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हरियाणा प्रांत १ नवम्बर, १९६६ को अस्तित्व में आया। तब से ही यह समग्र विकास की प्राप्ति के पथ पर निरंतर अग्रसर है। हरियाणा ने ८० के दशक में बड़ी तेजी से विकास किया। इसकी विकास दर अखिल भारतीय विकास दर दर ५.६० के मुकाबले अधिक अर्थात ६.६८ प्रतिशत वार्षिक रही। १९९० के बाद हरियाणा की विकास दर ६.७१ प्रतिशत वार्षिक हो गई, जबकि अखिल भारतीय विकास दर ६.०३ प्रतिशत रही। उल्लेखनीय है कि १९८०-८१ से १९९९-२००० के कालखण्ड में, हरियाणा प्रांत की विकास दर उच्चतम रही, जो ७.८० प्रतिशत वार्षिक थी, जबकि इसी कालखंड में राष्ट्रीय विकास दर ५.६६ प्रतिशत वार्षिक रही। २०००-०१, २००१-०२, २००२-०३, २००३-०४, २००४-०५ तथा २००५-०६ राज्य में विकास वृद्वि दर ६.८, ५.४, ५.०, ८.६, ८.४ तथा ८.५ प्रतिशत रही।

हरियाणा की स्थापना के समय १९६६ में, प्रांत में केवल १६२ बड़ी तथा मध्यम औद्योगिक इकाइयां थीं। परंतु जून, २००६ तक इनकी संख्या बढ़ कर १२९० हो गई थी। इन इकाइयों में २२० बिलियन रूपए से भी अधिक का पूंजी निवेश हो चुका था तथा इनमें २ लाख से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान किया गया था तथा इनमें १२.८०० करोड़ रूपए से अधिक की वस्तुओं का उत्पादन हो रहा था। निर्यात, जो १९६६ में केवल ४.५ करोड़ था, २००४-०५ तक बढ़ कर २०.००० करोड़ रूपए से अधिक हो चुका था। १९९१-२००१ के दौरान हरियाणा में २०६ पूर्णतया निर्यातोन्मुखी इकाइयों को स्थापित किया गया जो देश में स्थापित ऐसी इकाइयों का ५.९९ प्रतिशत था।

गुड़गांव के निकट स्थित मनेसर बहुत-सी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों का लक्ष्य बन चुका है। कुंडली तथा सोनीपत के बीच का इलाका उच्च औद्योगिकीकृत क्षेत्र के अंतर्गत आता है। कुंडली में एक बहु-कार्यात्मक संकुल का भी विकास किया गया है। इस संकुल में औद्योगिक पार्क, फूड पार्क विकसित किए गए हैं। बावल में स्थित औद्योगिक विकास केंद्र भी बहुत-सी बहुराष्ट्रीय कंपनियों का लक्ष्य बन कर उभरा है।

हरियाणा में औद्योगिक उत्पादन का संकेतक अखिल भारतीय औसत से कहीं अधिक है। इस समय हरियाणा में ७५ प्रतिशत से अधिक कारों, ६० प्रतिशत ट्रैक्टरों, ७० प्रतिशत मोटर साइकिलों तथा ५० प्रतिशत से अधिक रेफ्रिजरेटरों का उत्पादन हो रहा है। देश के कुल सैनिटरी के सामान का २५ प्रतिशत हरियाणा में उत्पादन होता है। देश की चार साइकिलों में से एक साइकल हरियाणा में बनाई जाती है। मोटर साइकिलों, स्कूटरों, मोपेड, कारें आदि के उत्पादन से जुड़ी औद्योगिक इकाइयों द्वारा अद्भुत कुशलता का प्रदर्शन किया गया है। इसी कारण औद्योगिक उत्पादन बढ़ कर दुगने से भी अधिक हो गया है।

