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भारत में शासन कल्याणकारी राज्य की अवधारणा के अंतर्गत काम करता है, अर्थात एक ऐसा शासन जो नागरिकों के आर्थिक एवं सामाजिक उन्नति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता हो। इसीलिए केन्द्र में किसी भी दल का शासन हो वह राज्यों के हितों का पोषण करता है। हालांकि विकास के मसले पर केन्द्र और राज्यों में अनेक बार टकराव की नौबत भी आती रही है। दलगत आधार पर राज्यों के द्वारा केन्द्र सरकार पर भेदभाव का आरोप लगता रहा है। राज्य सरकारों द्वारा केन्द्र के खिलाफ धरना-प्रदर्शन तक होता आया है। कई मौके ऐसे आए जब स्वयं मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेसनीत यूपीए की सरकार के खिलाफ हल्ला बोल किया। वर्ष २०१४ में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री ने केन्द्र सरकार के खिलाफ न्याय यात्रा का आयोजन किया। इस अवसर पर श्री चौहान ने मध्यप्रदेश की बिजली समस्या के लिए सीधे तौर पर केन्द्र को जिम्मेदार ठहराया था। उन्होंने केन्द्र से मिलने वाली बिजली और कोयले के साथ ही खाद्यान और इंदिरा आवास के कोटे में कटौती का आरोप लगाया था। तब मुख्यमंत्री ने सारणी बिजलीघर से कोयला खदान पाथाखेड़ा तक पदयात्रा की थी और हाथ में कोयला उठा कर सत्याग्रह किया था। इसी प्रकार वर्ष २००९ में भी केन्द्र सरकार के भेद-भावपूर्ण रवैये के खिलाफ शिवराज सिंह चौहान ने उपवास तक किया था।
लेकिन आज परिस्थितियां बदली हुई हैं। केन्द्र और राज्य दोनों स्तरों पर भाजपा का शासन है। आर्थिक स्थिति भले ही प्रतिकूल हो, लेकिन राजनीतिक स्थिति अनुकूल है। मध्यप्रदेश के विकास में मोदी सरकार न सिर्फ बड़े भाई की भूमिका में है, बल्कि उत्प्रेरक भी है। मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार ने शिवराज सिंह की अगुआई में उन सभी योजनाओं और कार्यक्रमों को हाथों-हाथ लिया है जिसका मोदी सरकार ने आगाज किया है। केन्द्र की हर पहल पर प्रदेश ने अमल किया है। पहल और अमल का यह ताना-बाना ही है जिसने विकास की मिसाल रची है। मध्यप्रदेश बीमारु राज्य के कलंक से मुक्त हुआ है। कृषि विकास दर में देश का सिरमौर बना है। मोदी सरकार की बहुचर्चित जन-धन योजना, स्वच्छ भारत अभियान, मेक-इन-इंडिया, स्टार्ट-अप स्कीम, डिजिटल इंडिया और ग्रामोदय अभियान में मध्यप्रदेश की भूमिका सिर्फ अनुसरणकर्ता की नहीं, बल्कि उदाहरण प्रस्तुत करने की रही है।
एक तरफ तो केन्द्र की मेक इन इंडिया की तर्ज पर शिवराज सिंह ने मेक इन मध्यप्रदेश का आह्वान कर मोदी सरकार का हमसफर होने का संदेश दिया, वहीं डिजिटल इंडिया की पहल पर मध्यप्रदेश सरकार ने इंदौर और जबलपुर में इलेक्ट्रानिक मेन्युफैक्चरिंग क्लस्टर की शुरूआत की। इसी प्रकार मध्यप्रदेश सरकार द्वारा आयोजित ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट में स्वयं उपस्थित होकर प्रधान मंत्री ने प्रदेश की हौसला अफजाई की। देश में सबसे पहले रक्षा उत्पाद निवेश संवर्धन नीति बनाने के कारण मध्यप्रदेश को सराहना मिली। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में प्रधान मंत्री मोदी ने कहा- अगर सही नेतृत्व हों, नीति स्पष्ट हों, नीयत साफ हों, इरादे नेक हों, दिशा निर्धारित हों, मकसद पाने का इरादा हों तो बीमारु राज्य भी प्रगतिशील राज्य बन सकता है। इसका उत्तम उदाहरण शिवराज जी, उनकी टीम और मध्यप्रदेश ने दिखाया है।
