलिवुड नायिका सोनाक्षी सिन्हा की टीम है। यो यो टायगर्स टीम के मालिक पॉप स्टार हनी सिंह हैं। अक्षय कुमार ने अपनी टीम का नाम खालसा वैरियर्स रखा है। भारत में आने के बाद इसकी टीआरपी बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
      प्रो-कबड्डी से कबड्डी का स्वरूप बदलेगा और युवा भी इस खेल में अपना नसीब आजमाते नजर आएंगे।

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