प्रदेश में लघु उद्योगों की वृद्वि दर भी उल्लेखनीय है। १९६६ में ४५०० इकाइयों से प्रारंभ कर अब इनकी संख्या एक लाख से अधिक हो चुकी है। ये प्रति वर्ष ५००० करोड़ वस्तुओं का उत्पादन कर रही हैं तथा १० लाख लोगों को रोजगार दे रही हैं। देश के वैज्ञानिक उपकरणों के कुल निर्यात का २० प्रतिशत, देश के सुरक्षा बलों की अस्त्र-शस्त्र के बक्सों की कुल मांग का ६० प्रतिशत तथा भारतीय सेना की ऊनी कंबलों की कुल मांग का ६० प्रतिशत हरियाणा के लघु उद्योगों द्वारा पूरा किया जा रहा है। इंजीनियरिंग का सामान, रसायन, हथकरघा उत्पाद, कृषि आधारित उपकरण, वैज्ञानिक उपकरण, चमड़े के उत्पाद, ऑटोमोबाइल तथा ट्रैक्टर आदि हरियाणा से निर्यात किए जाते हैं।

साठ के दशक में हरियाणा ने ५.५ प्रतिशत वार्षिक दर की तेजी से विकास किया, जबकि अखिल भारतीय स्तर पर विकास दर ३.० प्रतिशत थी, परंतु सत्तर के दशक में, जब अखिल भारतीय विकास दर ३.६ प्रतिशत वार्षिक हो गई, तब अवश्य हरियाणा की विकास दर ५.५ प्रतिशत से ४.८ प्रतिशत पर आकर ठहर गई।

भौगोलिक दृष्टि से हरियाणा को मुख्य रूप से तीन भागों में बांटा जा सकता है। उत्तर में शिवालिक पहाड़ियों से लगता हुआ तराई का क्षेत्र, मध्य हरियाणा का विशाल मैदानी क्षेत्र तथा दक्षिणी हरियाणा का सूखा मरूस्थलीय क्षेत्र। यमुना नदी हरियाणा में से गुजरते हुए उत्तर प्रदेश की सीमा बनाते हुए दिल्ली तक पहुंचती है। इस नदी के साथ-साथ लगते हरियाणा-प्रदेश के क्षेत्र में पर्याप्त विकास हुआ है।

अंबाला जिला, पंजाब, हिमाचल व उत्तर प्रदेश की सीमाओं से लगा हुआ है। यहां सेना का एक बड़ा केंद्र है जो अंबाला छावनी के नाम से विकसित हुआ है। पिछले ५० वर्षों में वैज्ञानिक उपकरणों के उत्पादन के लिए विख्यात रहा है। अम्बाला शहर अनेक वर्षों तक मिक्सी उद्योग के लिए प्रसिद्व रहा है। यमुनानगर जिला, जो उत्तर प्रदेश की सीमा के साथ लगा हुआ है, आजकल प्लाईवुड उद्योग के केंद्र के रूप में जाना जाता है। इसी जिले का प्रमुख शहर जगाधरी बर्तन उद्योग के लिए प्रसिद्व है। यमुनानगर में एक बहुत बड़ी पेपर मिल तथा चीनी की मिल भी है। इस क्षेत्र के किसानों द्वारा पॉपलर के पेड़ों की बड़ी मात्रा में उगाई तथा पहले से बड़ी मात्रा में लकड़ी की उपलब्धता तथा गन्ने की पर्याप्त मात्रा में की जाने वाली खेती ने इन उद्योगों को एक मजबूती प्रदान की है।

करनाल और कैथल जिले में धान की खेती पर्याप्त मात्रा में होती है। उच्च कोटि का बासमती धान यहां प्रचुर मात्रा में उत्पन्न होता है। इस कारण यहां बड़ी मात्रा में धान का छिलका उतारने, पॉलिश करने तथा जिनिंग आदि के उद्योग विकसित हुए हैं। इस क्षेत्र से बड़ी मात्रा में धान का निर्यात भी किया जाता है। करनाल में राष्ट्रीय महत्त्व के शोध संस्थान स्थापित किए गए हैं जिनमें राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान, अनुवांशिकी शोध संस्थान आदि प्रमुख हैं, जिन्होंने इस क्षेत्र के विकास में अपना योगदान दिया है। करनाल में लिबर्टी जूते बनाने का बहुत बड़ा कारखाना है, जिसके जूते भारत भर में बिकते हैं।

