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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ देशव्यापी बने, यह विचार संघ-निर्माता डॉ.हेडगेवार जी के मन में स्पष्ट था। १९२५ में संघ एक छोटा पौधा था, पर धीरे-धीरे विशाल वटवृक्ष का रूप लेता गया। पू.डॉ.साहब के जीवन काल में संघ-कार्य प्रत्येक प्रांत में ‘दीप से दीप जले दूसरा’ की तरह प्रज्वलित होता गया। इस श्रृंखला में सन १९३५-३६ में श्री वसंतराव ओक ने दिल्ली में संघ का शुभ समारम्भ किया। संघ-कार्य शीघ्र ही दिल्ली से सटे क्षेत्रों में फैलता गया। करनाल के वैद्य रतिरामजी, दिल्ली में स्वयंसेवक बने नंद किशोर जी व सुशील जी ने लाहौर के संघ-शिक्षा वर्ग में प्रशिक्षण प्राप्त कर १९३७ में शाहबाद मारकण्डा में शाखा प्रारंभ की। इस प्रकार हरियाणा प्रदेश में सर्वप्रथम शाखा प्रारंभ करने का श्रेय शाहबाद को जाता है। उधर रोहतक और हिसार तक संघ पहुंच गया।
स्वतंत्रता प्राप्ति के साथ देश का दुखांत विभाजन हुआ। इस त्रासदी में संघ हिन्दू-समाज की आशा और विश्वास का केन्द्रबिन्दु बना। सन् १९३७ से १९४७ संघ के स्वयंसेवकों के शौर्य और पुरूषार्थ का कालखंड रहा। कर्तव्यनिष्ठ स्वयंसेवक अपने स्वजातीय बंधुओं की रक्षा में सर्वदा सजग रक्षक की तरह खड़े रहे। इसी काल में संघ का कार्य शहर और उससे सटे गांवों में शीघ्र विस्तार लेता गया। अकस्मात कांग्रेस ने महात्मा गांधी जी की हत्या का मिथ्यारोप संघ पर मढ़ कर प्रतिबंध लगा दिया। हिन्दू समाज मिथ्या दुष्प्रचार में आकर के संघ-विरोधी बन गया। यह हरियाणा में संघ की उपेक्षा तथा उपहास का काल था। स्वयंसेवकों ने असत्य का प्रतिरोध सत्याग्रह के द्वारा किया।
सन् १९४९ से १९७७ तक संघ-कार्य में निरंतरता रही; परंतु विकास की गति धीमी रही। सन् १९७७ तक हरियाणा में संघ शाखाएं ९०-१०० स्थानों तक सीमित रहीं। संघ के कार्यकर्त्ता निष्ठा, धैर्य, परिश्रम से कार्य को विस्तार देने में सफल होते गए। इसी काल मंर स्वयंसेवक सेवा और शिक्षा के रूप में नए आयाम जोड़ते गए। उदाहरण स्वरूप सन् १९४७ में रोपड़ बांध की दरार को रोकना और सन १९४६ में कुरूक्षेत्र में गीता विद्यालय का शिलान्यास परम पूजनीय श्री गुरूजी द्वारा किया गया। अब अंबाला (तेपला) में वंचित समाज के मेधावी विद्यार्थियों को नि:शुल्क शिक्षा प्रदान की जाती है। जम्मू-कश्मीर तक के विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त करने तेपला आते हैं। वर्तमान में कुरूक्षेत्र का शिक्षा-केन्द्र हिन्दू शिक्षा समिति के नाम से विशाल स्वरूप ले चुका है, जिसके अंतर्गत ६४ विद्यालय संचालित हैं। कुरूक्षेत्र का गीता आवासीय विद्यालय भारत के सर्वोत्कृष्ट शिक्षा-संस्थानों में गिना जाता है। १५ प्रांतों के ४५० छात्र आवासीय विद्यालय में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
सन् १९७५ से संघ का कार्य आपातकाल के संघर्ष से प्रारम्भ हुआ। इस समय संघ और समाज अभिसरण के काल में प्रवेश कर चुका था। सन् १९८९ में डॉ.हेडगेवार जन्म-शताब्दी पर जिला, खंड स्थानों पर गोष्ठियां आयोजित हुईं। ‘नरसेवा नारायण सेवा’ का ध्येय वाक्य लेकर वंचित समाज में सेवा के प्रकल्प प्रारंभ हुए। आज २०० स्थानों में ४५० प्रकल्प सेवा बस्ती में चल रहे हैं। सन् १९७५ के आपातकाल की संघर्ष-गाथा अनूठी थी। श्रीमती इंदिरा गांधी ने सत्ता के मद में आकर संघ पर प्रतिबंध लगा दिया। संघ के प्रमुख ४९३ कार्यकर्ताओं को मीसा के अंतर्गत नजरबंद कर दिया। यह संघ की दूसरी अग्निपरीक्षा थी। हरियाणा में चौधरी बंशीलाल का एकछत्र राज्य था। उसने अपने विरोधियों को जेल में डाला और साथ में संघ कार्यकत्ताओं के साथ क्रूर अत्याचार भी किया। ऐसी स्थिति में लोकतंत्र की रक्षा के लिए स्वयंसेवकों ने सत्याग्रह किया। १२५ स्थानों से आए ११०५ संघ स्वयंसेवकों ने गिरफ्तारी दी। उन