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     झारखंड की तारा शाहदेव राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी हैं। एक मुसलमान युवक ने हिंदू नाम बताकर शादी की। वह तारा शाहदेव पर मुस्लिम धर्म स्वीकार करने का दबाव डालने लगा। जब तारा ने इसके लिये साफ इंकार कर दिया तो उस पर पैशाचिक अत्याचार किये गये। इस घटना को तारा शाहदेव ने पूरे देश के सामने रखा। तारा शाहदेव एक अकेली युवती नहीं है। देश की हजारों हिंदू युवतियां मुस्लिम धर्मविस्तार के अंधे और कपटपूर्ण षड्यंत्र का शिकार हो रही हैं। ‘लव जिहाद’ नाम से चल रहे इस षड्यंत्र को समझना जरूरी है।
      ‘जिहाद’ शब्द के बारे में कई लोगों की धारणायें अलग-अलग हैं। परंतु इन सभी में सबसे प्रमुख है ‘जिहाद’ अर्थात ‘धर्मयुद्ध’। इस्लाम के शब्दकोश में अगर कोई सबसे उज्ज्वल शब्द है तो वह है ‘जिहाद’। इस्लाम पृथ्वी पर हर तरफ अल्लाह का राज स्थापित करने की घोषणा करता है। जो भी इसका विरोध करता है उसके विरुद्ध युद्ध करने का अर्थ है ‘जिहाद’। इसी धारणा के कारण इस्लाम और अन्य धर्मों का सहअस्तित्व न इतिहास में कभी सौहार्द्रपूर्ण रहा और न वर्तमान में दिखाई देता है। इतिहास तो उनकी क्रूरता का ही उदाहरण प्रस्तुत करता है। पृथ्वीराज चौहान की आंखें निकालना हो, संभाजी राजे भोसले को दी गई यातनाएं हो या फिर गुरु गोविंद सिंह के दो मासूम नवयुवकों को दीवार में जिंदा चुनवाना हो; सभी घटनाएं क्रूरता की साक्षी हैं। वर्तमान भी इससे कुछ अलग नहीं है। कश्मीर घाटी से हिंदू पंडितों को भगाना, अमेरिकन पत्रकारों का सिर सारी दुनिया को दिखाते हुए कलम कर देना इत्यादि घटनाएं भी जिहाद के इर्द-गिर्द घूमनेवाली हैं। अब जब उन्हें यह समझ में आ गया है कि इतिहास में की गई क्रूरता अब नहीं चल सकती तो उन्होंने ‘जिहाद’ के लिये नया रास्ता खोज निकाला है। हिंदू स्त्रियों को फुसलाकर भगाना, उन्हें मुसलमान बनाना और अपने धर्म की जनसंख्या बढ़ाना। इस नये रास्ते को ही ‘लव जिहाद’ का नाम दिया गया है।
     स्कूल-कॉलेज के आसपास आजकल मुस्लिम युवकों के झुंड मंडराते नजर आते हैं। वे हिंदू लडकियों से नजदीकियां बढ़ाकर दोस्ती करते हैं। गाड़ी और फैशनेबल कपडों में घूमनेवाले इन युवकों के जाल में हिंदू लडकियां फंसती जाती हैं। गाडी, पेट्रोल और फैशनेबल कपड़ों के लिए अर्थात लव जिहाद के लिये लगनेवाला सारा पैसा उन्हें असामाजिक तत्वों द्वारा उपलब्ध कराया जाता है। हिंदू लड़कियों को फंसाकर उनसे शादी करने के बाद उन्हें एक मोटी रकम पुरस्कार के तौर पर भी दी जाती है। जितनी अधिक स्वाभिमानी जाति की ल़ड़की होगी, उतनी रकम भी बड़ी होगी। आकर्षक दिखनेवाले परंतु मन में इस्लाम के प्रचार की जिहादी मानसिकता पालनेवाले मुस्लिम युवकों द्वारा फंसाये जाने की वास्तविकता शादी के बाद जब हिंदू युवतियों के सामने आती है तब भी ये युवतियां कुछ नहीं कर पातीं। उसके बाद शुरू होता है इन युवतियों का नारकीय यातनाओं भरा घृणास्पद जीवन। पिछले कुछ वर्षों में इस तरह की कई घटनाएं हमारे सामने आई हैं। राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी तारा शाहदेव इसका ताजा उदाहरण है। इन दाहक अनुभवों से देश के प्रमुख शहरों के साथ ही गांव स्तर तक की युवतियां भी गुजर रही हैं। इस्लाम का गलत ढंग से प्रचार करनेवाले लोगों का का यह षड्यंत्र भीषण रूप ले रहा है।
