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कर्नाटक के मुख्यमंत्री कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण समारोह में विपक्ष के ज्यादातर बड़े राजनेताओं का एक मंच पर आना क्या गुल खिलाएगा? अपनी बेबाक राय दें

This Post Has 4 Comments

  1. The emergence of a new ideology
    “Problem politicians and People’s problem”

    The list of ‘people’s problem’ is vast in our country. In all these years, one problem after another delayed every tbing or it was delayed delibrately by the ‘problem people’. These problems could be solved, provided all politicians come together for solving ‘people’s problem’ at large. But, things we most want doesn’t happen. Let me tell you, ”people’s problem cannot be solved by the politicians until they disunite themselves from the ”problem people within and out side their party. Even then, ‘problem politicians’ will remain constant concern and the major worry for all of us. Therefore, these questions confuse even the experts.
    In our country all our politicians are alike. It is difficult to understand, which one of them is pro
    citizen! What makes these politicians think that, nation will tolerate any nonsensical things they do? No. It will take time to understand and bring them in shape, provided all citizens’ come together with or without them to solve ‘people’s problem’ at large.
    Generally, few politicians always try to find problem in every solution. And that is our biggest worry and concern. Therefore, such coalition “show off” or new ideology will less likely to last long and also it’s too tough for all of them to help solve ‘people’s problem’ individually or collectively!

    – A fifth perspective.

  2. कर्नाटक की जनता यह देखे और साथ ही पूरे देश की कि अगर स्पष्ट मनःस्थिति से मतदान नहीं करेंगे तो यही होगा। कन्नाडिगा ने काँग्रेस को सत्ता से बाहर करने हेतु जनादेश दिया था किंतु हुआ क्या? इन सब का एक मंच पर आना यह बता रहा है कि विपक्ष की एकजुटता केवल सत्ता में रहने हेतु है। कुछ न कुछ है ऐसा जो देश के लिए अच्छा हो रहा है किंतु जिससे समूचा विपक्ष डरा हुआ है। रही गुल खिलाने की बात तो प्रमुखतः दो तरह की मानसिकता के लोग इस देश में हैं कुछ राष्ट्रवादी जो मोदी को देख परख रहे हैं और कुछ मोदी विरोधी जिनके पास कोई मुद्दा नहीं है मोदी के विरुद्ध पर विरोध के लिए विरोध करना ही है और तीसरे हैं वज्रमूर्ख NOTA वाले। अब राष्ट्रवादी इस विपक्षी एकजुटता के विरुद्ध एकजुट रहें तो यह गुल सुगंधित होंगें अन्यथा वही ग़ुलामी जो 1300 वर्षों पहले विधर्मियों के आक्रमण के साथ शुरू हुई थी उसी गुलामी का दुर्गन्धयुक्त गुल खिलेगा। निर्णय राष्ट्रवादी और NOTA मूर्खों को करना है।

  3. हमे मजबूत विपक्ष की आवश्यकता है पर कुछ शर्ते है!
    १. विपक्ष का नेता एक स्वच्छ छवी वाला हो (मोदी सा)
    २. विपक्ष का नेता नेशन फर्स्ट ईसी आधारपर काम करे (मोदी सा)
    ३.विपक्ष का नेता सबको साथ लेके चलने वाला हो (मोदी सा)
    ४. विपक्ष का नेता कम से कम ऊसके राज्य का ३बार (कम से कम २बार) मुख्यमंत्री रहा हो(मोदि सा)
    ५. विपक्ष का नेता कीसी भी अदालती मामलेमे से पुर्णतः निर्दोश साबीत हुआ हो (मोदि सा)
    ६. विपक्ष का नेता १६-१८ घंटे कामकी क्षमता रखता हो (मोदि सा)
    ७. विपक्ष का नेता सामान्य ज्ञान मे पक्का हो (मोदि सा)
    ८. विपक्ष का नेता हिंदू हो (मोदि सा)
    ९. विपक्ष का नेता ऐसी पार्टी से हो जिसकी देश के हर एक राज्य के विधान परीषद मे कम से कम एक सदस्य हो

    ऐसा चरीत्र है नजरमे… मोदि सा..

    मुद्दे काफी है समय का बंधन रोक रहा है

    राहुल लोणकर

  4. पर कितने दिनों तक?

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