मध्यप्रदेश और भाजपा के इतिहास में यह पहली बार है जबकि केन्द्र और राज्य में भाजपा की बहुमत की सरकार है। केन्द्र और मध्यप्रदेश में भाजपा की सरकार तो कई दफे बनी, लेकिन या तो अल्पमत की या फिर केन्द्र और राज्य में परस्पर विरोधी दलों की। इसीलिए मध्यप्रदेश के विकास में केन्द्र और राज्य के नेतृत्व, नीति, नीयत और इरादे का फर्क और अंतर्विरोध साफ दिखता रहा। वर्षों बाद यह संयोग बना है जब केन्द्र और मध्यप्रदेश के राजनीतिक नेतृत्व, विकास की नीति, नेतृत्व की नीयत और इरादे एकाकार हैं। दिशा एक है। यही कारण है कि मध्यप्रदेश के विकास को सकारात्मक मुकाम मिला है। मध्यप्रदेश, देश में सबसे तेज गति से बढ़ने वाले राज्यों में शुमार हुआ है। प्रदेश की विकास दर दो अंकों में पहुंच गई है। २०१४-१५ में सकल घरेलू विकास दर १० प्रतिशत से अधिक दर्ज की गई। पिछले चार वर्षों में कृषि विकास दर औसत २० प्रतिशत रही। यह देश में सबसे अधिक है। गत वर्षों में कृषि उत्पाद में प्रदेश ने रिकार्ड बनाया। केन्द्र की नदी जोड़ो योजना में भी मध्यप्रदेश अव्वल रहा। प्रदेश में नर्मदा-क्षिप्रा लिंक, नर्मदा-गंभीर लिंक योजना को अमलीजामा पहना कर उदाहरण प्रस्तुत किया है।
मध्यप्रदेश सरकार ने केन्द्र सरकार के सहयोग से विद्युत उत्पादन, उद्योगों में निवेश, सड़कों का निर्माण, शालाओं में बच्चों का प्रवेश, लाड़ली लक्ष्मी और कन्या विवाह जैसी योजनाओं के द्वारा महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उदाहरण प्रस्तुत किया है। ई-टेंडरिंग, ई-पेमेंट, ई-पंजीयन, ई-साइन, सरकारी खजाने और बैंकों में ई-ट्रांसफर के द्वारा भारत सरकार के डिजिटल इंडिया अभियान को मूर्त रूप दिया है। केन्द्र सरकार की अत्यंत मह्त्वाकांक्षी जन-धन योजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश सरकार ने अधिकाधिक लोगों के बैंक खाते खुलवाने अभियान चलाया। कोशिश की जा रही है कि छात्रवृत्ति समेत अन्य शासकीय योजनाओं की राशि सीधे हितग्राहियों के बैंक खाते में जमा की जाए। मध्यप्रदेश जन-धन योजना का लक्ष्य प्राप्त करने वाला प्रथम राज्य बन गया है। इसके तहत १.५४ करोड़ परिवारों के पास कम से कम एक बैंक खाता होना सुनिश्चित किया गया है।
उल्लेखनीय है कि मेक इन इंडिया की तर्ज पर मध्यप्रदेश सरकार ने रोजगार हेतु मेक इन मध्यप्रदेश अभियान की शुरूआत की है। इस अभियान की सफलता के लिए सीआईआई से बतौर साझेदार दीर्घकालिक अनुबंध किया गया है। प्रदेश में औद्योगिक विकास के लिए सरकार ने निवेशकों के हित में नियम के साथ-साथ नीतियों में भी परिवर्तन किया है। यही कारण है कि निवेशकों के लिए मध्यप्रदेश में अन्य प्रदेशों के मुकाबले कहीं सकारात्मक वातावरण दिखाई दे रहा है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम दर्जे के उद्योगों के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने पृथक विभाग बना दिया है। उद्योग और निवेश अनुकूल माहौल के कारण गत वर्षों में देश-दुनिया के निवेशकों का रुझान न सिर्फ बढ़ा है, बल्कि उद्योगों की संख्या में भी उल्लेखनीय इजाफा हुआ है। इस दौरान प्रदेश की औद्योगिक विकास दर निरंतर ८ प्रतिशत से अधिक दर्ज की गई है।
प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी का नारा ‘सबका साथ, सबका विकास’ मध्यप्रदेश के लिए भी मूलमंत्र बना है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है- हमारा विश्वास है कि हम प्रदेश में सहभागी विकास का एक ऐसा तंत्र विकसित कर सकेंगे जो हमें देश का अग्रणी राज्य बनाएगा। केन्द्र सरकार के सहयोग और सेवाभाव, संतुलन, संयम, समन्वय, सकारात्मकता, संवेदना तथा संवाद के ७ सूत्रीय दिशादर्शन के आधार पर शिवराज सरकार निरंतर प्रगति की दिशा में अग्रसर है। मध्यप्रदेश के लिए, विशेषकर भाजपा के कार्यकर्ताओं के लिए यह गर्व की बात है कि प्रदेश सरकार ने बिजली का अतिरिक्त (सरप्लस) उत्पादन किया। प्रदेश में सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है। सरकार गांव और गरीब की चिंता कर रही है। गांव, गरीब, किसान और युवा जैसे केन्द्र सरकार की विशेष चिंता का विषय है, वैसे ही मध्यप्रदेश सरकार भी इन विशेष वर्गों को केन्द्रित कर विकास को गति देने का प्रयास कर रही है।

