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***अमोल पेडणेकर***
      

प्रधान मंत्री मोदीजी का सबसे बड़ा योगदान यह है कि उन्होंने नितीन गडकरी जैसे कार्यक्षम नेता को शिपिंग मंत्रालय का कार्य सौंपा है। मेरी सोच से नितीन गडकरी जी ने बड़ा परिवर्तन इस विभाग में लाया है। शिपिंग इंडस्ट्रीज का जो चक्का बड़े दिनों से जाम था, उसमें ग्रीस डाल कर उसे घूमने लायक करने का महत्वपूर्ण काम नितीन गडकरी जी ने किया है। यकिनन शिपिंग में ‘अच्छे दिन’ की शुरुआत हो गई है। शिपिंग में आने वाले बदलावों पर वी.आर. मेरीटाईम सर्विसेस प्रा.लि. के कॅप्टन संजय पराशर से हुई बातचीत के महत्वपूर्ण अंश-
 आपके उद्योग की शुरुआत कैसे हुई?
    जब मैं नौकरी करता था तब मुझे महसूस हुआ कि हर साल प्रमोशन के लिए बड़ी मेहनत करनी पड़ती थी। बड़े पद तक पहुंचने के लिए संयम की जरूरत होती है और मेरे अंदर इतना संयम नहीं था। अत: सन २००९ में मैंने निर्णय किया और मेरे इस व्यवसाय की नींव रखी।
आपके नाम और संस्था के नाम में कोई मेल नहीं है। कंपनी का नाम वी.आर. मेरीटाईम सर्व्हिसेस प्रा.लि. कैसे रखा गया?
      मेरा सम्पूर्ण परिवार अध्यत्मिक विचारधारा से जुड़ा हुआ है। मैं, मेरे दादा, पिताजी और चाचाजी, के साथ उनके गुरु विभूती राम जी के आशीर्वचन सुनने और आशीर्वाद लेने के लिए हर समय जाता था। अपनी युवा अवस्था से मैं भी उन्हें अपना गुरू मानने लगा। उन्होंने मुझे हर समय मार्गदर्शन किया है। जब मैंने इस उद्योग का प्रारंभ किया तब, मेरे गुरु पू.विभूती राम जी को इस व्यवसाय का मालिक बनाया। उन्हीं के नाम का शॉर्टफार्म बनाकर वी.आर. मेरीटाईम सर्विसेस प्रा.लि. इस नाम से मेरे व्यवसाय को प्रारंभ किया है। मैंने सदैव अपने आप को मुलाजिम समझा है। मेरे गुरु को मालिक का दर्जा दिया है। गुरु तय करें हमारे व्यवसाय को कहां तक ले जाना है। मैं और मेरा एक मित्र समीर परब इस व्यवसाय के प्रारंभ में थे। आज हमारे पास ४५ जहाज पर काम है। हमारा काम जहाज पर क्रू मैंनेजमेंट सर्विस है। आज हमारे पास जहाजों पर हर समय ६०० नाविक सेवा देते हैं। उनमे ३ महिला अधिकारी नाविक है। कार्यालयीन कर्मचारी ४८ हैं। उनकी औसत उम्र २८ बरस की है। अप्रैल २०१० में नरिमन पॉईंट में २५ हजार रुपये महीना किराये की जगा में प्रारंभ हुआ हमारा व्यवसाय आज खुद के कॉर्पोरेट ऑफिस में है। यह गुरु की ही मर्जी है, ऐसा हम मानते हैं।

उद्योग प्रारंभ करते वक्त गुरू को साक्षी मानकर, उनके नाम से संस्था प्रारंभ करने का विचार मन में क्यों आया? गुरू पर परम विश्वास या अपने आप पर भरोसा कम होना इनमें से कौन से भाव आपके मन में थे?
