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देश भर सडकों का संजाल तेजी से विकसित करने, जल परिवहन को सुनिश्चित करने तथा बंदरगाहों के विकास की जो केन्द्रीय सडक परिवहन, राजर्ग व जहाजरानी ने प्रस्तावित की है, उससे देश ‘ विकास के एक नए ङ्मुग का सूत्रपात होगा। ङ्मही सुशासन का पैना भी है।

‘ श्री नितिन गडकरी से इस विषङ्म हुई बातचीत प्रस्तुत हैं-

आपकी दृष्टि में सुशासन की व्याख्या क्या है?

सुशासन का मतलब होता है, जनता की समस्याओं का निदान करना। सरकार शासक नहीं सेवक होती है। समाज के साथ मिलकर काम करने की पद्धति से सुशासन आता है। पिछले दो साल सरकार की तरफ से जनहित को ध्यान में रखते हुए काम किया गया है। जनधन योजना, महिलाओं को मुफ्त एसपीजी गैस कनेक्शन, कौशल विकास, सुरक्षा बीमा योजना, फसल बीमा योजना, ग्राम सिंचाई योजना, दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना, श्रमेव जयते योजना जैसी कई सारी योजनाएं हैं, जो सामाजिक बदलाव लाने में मील का पत्थर साबित होंगी।

इन दो सालों में पहले की आपेक्षा सड़क मार्गों का कितना विकास हुआ है?

केन्द्र में जब हमारी सरकार आई तब देश में सड़क बनाने की गति ३ किमी प्रति दिन थी। आज हम २० किमी प्रति दिन के हिसाब से सड़कों का निर्माण कर रहे हैं। हमने १८ हजार किमी सड़क निर्माण का काम किया है। हमने २ लाख करोड़ के काम आवंटित किए हैं। हमारा लक्ष्य राष्ट्रीय राजमार्गों को डेढ़ लाख किमी लम्बा बनाने का है। इन दो सालों में आठ सौ परियोजनाएं शुरू की गई हैं। कई ऐसी परियोजनाएं बनाई गई हैं, जिससे आने वाले दो साल में देश का सड़क परिवहन सब से बेहतर होगा। कई जगह एक्सप्रेस-वे, आठ लेन के हाइवे बनाए जा रहे हैं। सड़क दुर्घटना रोकने के उपाय किए गए हैं। हाइवे में चलने वाले लोगों की सुरक्षा के साथ उनकी सुविधा बढ़ाने का काम भी किया जा रहा है। इसके लिए हाइवे में प्रत्येक ५० किमी पर राजमार्ग विलेज बनाया जा रहा है। जहां एटीएम, वाई-फाई, विश्राम गृह, रेस्त्रां के अलावा हेलीपैड भी बनाया जाएगा। टोल में फास्टट्रैक, हाइवे एडवाइजरी सिस्टम आदि बहुत कुछ किया गया है और बहुत कुछ किया जा रहा है।

राजमार्ग विलेज की संकल्पना क्या है?

राष्ट्रीय राजमार्ग बनाने के साथ हम यह भी सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उस रास्ते पर चलने वाले लोगों को किसी तरह की दिक्कत न हो। इसके लिए राष्ट्रीय राजमार्ग में १२ सौ रोड साइड एमीनिटीज बनाने की योजना है। इसका नाम ‘राजमार्ग विलेज’ रखा गया है। वहां लोगों को जरूरत के हिसाब से सुविधा मिलेगी। खानपान के लिए रेस्टोरेंट, लोगों की रूचि वाले सामान के साथ उस गांव का विशेष व्यंजन भी मिलेगा। इलाज के लिए चिकित्सालय, संवेदनशील स्थिति से निपटने के लिए हेलीपैड सुविधा, पेट्रोल पंप, पार्किंग, सुन्दर पार्क, लैंड स्क्रेपिंग के अलावा एक छोटा सा बाजार होगा। जहां हैंडलूम, हैंड्रीक्राफ्ट की दुकानें होंगी। उस विलेज में गांव की सांस्कृतिक झलक दिखाई देगी। यह सारा काम वहां के ग्रामीणों को दिया जाएगा। इसमें ६० जगहों का टेंडर निकल चुका है। यह सारा काम पीपीपी मॉडल पर किया जा रहा है।

चारधाम परियोजना को २०१८ तक बनाने का लक्ष्य क्या पूरा हो पाएगा?

