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केंद्रीय वाणिज्य एवं व्यापार राज्यमंत्री निर्मला सीतारामन ने पिछले दो वर्षों में अपने मंत्रालय के कामकाज में आए आमूल परिवर्तनों का जिक्र किया, जिससे दीर्घावधि में सुफल प्राप्त होंगे। भारत में व्यापार करना अब और आसान हो गया है और कागजी एवं दस्तावेजी प्रक्रियाओं को न्यूनतम कर दिया गया है। उनसे हुई विशेष बातचीत के महत्वपूर्ण अंश-

आपका मंत्रालय देश की तसवीर बदलने वाला मंत्रालय माना जाता है। पिछले दो वर्षों में आपके मंत्रालय का इस दिशा में क्या योगदान है?

मा. प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जी के दूरगामी नेतृत्व में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने विभिन्न बुनियादी बदलावों को लागू किया है। सरकार की मेक इन इंडिया एवं स्टार्टअप इंडिया जैसी प्रमुख योजनाओं के कारण भारत निवेश एवं नवनिर्माण का केंद्र बन गया है। जून २०१४ से जनवरी २०१६ की अवधि में पूर्ववर्ती समान अवधि की तुलना में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश ५३% बढ़ कर ३९.१९ बिलियन अमेरिकी डॉलर से ६०.०४ बिलियन अमेरिकी डॉलर हुआ है। अप्रैल २०१५ से फरवरी २०१६ की अवधि में भारत में विदेशी निवेश सर्वाधिक अर्थात ५१ बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया।
भारत में व्यापार आसान होने के मामले में अब हम ‘डूइंग बिजनेस रिपोर्ट २०१५’ में १४२वें स्थान पर था। पिछले वर्ष लागू किए गए सुधारों के कारण अब हम १३०.९८ अंक को छू गए है। राज्यों को भी सुधारों के लिए प्रवृत्त करने की इस वर्ष योजना बनाई गई है ताकि यहां व्यापार करना आसान हो और राज्यों का सूचकांक भी और सुधरे।
वैश्विक नवोन्मेष (इनोवेटिव) सूचकांक में भी भारत १५ स्थान से आगे बढ़ा है और विश्व की बेहतरीन नवोन्मेषी अर्थव्यवस्थाओं में ६६वें स्थान पर आ गया है। एमआइआइयूस के अंतर्गत वर्ष २०१४ में ५ संकुल परियोजनाएं लागू की गई हैं, जो एक रेकॉर्ड है। इनमें से एक डीएमआईसी का पुनरुज्जीवन है, जबकि चार योजनाएं अमल के लिए तैयार हैं, जो हैं- गुजरात में अहमदाबाद-ढोलेरा विशेष निवेश क्षेत्र, महाराष्ट्र में शेंद्रा-बिडकिन औद्योगिक पार्क, उ.प्र. के ग्रेटर नोएडा में समन्वित औद्योगिक परिसर तथा म.प्र. में समन्वित औद्योगिक नगरी। मंत्रिमंडल ने वैश्विक स्तर के कला प्रदर्शनी एवं सम्मेलन केंद्र को मंजूरी प्रदान की है। चेन्नई-बेंगलुरु औद्योगिक गलियारे, बेंगलुरू-मुंबई आर्थिक गलियारे, विजाग-चेन्नई औद्योगिक गलियारे की योजनाएं तेजी से लागू की जा रही हैं।
इस तरह यह औद्योगिक एवं व्यापार क्षेत्र का एक तरह से तेजी से कायापलट ही है, जिसके सुफल दीर्घावधि में अवश्य दिखाई देंगे।

स्टार्टअप इंडिया का एक्शन प्लान क्या है?

