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मुख्यमंत्री बन जाने के बावजूद अरविन्द केजरीवाल का समय उनके ऑफिस से ज्यादा धरनों में बीत रहा है. क्या उनकी धरना पालिसी से ही दिल्ली की समस्याओं का समाधान हो जायेगा? अपनी बेबाक राय दें.

This Post Has One Comment

  1. एक देशी कहावत है कि “नाच न आवे आॅगन टेढ़ा” यह केजरीवाल पर बिलकुल फिट बैठता है। अपनी नाकामियों के लिये मोदी जी और LG को दोषी ठहराना इनकी आदत हो गई है। ये लोग एक नंबर के नौटंकीबाज हैं। पब्लिक अब समझदार है अब इनके बहकावे में नहीं आने वाली है।

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