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हरियाणा के लिए विख्यात उक्ति है, देसां में देस हरियाणा, जहां दूध दही का खाणा। भारत के उत्तर पश्चिम दिशा में स्थित यह राज्य संघर्षों के लंबे दौर से गुजर कर स्थापित हुआ। पंजाब, हिमाचल, उत्तरांचल, दिल्ली व राजस्थान की सीमाओं को छूता हुआ यह राज्य अपने आप में विविधताएं लिए हुए हैं।
कुल ३६ बिरादरी हरियाणा में बसी हैं। जिनमें से कितने ही वीर योद्धाओं ने देश रक्षा हेतु अपने प्राण उत्सर्ग किए हैं। दूसरी ओर यहां की महिलाओं ने भी अपनी पहचान बनाई है। हरियाणा की महिलाओं का परिचय इन पंक्तियों में दिया जा सकता है-

मां की ममता, नेह बहिन का और पत्नी का धीर हूं,
मेरा परिचय इतना कि मैं हरियाणा की तस्वीर हूं,
युद्ध का साहस, शिव की शक्ति और काली रणवीर हूं,
मेरा परिचय इतना कि मैं हरियाणा की तस्वीर हूं॥

खेतों में ट्रैक्टर चला कर, अपना परिवार पालने वाली, सिर पर पानी के भरे घड़े लाती हुई, खेतों में टमाटर, भिंडी तोड़ती हुई, गाय, भैंस का दूध दुहती हुई, मज़दूरी करती हुई हरियाणा की ग्रामीण महिला, देश की अर्थव्यवस्था सुदृढ़ करने में लगी है। कला कौशल में भी गांव की महिला पीछे नहीं है। कपड़ों की सिलाई, कढ़ाई, बुनाई, दरी की बुनाई में भी हरियाणा की महिलाएं पारंगत हैं। यहां का तैयार सामान विदेशों में निर्यात किया जाता है। इससे देश में विदेशी मुद्रा आती है। इसके अलावा खाने का सामान, जैसे पापड़, वड़ी, मिर्च मसाले, अचार तथा मुरब्बा बना कर बाजार व परिवारों में बेच कर, आर्थिक सुदृढ़ता लाने में हरियाणा की महिला पुरुष की सहयोगी हो रही है।

हरियाणा की शहरी महिलाओं में भी सफल डॉक्टर, इंजीनियर, कॉर्पोरेट, एडवोकेट, न्यायाधीश, पुलिस अधिकारी हुई हैं। विश्व पटल पर भारत का नाम चमकाने वाली अंतरिक्ष परी कल्पना चावला का नाम कौन भुला सकता है? करनाल में जन्मी व शिक्षित, सपनों के पंख लगा कर अपनी मंजिल तक पहुंचने वाली कल्पना ने हरियाणा का परचम लहराया। आधुनिक हरियाणा की महिलाओं ने विविध क्षेत्रों में अपने रिकार्ड बनाए हैं। इससे पहले कि मैं इन सफल प्रतिभाओं के नाम लूं, यह जानना आवश्यक है कि कितनी त्रासदी से हरियाणा का महिला समाज गुजर कर आया है। तभी हम इनके कठिन परिश्रम की गरिमा समझ पाएंगे।