स्टार्टअप इंडिया के लिए आसान एक पृष्ठ का पंजीयन फार्म बनाया गया है। चार वर्षों के लिए १०,००० करोड़ रु. का कोष बनाया गया है, ताकि नए उद्यमियों को आसानी से ॠण सुविधा उपलब्ध हो। वर्ष २०१६-१७ के लिए ११०० करोड़ रु. आबंटित किए गए हैं। ३५ नए केंद्रों की स्थापना की जा रही है। वार्षिक स्टार्टअप महोत्सवों का आयोजन किया जाएगा; ताकि महानगरों के अलावा अन्य क्षेत्रों में रहने वाले युवाओं को इस सुविधा का लाभ प्राप्त हो सके। इस योजना का लक्ष्य युवाओं को उद्यमी के रूप में व्यापार के लिए प्रेरित करना है। हाल में आइपीआर नीति की घोषणा की गई, ताकि युवा उद्यमी भारत के विकास में नवोन्मेष पर अपना ध्यान केंद्रित कर सके। नए उद्यमियों के लिए पेटेंट को दर्ज करने के लिए ८०% रिबेट दे रहे हैं और उनके नवोन्मेष को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न सुविधाएं प्रदान कर रहे हैं। छोटे शहरों के युवाओं को नेटवर्क से जोड़ने के लिए राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्टार्टअप महोत्सवों का आयोजन किया जाएगा, ताकि वे सफल उद्यमियों से मिल सकें और उनके अनुभवों का लाभ उठा सकें।

डब्लूटीओ में मिले पीस क्लाज का भारत को क्या लाभ होगा?

हाल में विश्व व्यापार संगठन (डब्लूटीओ) की नैरोबी में हुई सचिव स्तरीय बैठक में हमारे प्रयासों के कारण खाद्यान्न सुरक्षा सचिव स्तरीय समझौते में संशोधन हुआ है और अनाजों के सार्वजनिक भंडारण पर स्थायी समाधान निकला है। इस कारण भारत के पीडीएस, एमएसपी, खाद्यान्न सुरक्षा कार्यक्रमों के लिए अब कोई खतरा नहीं है। इसके अलावा हमने भारतीय किसानों के लिए समान स्तर प्राप्त करने में सफल हुए हैं और विकसित देशों को अनाजों पर भारी सब्सिडी देने से रोकने में सफल हुए हैं। विपरीत स्थितियों में भी हमारे किसानों को सुरक्षा प्रदान करने में विशेष कार्यव्यवस्था को कायम करने में हमें सफलता मिली है।

हमने ट्विटर पर चजउखडएतअ विशेष सेवा आरंभ की है। इस सेवा के अंतर्गत वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय से सहायता प्राप्त करने के इच्छुक हरीहींरस का उपयोग कर ञ्चेलळीर्शींर से सम्पर्क कर उचित सहायता प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए मंत्रालय में एक विशेष कक्ष स्थापित किया गया है। सभी अधिकारियों से कहा गया है कि वे शीघ्रताशीघ्र जानकारी एवं सहायता मुहैया कराएं। वाणिज्य एवं औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभागों से हर तरह की सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

जीएसटी अब पारित हो चुका है। इसके क्या लाभ होंगे?

जीएसटी से भारत में कर-व्यवस्था में आमूल परिवर्तन आएगा और कारोबार करना पहले से कहीं अधिक आसान होगा। इससे हमारी अर्थव्यवस्था में भारी सुधार होगा और और जनकल्याण की योजनाएं चलाना अधिक आसान होगा।

व्यापार सुविधा समझौते (टीएफए-ट्रेड फैसिलिटेशन एग्रीमेंट) के क्या लाभ होंगे?

टीएफए को मंत्रिमंडल की मंजूरी प्राप्त हो चुकी है। इससे भारत में व्यापार करना और आसान हो जाएगा। इस समझौते के कारण सामानों की आवाजाही, अदायगी एवं क्लीअरेंस में आसानी होगी। इसके लिए सरकार ने सीमा शुल्क एवं अन्य अधिकारियों को उचित निर्देश जारी कर दिए हैं। ‘भारत में कारोबार करना आसान’ बनाने के प्रयासों का यह एक अंग है।
निर्यातबंधु योजना के अंतर्गत डीजीएफटी के क्षेत्रीय कार्यालयों ने २०,००० से अधिक उद्यमियों को प्रशिक्षण प्रदान किया है। निर्यातकों को प्रशिक्षण दिया गया है।

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