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‘मॉम ये क्या किया आपने, सारे छिल्के इस तरह चलती गाड़ी से सड़क के बीचोबीच फेंक दिए?‘

‘और क्या तेरी तरह घर लेकर जाएं ताकि सारी गाड़ी बास मारने लगे.’

‘हद है मॉम! जरा देर में बास हो जाएगी गाड़ी में? और ये जो  साफ़ सुथरी सड़क गन्दी कर दी आपने? आप को  तो किसी स्वच्छता-अभियान का भी कोई असर नहीं.’

‘तू है न, घर में एक समझदार ही काफी है, जिसे ये नहीं पता ये सफाई -वफाई अभियान जनता का ध्यान असल मुद्दों से भटकाने के लिए है बस. इन सड़कों के रखरखाव के लिए मोटा टैक्स देते हैं हम, अब इन पर झाड़ू भी हम लगाएं तो ये सफाई कर्मचारी क्या करेंगे?’

‘आपसे कौन बहस करे!’

‘हां तो मत कर न.’

मां बेटी को घर में दाखिल हुए अभी दस मिनट बीते थे कि फ़ोन की घंटी घनघना उठी.

‘ऋत्विक शर्मा  के घर से बोल रहे हैं? देखिये हम पुष्पांजलि से बोल रहे हैं. आपके बच्चे का एक्सीडेंट हो गया है.’

‘हाय राम , ये कैसे? कहां , कैसा है मेरा बच्चा?’

‘धीरज रखिये, हम ईलाज कर रहे हैं. अस्पताल के बाहर वाली सड़क पर ही एक केले के छिल्के पर उसकी साईकिल फिसल गयी और पीछे से तेजी से आ रही कार उसके पैरों पर चढ़ गयी. दोनों पैर जख्मी हो गए हैं. लेकिन शुक्र है ,बहुत बुरा होने से बच गया.’

‘हे भगवान्. सत्यानाश हो उसका, जिसने बीच सड़क पर छिलका फेंक दिया.’

 

 

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