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देश और राज्य के गरीब से गरीब से व्यक्ति तक यदि सरकार की योजनाओं का लाभ पहुंचे तो इसे सही मायने में समावेशित रूप से सुशासन कहा जा सकता है। वैसे सुशासन का तात्पर्य शासन की विधि, समानता, जनभागीदारी, अनुक्रियाशीलता, प्रभावशील दक्षता, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व से है। देश और राज्य की सरकारों को ऐसी योजनाओं और पहलों की शुरूआत या रूपरेखा को कार्यान्वित करना चाहिए जिसमें ऊपर दी गई सुशासन की सातों विशेषताएं समाहित हों। समावेशी विकास से प्रेरित योजनाओं की संरचना, क्रियान्वयन हेतु प्रभावशील कार्यप्रणाली और अंत में जनता की भागीदारी के अनूठे संगम से राम राज्य जैसे सुशासन को अनुभव किया जा सकता है।
पिछले एक दशक से भी अधिक समय से, पूर्व में श्री नरेंद्र मोदी और वर्तमान में श्रीमती आनंदीबेन पटेल के नेतृत्व में गुजरात सरकार ने निरंतर इन्हीं मापदंडों को आधार बनाकर कार्य किया है जिससे गुजरात के कोने-कोने तक समाज का प्रत्येक वर्ग लाभान्वित हो रहा है। गुजरात के अलग-अलग क्षेत्रों में आए सकारात्मक बदलाव फिर चाहे वह सामाजिक, शैक्षिणिक, स्वास्थ्य, खेल हो या फिर कृषि और किसानों, जलापूर्ति, बिजली, रोजगार या फिर व्यापारिक क्षेत्र हो, गुजरात सरकार ने विकास के प्रत्येक कोण में जनभागीदारी को सम्मिलित करते हुए सुशासन को एक स्वरूप दिया है।
वर्ष २००२ में जब श्री नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने तब उनके सामने गुजरात के विकास को लेकर कई चुनौतियां थीं लेकिन इन्हें स्वीकार करते हुए उन्होंने सुशासन की कार्यशैली को अपनाकर न केवल कार्य किया बल्कि भारत के अन्य राज्यों के लिए विकास का एक ‘गुजरात मॉडल’ भी प्रस्तुत किया है। अपने इनोवेटिव विचारों और जनता की सेवा के मूलभाव के साथ श्री मोदी ने गुजरात से सुशासन की शुरूआत की थी।
इसी क्रम में आगे बढ़ते हुए श्री मोदी वर्तमान में भारत के प्रधान मंत्री के रूप में भी ‘सबका साथ, सबका विकास’ के विचार से कार्य कर रहे हैं। श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने कई सकारात्मक पहलें और योजनाएं शुरू की हैं जो कि देश में ज़मीनी स्तर पर सकारात्मक प्रभाव दिखा रही हैं। प्रधान मंत्री उज्ज्वला योजना, जन-धन योजना, प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान, स्वच्छ भारत अभियान, प्रधान मंत्री कौशल विकास योजना जैसी कई जनकल्याणकारी योजनाएं हैं जो कि जनभागीदारी के साथ अपने मूल स्वरूप को आकार दे रही हैं।
श्री मोदी की दूरदर्शिता और उनकी कार्यशैली का अनुसरण करते हुए मुख्यमंत्री श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने उनके कार्य को आगे बढ़ाया और श्री मोदी की प्रायोजित योजनाओं को राज्य में अधिक से अधिक कार्यान्वित करने पर बल दिया है। मुख्यमंत्री श्रीमती पटेल ने अपने अथक प्रयासों और गतिशीलता से गुजरात की संप्रभुता को न केवल बनाए रखा है बल्कि इसे एक श्रेष्ठ आयाम भी दिया है। यह गुजरात सरकार के सुशासन का ही परिणाम है कि वर्ष २०१५ में गुजरात को अपने कार्यों के लिए कई अवॉर्ड्स और प्रशस्तिपत्र प्राप्त हुए हैं। यही कारण है कि श्रीमती पटेल ने अपने २ साल के कार्यकाल में एक उल्लेखनीय पहचान बनाई हैं।
मई २०१४ में जब श्रीमती आनंदीबेन पटेल गुजरात की मुख्यमंत्री बनीं तब उन्होंने अनुभव किया कि लोकसभा चुनाव के दौरान लंबे समय तक लगी आचार संहिता से गुजरात के विकास कार्यों की गति में रुकावट आ गई है। इसे दूर करने और गुजरात में परियोजनाओं को गति देने के उद्देश्य से श्रीमती पटेल ने ‘गतिशील गुजरात’ अभियान की शुरूआत की जिसके तहत एक तय समय-सीमा में विकास कार्यों के पूरा करने का लक्ष्य बनाया गया। श्रीमती पटेल की यह पहल बहुत ही सफल साबित हुई है इसीलिए इस अभियान के तीन चरणों की अपार सिद्धि के बाद इस वर्ष गतिशील गुजरात-४ की घोषणा की गई है। मुख्यमंत्री की यह पहल गुजरात में सुशासन को बनाए रखने के प्रयासों का एक जीवंत उदाहरण है।