हम वहां ऐसी सड़क बनाने जा रहे हैं, जिससे लोगों को किसी भी मौसम में दिक्कत नहीं हो। इसके लिए १२ हजार करोड़ रूपए खर्च करके ग्यारह सौ किमी की सड़क बनाने की योजना है। जिससे हर मौसम में गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ लोग जा सकेंगे। किसी भी तरह की प्राकृतिक आपदा पर भी सड़क मार्ग बंद नहीं होगा। इसमें छह सौ करोड़ के वर्क आर्डर दिए जा चुके हैं। काम भी शुरू हो गया है। हमारी कोशिश दो साल में इस परियोजना को पूरा करने की है। मैं अभी दस दिन पहले साइट विजिट पर गया था।

आप अक्सर अंतरराष्ट्रीय सड़क मार्ग की बात करते हैं। क्या बांग्लादेश, थाईलैंड तक सड़क मार्ग बन पाएगा?

क्यों नहीं बनेगा? हमने बीबीआईएम परियोजना बनाई है। इसमें बांग्लादेश, भारत, नेपाल और भूटान के लिए हम तीस हजार करोड़ की सड़कें बना रहे हैं। काठमांडू-लखनऊ बस हमने शुरू की है। बांग्लादेश से बस चलने वाली है। इससे अगरतला से कोलकता आना आसान हो जाएगा। अभी १८ घंटे लगते हैं। बाद में छह घंटे में पहुंचा जा सकेगा। इन सड़कों के बनने से सभी को फायदा है। इसका भी काम शुरू हो गया है। थाईलैंड के साथ चर्चा हो रही है। बांग्लादेश के साथ एक और एग्रीमेंट किया गया है। जिसमें ब्रह्मपुत्रा से माल भेजा जा सकेगा। फरक्का पावर प्रोजेक्ट भी बांग्लादेश में जा रहा है। साहिबगंज में मल्टीपल हब हम बना रहे हैं। वहां से सीधे माल बांग्लादेश जाने लगेगा।

आपके अमेरिका प्रवास के पीछे कुछ खास उदेश्य?

जल परिवहन, सड़क सुरक्षा से संबंधित कई मुद्दों पर अमेरिका हमारा सहयोग करेगा। अमेरिका हमें सड़क सुरक्षा के लिए, प्रौद्योगिकी, साफ्टवेयर, नियमन सहित सभी तरह का तकनीकी सहयोग देगा। न्यूयार्क सिटी के ट्राफिक कंट्रोल की व्यवस्था मैंने जाकर देखी है। दिल्ली, मुंबई जैसे अधिक याताताय वाले शहरों की यातायात व्यवस्था को ठीक करने में इससे मदद मिलेगी। अमेरिका ने सड़क निर्माण, पुल, फ्लाइओवर के मानकीकरण में भी भारत को तकनीकी सहयोग देने का वायदा किया है। अमेरिका में जल परिवहन पूरे साल नहीं होता, लेकिन भारत में यदि जल मार्ग का विकास हो गया तो पूरे साल इस मार्ग का इस्तेमाल हो सकेगा। मैं पोर्ट लुईस गया था। हम चाहते हैं कि भारतीय पोर्ट के आधुनिकीकरण का जो काम होने वाला है, उसमें उच्चस्तरीय तकनीक का प्रयोग हो। आने वाले समय में भारत में सड़क निर्माण, बंदरगाह, रेल मार्ग तथा हवाई अड्डों के विकास के लिए एक अरब डॉलर की आवश्यकता पड़ेगी। अमेरिकी कारोबारी समुदाय के साथ हमारी जो बैठक हुई है, उसमें निवेश को लेकर वे उत्साहित हुए हैं।

वैसे जल परिवहन की क्या स्थिति है?

सड़क और रेल की जगह पर जल मार्ग से माल ढुलाई काफी सस्ती है। हमारी कोशिश है कि वाराणसी से हल्दिया के बीच जल्द जलमार्ग शुरू कर दिया जाय। जल मार्ग से माल की आवाजाही शुरू होने के कई फायदे हैं। सामान जल्द पहुंचेगा। खर्च कम आएगा और खर्च में कमी आने से लोगों को मिलने वाले सामान की कीमत घटेगी। पिछले संसद सत्र में विधेयक पारित हुआ। अब डीपीआर बनाने का काम किया जाएगा। दिल्ली में पाला से वजीराबाद का जल मार्ग जल्द शुरू करने की कोशिश है।

बंदरगाह विकास के काम में आप खास दिलचस्पी ले रहे हैं, क्या स्थिति है?