केन्द्र का साथ, मध्यप्रदेश का विकास

पिछले दो वर्षों में केन्द्र की मोदी सरकार ने समृद्ध भारत के सपने को साकार करने के लिए अनेक योजनाओं की शुरूआत की। मध्यप्रदेश सरकार ने इन योजनाओं को प्रदेश में लागू कर स्वर्णिम मध्यप्रदेश की ओर कदम बढ़ा दिया है।
डिजिटल भारत के तहत डिजिटल मध्यप्रदेश अगस्त २०१४ में केन्द्र सरकार द्वारा डिजिटल भारत अभियान शुरु किया गया। इस अभियान के पीछे सरकार की मंशा यह रही है कि सुदूर और दुर्गम अंचलों तक आधुनिक डिजिटल माध्यमों की पहुंच सुलभ की जाए। सभी सेवाओं को डिजिटल रूप दिया जाए तथा लोगों को इसके उपयोग के लिए प्रेरित और उन्मुख किया जाए। सबसे महत्वपूर्ण यह कि इसके तहत देश के सभी गांवों और ग्रामीण इलाकों को इंटरनेट नेटवर्क से जोड़ना है। मध्यप्रदेश सरकार ने डिजिटल बुनियादी सुविधाएं, डिजिटल साक्षरता और प्रदेश सरकार की सभी सेवाओं को डिजिटल रूप देने की ओर कदम बढ़ा दिया है।

