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***गिरीश उपाध्याय***  
 
        

 प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से अपने भाषण में ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम की घोषणा की थी। इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारत में निर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देना है। लेकिन कोई भी युवा जब अपना खुद का उद्योग या उद्यम स्थापित करने की सोचता है तो उस दौरान उसके सामने पहली और सबसे बड़ी चुनौती होती है अपने सपने के उद्यम को स्थापित करने के लिए धन जुटाना। हम युवाओं को रोजगार ढूंढने वाला नहीं बल्कि रोजगार देने वाला बनाना चाहते हैं लेकिन रोजगार देने वाला बनने के लिए प्रतिभावान होने के बावजूद युवाओं को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। पढ़े लिखे और प्रतिभाशाली युवाओं के पास प्रोजेक्ट तो होते हैं लेकिन उन प्रोजेक्ट को जमीन पर साकार करने के लिए धन की व्यवस्था वे नहीं कर पाते। इस तरह का संकट ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं और शहरी गरीब युवाओं को अधिक झेलना पड़ता है। उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि भी वैसी नहीं होती कि उन्हें कहीं से कोई मदद मिल सके। ऐसे स्थिति में उनके सपने असमय ही कुचल जाते हैं और थक हार कर वे रोजगार देने वाला बनने के बजाय रोजगार ढूंढने वाले बनकर अंतत: कहीं नौकरी करने लग जाते हैं।
         ऐसे युवाओं के लिए जो खुद का उद्यम लगाकर अपने सपनों को पंख देना चाहते हैं, मध्यप्रदेश सरकार ने खास योजना शुरू की है। मुख्य मंत्री शिवराजसिंह चौहान ने ‘युवा उद्यमी योजना’ नामक यह योजना खास तौर से उन युवाओं के लिए शुरू की है जो अपना उद्योग लगाने का सपना देख रहे हैं। इस योजना का उद्देश्य खुद का उद्योग लगाने के इच्छुक लोगों को बैंकों के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराना है। वैसे तो बैंक अपनी कागजी खानापूरी होने पर किसी को भी उद्योग लगाने के लिए ऋण दे सकते हैं, लेकिन ऐसे मामलों में जो सबसे बड़ी कठिनाई आती है वह है मार्जिन मनी और गारंटी की। मध्यप्रदेश सरकार ने युवाओं की इस समस्या का निराकरण खुद करने का फैसला किया है। मुख्य मंत्री युवा उद्यमी योजना के तहत सरकार बैंकों से ऋण लेने वाले युवाओं को मार्जिन मनी सहायता, ब्याज अनुदान, ऋण गारंटी और प्रशिक्षण की सुविधा उपलब्ध कराती है।
        आम तौर पर ऐसी योजनाएं या तो अनुसूचित जाति, जनजाति या पिछड़ा वर्ग के लिए होती है या फिर अत्यंत गरीब वर्ग के लिए, लेकिन एक अगस्त २०१४ से शुरू की गई मध्य प्रदेश की इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह किसी वर्ग विशेष के लिए नहीं है, बल्कि समाज के सभी वर्गों को समान रूप से इसका पात्र माना गया है। इस योजना लाभ उन्हीं उद्यमों के लिए लिया जा सकता है जो मध्यप्रदेश की सीमा के भीतर स्थापित हों। सहायता के लिए प्रोजेक्ट की लागत न्यूनतम १० लाख रुपए और अधिकतम एक करोड़ रुपए रखी गई है। एक और बड़ी सुविधा यह है कि इस योजना में परिवार की आय सीमा का कोई बंधन नहीं रखा गया है। इसके अलावा शैक्षणिक योग्यता भी दसवीं कक्षा उत्तीर्ण होना ही रखी गई है। इससे वे युवा भी इसका लाभ आसानी से ले सकते हैं जो अधिक पढ़े लिखे नहीं हैं। साथ ही आयु सीमा भी १८ से ४० वर्ष तक रखी गई है। योजना से सबंधित अन्य जानकारियां इस प्रकार हैं-
पात्रता
