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तुलसीदास ने रामचरित मानस में रामराज्य के रूप में आदर्श राज्य का वर्णन किया है। आदर्श राज्य का अर्थ है सुशासन। आदर्श राज्य की सुशासन व्यवस्था में राज्य का नागरिक अभाव और अन्याय से मुक्त होकर सुखी जीवन जीता है। यह एक कड़वी सच्चाई है कि आज भारत की आज़ादी के ६९ वर्षों के बाद भी आम आदमी को भूख से मुक्ति, अज्ञान से मुक्ति और आधारभूत सुविधाएं देनेवाला सुशासन नहीं मिल पाया है। महात्मा गांधी ने ‘मेरे सपनों का भारत’ में लिखा था कि ‘मैं यह तब मानूंगा कि देश स्वतंत्र हो गया जब निरक्षरता, निर्धनता और विषमता समाप्त हो जाएगी।’ आज़ादी के ६९ वर्ष बाद भी इन तीनों बुराइयों को हम समाप्त नहीं कर पाए हैं।
जिसे हम रामराज्य कहते हैं, वह कल्याणकारी राज्य सुशासन की बुनियाद पर ही टिका होता है। सुशासन के लिए दो बातें जरूरी होती हैं, संवेदना और विवेक दृष्टि। शासन व्यवस्था में जिनके पास सत्ता और अधिकार हैं उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे निम्न स्तर पर जीवन बिताने वालों के प्रति संवेदनशील हों, उनकी वेदना को समझें और ऐसी योजनाएं बनाए जिससे समाज के अंतिम श्रेणी के अंतिम व्यक्ति को विकास का फल मिल सके और वह हर तरह के अभाव से मुक्त हो सके।
विगत ६९ सालों में से ६० साल कांग्रेस ने देश पर राज किया है। उन्होंने लोकतंत्र चलाया, पर नीतियों और विकास योजनाओं के पीछे जो विवेक होना चाहिए वह उनमें नहीं था। विवेकहीन लोकतंत्र पर ही हम गर्व करते रहे कि भारत में दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र चल रहा है। २०१४ के पहले दस साल तो कांग्रेस जैसी कमजोर सरकार देश पर शासन कर रही थी जिसको खुद पर भरोसा ही नहीं था। ऐसी सरकार देश में ‘सुशासन’ लाने का काम भी नहीं कर पाई। कांगे्रस की कमजोर सरकार का सारा ध्यान अपने को बचाए रखने और किसी तरह कुर्सी से चिपके रहने में ही था।
पहले हमें यह स्पष्ट रूप से समझ लेना चाहिए कि ‘सुशासन’ और उस व्यवस्था से आनेवाले ‘विकास’ जैसे शब्दों का क्या अर्थ है? किस तरह ‘सुशासन’ और ‘विकास’ सम्पूर्ण राष्ट्र तथा राष्ट्रीय क्षमताओं के साथ जुड़े हुए हैं? कितनी दूर तक ‘सुशासन’ और ‘विकास’ की व्याप्ति हो सकती है? सत्ता का प्रभाव सम्पूर्ण राष्ट्र के जीवनपटल पर फैला होता है। सबसे अच्छी सत्ता की कार्यपद्धति वह होती है जिनमें सामाजिक, राजनीतिक, बौद्धिक, सांस्कृतिक तथा नैतिक क्षमताओं का प्रगटीकरण होता है।
‘सुशासन’ के लिए यह भी आवश्यक है कि नेतृत्व प्रेरणा देनेवाला हो; क्योंकि शीर्ष स्थान पर बैठे व्यक्ति का अनुसरण ही जनता करती है। स्वयं भगवान कृष्ण ने भी गीता में कहा है ‘‘यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तन्त देवेतरो जन:, स यत्प्रमाण करुते लोकस्तदनुबर्तते’। यदि श्रेष्ठ स्थान पर बैठे व्यक्ति की प्रेरणा की सुगंध नीचे तक आती रहे तो सब कुछ सुगंधित हो जाता है। ऐसा नेतृत्व कांग्रेस की मौनी सरकार के कार्यकाल में देश को उपलब्ध नहीं हुआ था। पर भारतीय जनता ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के रूप में ऊर्जावान व्यक्तित्व का विकल्प चुना। मनमोहन सिंह सरकार के कार्यकाल में सब से अधिक घोटाले हुए। २ जी स्पेक्ट्रम, कोयला खदान जैसे अरबों के घोटाले से जनता आक्रोशित थी। इस आक्रोश की अभिव्यक्ति सन २०१४ के लोकसभा चुनाव में हुई। सशक्त विकल्प के रूप में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिला। भारतीय जनता ने न केवल भाजपा को चुना वरन् प्रेरणा की सुगंध जन-जन तक फैलाने वाले ऊर्जावान नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर भी मुहर लगा दी।
