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समाज के दिव्यांग समूह की ओर कई वर्षों से शासन एवं प्रशासन का उतना ध्यान नहीं रहा है। लेकिन विकलांग समूह के सक्षमीकरण और विकास के लिए वर्तमान केन्द्र सरकार कई नई योजनाएंं कार्यान्वित कर रही हैं। इसके अलावा पहले से कार्यरत कई योजनाओं की पुनर्रचना भी शासन ने की है। यही वजह है कि, दिव्यांगजनों के सक्षमीकरण की दिशा में केन्द्र सरकार के कदम बड़ी दृढ़तापूर्वक बढ़ रहे हैं। यह चित्र निश्चित रूप से दिव्यांगजनों को आश्वस्त करनेवाला है।

छात्रवृत्ति योजनाओं का आरंभ

१) स्नातकोत्तर और पीएचडी स्तर पर विदेश में अध्ययन करने हेतु विकलांग छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए वर्ष २०१४-१५ में राष्ट्रीय समुद्रपारीय छात्रवृत्ति का शुभारंभ किया गया। इस योजना के अंतर्गत प्रति वर्ष बीस छात्रों को वृत्ति दी जाएगी, जिनमें छह महिला उम्मीदवार होंगी। इस छात्रवृत्ति में अनुरक्षण भत्ता, आकस्मिक भत्ता, ट्यूशन शुल्क और हवाई सफर का शुल्क आदि शामिल है। इस छात्रवृत्ति की प्रति उम्मीदवार प्रति वर्ष औसत सरकारी लागत रू.१२.७१ लाख है। प्रति वर्ष ६ रु. लाख तक आय सीमा वाले छात्र इस योजना का लाभ ले सकते हैं।

२) विकलांग छात्रों के लिए मैट्रिक-पूर्व और मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति योजना वर्ष २०१४-१५ में जारी की गई। इस वित्तीय सहायता में छात्रवृत्ति, पुस्तक अनुदान, एस्कोर्ट, रीडर भत्ता आदि शामिल है। मैट्रिक-पूर्व छात्रवृत्तियों की संख्या १६,६५० और मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्तियों की संख्या ४६,००० है। इनमें से ५० प्रतिशत छात्रवृत्तियांं छात्राओं के लिए आरक्षित हैं। मैट्रिक-पूर्व छात्रवृत्ति के लिए अभिभावक की आय सीमा रू.२.०० लाख तक प्रति वर्ष और मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति के लिए अभिभावक की आय सीमा रू.२.५० लाख तक प्रति वर्ष है।

कौशल विकास और उद्यमिता प्रशिक्षण कार्यक्रम

केंद्र सरकार के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग ने कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के सहयोग से, २१ मार्च, २०१५ से एक राष्ट्रीय कार्य योजना शुरू की है। इस योजना के अंतर्गत वर्ष २०१५-१६ से २०१७-१८ हेतु प्रथम पांच वर्षों में ५ लाख और आगे २०१८-१९ से २०२१-२२ तक की अवधि में २० लाख विकलांग व्यक्तियों को कौशल प्रशिक्षण दिए जाने का लक्ष्य है। इसके लिए इंपैनल्ड प्रशिक्षण प्रदाताओं को एक क्लस्टर के द्वारा नियंत्रित व कार्यान्वित किया जाएगा जिसमें सरकारी संगठन, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम एवं स्वैच्छिक संगठन भी शामिल होंगे। इसी उपलक्ष्य में आगे बढ़ते हुए, राष्ट्रीय विकलांगजन वित्त विकास निगम और दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के बीच सन २०१४-१५ में एक समझौता हुआ है, जिसका उद्यमिता विभाग द्वारा अनुमोदन किया गया है। राष्ट्रीय विकलांगजन वित्त विकास निगम ने वर्ष २०१४-१५ के दौरान ९३९६ विकलांगजनों को कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराया है। इसी वर्ष में निगम ने १४,५०३ विकलांग व्यक्तियों को व्यवसाय हेतु १०१.४९ करोड़ रूपये की ॠण राशि का वितरण किया है। वर्ष २०१४-१५ के दौरान सिपडा योजना के अंतर्गत ८,५०० विकलांग व्यक्तियों को लाभान्वित करते हुए कौशल प्रशिक्षण हेतु १०.०० करोड़ रूपये जारी किए गए।