    आवेदक मध्यप्रदेश का मूल निवासी होना चाहिए। वह किसी भी राष्ट्रीयकृत बैंक/ वित्तीय संस्था/ सहकारी बैंक आदि का डिफॉल्टर नहीं होना चाहिए। पहले से ही किसी सरकारी उद्यम/स्वरोजगार योजना का लाभ पा रहा व्यक्ति इस योजना का पात्र नहीं होगा। कोई भी व्यक्ति इस योजना के अंतर्गत केवल एक बार ही सहायता प्राप्त कर सकेगा। यह योजना केवल उद्योग/सेवा क्षेत्र के लिए ही होगी। व्यापारिक गतिविधियों के लिए इसमें कोई सहायता नहीं मिलेगी।
वित्तीय सहायता
    योजना के अंतर्गत प्रोजेक्ट की पूंजीगत लागत पर सरकार १५ प्रतिशत तक की सहायता मार्जिन मनी के लिए देगी। लेकिन यह राशि १२ लाख रुपए से अधिक नहीं होगी। प्रोजेक्ट की पूंजीगत लागत पर अधिकतम सात साल तक सरकार ५ प्रतिशत की दर से ब्याजधन अनुदान देगी। – सरकार ऐसे ऋणों के लिए अधिकतम सात साल तक की गारंटी भी देगी। यह सुविधा क्रेडिट गारंटी ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्माल एंटरप्राइजेस योजना के तहत सरकार द्वारा दी जाने वाली गारंटी शुल्क सुविधा के रूप में होगी।
कैसे करें आवेदन
    आवेदन का प्रारूप मध्यप्रदेश सरकार के उद्योग विभाग की वेबसाइट www.mpindustry.gov.in पर निःशुल्क उपलब्ध है। यह आवेदन पत्र, साथ में लगने वाले सभी जरूरी दस्तावेजों के साथ जिला व्यापार और उद्योग केंद्र पर अथवा बैंक में सीधे जमा किया जा सकता है। ऐसे सारे आवेदन रजिस्टर होंगे और आधे अधूरे आवेदन पाए जाने या उनमें कोई कमी होने पर आवेदक को सूचित किया जाएगा ताकि वो कमियों को दूर कर आवेदन को पूर्ण कर सके। आवेदक को अपने प्रस्ताव की डीटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट आवेदन पत्र के साथ लगानी होगी। यह डीटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट किसी चार्टर्ड अकाउण्टेंट द्वारा प्रमाणित होनी चाहिए।
आवेदन पत्रों का निराकरण
      जिला व्यापार और उद्योग केंद्र तथा बैंक में प्राप्त होने वाले सारे आवेदन सभी संलग्न दस्तावेजों के साथ जिला टास्क फोर्स समिति के सामने प्रस्तुत किए जाएंगे। – जिला टास्क फोर्स समिति इस योजना के लिए हर जिले में बनाई गई है। इसमें जिला कलेक्टर समिति के अध्यक्ष होते हैं जबकि जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला अग्रणी बैंक के मैनेजर, किसी भी एक प्रमुख राष्ट्रीयकृत बैंक का जिला समन्वयक या प्रतिनिधि, सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्यम संस्थान इंदौर का प्रतिनिधि, जिला शहरी विकास अभिकरण का परियोजना अधिकारी, संबंधित बैंक का मैनेजर या उनका प्रतिनिधि, आई.टी.आई. अथवा पॉलिटेक्निक संस्थान के प्रतिनिधि इस टास्क फोर्स के सदस्य होते हैं। जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक को इसका सदस्यसचिव बनाया जाता है। टास्क फोर्स समिति की सिफारिश के बाद ऐसे सारे प्रकरण संबंधित बैंकों को निराकरण के लिए भेजे जाते हैं। चूंकि प्रोजेक्ट के लिए क्रेडिट गारंटी ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्माल एंटरप्राइजेस की ऋण गारंटी निधि योजना से गारंटी दी जाएगी इसलिए बैंक आवेदक से किसी भी प्रकार की को-लेटरल सिक्योइरिटी की मांग नहीं कर सकते। बैंकों को रिजर्व बैंक के दिशा निर्देश के अनुसार ऐसे आवेदनों का प्रकरण प्राप्ति के ३० दिन के भीतर निराकरण करना होगा। प्रकरण मंजूर होने के १५ दिन के भीतर बैंक की ओर से ऋण वितरण शुरू कर दिया जाएगा। योजना के सुचारू रूप से क्रियान्वयन, सहायता प्राप्त उद्यम की स्थापना, उद्यमी को आने वाली समस्याओं का निराकरण और अन्य विषयों की समीक्षा जिला स्तर पर गठित टास्क फोर्स समिति ही करेगी।