यमुना नदी के किनारे स्थित उद्योग नगरी पानीपत में राष्ट्रीय ताप बिजली निगम की विद्युत् उत्पादन इकाइयां हैं, जो पर्याप्त मात्रा में बिजली उत्पादन करती हैं, जिससे उद्योगों को बढ़ावा मिला है। इसके साथ-साथ पानीपत में इंडियन ऑयल कारपोरेशन की एक बड़ी रिफाइनरी है, जहां से तेल का शोधन करके दूर-दूर तक पहुंचाया जाता है। राष्ट्रीय ऊर्वरक निगम द्वारा स्थापित संयंत्र के माध्यम से किसानों की ऊर्वरक संबंधी मांगों को पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।

राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या १ पर स्थित होने, राजधानी दिल्ली से निकटता तथा पानी एवं अन्य प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता ने पानीपत को एक उद्योग नगरी के रूप में विकसित होने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यहां का हथकरघा उद्योग भी पूरे देश में प्रसिद्ध है। पानीपत के घर-घर में लोग हथ-करघे के माध्यम से लोई, गरम चद्दरें, कंबल, कालीन आदि तैयार करते हैं। पानीपत का पचरंगा इन्टरनैशनल अचार भी पूरे देश में बिकता है। यहां एक बड़ी चीनी मिल भी है जो किसानों द्वारा उत्पादित गन्ने को खरीद कर उच्च कोटि की चीनी का उत्पादन करती है।

हरियाणा के पूर्वी भाग में दिल्ली के साथ लगता हुआ महाभारतकालीन नगर सोनीपत है। इस जिले के राई, कुण्डली, मुरथल, भालगढ़, गन्नौर आदि क्षेत्रों में मध्यम तथा लघु उद्योगों का पर्याप्त विकास हुआ है। इन क्षेत्रों में मुख्य रूप से स्टेनलैस स्टील उद्योग, प्रिंटिंग तथा पैकेजिंग उद्योग, साइकिल उद्योग आदि प्रसिद्ध हैं। शिक्षण संस्थाओं जैसे दीनबन्धु सर छोटूराम विज्ञान और तकनीकी विश्वविद्यालय, मुरथल, जिंदल ग्लोबल विश्वविद्यालय आदि के कारण सोनीपत जिला शिक्षा के केंद्र के रूप में उभरकर सामने आया है।
सोनीपत जिले में स्थित मुरथल में चौधरी छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की स्थापना की गई है जिसके कारण सोनीपत जिला शिक्षा के नए केंद्र के रूप में उभर कर सामने आया है।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के साथ लगता हुआ हरियाणा का प्रमुख जिला फरीदाबाद है जो औद्योगिक दृष्टि से काफी समय से अपनी पहचान बनाए हुए है। फरीदाबाद को हरियाणा की ’औद्योगिक राजधानी‘ भी कहा जाता रहा है। २०१३ में हरियाणा की कुल ११,६५५ पंजीकृत चालू फैक्ट्रियों में से २,४९९ फरीदाबाद में ही थीं। बड़ी-बड़ी कम्पनियों जैसे यामाहा मोटर प्राइवेट लिमिटेड, हावेल्स इंडिया लिमिटेड, जे.सी.बी. इंडिया लिमिटेड, इण्डियन ऑयल, लार्सन एण्ड टुब्रो, कृषि मशीनरी समूह (एस्कोर्टस), व्हर्लपूल इंडिया लिमिटेड, ए.जी.बी. ग्रुप, गुडईयर इंडिया लि., बाटा इंडिया, आईशर ट्रैक्टर्स लि., ई-टेलर, लेंसकार्ट आदि के मुख्यालय फरीदाबाद में ही स्थित हैं। वाहनों के पुर्जे बनाने वाली लगभग ५००० इकाइयां फरीदाबाद में स्थापित की गई हैं। लखानी अरमान समूह ने भी अपनी इकाइयां यहां स्थापित की हैं। पूर्व में स्थित एक ताप बिजली संयंत्र, जो अब बंद हो चुका है, के स्थान पर हरियाणा विद्युत् उत्पादन निगम लिमिटेड एक सौर ऊर्जा संयंत्र की स्थापना कर रहा है।