पर पुलिस ने अमानुषिक अत्याचार किया। परंतु सभी स्वयंसेवक चट्टान की तरह अड़िग रहे, सत्य के पथ को नहीं छोड़ा। जनजागरण के लिए योजनापूर्वक ‘दर्पण’ समाचार पत्र प्रकाशित किया गया। आपातकाल के पश्चात् हरियाणा में संघ-कार्य की लोकप्रियता बढ़ी और संघ कार्य ग्रामीण क्षेत्रों में विस्तार लेने लगा। सन् १९७७ के पश्चात् संघ और समाज एकरूप होते दिखाई देते हैं। संघ के स्वयंसेवक समाजिक जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में प्रवेश कर यशस्वी बने। हरियाणा के संघ नेतृत्व ने एक विराट संघ शक्ति के प्रगटीकरण की योजना बनाई। १७ सितम्बर सन् १९९५ को करनाल में हिन्दू संगम का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में पूजनीय स्वामी सत्यमित्रानन्द जी गिरी एवं सरसंघचालक श्री राजेन्द्र सिंह जी उपस्थित रहे। इसमें हिन्दू समाज की विराट संगठित शक्ति के प्रथम बार दर्शन हुए। इस कार्यक्रम के कुछ दिन पहले इन्द्रदेवता ने बाधा डाली। ऐसा आभास हुआ कि भगवान हमारी परीक्षा ले रहा है। हरियाणा को बाढ़ और वर्षा के संकट ने आ घेरा। एक ओर संघ ने बाढ़-पीड़ित समाज-बंधुओं की सेवा में समय लगाया, दूसरी ओर हिन्दू-संगम की तैयारी में जुटा रहा। इस सम्मेलन में १००० स्थानों से २४५०० गणवेशधारी स्वयंसेवकों के शारीरिक प्रदर्शन और संचलन ने दानवीर कर्ण की धरती को राष्ट्रभाव से आप्लावित कर दिया। इस समय सम्पूर्ण करनाल शहर केसरी ध्वज से सुशोभित हो रहा था। समाज से प्राप्त हुए प्रतिसाद की पुनरावृत्ति राष्ट्र-जागरण अभियान २००० में भी प्रकट होती दिखाई दी। इस राष्ट्र-जागरण के अभियान में संघ के स्वयंसेवकों ने ६७४५ गांवों तथा ५२८ बस्तियों में घर-घर सम्पर्क किया। हिन्दू समाज के सभी वर्गों ने स्वयंसेवकों की देशभक्ति, सेवाभाव का मुक्त हृदय से स्वागत किया।
२१वीं शताब्दी का प्रारंभ हरियाणा में संघशक्ति के विस्तार का गौरवमय कालखण्ड है। श्री गुरूजी जन्म शताब्दी समारोह से संघ के इतिहास मेेंे नया मोड़ आया। प्रदेश के सभी १५० खंडों में हिन्दू सम्मलेन आयोजित हुए। ४.२५ लाख से अधिक जनता की भागीदारी रही। हरियाणा के सभी मत-सम्प्रदायों के संत एक मंच पर समासीन हुए। उस समय ‘हिन्दव: सोदरा सर्वे’ की अनुभूति का भावपूर्ण दृश्य प्रत्यक्ष दिखाई दे रहा था।
राष्ट्रीय सामाजिक महत्व के विषयों में हरियाणा का योगदान अभूतपूर्व रहा। श्रीरामसेतु रक्षा के लिए ३० दिसम्बर २००७ को दिल्ली में महासम्मेलन आयोजित किया गया था। हरियाणा से १.५० लाख सदाशयी सहभागी सभा में उपस्थित हुए। दूसरे प्रांतों से आने वाले लाखों लोगों के ठहरने व भोजन की व्यवस्था रोहतक, फरीदाबाद, पानीपत के स्वयंसेवकों ने की।
सन् २००९ में पू.शंकराचार्य जी महाराज ने गौरक्षण और गौसेवा को निमित्त मान कर विश्व मंगल गौग्राम यात्रा का आह्वान किया। हरियाणा की गौभक्त जनता के सत्त्विक सहयोग से यशस्वी कार्य सम्पन्न हुए। सौभाग्य से इस यात्रा को गीता की प्राकट्यस्थली कुरूक्षेत्र से शंखनाद कर प्रारम्भ किया गया। इस यात्रा के परिणास्वरूप हरियाणा में गौधन और गौशालाओं की वृद्धि हुई है। हिसार की ‘कांबरेल’ आदर्श गौशाला का अनूठा उदाहरण है।
सन् २०१३ को सम्पूर्ण विश्व ने स्वामी विवेकानंद जी के १०५वें जन्म दिन को सार्धशती के रूप में मनाया। वर्षभर चले सभी प्रकार के आयोजनों में हरियाणा की भूमिका अग्रणी थी। १८ फरवरी २०१३ को एक ही समय देश भर में सूर्य नमस्कार कर स्वामीजी को श्रद्धांजलि दी गई। इस विराट समारोह में हरियाणा के २२०० विद्यालयों के ४.२५ लाख विद्यार्थी सहभागी बने। संघ के कार्यकर्ताओं के प्रयास से कुरूक्षेत्र के थीम पार्क में १८००० विद्यार्थियों ने सूर्य नमस्कार किया। ‘भारत जागो’ दौड़ में ७०००० कालेज छात्रों ने भाग लिया। इसके अतिरिक्त बड़ी संख्या में मातृशक्ति व घुमन्तू जाति के बंधुओं के कार्यक्रम हुए।