प्रशिक्षण
      एक बार ऋण मंजूर हो जाने पर उद्यमी यदि चाहे तो उसे संबंधित उद्यम के बारे में प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। यह प्रशिक्षण शासन की एजेंसियां देंगी। ऐसे प्रशिक्षण समय समय पर उद्यमिता विकास कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित किए जाते हैं। आवश्यकता के आधार पर अलग से प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की जा सकेगी।
मार्जिन मनी सहायता और कर्ज की अदायगी
     परियोजना की पूंजीगत लागत पर १५ प्रतिशत की मार्जिनमनी सहायता सरकार की ओर से दी जाएगी लेकिन यह १२ लाख रुपए से अधिक नहीं होगी। मार्जिन मनी को थछोड़कर बाकी राशि हितग्राही को स्वयं जमा करानी होगी। योजना के अंतर्गत स्थापित होने वाले उद्यमों के लिए शुरू के छह माह तक ऋण वसूली की कार्यवाही नहीं होगी। इन छह माह के बाद ५ से ७ साल की अवधि के भीतर ऋण की अदायगी की जाएगी। यह प्रयास भी किया जाएगा कि आरंभिक दौर में ऋण वसूली स्थगित रखने की न्यूनतम छह माह की अवधि को अधिकतम किया जा सके और ऋण चुकाने की अवधि भी उस अधिकतम अवधि स्तर यानी ७ साल तक रखी जाए।
बैंक कैसे करेंगे वसूली
      ऋण वितरण के बाद उद्योग की स्थापना हो जाने पर, प्रोजेक्ट की पूंजीगत लागत पर सबंधित बैंक की ओर से मार्जिन मनी सहायता और ब्याज अनुदान राशि की का क्लेम किया जाएगा। बैंकों को इस क्लेम की राशि राज्य मुख्यालय पर लीड बैंकों में खोले गए विशेष खातों के जरिए मिलेगी। उद्यमी द्वारा ऋण का नियमित भुगतान किए जाने पर ब्याज अनुदान की राशि का क्लेम बैंकों को नोडल बैंकों से त्रैमासिक आधार पर मिलेगा।
विविध जानकारी
      इस योजना के अंतर्गत भागीदारी के प्रकरणों पर भी विचार किया जा सकता है लेकिन एक ही परिवार के सदस्यों के बीच भागीदारी के प्रकरण मान्य नहीं किए जाएंगे। अन्य भागीदारी के प्रकरणों में यह अनिवार्य होगा कि सभी भागीदार योजना के अंतर्गत निर्धारित की गई पात्रता की शर्तों का पालन करते हों या उस दायरे में आते हों। ऐसी कोई भी सहायता भागीदारों के मान से नहीं बल्कि उद्यम के मान से दी जाएगी। – इस योजना के अंतर्गत जो उद्यम स्थापित होंगे उन्हें पूंजीगत लागत अनुदान और ब्याज अनुदान को छोड़कर, सरकार की उद्योग संवर्धन नीति के अनुसार समय समय दी जाने वाली सुविधाएं भी मिलेंगी।
सावधानियां
     गलत या भ्रामक जानकारी देने अथवा गलत तरीके से सहायता प्राप्त करने पर हितग्राही के खिलाफ कानून के अनुसार दंड की कार्रवाई की जाएगी। हितग्राही की ओर से ऋण और ब्याज के भुगतान अथवा पुनर्भुगतान में कोताही होने की स्थिति में योजना के अंतर्गत दी गई सहायता को भू-राजस्व बकाया की तरह वसूला जाएगा और ऐसी स्थिति में उसे भविष्य में दी जाने वाली बाकी सहायता भी नहीं मिलेगी।
      कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि मध्य प्रदेश की ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना’ उन बेरोजगार युवाओं के लिए वरदान है जो नौकर बनकर नहीं बल्कि अपनी प्रतिभा और क्षमता के बल पर खुद अपना उद्यम लगाकर दूसरों को रोजगार देने वाला बनना चाहते हैं।

                                                            मो. 9752022355

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