नरेंद्र मोदी के नेतृत्व मे केंद्र सरकार दो वर्ष पूर्ण करसफलतापूर्वक मार्गक्रमण कर रही है। मोदी सरकार देश की ऐसी सरकार है जिनकी कार्यप्रणाली, कार्यक्रम, योजना एवं नीतियों में भारत की संस्कृति परम्परा, लोकभावना एवं मूल्यों का अंतर्भाव प्रदर्शित हो रहा है। इस सरकार की प्राथमिकता भारत, भारतीय और भारतीयता के द्वारा देश में ‘सुशासन’ और ‘विकास’ लाने की है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय मोदी के प्रेरणा स्थान हैं। दीनदयाल जी के अंत्योदय की संकल्पना में समाज के अंतिम व्यक्ति की सेवा का मंत्र है। मोदी सरकार गरीबों की सरकार है। ६० सालों के कांग्रेस के राजनैतिक नेतृत्व के केवल वक्तव्य में भारत के गरीबों को महत्वपूर्ण स्थान था परंतु प्रत्यक्ष रूप से उनकी बोली और कृति में बहुत अंतर था। मोदी सरकार ने इस अंतर को कम करने की ओर अपना ध्यान लगाया है।
मोदी सरकार ‘सबका साथ सबका विकास’ की अवधारणा में विश्वास करती है। इस घोष वाक्य को चरितार्थ करते हुए वनवासी समुदाय हेतु वनबंधु कल्याण योजना, अनुसूचित जाति सफाई कर्मचारी एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के कौशल्य विकास पर विशेष जोर दिया है। अल्पसंख्यकों के लिए उस्ताद योजना लागू की है। श्रमिकों के लिए कर्मचारी पेंशन योजना, दिव्यांगों के जीवन को आसान बनाने के लिए सुगम भारत अभियान, बालिकाओं के सशक्तिकरण के लिए ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ कार्यक्रम, सुकन्या समृद्धि योजना तथा गांव के किसानों के लिए ‘श्यामाप्रसाद मुखर्जी शहरी ग्रामीण मिशन’ लागू किया गया है। ग्रामीण क्षेत्र में पक्के घर बनाने हेतु प्रधान मंत्री आवास योजना लागू की गई है। आगामी ५ वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों में १ करोड़ घर बनाने का लक्ष मोदी सरकार ने निर्धारित किया है। मोदी सरकार द्वारा नमामि गंगे, योग दिवस जैसे अभियान भारत निर्माण की दिशा में उठाए गए महत्वपूर्ण कदम हैं। ‘स्वच्छ भारत अभियान‘ अब एक राष्ट्रीय आंदोलन बन गया है। जिसमें भारत के सभी वर्ग बढ़-चढ़ कर भाग ले रहेे हैं।
मोदी सरकार के इन प्रयासों को देख कर महसूस हो रहा है कि मानव संसाधन में सुधार, शिक्षा सुधार, सुरक्षा और जीवन स्तर में सुधार आदि कुछ ऐसी बाते हैं जो सुशासन स्थापित करने की प्रक्रिया में मदद कर सकती हैं। मोदी सरकार देश की जन शक्ति पर अपना ध्यान केंद्रित कर रही है जिससे सुशासन को बल मिल रहा है। राष्ट्र भावना से प्रेरित होकर पूर्ण देश को मातृभूमि के रूप में देखना और उसमें ‘सुशासन’ स्थापित करने का प्रयास करने से ही सही मायनों में विकास की दिशा निकल सकती है। स्वामी विवेकानंद के दरिद्र नारायण, महात्मा गांधी की ग्रामोदय और पंडित दीनदयाल जी की अंत्योदय की भावना को मोदी सरकार सर्वोपरि न्याय देकर कार्य करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने सभी योजनाएं सबसे पहले सबसे निचले स्तर के व्यक्ति के विकास को ध्यान में रखकर कार्यान्वित की हैं। अंत्योदय की भावना से सम्पन्न हो रही इन योजनाओं के कारण केवल विकास ही नहीं सामाजिक न्याय भी प्रस्थापित होगा। मोदी सरकार ने गांव और शहर के मध्य विकास का संतुलन स्थापित किया है। अपनी योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से उन्होंने यह प्रदर्शित किया है कि सुधार एवं जनकल्याण साथ-साथ संभव है। उनकी विकास की अवधारणा सर्वस्पर्शी और सर्वसामावेशक है। सरकार ने विगत दो वर्षों में रसोई गैस के १५ करोड़ ग्राहकों की ३५,८२५ करोड़ रुपये की सब्सिडी उनके खाते में जमा की है। प्रधान मंत्री मोदी के आव्हान पर आर्थिक रूप से सक्षम १ करोड़ से अधिक लोगों ने गैस सब्सिडी छोड़ दी है जिसके फलस्वरुप सरकार ने प्रधान मंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत ५ करोड़ बीपीएल परिवारों को आगामी ४ वर्षों में गैस कनेक्शन प्रदान करने की घोषणा की है। २०२२ तक कृषि क्षेत्र में कार्य करनेवाले किसानों की आमदनी दो गुना करने का सरकार का लक्ष्य है। जिसके लिए विविध अभियान एवं योजनाएं कृषि क्षेत्र में लागू की गई हैं।
भारतीय अर्थव्यवस्था ने चीन जैसे राष्ट्र को पछाड़ा है। भारत ने ७.६ प्रतिशत की विकास दर को प्राप्त किया है। मोदी सरकार को विरासत में एक खस्ताहाल अर्थव्यवस्था तथा वैश्विक मंदी का माहौल प्राप्त हुआ था। किन्तु मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने आधारभूत संरचना में निवेश कर, कृषि एवं छोटे उद्योगों को वित्तीय मदत कर अर्थव्यवस्था को गति देने का कार्य किया है। सड़क, राजमार्ग, ऊर्जा, रेल्वे जैसे क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। पड़ोसी देश और विश्व के अधिकतम देशों में प्रधान मंत्री मोदी ने जो यात्राएं कीं, उससे विदेशों से सम्बंध सदृढ़ हुए हैं।
मोदी सरकार ने स्वच्छ पारदर्शी एवं भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन दिया है। दो साल के कार्यकाल में मोदी सरकार पर भ्रष्टाचार का एक भी आरोप नहीं लगा है। सुरक्षा की दृष्टि से स्थिति काफी मजबूत हुई है। आतंकवादी गतिविधियों पर नियंत्रण हुआ है। घुसपैठ की कोशिश करने वाले आतंकी मारे जा रहे हैं। सुरक्षा जवानों को स्पष्ट निर्देश है कि जो भी सीमा पार करने की कोशिश करे उसे घुस कर मारो। सुरक्षा सौदे भी गति से एवं त्वरित हो रहे हैं। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आगे बढ़ता रहा तो न केवल वैश्विक शक्ति के रूप में जाना जाएगा बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी महाशक्ति बनेगा। महान भारत का लक्ष्य पूरा करने की दिशा में मोदी सरकार पूर्णत: प्रयास कर रही है।
‘राष्ट्रभाव’ की मूल भावनाओं को कमजोर करने की कोशिश कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुई है। यह राष्ट्रीय अपराध कांग्रेस सरकार ने किया था। किसी भी राष्ट्र के विकास की भावना वहीं सार्थक और समर्थ होती है, जहां ‘राष्ट्रभाव’ होता है। सुशासन और विकास वहीं हो सकता है जहां के नागरिक यह सोचने लगेे कि उन्हें विश्व के मार्गदर्शक के रूप में उभरना है। विकास व्यक्ति के साथ-साथ राष्ट्र के लिए भी अत्यंत आवश्यक है। यदि राष्ट्र में राष्ट्रभाव का वातावरण सशक्त हो तो मनुष्य विकास की ओर बढ़ेगा। सकारात्मक और बहुमुखी विकास की प्रबल संभावना वहां बनती है जहां ‘राष्ट्रभाव’ समर्थ होता है।
राष्ट्र किसी जमीन के टुकड़े या भौगोलिक सीमा का नाम नहीं है। राष्ट्र एक भावना है। राष्ट्रभाव का विकास और सुशासन का आपस में सीधा सम्बंध है। यदि सुशासन होगा तो राष्ट्रभाव प्रबल होगा और इसी से इच्छित विकास भी होगा। नरेंद्र मोदी की राष्ट्रभाव से जुड़ी चिंतनधारा भारत को विकास की ओर तेजी से ले जा रही है।