सद्भावना-सम्मेलन, २०१६

आरक्षण-आंदोलन की लपटों में झुलसे शोक-संतप्त बंधुओं के आहत हृदयों में सहानुभूति और सद्भावना का सुखद संचार करने के सद्देश्य से संघ ने ३ अप्रैल २०१६ को रोहतक की धरती पर भव्य सद्भावना सम्मेलन का आयोजन किया। जिसमें सभी जाति बिरादरी के एक लाख से अधिक नागरिकों ने ‘म्हारा हरियाणा- सबका हरियाणा’ की हुंकार भरी। इससे पूर्व की तैयारी के लिए १२०० ग्रामों व ४०० बस्तियों में राष्ट्र रक्षा यज्ञ का कार्यक्रम हुए जिसमें ७०००० पुरूष तथा महिलाओं की सहभागिता रही। मंच पर २०२ सन्त एवं समादरणीय अतिथि उपस्थित थे। सम्मेलन में आने वाली जनता के लिए बस्तियों से १.३० लाख भोजन-फैकेट वितरित किए गए। सम्मेलन में भाग लेने आए लोगों ने जातिगत दूरियां समाप्त कर एकजुट रहने का संकल्प किया। इसमें सभी बिरादरियों के नेतृत्व करने वाले प्रमुख लोग उपस्थित थे। दहिया खाप ने निर्णय किया कि हम सम्मेलन में खाली हाथ नहीं जाएंगे। अत: वे एक ट्राली केलों की भरकार लाए।