      मेरे गुरू के मार्गदर्शन का मुझ पर बहुत ब़ढिया असर रहा है। मैं मुश्किल वक्त में मेरे गुरू को याद करता हूं, तो मेरा उद्योग प्रारंभ करना यह अच्छी बात थी। उस अच्छे समय में गुरु को याद क्यों न रखूं। मैंने मेरे मन की सुनी है। मैंने अपने आप को नौकर के तौर पर हमेशा महसूस किया है। मेरे गुरु को इस व्यवसाय के मालिक का दर्जा दिया है।
कोई भी व्यवसाय कल्पकता एवं परिश्रम से फलता फूलता है। आपके व्यवसाय के विकास के लिए कल्पकता एवं परिश्रम किस प्रकार काम आए हैं?
     मैंने अब तक की मेरी सारी जिंदगी में शिपिंग का ही काम किया है। १८ साल की उम्र में शिपिंग का प्रशिक्षण प्रारंभ किया। २६ साल की उम्र में कैप्टन प्रशिक्षण परीक्षा पास की, ३० साल में प्रत्यक्ष कैप्टन बना। ३२ साल में नौकरी छोड़ दी। हॉंगकॉंग गया। वहा एक यहूदी कैप्टन के मातहत २ साल काम किया। १८-१८ घंटे काम करतेे थे। परिश्रम मेरे स्वाभव में ही है। बचपन से जो संस्कार होतेे हैं, आदमी उसी के साथ जीता है। मेरे पिताजी फौजी थे। परिश्रम के संस्कार तो घर से ही थे। मेरे जीवन प्रवास में अच्छे लोग मिले, जिन्होंने मुझे इस व्यवसाय में यहां तक पहुंचाने में बड़ा योगदान दिया है। हमें जहाज पर मैनेजमेंट सर्विस देने का काम मिलता गया। पहले एक जहाज मिला, हमारी पारदर्शी कार्य कुशलता से मालिक को अच्छे परिणाम हमने दिए। नाम की चर्चा होने लगी। जहाज बढ़ते गए। एक के दो जहाज हो गए। आज ४५ जहाज पर हमारी मैनेजमेंट सेवा हम दे रहे हैं। यह परिणाम सिर्फ ५ सालों में हमारी संस्था को मिला है। हमारे स्टाफ का परिश्रम, जहाज पर जानेवाले क्रू मेंबरों का बढ़िया बर्ताव व्यवसाय विृध्द में सहयोग दे रहा है। मैं खुद जहाज पर जाता हूं, हमारे क्रू मेंबर जो जहाज पर होते हैं उनसे मिलता हूं। जो अनुशासन का पालन नहीं करते उनसे संवाद रखते हैं। समझाते हैं। फिर भी ना समझ रहते हैं तो उनको कार्य से विदाई देते हैं। जो अच्छा काम करते हैं उनको प्रमोशन देने से कर्मचारी वर्ग में विश्वास आने लगा। इसके कारण जहाज मालिक को मुनाफा होने लगा। भारत में ३१५ शिपिंग कंपनियां हैं, पर आज उनमें हमारी कंपनी १५वें नामांकन पर है।

आपके व्यवसाय के स्वरूप के संदर्भ में जानकारी दीजिए?