दिव्यांगजनों को एडिप द्वारा सहायक उपकरणों/यंत्रों का वितरण

सहायक उपकरणों/यंत्रों की खरीद हेतु विकलांग व्यक्तियों को सहायता की (एडिप) योजना के अंतर्गत नागपुर में दि.२९/०३/२०१५ को एक बृहद् शिविर का आयोजन किया गया। इसमें ४,०४५ लाभार्थियों को ४.३० करोड़ रूपये की लागत के यंत्रों और उपकरणों का वितरण किया गया। एडिप योजना के लिए ११०.०० करोड़ रूपये के बजट अनुमान में से वर्ष २०१४-१५ के दौरान २.३९ विकलांग व्यक्तियों को लाभान्वित करते हुए १०१.२८ करोड़ रूपये जारी किए गए। ३९,१५३ विकलांग व्यक्तियों को २९.३१ करोड़ रूपये की लागत के उपकरणों का वितरण किया गया। वर्ष २०१४-१५ मे २.३९ विकलांग व्यक्तियों को लाभान्वित करने उद्देश्य से ५० बृहद् एवं विशेष शिविरों का आयोजन किया गया। दि.१३/१२/२०१४ को देश में एडिप योजना के अंतर्गत कोकलियए इंप्लांट प्रोग्राम का शुभारंभ किया गया। वर्ष २०१४-१५ के दौरान कोकलियर इंप्लांट सर्जरी हेतु ३१ अस्पताल इंपैनल किए गए और ३८ सफल कोकलियर इंप्लांट सर्जरी की गईं।
दि.३०/०३/२०१५ की अधिसूचना के अनुसार, विभाग ने राज्यों में स्पाइनल इंजुरी सेंटर स्थापित करने की एक योजना तैयार की है जिसके लिए १२हवीं योजना अवधि हेतु २० करोड़ रूपये आबंटित किए गए हैं। राज्य स्पाइनल केन्द्रों का ध्यान स्पाइनल इंजुरीज् के विस्तृत प्रबंधन पर केन्द्रित होने हेतु इस योजना के अंतर्गत १२ बिस्तरों के साथ राज्य के जिला अस्पतालों से संबध्द एक विस्तृत एवं संसाधनयुक्त पुनर्वसन केन्द्र स्थापित किया जाएगा।
विभाग ने टीआईएफएसी, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से विकलांगजनों की यंत्रों और उपकरणों से संबंधित पहुंचनीय आवश्यकताओं को पूरा करने हेतु एक वेब पोर्टल शुरू किया जिसका महामहिम राष्ट्रपति महोदयजी ने दि.३ दिसम्बर, २०१५ को शुभारंभ किया है।
एडिप योजना के संशोधन के परिणामस्वरूप मंत्रालय की ओर से दि.०१/०४/२०१४ को दृष्टिबाधित, कुष्ठप्रभावित, श्रवणबाधित एवं बौध्दिक और विकासात्मक विकलांगजनों की सहायता हेतु विकलांगता-वार उच्च कोटि के यंत्रों और उपकरणों का वितरण करने की अधिसूचना जारी की गई है।

ब्रेल प्रेस योजना

वर्ष २०१४-१५ में ब्रेल पृष्ठ उत्पादन में वृध्दि करने हेतु, मौजूदा १० ब्रेल प्रेसौं के आधुनिकीकरण हेतु और १५ नई ब्रेल प्रेसों के संस्थापन हेतु नवम्बर में ब्रेल प्रेसों के संस्थापन / आधुनिकीकरण / क्षमता निर्माण हेतु सहायता नामक योजना का शुभारंभ किया गया। इस योजना के कार्यान्वयन हेतु नोडल एजेंसी राष्ट्रीय दृष्टि बाधित संस्थान, देहरादून को ३.८६ करोड़ रूपये की राशि जारी की गई।

