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पेट्रोलियम मंत्रालय की दो साल की उपलब्धियां संक्षिप्त में बताएं?

देश के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदीजी के नेतृत्व में हमने जब पेट्रोलियम मंत्रालय का कामकाज प्रारंभ किया तब विरासत में हमें बहुत सारी चुनौतियां मिली थीं। देश की आवश्यकता के अनुरूप ऊर्जा की आपूर्ति करना, पुराने विवादों में न उलझते हुए नए रास्ते निकालना, पेट्रोलियम मंत्रालय को सामान्य जनों के प्रति उत्तरदायी बनाना। गरीबों के कल्याण के लिए इस विभाग की उपयोगिता कायम करना इस प्रकार की चुनौतियां हमारे सामने थीं।
विगत दो सालों में हमने कई उपलब्धियां अर्जित कीं। नरेंद्र मोदी जी की दूरदृष्टि, कुशल नेतृत्व एवं संवेदनशीलता के कारण हम पेट्रोलियम मंत्रालय में सकारात्मक बदलाव ला सके हैं। हमारा पहला कामयाब कदम है देश के १५ करोड़ एलपीजी उपभोक्ताओं की सब्सिडी उनकेबैंक खाते में पहुंचाना। मा. प्रधान मंत्री के निवेदन पर १ करोड़ से ज्यादा लोगों ने अपनी एलपीजी की सब्सिडी छोड़ देना। आनेवाले तीन सालों में ५ करोड़ गरीब लोगों के घर तक एलपीजी कनेक्शन पहुंचाने का लक्ष्य हमने रखा है। आने वाले समय में देश की तेल की आवश्यकताओं को पूरा करने के मार्ग से मंत्रालय को समर्थ बनाना इस विषय के लिए लांग टर्म स्ट्रेटेजी हमने तय की है, ताकि देश में ऊर्जा संरक्षण, उत्पादन बढ़े।

Give it up योजना में लोगों के उत्साह का क्या कारण है?

व्यक्तिगत रूप से मुझे भी आश्चर्य हो रहा है। जब मा. प्रधान मंत्री ने देश को आवाहन किया था कि जो अपने घर में चूल्हा जला सकते हैं वे एलपीजी सब्सिडी छोड़ दें। प्रधान मंत्रीजी का एक विश्वास था कि ‘‘शासन चलाते समय नागरिकों को साथ लेना चाहिए’’। उसी के आधार पर उन्होंने अपील की तथा आज एक साल के अंदर १ करोड़ से ज्यादा लोगों ने सब्सिडी स्वेच्छा से छोड़ दी है। यह अभी जन आंदोलन का रूप ले रहा है। आने वाले समय में यह संख्या और बढ़ जाएगी। सब्सिडी को लेकर समाज में दो राय है। अच्छी भी है और बुरी भी। प्रधान मंत्रीजी ने केवल सब्सिडी का नहीं अपितु जो समर्थ हैं उन्हें एक आवाहन किया और उन्हें अच्छा सहयोग मिला।

ऐसा क्यों कहा जा रहा है कि धर्मेंद्र प्रधान ने गरीबों से इस मंत्रालय को जोड़ा है?

दो वर्ष पहले देश की जनता ने एक महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक निर्णय लिया था, जो है देश में नरेंद्र मोदी का शासन लाना। सेंट्रल हॉल में हुए पहले भाषण में मा.प्रधान मंत्री ने कहा था, ‘‘यह सरकार देश के गरीबों के प्रति, महिलाओं के प्रति समर्पित है। यह हमारी सरकार का मूलमंत्र है। इस भावना को आगे बढ़ाते हुए सारे विभाग कार्य कर रहे हैं। उसी में एक विभाग है पेट्रोलियम मंत्रालय।
उज्ज्वला योजना को कार्यान्वित करते समय हमारे मन में देश की गरीब तबके की महिलाओं का विचार था, ग्रामीण क्षेत्र में चूल्हे पर खाना बनाने वाली महिलाओं का दर्द हमारी नजर के सामने था। भारत में ५ करोड़ महिलाओं की जान घरेलू प्रदूषण के कारण चली जाती है। यह प्रति वर्ष की संख्या है। एक घंटे का घरेलू धुआं ४०० सिगरेट के बराबर का प्रदूषण महिलाओं को देता है। महिलाओं के कष्ट समझने के कारण, संवेदनशील सरकार होने के कारण उज्ज्वला योजना का निर्माण हुआ।

प्रधान मंत्रीजी ने आने वाले ३ साल में ५ करोड़ महिलाओं को एलपीजी कनेक्शन देने का भरोसा दिया है। इस वादे को पूरा करना चुनौती भरा काम है। उन ५ करोड़ महिलाओं का चयन किस मापदंड पर होगा?