      जहाज पर २२ कर्मचारी होतेे हैं। उन कर्मचारियों की वैश्विक स्तर पर और भारतीय स्तर पर एक प्रक्रिया है। मर्चेंट नेवी की वह एक प्रकिया है। जहाज के कप्तान से लेकर अंतिम श्रेणी के कर्मचारियों तक जहाज में उपलब्ध करके देने की सेवा हम देते हैं। जिस कू मैनेजमेंट कहा जाता है। हम यह सेवा अत्यंत उचित दाम में जहाज मालिकों को मुहैया करवाते हैं।
      क्रू मैनेजमेंट में चार बातें महत्वपूर्ण होती हैं। उसमें आदमी को चुनना और उन्हें जहाज पर भेजना और उनके लायसेन्स अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्हें प्रशिक्षित करना हमारा काम है। अच्छा क्रू देना, कप्तान ४ महीने के लिए जाता है और क्रू ९ महीने के लिए जहाज पर जाता है। जब वह जहाज पर है तब उनकी सभी बातों की जिम्मेदारी हमारी होती है। जहाज पर जब वह क्रू होते हैं तब उनमें कौनसी अच्छाई और बुराइयां रही हैं उस बारे में जानकारी हम रखते हैं। उसमें सुधार लाने का प्रयास करते हैं। आज तक हमारे क्रू कर्मियों पर एक भी कानूनी केस नहीं हुआ है। हमारे क्रू तंदुरुस्त स्थिति में जहाज पर जाते हैं पर जब जहाज से उतरते हैं तब भी तंदुरुस्त होते हैं।
विशाल समुंदर में उतरते वक्त अपने व्यवसाय को किस दिशा में ले जाना है यह आपने तय किया था?
      मैंने अपने लिए कोई मापदंड या पैमाने नहीं रखे थे, कि हमें ये करना है और यहां तक पहुंचना है। हमने यह बात तय की थी, हम हमेशा सच बोलेंगे, हम मार्केटिंग के लिए जहाज मालिक से प्रत्यक्ष मिलेंगे, हम क्या काम करतेे हैं यह उनको परिभाषित करेंगे। जहाज पर होने वाले हमारे क्रू मेंबर चाहे रात को एक बजे फोन करे या तीन बजे, मैं हमेशा उनके लिए तत्पर रहूंगा। जहाज पर होने वाले कर्मचारियों के परिवार से जब फोन आता है तब उनको सही और तत्काल जानकारी देना, यह प्रण मैंने किया है। इस चीजों का हमें फायदा ही हुआ है। हमारे क्रू मेंबरों में हमारे प्रति विश्वास का भाव रहता है। उसके कारण जहाज पर काम करते समय एक प्रसन्नता रहती है। जिसका सीधा फायदा जहाज के मालिक को होता है। यह कोई नया तरीका नहीं है। लोगों से मिलतेे रहने का संस्कार तो मेरे मन मस्तिष्क पर बचपन से ही है। मैंने जो संस्कार मेरे बचपन में लिए हैं, उन संस्कारों को यहां काम में लाया है। आज हम दो भारतीय और १३ विदेशी जहाजोंे के मालिकों को सेवा देते हैं। शिपिंग की दुनिया बहुत छोटी है। पूरे विश्व के जितने नाविक हैं उसमें ७% प्रशिक्षित भारतीय हैं। हर साल ३० मिलियन डॉलर शिपिंग व्यवसाय से हमारी कंपनी भारत में लाती हैं। सालाना ५ मिलियन डॉलर्स इस व्यवसाय से भारत में आते हैं।
नरेंद्र मोदीजी की सरकार आने पर क्या शिपिंग इंडस्ट्रीज में ‘अच्छे दिन’ आए हैं?
