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संघ ने अपने तृतीय संघ शिक्षा वर्ग के समापन समारोह में पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुख़र्जी को बुलाया है.  क्या कांग्रेसी और वामपंथी विचारधारा की संस्थाएं भी इसी तरह से खुले मन का परिचय देकर संघप्रमुख को अपने कार्यक्रमों में मुख्या वक्ता के तौर पर बुलाने का साहस दिखाएंगी ? अपनी बेबाक राय दें.

This Post Has 5 Comments

  1. जब सबकुछ हाथसे फीसलते दिखरहा हो…सच को समझकरभी उसे आपनाने की हिम्मत ना हो.. वैचारीक तर्क के बगैर केवल विरोध के लीये हो रहा हो… और सत्ता पाने केलिये कीसीभी हदतक जाने की मनशा रखता हो ऐसा व्यक्ति या व्यक्तिसमुह किसी वैचारीक द्रुष्टिकोण को अपना सकता है इसकी संभावना नही के बराबर है। गलतीसे भी ऐसा कदम ये अगर उठाते भी है तो उनको इसका खाॕमियाझा भुगतना पडेगा…

    राहुल लोणकर

  2. कांग्रेस विचारधारा की जगह परिवारवाद की ओर मुखातिब है वहीं वामपंथी विखरते जनाधार के चलते कुंठाग्रस्त हैं। विचारधारा की जगह अब सत्तालोलुपता ने ले लिया है। सिद्धान्तविहीन पार्टी में हिम्मत कैसे आयेगी?

  3. इसके लिए पर्याप्त हिंमत उनके पास नही है .

  4. उनमें इतना साहस है ही नहीं की और विचारों का अध्ययन व मनन करें।

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