हम देश में नए बंदरगाह बना रहे हैं। पुराने बंदरगाहों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। पोर्ट विकास के लिए हमने सागरमाला परियोजना बनाई है। इस परियोजना में करीब ७० हजार करोड़ का निवेश किया गया है। सरकार का यह लक्ष्य है कि सभी मुख्य १७ बंदरगाहों का यांत्रिकीकरण किया जाए। सागरमाला परियोजना का २०२५ तक व्यापक प्रभाव दिखाई देगा। इससे निर्यात में ११० बिलियन अमेरिकी डॉलर की बढोत्तरी होगी। बंदरगाहों के पास हम स्मार्ट सिटी भी बसा रहे हैं। इसके अलावा पर्यटन से जोड़ने से लिए बंदरगाह में लाइट हाऊस भी शुरू किया गया है।

प्रदूषण कम करने की दिशा में भी आप कुछ प्रयोग कर रहे हैं?

इस देश में इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा कि एक करोड़ ऐसे लोग हैं, जो आदमी ढोने का काम कर रहे हैं। मैकेनिज्म के तहत हम ई-रिक्शा लाए हैं। इससे रिक्शा चलाने वालों को नई दिशा मिली है। अब ई-रिक्शा के कारण प्रदूषण भी कम हो रहा है। सस्ता साधन भी लोगों को उपलब्ध हो रहा है। रोजगार में बढोत्तरी भी हुई है। केन्द्र सरकार विकास के साथ सामाजिक परिवर्तन लाने का काम भी कर रही है। जिसमें एक करोड़ लोगों का जीवन बदला है। हम बैटरी वाली कार और बस चलाने का प्रयास भी कर रहे हैं। नागपुर शहर में सीवेज के पानी की री-साइकिलिंग करके महाराष्ट्र सरकार को पावर जनरेशन के लिए दिया। उस पानी से मिथेन निकाल कर सीओटू अलग करके बायो-सीएनजी निकाली। उससे सौ बसें चलेंगी। अगर पूरे देश के चार से पांच सौ शहरों में गंदे पानी से मिथेन निकाल कर सीएनजी बनाकर बसें चलाई जाए तो उससे वातानुकूलित बस में लोग सस्ते किराए पर सफर सकेंगे। प्रदूषण की समस्या भी हल होगी।

क्या ग्रीन हाईवे प्रोजेक्ट भी इसी का हिस्सा है?

जी हां, ग्रीन हाइवे प्रोजेक्ट के पीछे एक उदेश्य पर्यावरण की सुरक्षा है और दूसरा लम्बे राजमार्ग को सुंदर बनाना भी है। इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो गया है। यह काम बहुत व्यवस्थित तरीके से किया जा रहा है। इसमें स्थानीय लोगों की ज्यादा से ज्यादा सहभागिता सुनिश्चित की गई है। दो करोड़ पेड़ लगाने का लक्ष्य है। यह राजमार्ग को खूबसूरत बनाने के साथ रोजगार सृजन का केन्द्र भी बनेगा।

अगले दो साल की क्या योजनाएं हैं?

कई दिशा में काम तेजी से हो रहा है। हमारी कोशिश है कि सभी राज्यों की सड़कें बेहतर हों। इससे आवागमन का साधन सुगम होगा। इसके लिए भारतमाला परियोजना बनाई गई है। इसमें गुजरात से मिजोरम तकˆ१४,००० कि—मी लबी सड़कˆबनाई जाएगी। इस पर २,६७,२०० करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इसे २०२२ तक—पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। पिछड़े इलाके, धार्मिक व पर्यटन स्थल सम्पर्क कार्यक्रम के तहत ८५, २५० करोड़ रुपए की लागत से क—रीब ७,००० कि.मी. सड़कों का विकास किया जाएगा। जिला मुख्यालय सम्पर्क योजना के तहत ६०,००० करोड़ रुपए की लागत से हाल ही में घोषित करीब ९,००० किमी राजमार्गों का विकास किया जाएगा। करीब १७,२०० किमी सड़कˆके लिए डीपीआर (डीटेल्ड प्रोजेट रिपोर्ट) तैयार की जा रही है। मैंने जिस काम की जो मियाद तय की है, वह उसी समय पर पूरा किया जाएगा। जब पांच साल की अवधि पूरी होगी तब मैं सूची दूंगा कि कौन सा काम कहां किया गया। कौन सा चल रहा है। कौन सा पूरा हो गया है। इसकी पूरी जानकारी लोगों के सामने रखूंगा।

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