      मोदीजी का सबसे बड़ा योगदान रहा है कि उन्होंने नितीन गडकरी जैसे कार्यक्षम नेता को शिपिंग मंत्रालय का कार्य सौंपा है। मेरी सोच से नितीन गडकरी जी ने बड़ा परिवर्तन इस विभाग में लाया है। शिपिंग इंडस्ट्रीज का जो चक्का बड़े दिनों से जाम था, उसमें गी्रस डाल कर उसे घूमने लायक करने का महत्वपूर्ण काम नितीन गडकरी जी ने किया है। सर्वप्रथम कोई भी विषय मंत्रालय मे लेकर जाते हैं तो हमारी बातें वहां सुनी जाती हैं। ऐसी व्यवस्था वहां पर है। यह मेरा प्रत्यक्ष अनुभव है। सरकार बदलने से और शिपिंग मंत्रालय मे संवेदनशील एवं कार्यक्षम व्यक्ति आने पर कितना परिवर्तन आ सकता है इसका यह उत्तम उदाहरण है। देढ साल पहले मेरी कंपनी का जहाज चीन में डूब गया था। हमारी कंपनी के नाविक इस विपदा से बच निकले। उन्हें चीन ने हॉटेल में बंदी बनाया था। यह बात शिपिंग मंत्रालय में ले जाने पर वहां से तुरंत कार्रवाई होकर मेरे सभी कर्मचारी चीन के कब्जे से १० दिन के अंदर वापस लाने में और उनके परिवार से मिलवाने में कामयाब रहा था। इतनी जल्द कार्रवाई मैंने पहले कभी महसूस नहीं की थी। इस अनुभव के कारण शिपिंग इंडस्ट्रीज में सरकार के बारे में नई सोच उभरने लगी है। नाविकों की एवं शिपिंग कंपनी की समस्यों को जब हम सरकार तक प्रत्यक्ष रूप में, टि्वटर या इमेल के माध्यम से पहुंचाते हैं तो सरकार से हमें तुरंत सकारत्मक जबाब मिलता है। मेरे इस प्रयास के बाद सरकार की ओर से सभी शिपिंग कर्मचारियों को ट्विटर पर लाया गया है। एक साल में १६०० के आसपास ट्वीट हुए। उसमें से ७०% प्रशिक्षित शिपिंग कर्मचारियों की समस्याओं का मंत्रालय ने समाधान किया है। शिपिंग व्यवसाय के कारण हम पूरी दुनिया घूमते हैं। देश के परिवर्तन के संदर्भ में दुनिया में अच्छी सोच है। जिस गतिमानता से देश में विदेश संबंध, व्यापार को बढ़ावा देनेवाली बातें हो रही हैं उसको दुनिया, आश्चर्य से देख रही है। भविष्य में सुपर पावर होने की क्षमता भारत रखता है। यह बात दुनिया भर में कही जा रही है। यह विश्वासपूर्ण परिवर्तन हम मोदी सरकार के आने पर महसूस कर रहे हैं।
इस परिवर्तन के दौर में मरीन शिपिंग इंडस्ट्रीज में कौनसी बातों पर ध्यान देना अत्यंत आवश्यक है?
      हमारे शिपिंग इंडस्ट्री की ६ मुख्य संस्थाएं हैं। ङ्गॉसमा IMEI, मासा, इंसा, इक्सा और CMMI ये अत्यंत महत्वपूर्ण संस्थाएं हैं। इन छह संस्थाओं द्वारा शिपिंग पॉलिसी तैयार करने में अपना योगदान एकमत से देने की अत्यंत जरूरत है। इस बार पहली दफा ऐसा हुआ है कि मंत्रालय ने इनसे बजट के लिए सुझाव मांगे हैं। सरकार हमें एक वातावरण निर्माण करके दें ताकि हम उन्हें इसके पहले शिपिंग इंडस्ट्रीज में एक अभूतपूर्व परिवर्तन देंगे। जहाज के उपर जेष्ठ श्रेणी के कर्मचारियों की कमी है। जिस प्रकार शिपिंग इंडस्ट्रीज का फायदा ़बढ़ रहा है, उस प्रकार प्रतिभावान कौशल्यपूर्ण कर्मचारियों का निर्माण होना भी समय की मांग है। इस मांग को पूरा करने हेतु शिपिंग यूनिवर्सिटी होना आवश्यक है। कर्मचारी संस्कारित होना जरूरी है। सिर्फ पैसा कमाना यह लक्ष्य भारतीय मर्चंट नेवी का नहीं होना चाहिए। कारण हम भारत के राजदूत होकर दुनिया में भारतीयता का परिचय देते हैं। हम व्यवसाय के कारण दुनिया में घूमते रहते हैं। हमारी संस्कृति जहाज में सब जगह पहुंचातेे हैं।

आप अपने व्यवसाय को लेकर कौनसा भविष्य देख रहे हैं?