राष्ट्रीय संस्थान और कंपोजिट रिजनल सेंटर

इस योजना के अंतर्गत वर्ष २०१४-१५ के दौरान ७ राष्ट्रीय संस्थानों को ७८.९७ करोड़ रूपये की राशि जारी की गई। दि.१४/११/२०१४ को राष्ट्रीय दृष्टि बाधित संस्थान, देहरादून के परिसर में विशेष शिक्षा और विकलांगता अध्ययन भवन का शिलान्यास किया गया। दि.२५/०८/२०१४ को राष्ट्रीय पुनर्वास प्रशिक्षण और अनुसंधान संस्थान (निरतार) कटक (उडीसा) में ४.७० करोड़ रूपये की लागत के १५० बिस्तरवाले नए महिला छात्रावास का उद्घाटन हुआ। राष्ट्रीय बहुविकलांगताग्रस्तजन सशक्तिकरण संस्थान, चेन्नई में दि.२६/०९/२०१४ को हाइड्रोथेरपी पूल और एथिलेटिक ट्रैक का शिलान्यास किया गया। श्रीनगर में दि.१८/०६/२०१४ को ३.०० करोड़ रूपये की लागत के पुनर्वास केंद्र के नए भवन का शिलान्यास हुआ। इस पुनर्वास केन्द्र का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है और प्रारंभिक चरण में है। दि.१३/०६/२०१४ को राष्ट्रीय मानसिक विकलांग संस्थान, सिकन्दराबाद में ५.०० करोड़ की लागत पर एकेडमिक ब्लॉक का उद्घाटन एवं १५.०० लाख रूपये की लागत पर सैंसरी पार्क का शिलान्यास किया गया। गुवाहाटी दौरे के दौरान दि.१२/०२/२०१५ को, माननीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री ने अरूणाचल प्रदेश के इटानगर मे रीजनल सेंटर स्थापित करने की घोषणा की है। लगभग ४०.०० करोड़ रूपये की लागत पर राष्ट्रीय संस्थानों और कंपोजिट रीजनल सेंटरों में ७ नए भवनों का निर्माण अनुमोदित किया गया है। कंपोजिट रीजनल सेंटर, पटना के अलग प्रशासनिक ब्लॉक का निर्माण शुरू हो गया है और ३.६४ करोड़ रूपये जारी किए गए हैं।

नेशनल इन्स्टिट्यूट फॉर ओर्थोपेडिकली हॅन्डीकॅप्ड्, कोलकाता में नए अकादमिक भवन का निर्माण कार्य शुरू होने जा रहा है। आइजोल, मिजोरम में विकलांगता अध्ययन केन्द्र हेतु भवन का निर्माण कार्य शुरू हुआ है जिसके लिए ८.९० करोड़ रूपये की अनुमोदित राशि में से ४.३५ करोड़ रूपये जारी किए जा चुके हैं। दि.२९/१२/२०१४ को आयोजित स्थायी वित्त समिति की बैठक में २०१२-१३ से २०१६-१७ तक १२हवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान ८ कंपोजिट रीजनल सेंटरों के जारी रहने का अनुमोदन किया गया। वर्ष २०१४-१५ के दौरान ८ कंपोजिट रीजनल सेंटरों को १३.५२ करोड़ रूपये जारी किए गए।

भारतीय पुनर्वास परिषद

भारतीय पुनर्वास परिषद द्वारा दि.२९/१२/२०१४ को विकलांगता क्षेत्र हेतु अनुसंधान एजेंडे पर एक राष्ट्रीय परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस परिचर्चा की सिफारिशों के आधार पर एक अनुसंधान योजना बनाई जा रही है। दि.५ से ७ फरवरी, २०१५ तक पूर्वोत्तर क्षेत्र में पुनर्वास व्यावसायिक क्षमता निर्माण पर एक तीन दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया।