राष्ट्रभाव, सुशासन एवं विकास तीन अलग-अलग शब्द हैं, लेकिन जब ये तीन शब्द एकत्र आते हैं तो ये एकात्म एवं परस्पर पूरक बन जाते हैं। राष्ट्रभाव सांस्कृतिक आराधना है। सुशासन राजनैतिक सुव्यवस्था है। विकास सांस्कृतिक आराधना और राजनैतिक सुव्यवस्था के मिश्रित परिणाम का सूचक है विकास। सुशासन से लोकतांत्रिक प्रणाली सुचारू रूप से चलने में मदद मिलती है। नरेंद्र मोदी सरकार के नेतृत्व में सुशासन की संस्कृति विकसित होती दिखाई दे रही है। गत लोकसभा चुनाव के पहले भारत की छवि अस्तव्यस्त, भ्रष्टाचार में लिप्त, आर्थिक अराजकता से त्रस्त, नीतिगत पंगुता से ग्रस्त, निर्णय लेने में अक्षम मौन राष्ट्र की थी। नरेंद्र मोदी द्वारा नेतृत्व संभालने के पश्चत राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय राजनैतिक परिदृश्य में गुणात्मक परिवर्तन दिखाई दे रहा है। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की गहरी छाप विश्व में दिखाई दे रही है। जन-जन की धारणा है कि मोदी सरकार एक निर्णायक सरकार है तथा देश की हर समस्या का निर्णायक समाधान करने का प्रयास करती है। विश्व में भारत की आवाज गौर से सुनी जा रही है, यह उनके कूटनीतिक कौशल्य का ही प्रमाण है। चढउठ के समूह में भारत का शामिल होना मोदी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि है। इस कारण अब भारत विश्व के अन्य देशों को भी मिसाइल व मिसाइल टेक्नॉलजी विक्रय कर सकेगा। इस कदम से हमारे देश के लिए हथियारों के बड़े बाजार का मार्ग खुल गया है।
सुशासन की अवधारणा हम भारतीयों के लिए नई नहीं है। हम भारतीय बचपन से ही रामराज्य के बारे में सुनते आए हैं जो सुशासन का सबसे आदर्श रूप है। गीता में भगवान कृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया उपदेश सुशासन के बारे में ही है। चाणक्य नीति सुशासन की रीत बताती है। छत्रपति शिवाजी महाराज सुशासन प्रस्थापित करने के प्रत्यक्ष मार्गदर्शक हैं। इसलिए हम भारतीयों के समक्ष यह प्रश्न नहीं उठता कि सुशासन क्या है? वास्तव में हमारे सामने यह प्रश्न है कि सुशासन को पुनर्स्थापित कैसे किया जाए? मनुष्य के समग्र विकास के द्वारा ही स्वस्थ एवं खुशहाल समाज का निर्माण हो सकता है। भारतीय जनता वास्तव में अपने बच्चों के एवं खुद के भविष्य को लेकर चिंतित थी। इसलिए उन्होंने २०१४ के लोकसभा चुनाव में ऊर्जावान नरेंद्र मोदी के हाथों में देश कि बागड़ोर सौंप दी।
राष्ट्रभाव, सुशासन और विकास की अवधारणा वेद-उपनिषद से प्रारंभ हुई। विवेकानंद, महात्मा गांधी, पंडित दीनदयाल जैसे राष्ट्र निर्माताओं ने उसे आगे बढ़ा कर अपने राष्ट्रीय, सामाजिक चिंतन से राष्ट्र उद्धार का संदेश देश के सामने रखा है। उस संदेश में चरैवति-चरैवेति का भाव था। त्याग एवं परिश्रम की व्यवस्था प्रस्थापित करने के लिए किसी भी आपदा को पार करके लक्ष्यों का पीछा करने का संदेश उनके चिंतन में है। राष्ट्र निर्माताओं द्वारा दिखाए मार्ग पर चल कर समाज के निचले स्तर के व्यक्तियों को लाभ देने हेतु नरेंद्र मोदी सरकार कार्यरत है। ‘सबका साथ सबका विकास’ मोदी जी ने अपने कार्यकाल का घोषवाक्य माना है। वे सकारात्मक राजनीति के पक्षधर हैं। उनके नेतृत्व में आनेवाला ‘भविष्य’ राष्ट्र के लिए प्रभावशाली होगा, जो राष्ट्रभाव से ओतप्रोत और विकास की ओर उन्मुख होगा। साथ में सुशासन के माध्यम से सुराज्य को स्थापित करेगा।

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