हां! यह काम चुनौती भरा है, यह हम भी मानते हैं। राज्य सरकार एवं केंद्र सरकार ने मिलकर एक ssc list बनाई है, जिसमें गरीबी रेखा के नीचे के लोग हैं। उसी सूची को हम मानक मानेंगे। उस सूची में जिनका नाम है वे एलपीजी के लिए आवेदन कर सकते हैं। उनके आधार कार्ड, बैंक अकाउंट को परखा जाएगा। साथ ही उनके पास इसके पहले कोई गैस कनेक्शन है या नहीं इस बात की भी जांच की जाएगी। इस जांच के बाद ही लोग एलपीजी कनेक्शन के लाभार्थी बनेंगे।

पर्यावरण संतुलन एवं प्रदूषण मुक्त भारत के अभियान में पेट्रोलियम मंत्रालय का योगदान किस प्रकार होगा?

अनेक ग्रामीण महिलाएं चूल्हा जलाने के लिए जंगल जाकर लकड़ी काटती हैं। जिससे पर्यावरण पर असर होता है। हमारी उज्ज्वला योजना से पर्यावरण की रक्षा होगी। हमने बीएस४, बीएस५,और बीएस६ की योजना क्रमानुसार चलाने का संकल्प किया है। बीएस अत्यंत शुद्ध तेल होगा जिसमें प्रदूषण की मात्रा न के बराबर होगी। सीएनजी, पीएनजी को हमारे मंत्रालय ने प्रधानता दी है। शहर में पाइप के माध्यम से घरेलू स्वच्छ गैस की आपूर्ति होगी। देश के सभी प्रमुख शहरों में इस उपक्रम की कार्यवाही प्रारंभ हो चुकी है। घरेलू ईंधन अब तक ३० लाख घरों तक पहुंचा है। आने वाले समय में बड़े शहरों के साथ छोटे शहरों में भी यह सुविधा मुहैया होगी। इस सुविधा के कारण पर्यावरण को न्यूनतम हानि होगी। आने वाले तीन सालों में हमने १ करोड़ घरों तक पहुंचने का लक्ष्य रखाहै।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें तय होती हैं। इस बात का लाभ भारत को मिला है पर विपक्ष का कहना है कि जितना लाभ मिलना चाहिए उतना नहीं मिला है। इसमें कितना तथ्य है?

जुलाई २०१४ में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम घटे हैं। पिछले डेढ़ साल में जो बचत हुई है उसे हमने ५० प्रतिशत ग्राहकों को लाभ पहुंचाया। इस कारण आज मुद्रा स्फीति नियंत्रन में है। ५० प्रतिशत हमने बचाकर संचय करके रखा। उसमें से ४२ प्रतिशत राज्यों को पहुंचाया। और शेष बचत जो है उसे अच्छी सड़कों, किसान की सिंचाई, फसल बीमा, उज्ज्वला योजना जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं में लगा दिया। सामान्य लोगों के जीवन में परिवर्तन आए और वह सुख-सपंन्न हो, उनका बुनियादी ढांचा मजबूत हो इस बात पर हमने खर्च किया है।

आपके मंत्रालय के माध्यम से भारत को ईरान, तुर्की या अन्य विदेशों से पाइप लाइन से जोड़ने की परियोजना प्रस्तावित थी। उस परियोजना की आज स्थिति क्या है?

ज्यादातर तेल हम खाड़ी देशों से लेते हैं। इन सभी देशों से अच्छे सम्बंध बढ़ रहे हैं। इसका प्रमुख कारण है मा. नरेद्र मोदीजी के प्रति वहां के नेतृत्व का भरोसा। आने वाले दिनों में सभी खाड़ी देशों से हमारे सम्बंध बढ़ेंगे। इस कारण हमें अच्छी दर में तेल मिलना प्रारंभ होगा। जिससे भारत की बहुत सारी बचत भी होगी। इसे देश की बुनियादी सुविधाओं के विकास में उपयोग में लाया जा सकता है। हमारी एनर्जी सिक्यूरिटी एक नई दिशा की ओर जा रही है।

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