७० के दशक में हरियाणा के गुड़गांव में मारूति उद्योग की स्थापना हुई और इसके द्वारा बनाई गई मारूति कारें देश-विदेश में प्रसिद्ध हुईं। तब से गुड़गांव जिले का औद्योगिक विकास प्रारंभ हुआ। आज गुड़गांव में बहुत-सारी बहुराष्ट्रीय कंपनियां अपनी इकाइयां स्थापित कर चुकी हैं तथा अभी भी निवेश की प्रक्रिया जारी है। पिछले लगभग तीन दशकों में गुड़गांव देश के ही नहीं, बल्कि विश्व के औद्योगिक मानचित्र पर उभरा है। वाहन उद्योग, इलैक्ट्रॉनिक्स उद्योग, रियल एस्टेट, सॉफ्वेयर, सेवाएं, कॉल सेंटर (बी.पी.ओ. उद्योग) के साथ-साथ नए-नए आयाम इसमें जुड़ते जा रहे हैं। गुड़गांव में esa Fortune ५०० कंपनियों में से २५० कम्पनियां कार्यरत हैं। अब यह सहस्राब्दि नगर (Millenium City)के रूप में विख्यात हो चुका है। बहुत-सी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों, जिनमें कोका-कोला, पैप्सी, बी.एम.डब्ल्यू, एजिलैंट टैक्नोलॉजीज् आदि, ने गुड़गांव में अपने मुख्यालय स्थापित किए हैं। गुड़गांव में २६ बड़े-बड़े मॉल हैं, जिसके कारण यहां रिटेल उद्योग भी बढ़ा है। इस समय गुड़गांव की प्रति व्यक्ति आय भारत में तीसरे स्थान पर है। यहां गगनचुम्बी इमारतों का निर्माण बड़ी तेजी से हुआ है। १११० आवासीय आकाश को छूने वाली इमारतें आजकल गुड़गांव में हैं। आज यह नगर रेल, सड़क तथा वायु मार्गों से दुनिया के सभी हिस्सों से जुड़ चुका है। फोर्टिस अस्पताल, मेदांत अस्पताल, कोलम्बिया एशिया अस्पताल जैसे अस्पतालों के कारण गुड़गांव में इलाज कराने हेतु दुनियाभर से लोग आते हैं जिसने चिकित्सा पर्यटन उद्योग को भी तेजी से बढ़ावा दिया है।

हिसार, हरियाणा प्रांत के हिसार जिले का प्रशासनिक मुख्यालय है। यह राजधानी दिल्ली से १६४ कि.मी. पश्चिम में राष्ट्रीय राजमार्ग क्र. १० तथा राष्ट्रीय राजमार्ग क्र. ६५ पर पड़ता है। यह भारत का सब से बड़ा जस्ती लोहा उत्पादक नगर है। इसलिए इसे इस्पात का शहर के नाम से भी जाना जाता है। अन्य उद्योगों में कपास की ओटाई, हथकरघा बुनाई और कृषि यंत्रों व सिलाई मशीनों के निर्माण से बने उद्योग भी यहां पाए जाते हैं। कपास, अनाज और तेल के बीजों का यहां बड़ा बाजार है, जिसके लिए यह प्रसिद्ध है।

हिसार शहर में हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, लाला लाजपत राय पशुपालन महाविद्यालय, गुरू जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, एच.एस.बी. प्रबंधन महाविद्यालय, कृषि इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय आदि प्रमुख शिक्षण संस्थान भी हैं। पर्यटन की दृष्टि से भी हिसार एक अच्छा केंद्र बनता जा रहा है। हिसार के साथ-साथ इससे २० किलोमीटर दूरी पर स्थित अग्रोहा धाम भी एक अच्छे पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित हुआ है। उद्योगपति तथा राजनीतिज्ञ नवीन जिंदल, सुभाष चंद्रा तथा अरविंद केजरीवाल हिसार जिले के ही मूल निवासी हैं।