प्रधान मंत्री जन-धन एवं अन्य बीमा योजनाएं

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने २८ अगस्त २०१४ को प्रधान मंत्री जनधन योजना की शुरूआत की। इसकी घोषणा उन्होंने १५ अगस्त २०१४ को अपने पहले स्वतंत्रता दिवस भाषण में की थी। यह एक वित्तीय समावेशन कार्यक्रम है। इस कार्यक्रम के शुरू होने के पहले दिन ही डेढ़ करोड़ बैंक खाते खोले गए थे और हर खाताधारक को १,००,००० रुपये का दुर्घटना बीमा कवर दिया गया। इस योजना के तहत अब तक ३.०२ करोड़ खाते खोले गए और उनमें करीब १,५०० करोड़ रुपये जमा किए गए। इस योजना के अनुसार कोई भी व्यक्ति जीरो बैलेंस के साथ बैंक खाता खोल सकता है। वित्तीय समावेशन के लिए लागू प्रधान मंत्री जन-धन योजना का लक्ष्य पूरा करने वाले प्रदेशों में मध्यप्रदेश अग्रणी है। अब प्रदेश में हर परिवार का बैंक में कम से कम एक खाता है। प्रदेश में शासकीय योजनाओं में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के काम को और आगे बढ़ाया जा रहा है। मध्यप्रदेश शासन द्वारा मनरेगा की मजदूरी तथा अन्य हितग्राही मूलक योजनाओं की राशि लाभान्वितों के खाते में पूर्व से ही सीधे जमा करवाई जा रही है। योजना में ४९ लाख ४७ हजार परिवार के कुल एक करोड़ १९ लाख ५० हजार खाते खोले गए। अब प्रदेश में कुल एक करोड़ ५३ लाख ८६ हजार परिवारों के पास बैंक खाते हो गए हैं।
इस वर्ष ९ मई से भारत सरकार द्वारा प्रधान मंत्री सुरक्षा बीमा, प्रधान मंत्री जीवन ज्योति और अटल पेंशन योजना लागू की गई है। देश की बड़ी आबादी को सामाजिक सुरक्षा देने वाली इन योजनाओं का लाभ सभी पात्र लोगों को दिलवाने के लिए मध्यप्रदेश में अभियान चलाकर कार्य किया जा रहा है। अभियान की देख-रेख मंत्रि-परिषद के सदस्य कर रहे हैं। तीनों योजना में अभी तक एक करोड़ ६ लाख ३४ हजार व्यक्ति लाभान्वित हो चुके हैं।

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ

प्रधान मंत्री ने २२ जनवरी २०१५ को हरियाणा के पानीपत से इस योजना की शुरूआत की। १०० करोड़ रुपये की शुरूआती राशि के साथ यह योजना देशभर के १०० जिलों में शुरू की गई। सरकार की इस योजना से महिलाओं की कल्याण सेवाओं के प्रति जागरुकता पैदा करने और निष्पादन क्षमता में सुधार को बढ़ावा मिलेगा। मध्यप्रदेश की लाड़ली लक्ष्मी एक ऐसी योजना बनी, जिसने क्रांतिकारी बदलाव की शुरूआत की। प्रदेश में २१ लाख ऐसी बालिकाएं हैं, जिनके पढ़ने और विवाह तक की जिम्मेदारी सरकार ने सम्हाली है। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ और ’स्वागतम् लक्ष्मी’ योजना ने बेटी को बोझ मानने की सोच बदली। इन योजनाओं के परिणाम इतने बेहतर मिले कि देश के ९ राज्यों के साथ ही बांग्लादेश ने भी लाड़ली लक्ष्मी योजना का अध्ययन कर अपने यहां योजना को अपनाया। ‘लाड़ली लक्ष्मी’, ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ और ’स्वागतम् लक्ष्मी’ योजना के विस्तार के रूप में सुकन्या समृद्धि योजना को लागू किया गया है।

प्रधान मंत्री कौशल विकास योजना

गरीबी के खिलाफ लड़ाई और बेहतर रोजगार अवसर के लिए देश के लोगों, खासकर युवाओं को कुशल बनाने के लिए इस योजना की शुरूआत की गई। १५ जुलाई २०१५ को इसकी शुरूआत करते हुए पीएम ने कहा, ‘अगर देश के लोगों की क्षमता को समुचित और बदलते समय की आवश्यकता के अनुसार कौशल का प्रशिक्षण देकर निखारा जाता है तो भारत के पास दुनिया को ४ से ५ करोड़ कार्यबल उपलब्ध करवाने की क्षमता होगी। सरकार इसके तहत देश के इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग सेंटर्स को बढ़ावा देती है, ताकि युवाओं को स्किलफुल बनाया जा सके।