ग्राम विकास कार्य

सन् २०११ में रोहतक शहर से ७ किलो मीटर दूर भिवानी रोड पर भाली आनन्दपुर गांव में प्रभात शाखा लगनी प्रारम्भ हुई। इससे पूर्व सन् २००७ में गांव के युवकों ने प्रसिद्ध क्रांतिकारी चन्द्रशेखर आजाद सेवा समिति का गठन कर लिया था। शाखा के स्वयंसेवक तथा ग्रामवासियों ने मिलकर पुन: सेवा के आयाम को योजनाबद्ध करके विभिन्न प्रकल्पों के माध्यम से सेवा कार्य का श्रीगणेश किया। आज भाली आनन्दपुर आदर्श गांव की दिशा में प्रगति कर रहा है। सर्वप्रथम नवम्बर २०१२ में बाल संस्कार केन्द्र खोला गया। प्रारंभ में, छठी कक्षा के १५-२० छात्र आने लगे। अब १०० छात्रों तक संख्या पहुंच गई है। ये छात्र प्रत्येक रविवार को सांस्कृतिक कार्यक्रम, साहित्य पाठ एवं परस्पर परिचय करना तथा मंच पर खड़े होकर बोलने का आत्मविश्वास जगाने का कार्यक्रम करते रहते हैं। अब २ बाल संस्कार केन्द्र हैं। एक संगणक-केन्द्र, स्वामी दयानंद पुस्तकालय, रानी लक्ष्मीबाई सिलाई केन्द्र भी सुचारू रूप में सक्रिय है। तक्षशिला विद्या मंदिर में कक्षा तीन से बारहवीं तक २०८ छात्र शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। पच्चीस विद्यार्थी रात्रि छात्रावास में रह कर पढ़ते हैं। जैविक खेती, वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान के कार्यक्रम निरंतर चलते रहते हैं। ग्राम पंचायत द्वारा प्रदान की गई जमीन पर सभी के आर्थिक सहयोग से ‘केशव भवन’ का निर्माण किया गया है, जिसका लोकार्पण माननीय सरकार्यवाह भैयाजी जोशी ने किया। प्रत्येक वर्ष ग्राम उत्सव बड़ी संख्या में धूमधाम से मनाए जाते हैं।

संघ-कार्य के बढ़ते चरण

संघ कार्य का लक्ष्य शाखा-विस्तार है। आज हरियाणा में संघ का कार्य सर्वव्यापी और सर्वस्पर्शी बन गया है। २७-२९ मार्च २०१५ में कालेज विद्यार्थियों द्वारा आयोजित बड़ा कार्यक्रम ‘तरूणोदय शिविर’ संघ कार्य के विस्तार में मील का पत्थर सिद्ध हुआ है। इस कार्यक्रम में पूजनीय सरसंघचालक डॉ.मोहन जी भागवत का सान्निध्य मिला। शिविर में ८१९ स्थानों से कुल ४४०७ स्वयंसेवकों ने भाग लिया, जिनमें ३२८८ शिविरार्थी ३७९ शिक्षक व ७४० प्रबन्धक थे।
जहां संघ कार्य का विस्तार हुआ, वहां गुणवत्ता निर्माण करने का कार्य भी साथ-साथ होता रहा है। कार्यक्रमों के माध्यम से अनुशासन, साहस और संगठन की क्षमता का भी आशाजनक विकास होता रहा है। इस दृष्टि से हरियाणा में खेल संगम का आयोजन पहले खण्ड स्तर पर किया गया, फिर विभाग स्तर पर प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। इसमें १६ शाखाओं की भागीदारी हुई। १३८८१ स्वयंसेवकों ने खेल प्रतियोगिता में भाग लिया।
अब प्रथम बार एक हजार के आंंकड़े को पार कर १०७२ स्थानों पर १७२० शाखाएं स्थापित हो गई हैं। प.पू.बाला साहब ने कहा था कि हरियाणा और केरल दोनों राज्य छोटे हैं। केरल में संघ का कार्य अधिक प्रभावी है। हरियाणा को भी केरल का अनुकरण करके एक हजार से ज्यादा शाखाएं करनी चाहिए। आज हरियाणा के कार्यकर्त्ताओं के अनथक परिश्रम से उनके मुखारविन्द से निकले शब्दों को चरितार्थ किया है। ‘सभी समाज को लिए साथ में आगे ही बढ़ते जाना’ यह हरियाणा के स्वयंसेवकों का ध्येय मंत्र है।

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