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***टी .बी.सिंह***


 उत्तर प्रदेश विधान सभा के चुनाव में भले ही अभी देर है लेकिन सूबे के सियासी दल नम्बर गेम में जा उलझे हैं। हर दल का अपना गणित है और समीकरण। कोई अपने को कमतर आंकने को तैयार नहीं। हर कोई अपने बहुमत या पूर्ण बहुमत को लेकर दावे करने लगा है। कुछ दल तो इतने उत्साहित हैं कि वे अपने विरोधियों की जमानत तक जब्त होने की बात कह कर राजनीतिक पारा उठाने की फिराक में हैं।
    देश की ४०३ सदस्यीय विधान सभा में वैसे तो बहुमत का आंकडा २०२ सीटों पर आकर ठहरता है, लेकिन दावा करने वाले दल तीन चौथाई सीटों पर जीत का आंकडा पेश करने से गुरेज नहीं कर रहे हैं।
    सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी जहां फिर सत्ता में वापसी का दावा करती दिखती है, वहीं सत्ता का स्वाद चखने को आतुर भारतीय जनता पार्टी के नव नियुक्त अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने अपनी पहली पत्रकार वार्ता में ही यह साफ कर दिया कि उनकी पार्टी ने जीत का जो लक्ष्य बनाया है वह २६५ का है। वहीं बसपा प्रमुख मायावती ने आंबेडकर जयंती के दिन सियासी घमासान में कूदते हुए यह घोषणा कर डाली कि इस बार उनकी पार्टी की सरकार बनने जा रही है। इसी के साथ उन्होंने विरोधी दलों के प्रत्याशियों की जमानत जब्त होने की बात कहने से भी संकोच नहीं किया। यही नहीं मायावती का यह भी दावा है कि इस बार उनकी सरकार बनेगी और वह भी अकेले दम पर।
     इस खींचतान में कांग्रेस यद्यपि पीछे है लेकिन इसके चुनावी रणनीतिकार प्रशांत कुमार की टीम अभी फीड बैक लेने में ही जुटी हुई है। लेकिन वहीं कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने कार्यकर्ताओं से अपनी जेब में पर्ची लिखकर रखने को कह दिया है कि २०१७ में कांग्रेस की सरकार बनेगी। वैसे कांग्रेस के चुनाव प्रबंधन की बागडोर संभालने वाले प्रशांत किशोर फिलहाल बैठकों का दौर आयोजित कर मिशन २०१७ के लिए नई रणनीति बनाने में मशगूल हैं। एक बात साफ नजर आ रही है कि कांग्रेस बाहुबली प्रत्याशियों को लेकर काफी सतर्क है। एक तरफ जहां यह संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी के द्वार बाहुबलियों के लिए बंद रहेंगे तो वही दूसरी ओर पार्टी के बाहुबली प्रत्याशियों के मुकाबले कांग्रेस ने जुझारू महिला प्रत्याशियों को मैदान में उतारने का मन बना लिया है।
    इस समय समाजवादी पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती दुबारा सत्ता में वापसी है। सपा अपनी सबसे बड़ी विरोधी पार्टी बसपा को मानती है। यही वजह है कि जब भी कोई मौका मिलता है तो सपा के शीर्ष नेता बसपा की सर्वेसर्वा मायावती को निशाने पर लिए दिखते हैं। सपा के प्रदेश प्रभारी व वरिष्ठ मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने तो यहां तक कह डाला है कि मायावती खुद तो बेईमान रही ही है साथ ही उन्होंने अपने कार्यकाल में अधिकारियों को भी बेईमान बना दिया। सपा प्रभारी ने यह भी दावा करने से गुरेज नहीं किया है कि २०१७ के चुनाव में संगठन के बल पर ३०० सींटे जीतने जा रही है। इसका आधार उन्होंने जिताऊ और टिकाऊ प्रत्याशी बताया है। वहीं मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का कहना है कि इस वक्त सपा का पूरा फोकस २०१७ में विधान सभा चुनाव जीतना है।
       मुख्यमंत्री एवं सपा के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव अभी से पूरे चुनावी मूड में नजर आने लगे हैं। वे अपनी प्रखर विरोधी बसपा की मायावती के साथ ही भाजपा की केन्द्र सरकार पर भी जम कर बरस रहे हैं। कांग्रेस को हल्के में लेते हुए उन्होंने कहा कि चुनाव के लिए कांग्रेस प्रशांत किशोर ‘पी.के.’ ढूंढ लायी है तो हमें प्रचार के लिए विपक्षी बुआ जी मिल गई हैं। बसपा प्रमुख मायावती को अखिलेश यादव इसी नाम से बुलाते हैं। मायावती पर कटाक्ष करते हुए अखिलेश ने यह भी कहा कि बुआ जी हमारी योजनाओं को अपना बता कर एक तरह से हमारा ही प्रचार कर रही हैं।
      अभी तक दो ही पार्टी बसपा और सपा ऐसी हैं जिन्होंने अपने प्रत्याशियों के नामों की घोषणा करनी शुरू कर दी है। पूर्व में दिल्ली और बिहार विधान सभाओं में पराजय के बाद भाजपा के लिए अब यूपी फतह करना सब से बड़ी चुनौती बनी हुई है। अपने चुनावी मिशन को धार देने के लिए ही भाजपा ने अपने नए प्रदेश अध्यक्ष के रूप में सांसद केशव प्रसाद मौर्य को चुना है। मौर्य भी अपनी चुनौती से परिचित है। इसीलिए उन्होंने कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाते हुए यह कहने में गुरेज नहीं किया कि उनकी मेहनत के बल पर ही २०१४ के आम चुनाव में ७३ सांसद यूपी से जीते थे। आज प्रधान मंत्री मोदी उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाना चाहते हैं, लेकिन यह तभी संभव होगा जब सपा और बसपा किनारे हों। इसीलिए भाजपा ने २६५ सीटें जीतने का लक्ष्य तय किया है। वैसे भाजपा का खेल बिगाड़ने के लिए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जदयू और राष्ट्रीय लोकदल का विलय कर अजीत सिंह के बेटे जयंत चौधरी को मुख्यमंत्री का दावेदार घोषित कर सकते हैं। नीतीश ने पीस पार्टी के अध्यक्ष डॉ. अयूब से गठबंधन के लिए बातचीत भी कर ली है और उनकी कांग्रेस से भी इस संदर्भ में बातचीत जारी है। इनका लक्ष्य ७५ सीटें जीतने का है। फिलहाल इस गठबंधन में थोड़ी रुकावट आ गई है और नीतीश कुमार के जदयू का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद अब नीतीश अपनी शर्तों पर विलय की बातचीत को अंजाम देंगे।
      सपा, बसपा, भाजपा और कांग्रेस जैसी बड़ी पार्टियों को चुनौती देने के लिए राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल के आहृ्वान पर १७ छोटे राजनीतिक दलों को साथ लेकर राजनैतिक परिवर्तन महासंघ का गठन किया गया है। यह महासंघ आगामी विधान सभा चुनाव में सभी ४०३ सीटों पर चुनाव लड़ेगा।
    इसी क्रम में आल इंडिया मजलिशे इत्तेहादुल मुसलमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद आसुद्दीन ओवैसी ने पूर्वांचल के जिलों पर अपनी नजरें गड़ा दी है।

मो. ः ९४१५०००१५१

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