स्टैंड अप इंडिया तथा स्किल इंडिया स्कीम

इसकी शुरुआत ५ अप्रैल २०१६ को नोएडा के सेक्टर-६२ में की गई। इस योजना के लिए प्रधान मंत्री ने एक वेब पोर्टल की शुरूआत की। इस स्कीम को लेकर भारत के उद्यमी वर्ग में खासा उत्साह है। इसका उद्देश्य नए उद्यमियों को स्थापित करने में मदद करना है। इससे देशभर में रोजगार बढ़ेगा। योजना के अंतर्गत १० लाख रुपये से १०० लाख रुपये तक की सीमा में ऋणों के लिए अनुसूचित जाति/अनुसूचित जन जाति और महिलाओं के बीच उद्यमशीलता को प्रोत्साहन दिया जाएगा। १० हजार करोड़ रुपये की शुरूआती धनराशि के साथ भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) के माध्यम से फिर से वित्त सुविधा और एनसीजीटीसी के माध्यम से लोन गारंटी के लिए ५००० करोड़ रुपये के कोष का निर्माण किया गया।
मध्यप्रदेश में उद्योग एवं व्यवसाय को और अधिक सुगम बनाने के लिए ठोस कदम उठाए गए हैं। इस सम्बंध में नियम-कानून और प्रक्रियाओं को सरल बनाते हुए अनावश्यक अनुमतियों को समाप्त किया गया है। उद्योगों के लिए सिंगल डोर पॉलिसी लागू की गई है। प्रक्रियाओं को सरल करते हुए श्रम कानूनों में भी आवश्यक सुधार किए गए हैं। वालियंटरी कम्प्लायंस स्कीम लागू की गई है, जिसमें इकाइयों को पांच वर्ष में केवल एक बार निरीक्षण की सुविधा दी गई है। सत्रह केन्द्रीय श्रम कानून में संशोधन प्रस्तावित किए गए हैं। इकाइयों को ६१ के स्थान पर केवल एक रजिस्टर रखने की सुविधा दी गई है। अब उन्हें १३ की जगह सिर्फ २ वार्षिक विवरणियां रखने की सुविधा भी दी गई है। ईज ऑफ डूईंग बिजनेस में सुधार के लिए १५० मुद्दे चिन्हित किए गए हैं।
देश-विदेश की प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थाएं अब मध्यप्रदेश में अपने संस्थान स्थापित कर रही हैं। पिछले दिनों इंदौर में नरसी मौंजी इंस्टीट्यूट ऑफ मेनेजमेंट एण्ड साइंस का शिलान्यास किया गया। इसी तरह सिम्बायसिस संस्थान के दो एक्सीलेंस सेन्टर भी इंदौर में स्थापित किए जा रहे हैं।
सरकार तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास को लगातार बढ़ावा दे रही है। इसमें निजी क्षेत्र का सहयोग भी लिया जा रहा है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मध्यप्रदेश कौशल विकास मिशन का गठन किया गया है। मिशन में आगामी वर्ष में ४० लाख लोगों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य है। पॉलीटेक्निक, आई.टी.आई., स्किल डेवलपमेंट सेंटर आदि में सीट बढ़ा कर एवं नए पाठ्यक्रम तैयार कर अधिकाधिक युवाओं को प्रशिक्षित किए जाने का काम हाथ में लिया गया है।
तकनीकी जन-शक्ति की पूर्ति के लिए उद्योगों के साथ परस्पर सहयोग से पाठ्यचर्या निर्धारित कर प्रशिक्षण के लिए फ्लेक्सी एमओयू किए जा रहे हैं। शासकीय आईटीआई में नए उद्योगों की मांग के अनुरूप ६६ नए पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं। इससे १७०० नई सीटें बढ़ी हैं। इसके अलावा १३० निजी नई आईटीआई खुली हैं। अगले साल आईटीआई विहीन २५ विकास खंडों में नई शासकीय आई.टी.आई. खोलने की योजना है।
युवाओं के कौशल विकास के साथ ही मध्यप्रदेश शासन उन्हें खुद के रोजगार, व्यवसाय शुरू करने में भी मदद कर रहा है। इसके लिए मुख्यमंत्री स्व-रोजगार योजना लागू की गई है। प्रदेश में नवाचार पर आधारित नई उद्यमिता विकसित करने अंश पूंजी की आवश्यकता पूरी करने के उद्देश्य से १०० करोड़ रुपये के वेंचर केपिटल फंड की व्यवस्था की गई है।