राष्ट्रीय न्यास- देखभाल प्रदाता कार्यक्रम

राष्ट्रीय न्यास ने २००७-०८ के दौरान सहयोगी-देखभाल प्रदाता प्रशिक्षण और नियुक्ति योजना का शुभारंभ किया था। इसके अंतर्गत राष्ट्रीय न्यास के पंजीकृत संगठनों के चुनिंदा केन्द्रों में ३६ देखभाल प्रदाता सेल स्थापित किए गए। ६ वर्षों की अवधि में अर्थात् २०१३-१४ तक २,४०७ देखभाल प्रदाता प्रशिक्षित किए गए और १००३ को नियुक्ति प्रदान की गई। परंतु योजना के अपेक्षित परिणाम नहीं आए और देखभाल प्राप्तकर्ताओं की देखभाल प्रदाताओं हेतु आवश्यकता पूरी नहीं की जा सकी। इस समस्या को सुलझाने के लिए राष्ट्रीय न्यास, भारतीय पुनर्वास परिषद, राष्ट्रीय मानसिक विकलांग संस्थान और संशोधन संस्थान के प्रतिनिधियों के साथ दि.२५/०२/२०१६ को हुई बैठक में देखभाल प्रदाताओं के मॉड्यूल का मानकीकरण करने और सहयोगी योजना को रीमॉड्यूल करने का निर्णय लिया गया। देखभाल प्रदाताओं हेतु प्रशिक्षण की तीन श्रेणियां स्थापित की गईं। व्यक्तिगत देखभाल प्रदाता, संस्थागत देखभाल प्रदाता और माता-पिता के तहत देखभाल प्रदाता इन तीन श्रेणियों में प्रशिक्षण कार्यक्रम की पुनर्रचना की गई। अब की बार इस योजना में प्रदाताओं को उपक्रम में बनाए रखने हेतु और प्रेरित करने हेतु उन्हें उपयुक्त मानदेय प्रदान करने का भी निर्णय लिया गया। अब देखभाल प्रदाता कार्यक्रम भारतीय पुनर्वास परिषद का मान्यता प्रदत्त कार्यक्रम है। इससे मानसिक विकलांग व्यक्तियों को देखभाल प्रदाताओं हेतु आवश्यकताओं की आपूर्ति होने की दिशा में अच्छा कार्य किए जाने की आशा है।

अद्वितीय पहल-‘विकलांग व्यक्तियों के लिए दिशा दर्शन दिवस’

दि.०१/०२/२०१५ को एक अद्वितीय पहल के तौर पर भारत में अपनी ही तरह का ‘विकलांग व्यक्तियों के लिए दिशा दिवस’ का पहली बार आयोजन किया गया। इसका आयोजन नई दिल्ली नगर पालिका और दिल्ली पुलिस के सहयोग से किया गया। १००० विकलांगजनों सहित १०,००० व्यक्ति इस कार्यक्रम में सहभाग लेने और देखने हेतु प्रात: ६.०० से ९.०० बजे तक कनॉट प्लेस में एकत्रित हुए। इस कार्यक्रम के दौरान विकलांगजनों के पुनर्वास एवं कल्याण के उद्देश्य से कार्यरत प्रतिष्ठित गैर-सरकारी संगठनों ने विकलांग छात्र और प्रौढ व्यक्तियों के विविध गुणों का प्रदर्शन करवाया। इस प्रकार विकलांगजनों में कुछ करने की हिम्मत जगाने और सकारात्मक अवधारणा उत्पन्न करने की सफल कोशिश की गई।
दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग ने यूनेस्केप सेक्रेटरिएट के सहयोग से दि.२ से ३ मार्च, २०१५ के दौरान यूनेस्केप समूह के विकलांग व्यक्तियों के लिए एशिया के दूसरे सत्र की मेजबानी की।
वर्ष २०१४-१५ के दौरान पहली बार गैर-सरकारी संगठनों द्वारा प्राप्त प्रस्तावों का ऑन-लाइन पोर्टल हींींि://पसेसीरपींीक्षश.र्सेीं.ळपफ पर प्रस्तुतिकरण शुरू किया गया। इस वर्ष राज्य सरकारों ने अपने से संबंधित राज्यों के कुल ६९० प्रस्ताव संस्तुत किए। इनमें सें ६४० गैर-सरकारी संगठनों को सहायता प्रदान की गई। अनुदान सहायता कुल ५०.०८ करोड़ रूपये थी। इससे १.८१ लाख लाभार्थी लाभान्वित हुए।

