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जिस तरह नक्सलवादियों के आपसी पत्र में प्रधानमन्त्री को मारने की साजिश का पता चला है उससे साफ़ ज़ाहिर होता है कि नक्सल और मावोवाद के आकाओं की हिम्मत काफी बढ़ चुकी है. यह दुस्साहस बिना राजनीतिक सहयोग के संभव नहीं है. मावोवाद के कारण होने वाले  देश के रक्तरंजित वर्तमान और भविष्य को बचाने के लिए किस तरह के कदम उठाये जाने की आवश्यकता है ? अपनी बेबाक राय दें.

This Post Has 5 Comments

  1. No. the naxlite problem in India is not as fierce and gripping as it had become in sri Lanka. The Naxlute problem in India is set in dead negligence of Adivasies and Vanvasies in the past. The strategy of Naxlite movement has been to keep the illustrate Adivasies cut of from the development process. This peculiar example of Jungle Raj of primitive age.
    Now the present government has not only made the police and paramilitary forces attacks and counter attacks more fierce, But has also prioritised their development attempts in these areas. So positive results are coming and people at large in these areas have stopped giving active support and shelter to them except under compulsive situations. So far their so called ideologies in the urban area are concerned, it is the dead movement with the global downfall of the communist ideology.

  2. कानून को बेहतर बनाना होगा..

  3. We have to be very alert smart and strict not allowing any loopholes or any excuses or be liberal unnecessarily

  4. माओवादियों के समर्थक देश के बड़े-बड़े शहरों में विभिन्न क्षेत्रों के विद्धानों के रूप में विचरण करते हैं। वे शहरों में विचारक और मानवाधिकार का मुखौटा चढ़ा लेते हैं और माओवादियों की सहायता करते हैं। ऐसे अनेक सफेदपोश माओवादी समाज में खुले आम घूम रहे हैं। ये सफेदपोश जंगल में संघर्ष के लिए पैसा, कार्यकर्ता और विचारधारा की रसद पहुंचाते रहते हैं। उनका यह दोगलापन देश विघातक है।
    फिलहाल केरल की भूमि हिंसक कम्युनिस्ट विचारधारा की प्रयोगशाला बन चुकी है। लाल आतंक शिखर पर है।

    केंद्रीय गृह मंत्रालय की जानकारी के अनुसार देश के 22 राज्यों में नक्सली आंदोलन प्रभावी है। देश के लगभग 220 जिलों में यह फैला हुआ है। देश का करीब 30 प्रतिशत इलाका नक्सली प्रभाव क्षेत्र में आता है। आज देश में आंतरिक सुरक्षा की सब से बड़ी समस्या मार्क्सवादी हिंसा अर्थात नक्सलवाद ही है। आखिर नक्सलियों का शक्ति-स्रोत क्या है? किस आधार पर ये नक्सली सब से बड़े लोकतांत्रिक देश भारत को चुनौती देते हैं? ऐसे कौनसे स्रोत उनके पास हैं?
    जेएनयू में एफएसआई को मात्र छात्र संगठन समझना सब से बड़ी भूल होगी। कम्युनिस्टों में हमेशा मजाक में कहा जाता है कि, केरल, त्रिपुरा के बाद कम्युनिस्ट पार्टी की तीसरी इस्टेट यह विश्वविद्यालय है, जहां समर्पित कम्युनिस्ट कार्यकर्ता निर्माण होते हैं।

    माओवादी विचारधारा पर सोचते समय केवल राजनीतिक स्तर पर ही विचार करने से नहीं चलेगा। इसके पूर्व उनकी विचारधारा को बल देने वाली राष्ट्रविरोधी विचारधारा को भी रोकने की अत्यंत आवश्यकता है। जिस तरह से त्रिपुरा कम्युनिस्टों से छीन लिया, उसी तरह उनकी राष्ट्रविघातक विचारधारा को भी संवैधानिक प्रयास से जड़ से उखाड़ देना चाहिए, ताकि उनसे प्रभावित क्षेत्र देश की मुख्य धारा में आए

  5. law should be more strict about such cases. Right punishment should be given at right time.

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