सन १९६६ से पूर्व हरियाणा राज्य का अस्तित्व नहीं था, यह पंजाब में ही समाहित था। पंजाब को बार-बार मुगल आक्रांताओंं का सामना करना पड़ा। तब वर्तमान हरियाणा के राज्य भी अच्छे समृद्ध थे। सन १००९ में महमूद गजनवी की नजर थानेसर (कुरुक्षेत्र) की समृद्धि पर पड़ी़। इस पर आक्रमण किया, तथा धन लूट कर ले गया। इतना ही नहीं, उसके सैनिकों ने यहां की महिलाओं से अभद्र व्यवहार किया, उन्हें अपमानित किया। बाद में मोहम्मद गौरी ने कुरुक्षेत्र से आगे बढ़ कर तरावड़ी (करनाल) पर हमला किया, परन्तु पृथ्वीराज चौहान से हार कर वापस चला गया। परन्तु एक ही साल बाद ११९२ में फिर से और अधिक मजबूती से तरावड़ी पर आक्रमण कर, पृथ्वीराज चौहान को बंदी बना कर ले गया। पानीपत की तीन लड़ाइयों में मुगलों ने अपना साम्राज्य स्थापित किया। पानीपत के राजकुमार हुमायूं ने, तथा अलाउद्दीन सिकन्दर शाह ने दिल्ली को विजित किया। दिल्ली तक पहुंचने के लिए मुगलों ने हरियाणा को दिल्ली से सड़क मार्ग से जोड़ दिया। इन सब युद्धों के परिणामस्वरूप हरियाणा के महिला समाज को बहुत अपमानित होना पड़ा। परिणामतः हरियाणा की महिलाओं ने अपने को मुगल आतताइयों से बचाने के लिए, सती प्रथा, घूंघट प्रथा, बालविवाह को अपना लिया। घर के अंदर ही अंधेरों में रहने से बीमार रहने लगीं। सत्रहवीं शताब्दी सिख गुरुओं की मुगलों के विरोध में युद्ध व बलिदान की शताब्दी रही। उन्नीसवीं शताब्दी में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम रानी लक्ष्मीबाई के नेतृत्व में हुआ। पूर्ण देश में स्वतंत्र होने की भावना जगी। कई समाज सुधारक हुए। सभी ने महिलाओं में स्वाभिमान जगाने हेतु प्रबोधन देने शुरू किए। स्वामी विवेकानंद जी का, फिर स्वामी दयानंद सरस्वती जी का हरियाणा में प्रवास रहा। दोनों ने ही स्त्री शिक्षा पर बल दिया, तथा सती प्रथा, घूंघट प्रथा, बाल विवाह आदि कुरीतियों को समाप्त करने के लिए जोर दिया। स्वामी दयानंद जी ने आर्यसमाज की स्थापना की। हरियाणा में इसका प्रभाव आज भी देखने को मिलता है।

हरियाणा की महिलाओं में जागृति आ रही थी। देश की स्वतंत्रता के लिए वे घरों से बाहर निकलने लगीं। लेकिन इसी बीच एक बार फिर युद्ध विभीषिका १९१४ में प्रथम विश्व युद्ध के रूप में हुई। हरियाणा की बहुत-सी शक्ति इसमें लगी। केवल करनाल जिले से ही ६५५३ सैनिकों की भर्ती हुई व १,३०, ९६९ रुपये युद्ध फंड में यहां से दिए गए।

स्वाधीनता आंदोलन में, जो गांधीजी के नेतृत्व में चल रहा था, हरियाणा की महिलाओं ने भी बढ़-चढ़ कर भाग लिया। इनमें से रोहतक से श्रीमती कस्तूरी देवी, श्रीमती धंपा जी व श्रीमती चित्रा जी के नाम जानकारी में आए हैं। १९३० में ढाणा हांसी में चरखा दंगल हुआ जिसमें हरियाणा की महिलाओं ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। सम्पूर्ण देश में विभिन्न गतिविधियां चल रहीं थीं। पंजाब के जलियांवाला कांड ने देश के युवाओं में अंग्रेज सरकार के प्रति विद्रोह प्रज्ज्वलित कर दिया। स्धान-स्थान पर महिलाएं विदेशी कपड़ों की होली जलाने लगीं। कुछ नए राष्ट्र प्रेमी संगठनों की स्थापना हुई। सन १९२५ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सबसे बड़ा अखिल भारतीय संगठन बना। सुभाषचंद्र बोस ने आज़ाद हिन्द फौज बनाई। सन १९३६ में एकमात्र अखिल भारतीय महिला संगठन की स्थापना हुई, जिसका नाम राष्ट्र सेविका समिति रखा गया। चन्द्रशेखर आजाद के नेतृत्व में भगतसिंह, राजगुरु, सुखदेव, भगवतीचरण शर्मा आदि का क्रांतिकारी संगठन बना। सभी संगठनों के सामूहिक प्रयास से अंततः वह दिन आया जब देश की स्वतंत्रता की घोषणा हुई, परंतु देश के विभाजन की त्रासदी के साथ। इस विभाजन के परिणामस्वरूप कितने ही परिवार विस्थापित हुए। हिंदू महिलाओं को अपमानित होना पड़ा। पाकिस्तान से आए ६,६६,३७५ विस्थापितों को हरियाणा के विभिन्न जिलों में पुनर्वासित किया गया। सब से अधिक करनाल जिले में कैम्प लगे। विस्थापित महिलाएं अपने परिवारों में वापस नहीं जाना चाहती थीं, क्योंकि उन्हें भय धा कि उन्हें उनके घर वाले स्वीकार नहीं करेंगे। गांधी जी व नेहरू जी को समाचारपत्रों के माध्यम से अपील करनी पड़ी कि पाकिस्तान से आईं महिलाओं को उनके परिवार वाले ले जाये व घर पर इज्जत से उन्हें रखें। हरियाणा की महिलाओं ने समाज सेवा का बीड़ा उठाया। इन महिलाओं में एक नाम है रोहतक से श्रीमती मामकौर का, जिन्होंने प्रथम अपना घूंघट हटाया फिर बाकी महिलाओं से घूंघट हटाने के लिए अपील की। इस तरह अन्य महिलाओं के व सामाजिक संगठनों के प्रयास से हरियाणा की महिलाओं में आत्मविश्वास जागा। वे उच्च शिक्षा लेने लगीं। राज्य सरकार ने महिला विद्यालयों की संख्या में वृद्धि की। महिला महाविद्यालय बनाए। सामाजिक संस्थाओं, जैसे कि आर्यसमाज, सनातन धर्म सभा, डी ए वी, वैश्य समाज आदि ने महिला शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए।