      जो भी इस इंडस्ट्री में कदम रखता है, चाहे वह क्रू हो या जहाज का कप्तान वह एक सपना देखता ही है कि मैं भी कभी एक जहाज का मालिक बनूं। मैंने ६ साल पहले इस व्यवसाय में मेरे गुरु के साथ पदार्पण किया है। उनकी कृपा से आज इस इंडस्ट्री में हमारी संस्था का काम और नाम दोनों है। आने वाले समय में हमारे जहाज होंगे ही उसमें कोई शंका नहीं है। अब ये कब होगा यह मेरे गुरु तय करेंगे। यह तो हमारा वैयक्तिक सपना है।
     हम एक विचार को लेकर कार्य करते हैं। पैसा हमारा साधन है, साध्य नहीं है। मर्चंट नेवी के सभी मेंबर्स के हितों का हम ध्यान रखते हैं। भविष्य में उनके हित में कोई बड़ा कार्य कर सकते हैं तो हम अपना सपना पूरा हुआ यह मानेंगे। अगर हिदुस्तान में १० लाख शिपिंग कर्मचारी हैं तो १० लाख घरों तक परमनंट शिपिंग की नौकरियां पहुंचे। मेरा पहला लक्ष्य यह है। जिस तरह के शिपिंग क्षेत्र में मंत्रालय के काम हो रहे है उसे देखते हुए आनेवाले समय में १ करोड नौकरीयां इस क्षेत्र में होंगी।
इतनी ऊर्जा को लेकर काम करते हैं, वह ऊर्जा कहां से आती है?
       मेरे जीवन मे बहुत उतार चढ़ाव आए हैं। उन उतार चढ़ाओं में मेरी पत्नी श्रीमती सोनिका पराशरने मुझे बहुत सहयोग दिया है। जब हम किसी मोर्चे पर काम करते हैं तो सकारात्मक विश्वास मिलना बहुत जरूरी होता है। वह मुझे घर से मिलता रहा है। व्यवसाय के साथ सामाजिक कार्यों में भी में रूचि से कार्य करता हूं। फिन्स नाम का संगठन है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के विषयों पर विचार रखता है। इस फिन्स की समुद्री सुरक्षा की इकाई का सह उत्तरदायित्व मुझ पर है। व्यवसाय, अध्यात्म, समाजसेवा इन सभी कार्यों को मैं उचित भाव से, संतोषपूर्वक कर पाता हूं। उसमें मुझे घर से बड़ा योगदान मिलता है। घर की जिम्मेदारी मेरी पत्नी सही तरह से संभाल रही है। मेरे विकास में उसका विश्वास मेरे साथ काम कर रहा है।
आप अपनी बातचीत में व्यवसाय, अद्यात्म, सेवाकार्य, सहयोगी कर्मचारियों का हित इन सारी बातों पर अपने विचार रख रहे हैं। ये विचार संस्कारों से जुड़े हैं। ये संस्कार कहां से मिले हैं?
      ये संस्कार कहां से मिले हैं इसे मैं उंगली रख कर नहीं बता सकता हूं। पर ये संस्कार मुझ पर हुए विचारों का मंथन है। घर का अध्यात्मिक संस्कार, संघ शाखा में मिला राष्ट्रीय एवं सामाजिक संस्कार और गुरु से मिले अटूट विश्वास का ही प्रत्यक्ष रूप होगा। आज मेरी कथनी और करनी में अंतर नहीं है तो इसी विचारों के कारण है। मुझ पर विश्वास रखा जा रहा है तो इन्हीं विचारों के कारण ही। मेरे संस्कारों ने मुझे पारिवारिक सोच दी है। राष्ट्र, समाज, व्यक्ति के हित को अपने पारिवारिक सोच में लाना है। मैं अपने आप को भाग्यशाली मानता हूं। मेरा सौभाग्य है मुझे यह संस्कार मिले।

                                                          मो 9869206106

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