     सन २००६ में इलाहबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार से यह सवाल किया था कि ‘केवल हिंदू लडकियां ही इस्लाम क्यों स्वीकारती हैं? न्यायालय के सामने लगातार ऐसे मामले आ रहे हैं जिनमें हिंदू युवतियों को दीक्षा देने के बाद उनका विवाह मुस्लिम युवकों से कराया जाता है। एक बार विवाह हो जाने के बाद इन युवतियों का कोई अता-पता नहीं होता।’ न्यायालय के इस प्रश्न से ‘लव जिहाद’ की भीषणता सामने आ जाती है। केरल में लव जिहाद को रोकने के लिये केरल उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को विशेष कानून बनाने के आदेश दिये हैं। धार्मिक उन्माद से प्रेरित होकर वे लोग अगर ‘लव जिहाद’ का सहारा ले रहे हैं तो भविष्य में एक बड़े संघर्ष की स्थिति निर्माण होगी। उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ दिनों जो दंगे भड़के थे उनके पीछे भी ‘लव जिहाद’ की प्रवृत्ति ही थी। उत्तर प्रदेश में हिंदुओं के द्वारा ‘बेटी बचाओ आंदोलन’ शुरू किया जाना बेवजह नहीं है। उत्तर प्रदेश इसका मार्मिक उदाहरण है कि ‘जिहादी’ वृत्ति को अन्य धर्मों की ओर से भी उतना ही तीक्ष्ण उत्तर मिल सकता है। डरा-धमकाकर, जोर-जबरदस्ती से या जिहाद के माध्यम से अपनी आबादी बढ़ाने के प्रयत्न अब सफल नहीं होंगे। लव जिहाद की कपटपूर्ण कहानी व्यक्ति विशेष की नहीं है। इसके सामुदायिकता, योजनाबद्धता और विस्तार जैसे विभिन्न आयाम हैं। अत: हिंदुओं को चौकन्ना रहने की आवश्यकता है। उन्हें अपनी बेटियों को संभालना होगा। घर का वातावरण देश, धर्म और समाज के संस्कार देनेवाला बनाना होगा। बाहरी आकर्षणों की ओर रीझनेवाला वातावरण घर में तैयार न होने दें। अपने परिवार और आसपास की युवतियों को संस्कारित करने की जिम्मेदारी अब माताओं को जागरूक होकर निभानी होगी।
     हिंदुओं को यह नहीं भूलना चाहिये कि हिंदुओं के अल्पसंख्यक होने का अर्थ है देश का कोई हिस्सा हमसे अलग होना। पाकिस्तान और बांग्लादेश का निर्माण इसके उत्तम उदाहरण हैं। हिंदुओं की संख्या कम होना अर्थात भारत का लोकतंत्र समाप्त होना; भारत के सभ्य नागरी जीवन को तिलांजलि देना; ईरान, ईराक, सीरिया, पाकिस्तान जैसे मुस्लिम देशों में जो भयानक अराजकता और दयनीय परिस्थिति है उसे स्वीकार करना। हिंदुओं की संख्या कम होने का अर्थ है भारत के सभी धर्मों का समान आदर करनेवाली व्यवस्था को खत्म करना और किसी एक धर्माधारित राज्य का निर्माण करना। यदि हम चाहते हैं कि ऐसी विकट परिस्थिति हमारी मातृभूमि पर न आये तो प्रत्येक हिंदू परिवार, प्रत्येक हिंदू ग्राम व नगर को अत्यंत जागरूक रहना होगा। हर हिंदू को यह समझना होगा कि हम एक मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। अगर हिंदू बचा और बहुसंख्य रहा तो ही देश एक रहेगा। यहां शांति रहेगी। इस देश का भाग्य और भविष्य हिंदुओं से जुड़ा हुआ है। ऐसा होना आवश्यक भी है, नहीं हुआ तो क्या होगा यह बताने की आवश्यकता नहीं है। पाकिस्तान और अन्य मुस्लिम देशों में आज जो रक्तरंजिक अराजकता फैली है वही धर्मांधता पवित्र भारतभूमि में भी फैलेगी। अत: हिंदू युवतियों! मन में कपट रखकर फुसलानेवाले ‘लव जिहाद’ के प्रति समय रहते ही सावधान हो जाओ।

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