प्रवासी भारतीय विभाग गठित

प्रवासी भारतीयों को मध्यप्रदेश से और अधिक जुड़ने में सुविधा के लिए प्रवासी भारतीय विभाग का गठन किया गया है। यह विभाग प्रवासी भारतीयों से सम्बंधित सभी मामले जिसमें प्रवासी भारतीय/भारतीय मूल के विद्यार्थियों को मध्यप्रदेश के विभिन्न शैक्षणिक, तकनीकी शिक्षा और सांस्कृतिक संस्थानों में प्रवेश से सम्बंधित सूचना एकत्र करने और प्रसारण का काम भी करेगा। मध्यप्रदेश ने सबसे पहले ग्लोबल टेलेंट पूल बनाने की पहल की है। ‘फ्रेंडस ऑफ एमपीवेबसाइट’ आरंभ की गई है। देश के बाहर रहने वाले मध्यप्रदेश के सदस्य फ्रेंडस प्रदेश के विकास के सम्बंध में कोई आयडिया अथवा विजन दे सकते हैं, किसी प्रोजेक्ट को स्पान्सर कर सकते हैं, कोई स्वैच्छिक काम हाथ में ले सकते हैं और निवेश भी कर सकते हैं।

प्रधान मंत्री उज्ज्वला योजना

१ मई २०१६ को यूपी के बलिया से शुरू हुई उज्ज्वला योजना अब मध्यप्रदेश के विभिन्न अंचलों में पहुंच गई है। प्रधान मंत्री की घोषणा को मूर्त रूप देने की पहल हो चुकी है। गरीब परिवारों को जहां लकड़ी का चूल्हा जलता है, मुफ्त गैस कनेक्शन मिलना प्रारंभ हो गया है।

स्वच्छ भारत अभियान

प्रधान मंत्री के स्वच्छ भारत अभियान को मध्यप्रदेश में पूरी गंभीरता से लिया गया है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्र की स्वच्छता के लिए अलग-अलग रणनीति बनाई गई है।मुख्यमंत्री कन्यादान योजना में जिन जोड़ों की शादी होती है, यदि उनके पास घर में शौचालय नहीं है, तो उन्हें शौचालय निर्माण के लिए अलग से १२ हजार रुपये देने की योजना शुरू की गई है। यह पहल करने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है।

मध्यप्रदेश में स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में समुदाय की भागीदारी से स्वच्छता सुविधाओं की उपलब्धता एवं उपयोग सुनिश्चित किए जाने का अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के द्वारा २ अक्टूबर २०१९ तक सभी ग्राम पंचायतों के परिवारों के घरों में स्वच्छ शौचालय की सुविधा उपलब्ध करवाते हुए उन्हें इसका उपयोग करने के लिए प्रेरित कर ग्रामीण क्षेत्र को ‘खुले में शौच’ मुक्त बनाना तथा ग्रामों में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन द्वारा उन्हें सम्पूर्ण रूप से स्वच्छ बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

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