श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा, खेल और महिला सशक्तिरण जैसे क्षेत्रों को विशेष रूप से प्राथमिकता देते हुए समाज को ज़मीनी स्तर पर सुदृढ़ बनाने का कार्य किया है जिससे गुजरात में सुशासन की बुनियाद और भी अधिक मजबूत हुई है। गुजरात सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में एक बहुत बड़ा अभियान चलाते हुए सरवाइकल तथा ब्रेस्ट कैंसर और डायबिटीज़ की राज्यव्यापी निःशुल्क जांच और उपचार शिविर, गरीब परिवारों के स्वास्थ्य उपचार के लिए एक निश्चित आय सीमा के तहत मुख्यमंत्री अमृतम योजना और मुख्यमंत्री अमृतम वात्सल्य योजना की शुरूआत, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और उपस्वास्थ्य केंद्रों का विस्तार, कुपोषण के निपटारे के लिए दूध संजीवनी योजना और नए बाल सेवा केंद्रों की स्थापना, क्लेफ्ट लिप और क्लब फुट जैसी घातक बीमारियों की निःशुल्क जांच और उपचार व्यवस्था की शुरूआत, इत्यादि जैसी कई पहलें और योजनाएं हैं जो कि पूरे गुजरात की जनता को स्वस्थ बना रही हैं।
सुशासन का तात्पर्य जनता की बुनियादी आवश्यक्ताओं की पूर्ति से भी है। किसी भी मनुष्य की सबसे बुनियादी आवश्यकता है भोजन और जल। इसलिए गुजरात सरकार ने इन दोनों की पूर्ति के लिए बहुआयामी प्रयास किए हैं। एक सूखा राज्य या दूसरे शब्दों में कहा जाए तो प्राकृतिक रूप से जल संपन्न नहीं होने के बावजूद गुजरात सरकार ने जिन नीतियों और दूरदर्शिता से जल का संरक्षण किया है वह प्रशंसनीय है। यहां खेती, पीने के पानी और उद्योगों को आवश्यकतानुसार पर्याप्त मात्रा में जलापूर्ति की जा रही है। सिंचाई के लिए सौराष्ट्र नर्मदा अवतरण इरीगेशन योजना, पीने के पानी के लिए नर्मदा बल्क पाइपलाइन योजना, पानी के प्रबंधन में जनता की भागीदारी को सुनिश्चित करने के लिए ‘महिला पानी समिति’ जैसी कई योजनाएं और पहलें हैं जिससे पूरा गुजरात जल समृद्ध हुआ है। यह गुजरात के सुशासन का ही प्रतिफल है कि गुजरात की वर्तमान जल संरक्षण नीति ने अन्य राज्यों के समक्ष जल संकट के समाधान का एक मॉडल प्रस्तुत किया है जिसका अनुसरण कर पूरे देश के जल संकट का निवारण किया जा सकता है।
इसी क्रम के तहत, कृषि में ‘रवि कृषि महोत्सव’, लघु सिंचाई योजना, प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना, महिला सहकारी दूध मंडली, हॉर्टिकल्चर को बढ़ावा, शिक्षा में विद्या लक्ष्मी बॉंड, विद्या दीप योजना, साइकल सहायता योजना, शाला प्रवेशोत्सव, फर्स्ट एड योजना एंव कन्या शिक्षा योजना, मुख्यमंत्री युवा स्वावलंबन योजना और खेल के क्षेत्र में क्रिकेट, स्विमिंग, टेबल टेनिस और एथलेटिक्स जैसे क्षेत्रों में गुजरात ने प्रशंसनीय कार्य किए हैं।
सुशासन के मूल तत्वों में युवाओं का सशक्तिकरण भी एक प्रमुख कारक है। इसीलिए, गुजरात सरकार ने युवाओं के भविष्य को भी सुदृढ़ बनाने का कार्य किया है। गुजरात अपनी व्यापारिक छवि के लिए विश्वविख्यात है जिससे यहां के युवाओं को रोजगार का भरपूर अवसर मिलता है। इसके अलावा, राज्य सरकार ने इस वर्ष सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से पिछड़े युवाओं को शिक्षा और राज्यीय रोजगारों में १०% का आरक्षण का प्रावधान देकर युवाओं के लिए अवसरों की परिसीमा में वृद्धि की है। साथ ही, गुजरात सरकार ने खेल महाकुंभ जैसे महाआयोजन के द्वारा भी युवाओं को करिअर बनाने का एक सुनहरा अवसर प्रदान किया है। उपर्युक्त तथ्य गुजरात के सुशासन का आधार हैं।
गुजरात सरकार राज्य के कोने-कोने तक लोगों की समस्याओं को सुनकर उसका निवारण करती है। २०१४ में मुख्यमंत्री श्रीमती आनंदीबेन पटेल द्वारा घोषित ‘लोक संवाद सेतु’ इसका एक आदर्श उदाहरण है जिसे सुराज की उत्तम कार्यशैली कहा जा सकता है। भारत में केवल गुजरात पहला ऐसा राज्य है जहां तहसील स्तर पर लोक संवाद सेतु जैसे बड़े कार्यक्रमों का राज्यव्यापी आयोजन किया जाता है। तालुका स्तर पर आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री, प्रभारी मंत्री और संबंधित क्षेत्र के कलेक्टर, डीडीओ, एसपी, एसडीएम, तहसीलदार शामिल होते हैं।