हरियाणा की महिलाओं ने विविध क्षेत्रों में विशिष्ट उपलब्धियां प्राप्त की हैं। लेखिका के रूप में अनुराधा बेनीवाल, सोना चौधरी, अरुणा आसिफ अली ने विशेष पहचान बनाई है। जींद की एक सरकारी स्कूल की अध्यापिका ने श्रीमद् भागवत गीता के श्लोकों का हरियाणवी भाषा में अनुवाद किया है।
कला के क्षेत्र में, भारताय फिल्मों की विख्यात अभिनेत्रियां जुही चावला, व परिणीति चोपड़ा हरियाणा के अम्बाला शहर से हैं। हरियाणवी फिल्मों की अभिनेत्री ऊषा शर्मा ने अपनी पहचान बनाई है। हरियाणा की मल्लिका शेरावत ने फिल्मों में तथा दूरदर्शन पर भी विशेष स्थान बनाया हुआ है।

विभिन्न खेलों में हरियाणा की महिलाओं का परिचय, हाकी राष्ट्रीय टीम में जस्जीत कौर हांडा, ममता खरब रोहतक से, प्रीतम रानी सिवाच गुड़गांव से, सीता गोसाईं, सुमनबाला शाहबाद से, सविता पूनिया सिरसा से हैं। कुश्ती में गीता फोगाट भिवानी से, सुमन कुण्डु जींद से ने विशिष्ट स्थान बनाया है। डिस्कस थ्रो में कृष्णा पूनिया ने कॉमनवेल्थ खेलों में स्वर्ण पदक जीता है। संतोष यादव रेवाड़ी से, ने एक ही वर्ष में दो बार माऊंट एवरेस्ट पर चढ़ कर रिकॉर्ड बनाया है। बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल ने ओलम्पिक जीता है। इस वर्ष की आई.ए. एस. टॉपर शीना अग्रवाल भी यमुनानगर हरियाणा से ही है। जूड़ो कराटे की कैथल महिला टीम ने कई प्रतियोगिताएं जीतीं हैं।

हरियाणा ने कई सफल राजनीतिज्ञ महिलाएं भी दी हैं। विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज अम्बाला की हैं। हरियाणा राज्य की कैबिनेट में कविता जैन हैं। अन्य में कुमारी शैलजा, किरण चौधरी, कमला बेनीवाल हैं। हरियाणा की कुछ प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता बहनों के नाम हैं श्रीमती चन्द्रकान्ता जी, डॉक्टर ममता जी करनाल से, श्रीमती कमलेश जी अम्बाला से, एडवोकेट कुमुद बंसल सिरसा से, डॉक्टर विजय अग्रवाल हिसार से, डॉक्टर अंजलि जैन रोहतक से और सुश्री तारा जी सोनीपत से। इस तरह हरियाणा की महिलाओं ने देश में तथा विदेशों में भी अपनी एक अलग पहचान बनाई है।

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