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यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनोइस में किये गये एक शोध में यह पता चला है कि अगर व्यक्ति का निद्रा-चक्र लगातार बाधित होता रहता है, तो इसका उसके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ पर बुरा असर पड़ता है। इससे व्यक्ति में अल्जाइमर के लक्षण उभरने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

हमारे बेहतर स्वास्थ के लिए पर्याप्त और सूकून भरी नींद  कितनी जरूरी है, इस बारे में आये दिन नये-नये शोध होते रहते हैं। कुछ लोगों को बीच रात में जागने की आदत होती है, जो कि एक सामान्य प्रक्रिया है। कुछ लोग बाथरूम जाने के लिए उठते हैं, तो कुछ पानी पीने के लिए। विशेषज्ञों का मानना है कि रात भर में आठ-नौ घंटे की नींद के दौरान अमूमन तीन से चार बार अगर किसी व्यक्ति की नींद खुलती है, तो इसे सामान्य माना जाता है, लेकिन अगर किसी की नींद चार-पांच बार से ज्यादा खुलती है, तो यह उस व्यक्ति की मस्तिष्कीय कार्यप्रणाली के लिए अच्छा संकेत नहीं है।

हाल ही में यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनोइस में किये गये एक शोध में यह पता चला है कि अगर व्यक्ति का निद्रा-चक्र लगातार बाधित होता रहता है, तो इसका उसके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ पर बुरा असर पड़ता है। इससे व्यक्ति में अल्जाइमर के लक्षण उभरने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

इस शोध में 71 से लेकर 78 वर्ष की आयु के करीब 516 वयस्क लोग शामिल थे। शोध परिणाम में यह पाया गया कि वैसे लोगों में, जिन्हें श्वसन संबंधी नींद की बीमारी होती है, उनमें अल्जाइमर की बीमारी से सम्बंधित  बायोमार्कर्स नामक प्रोटीन की अधिकता पायी जाती है। इससे उनका स्लीपिंग पैटर्न प्रभावित होता है।

अल्जाइमर एसोसिएशन के अनुसार, शोध में शामिल करीब 20 फीसदी महिलाओं और 30 फीसदी पुरुषों को स्लीप एपनिया की समस्या पायी गयी, जो कि एक सामान्य श्वसन सम्बंधी बीमारी है।  शोध में यह भी पता चला कि जिन लोगों को सोते वक्त सांस लेने में परेशानी होती है, उन्हें अक्सर हाइपोनिया की समस्या से भी जूझना पड़ता है। आमतौर से प्रत्येक 10 में से 3 पुरुषों को और पांच में से एक महिला में स्लीप एपनिया की समस्या देखने को मिल जाती है।

आखिर क्यों होती है यह समस्या?

स्लीप एपनिया की स्थिति अमूमन तब होती है, जब व्यक्ति के श्वसन तंत्र का ऊपरी वायुमार्ग आंशिक अथवा पूर्ण रूप से अवरूद्ध हो जाता है। इसके बावजूद इंसान का शरीर सांस लेने की पूरी कोशिश करता है, लेकिन इस अवरोध की वजह से उसे घुटन महसूस होती है और इससे उसकी नींद लगातार बाधित होती रहती है। ज्यादातर 40-60 आयु वर्ग के लोगों को इस समस्या से जूझना पड़ता है।

इससे निपटा कैसे जाये?

यदि आपकी नींद भी रात में बार-बार टूटती है, तो आपको तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। आप अपने स्लीपिंग पैटर्न में कुछ परिवर्तन करके भी अपनी इस समस्या से काफी हद तक छुटकारा पा सकते हैं, जैसे- जल्दी और तय समय पर सोने जाना, सुबह नियत समय पर जागना, सोने की दिशा बदलना और अगर कभी आपको रात में सोते समय काफी तनाव महसूस हो, तो अपने मन की उलझनों को कागज पर लिख देना। सोने से दो घंटे पहले अल्कोहल या किसी तरह के कैफीन पदार्थ का सेवन न करें। मोबाइल फोन को करीब आधा घंटा पहले बंद करके रख दें। इन उपायों को अपनाकर भी यदि आपको अपनी समस्या में कोई कमी महसूस नहीं होती हो, तो किसी एक्सपर्ट से सलाह लें।

 

 

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