रेवाड़ी शहर मुख्य रूप से कांसे के बरतन बनाने के परंपरागत व्यवसाय के लिए प्रसिद्ध है। रेवाड़ी के मुख्य बाजारों में कांसे के बर्तनों को बनाने तथा उन पर कलात्मक कार्य करने की दुकाने हैं। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद की तरह यह भी कांस्य का गढ़ है। रेवाड़ी जिले में स्थित बावल औद्योगिक विकास के एक बड़े केंद्र के रूप में विकसित हुआ है। बहुत सारी बहुराष्ट्रीय कम्पनियां हैं, जिनमें हैको ग्रुप, मुशासी आटो पाटर्स, पास्को, युओथर्न हेमा, फीहिन, कपारो मारूति, हार्ले डेविडसन तथा अर्हेस्टी इंडिया प्रमुख हैं। इनके साथ-साथ भारतीय कम्पनियां जैसे-औमैक्स, रीको,एन.के.मिंडा ग्रुप, रूविको इन्टरनैशनल, टैनेको ऑटोमोटिव इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, कांटीनैंटल इक्विपमैंट्स इंडिया तथा मल्टीकलर स्टील ने भी अपनी इकाइयां यहां स्थापित की हैं। स्वराज पाल, जो कपारो ग्रुप के मालिक हैं, ने मार्च २०१० में यहां ११५ मिलियन डॉलर की लागत से गैस आधारित विद्युत ऊर्जा प्लांट स्थापित करने के लिए वारसिला कम्पनी के साथ संयुक्त उद्यम स्थापित करने की घोषणा की, जिसमें ६० मेगावाट बिजली तैयार होगी।

रेवाड़ी जिले में ही स्थित धारूहेड़ा, जो राष्ट्रीय राजमार्ग क्र. ८ पर गुड़गांव के निकट स्थित है, औद्योगिक विकास का एक और नमूना है। राष्ट्रीय राजमार्ग क्र. ८ के दोनों ओर बसे धारूहेड़ा में बड़े-बड़े औद्योगिक संयंत्र हैं जिनमें हीरो होंडा मोटर्स लि. तथा डेल्फी आटोमोटिव सिस्टम्स प्रा. लि. प्रमुख हैं। धारूहेड़ा में भारत के सबसे बड़े डेयरी प्लांट अमूल की स्थापना की गई है तथा कार्ल्सबर्ग की बीयर की फैक्ट्री भी यहां है। इनके साथ-साथ लूमैक्स उद्योग लि., धारूहेड़ा फार्मास्यूटिकल्स प्रा. लि., रीको ऑटो एण्ड सहगल पेपर मिल्स, ईस्ट इंडिया सिथैंटिक्स तथा इंडियन ऑयल कारपोरेशन भी यहां है।

एक अध्ययन के अनुसार भारत के विभिन्न राज्यों का तीन विभिन्न श्रेणियों में वर्गीकरण किया गया है। निवेश वातावरण परिदृश्य के आधार पर उत्पादन के क्षेत्र में सकल तत्त्व उत्पादकताTotal Factor Productivity का अनुमान लगाते हुए यह वर्गीकरण किया गया है। ये सकल तत्व उत्पादकता की गणना मूल्य-संवर्धित कार्य तथा सकल उत्पादन कार्य के आधार पर की गई। इस अध्ययन में हरियाणा को गुजरात, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और पंजाब के साथ उत्तम निवेश वातावरण श्रेणी मेें रखा गया है। यह संतोषजनक है १९८०-८१ से १९९७-२००० तक हरियाणा अधिकतर दूसरे स्थान पर रहा है। यह इस प्रदेश के उत्पादन क्षेत्र में पाई जाने वाली कार्यकुशलता की तस्वीर को स्पष्ट रूप से सामने लेकर आता है।

हरियाणा राज्य बहुराष्ट्रीय कम्पनियों, बड़े व्यापारिक घरानों, विदेशी निवेशकों, अनिवासी भारतीयों तथा लघु-स्तरीय उद्यमियों से पर्याप्त निवेश आकर्षित कर पाने में सफल रहा है। यह एक निवेशक मित्र राज्य के रूप में उभरा है तथा कुशल, प्रेरित तथा अपेक्षाकृत सस्ती मानवश्रमशक्ति प्रदान करता है। ढांचागत क्षेत्र का विकास तथा सद्भावपूर्ण औघोगिक सम्बंध इसकी विशेशता है। विदेशी तकनीकी वितीय क्षेत्र में अभी प्रदेश में १००० से भी अधिक संयुक्त उपक्रम कार्य कर रहे हैं।

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