पुनर्वसन अनुसंधान एवं संवर्धन तथा विकास कार्यक्रम

दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग ने विकलांजनों की जीवनचक्र आवश्यकताओं, विकलांग व्यक्तियों और उनके परिवारजनों का सुयोग्य विकास, विकलांगजनों के सशक्तिकरण के लिए उपयुक्त वातावरण सृजित करने, विकलांगता निवारण एवं विकलांगजनों के प्रचलन में अनुसंधान संवर्धन करने और स्वदेशी सहायक यंत्रों, उपकरणों के विकास हेतु विज्ञान और प्रौद्योगिकी एप्लिकेशन के सेवा और प्रोग्राम्स् मॉड्यूल्स् के अनुसंधान संवर्धन के उद्देश्य से जनवरी, २०१५ में विकलांगता संबंधी तंत्रज्ञान, उत्पादों और मामलों के अनुसंधान के लिए एक योजना आरंभ की है।

ऑटिज्म प्रमाणन

दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग ने स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के परामर्श से ऑटिज्म से ग्रस्त व्यक्तियों का आकलन करने और प्रमाणन हेतु दिशा-निदेर्शों को अंतिम रूप दे दिया है। इन दिशा-निदेर्शों के अनुसार ऑटिज्म से ग्रस्त व्यक्तियों की पहचान हेतु खछउङएछ ढेेश्री का उपयोग किया जाएगा। इसके अनुसार ऑटिज्म से ग्रस्त व्यक्तियों की पहचान के आधार पर इंडियन स्केल ऑफ एसेसमेंट ऑफ ऑटिज्म टूल्स के आधार पर ऑटिज्म का प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा। अब तक ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों को मानसिक मन्दता का प्रमाणपत्र दिया जाता था। अब भारत में पहली बार खछउङएछ ढेेश्री के आधार पर ऑटिज्म से ग्रस्त व्यक्तियों का प्रमाणन केन्द्रीय सरकार/राज्य सरकार द्वारा विधिवत स्थापित ऑटिज्म सर्टिफिकेशन मेडिकल बोर्ड द्वारा किया जाएगा।
केन्द्र सरकार के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की योजनाओं की उपर्युक्त जानकारी लेने के बाद, सरकार आज तक उपेक्षित रह गए दिव्यांगजनों की आवश्यकताओं की पूर्ति करने के लिए बेहतर पहल करने के लिए पर्याप्त प्रयास कर रही है, यह कहना अव्यवहार्य नहीं होगा। समाज के सबसे पिछड़े हुए दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण के उद्देश्य से सरकार जो कदम उठा रही है निश्चित ही सराहनीय है। देश के दूर-दूर तक विभिन्न भागों में बंटे हुए हर एक नागरिक को विकास की गंगा से लाभान्वित करना माननीय प्रधान मंत्री नरेंद्रजी मोदी का लक्ष्य है। इसी उपलक्ष्य में दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग भी आगे बढ़ रहा है, यह विकलांग व्यक्तियों के लिए बड़ी आश्वासक स्थिति है।
लेकिन, केवल कुछ योजनाओं का पुनर्गठन या कुछ नई योजनाओं की शुरूआत मात्र करने से दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण का उद्देश्य सफल होगा यह समझना बड़ी भूल होगी। विकलांगजनों तक इन योजनों की जानकारी पहुंचाना अधिक आवश्यक है। इसके लिए सरकार और प्रशासन अपनी ओर से निश्चित प्रयास करेंगे। परंतु हमें चाहिए कि गैर-सरकारी संगठन और सामाजिक क्षेत्रों सें जुड़े हुए विभिन्न प्रदेशों में कार्यरत सामाजिक कार्यकर्ता व संगठन इस कार्य में जुट जाए और सरकार एवं प्रशासन के कंधे से कंधा मिलाकर कुछ कदम साथसाथ चले। सरकार और जनता के सम्मिलित कार्य के फलस्वरूप दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण का यह अभियान सफलता के शिखर पर अवश्य पहुंच सकेगा, यह विश्वास के साथ कहा जा सकता है।

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