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दिन-ब-दिन बढ़ रहे पेट्रोल के दामों ने आम आदमी की दिनचर्या को प्रभावित करना शुरू कर दिया है. बाजार में महंगाई बढ़ाने वाले कारकों में से एक पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के बारे में अपनी बेबाक राय दें……..

This Post Has 9 Comments

  1. Prices hb raked up petro co profits, Dividend, bonusezs for staff. Petro cos n lobbies r misguiding the govt. Govt can fix petrol price at rs. 35 n diesel st 25. A GST of 28 pc can fix petro price with GST at Rs44 n disel at Rs 33. Low priced petro lubricated economy.

  2. विदेशों से आने वाले पेट्रोल डीजल के अतिरिक्त वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों जैसे बायो-डीज़ल इत्यादि के अन्वेषण पर जोर देना चाहिए।

  3. सरकारने तेल के दाम और बढा़ना चाहिए ताकी सडकोंपर चलनेवाली कार संख्या कम होगी। परीणाम पलुशन कम होने कारण लोगों की सेहत अच्छी होगी। लोगों के जीवन में “अच्छे दीन” और पर्यावरण सुधार लाने का यही एकमेव सस्ता उपाय हो सकता है।

  4. सारीघटनाओं का आकलन चुनाव के परीपेक्ष मे नही देखना चाहीये यह सही है, परंतू भारतीय समाजकी मानसिकता पैसोंके निवेश एवं खर्च पर बनती या बिघडती है, यह भी एक वास्तविकता है। ईसे समाज का दोश नही कहा जा सकता क्युकी भारतकी ६५ से ७०% जनता कम पैसोमे अपना जिवन बिताती है। सरकार इसका संतुलन रखसकती है …रखना चाहीये। अन्यथा ईसके दुरगामी परीणाम हो सकते है। विपक्ष तो ताकमेही बैठा है ईसका भी खयाल रखे। …

    राहुल लोणकर

  5. Petrol petrol everywhere why not people discussing about pulses, rice, wheat, spices etc. This is a drama to threat the present government. We have paid rupees 73 for this petrol 4 years ago. It can be fact that government put some more taxes or cess etc. on petrol but for what purpose? Explore the reason, it may be for giving facility to soldier, to farmers, to labours. I welcome the decision.

  6. हर चीज़ को चुनाव या लोक लुभावन नज़रिये से देखना बन्द करना होगा। पेट्रोल की कीमत में वृद्धि हुई है तो इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय बाज़ार है, कराधान भी एक कारण हो सकता है। यह पहली बार नहीं है जब पेट्रोल की कीमत इतनी ज्यादा हुई है 2014 में भी पेट्रोल 73 रुपये लीटर रहा है। अगर कीमतों को सरकार की प्रतिष्ठा का और जनता के प्रति संवेदना का आधार माना जाए तो पेट्रोल से कहीं अधिक आवश्यकता खाद्य पदार्थों की है और यह अच्छी बात है कि चावल, दाल, चीनी इत्यादि की कीमतें आम जन साधारण के लिए परेशानी का कारक नहीं हैं।

  7. तेल की बढ़ती हुई कीमत में तेल कंपनियों का कोई भूमिका नहीं है । पेट्रोल की कीमत इसलिए बड़ी है क्योंकि केंद्र सरकार ने उसके ऊपर निरंकुश कर लगाए हैं ‌। जैसे यदि 1 लीटर पेट्रोल का दाम डीलर को ₹35 देना पड़ता है तो केंद्र और राज्य सरकार का कर भी पेट्रोल के ऊपर ₹35 हैं प्रति लीटर है । अंतर्राष्ट्रीय बाजार में पेट्रोल का दाम मनमोहन सरकार के समय जितना था इस समय उसका आधा है फिर भी अपने देश में पेट्रोल प्रति लीटर मनमोहन सरकार से ज्यादा हो गया है । पेट्रोल के बढ़ते हुए दाम का एकमात्र कारण है सरकार का निरंकुश आचरण ।

  8. तेल के दामों की कीमत बढ़ने का कारण कोई समझना नहीं चाहता है इसलिए 2019 के चुनाव में इसका दुष्प्रभाव पड़ने की पूरी संभावना है अतः सरकार को चाहिए कि मर्म को समझते हुए यथोचित उपाय करें

  9. सरकार या तो तेल कंपनियों पर अंकुश लगाए नहीं तो पुनः इसे अपने हाथों में ले ले. इसका प्रभाव २०१९ के चुनावों पर भी पड़ सकता है.

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