इस कार्यक्रम के तहत गांव, तहसील, और जिला स्तर पर ऐसी छोटी-बड़ी समस्याओं का समाधान किया जाता है जिनका जटिल सरकारी प्रक्रियाओं के कारण उचित समाधान नहीं मिल पाता था। गुजरात सरकार ने इस कार्यक्रम के माध्यम से जनता और सरकार के बीच एक सीधा संवाद स्थापित किया है जिससे लोगों की स्थानीय स्तर की समस्याओं का बहुत ही व्यवस्थित और चरणबद्ध तरीके से निवारण किया जाता है। अतएव, मुख्यमंत्री श्रीमती पटेल द्वारा घोषित इस कार्यक्रम को सुशासन की उपल्बधियों का एक प्रमुख कारक भी कहा जा सकता है।
खेल के क्षेत्र में सफल हो रहे खिलाड़ी भी गुजरात के सुशासन की व्याख्या कर रहे हैं। जहां सामान्यतः युवा या तो अपने परिवार की जिम्मेदारी के कारण या फिर उपयुक्त सुविधाओं की कमी के कारण अपनी खेल प्रतिभा को दिखाने का अवसर प्राप्त नहीं हो पाता लेकिन गुजरात में ऐसी समस्याएं नहीं हैं। गुजरात में युवाओं को यथानुसार रोजगार की उपलब्धता और सुविधाओं से अपनी प्रतिभा को निखारने का पर्याप्त अवसर मिल रहा है जिससे न केवल रवींद्र जडेजा, पार्थिव पटेल, जसप्रीत बुमराह, हार्दिक पंड्या जैसे प्रतिभावान खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में गुजरात का नाम रोशन किया है तो वहीं स्वीमिंग में माना पटेल, चेस में अंकित राजपारा, टेनिस में अंकिता रैना, टेबल टेनिस में हरमीत देसाई और राइफल शूटिंग में लज्जा गोस्वामी जैसे खिलाड़ियों ने भी देश-विदेश में गुजरात को गौरवान्वित किया है।
सुशासन की प्रतिबद्धता के साथ, श्रीमती आनंदीबेन पटेल की सरकार ने केंद्र की योजनाओं को भी राज्य में न केवल सक्रियता से लागू किया है बल्कि नए विचारों के सम्मिश्रण से उपयोगकर्ताओं के लिए उन्हें परिणामदायी भी बनाया है। फिर चाहे वह प्रधान मंत्री उज्जवला योजना के तहत गुजरात सरकार के द्वारा राज्य के ३० लाख परिवारों को स्वच्छ ईंधन प्रदान करने का लक्ष्य हो, सुगम्य भारत अभियान के तहत दिव्यांगों के लिए गुजरात में विशेष रूप से आईटीआई कॉलेज के निर्माण का निर्णय हो, स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत गुजरात को सबसे उत्तम राज्य बनने की उपलब्धता हो या फिर प्रधान मंत्री जन-धन योजना, प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना, प्रधान मंत्री मुद्रा योजना, प्रधान मंत्री आवास योजना, मेक इन इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, अटल पेंशन योजना इत्यादि का गुजरात में कुशल कार्यान्वयन हो।
ये सभी केवल कुछ उदाहरण हैं। इसके अलावा भी गरीबों और वंचित वर्गों को या तो बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर या वित्तीय समावेशन या फिर उनके कौशल विकास के द्वारा उन्हें सशक्त बनाया जा रहा है। गुजरात और केंद्र सरकार ने कोपरेटिव-फेडरलिज़्म की भावना से जनता की स्पष्ट भागीदारी के साथ सुशासन को सुनिश्चित करते हुए खुशहाली और समृद्धता को प्रतिपादित किया है।
सुशासन की दिशा में, जब सरकारें ‘जनता के लिए, जनता तक’ और लोगों के सशक्तिकरण के मूल सिद्धांत को अपनाकर एक-दूसरे से हाथ मिलाकर कार्य करती हैं तो प्रत्येक गांव, शहर, राज्य और देश में चिरकाल तक न केवल सुशासन स्थापित हो सकता है बल्कि यह दूसरों को भी प्रेरित करता है। इस संदर्भ में, गुजरात एक आदर्श उदाहरण है जहां राज्य सरकार ने अलग-अलग क्षेत्रों में जनकल्याणकारी कार्यों और योजनाओं तथा पहलों की सफलताओं से सुशासन को पूरी तरह से परिभाषित किया है। अतएव भविष्य या इतिहास में जब भी सुशासन की चर्चा की जाएगी गुजरात को स्पष्ट और सुनहरे शब्दों में स्थान दिया जाएगा।

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