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मोदी सरकार के दो वर्ष के कार्यकाल में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने बहुत तेजी से प्रगति की है और कमजोर तबकों को सामाजिक न्याय दिलाने एवं उन्हें सबल बनाने में एक नए अध्याय की शुरूआत की है। महज आंकड़ों के मायाजाल में फंसने के बजाए उसके पीछे जो ठोस संकल्प है, उसकी मजबूत बुनियाद मंत्रालय ने अल्पावधि में ही कायम की है। सब से बड़ी बात यह कि इससे अनुसूचित जातियों/जनजातियों, अन्य पिछड़े वर्गों, विकलांगों, वृद्ध जनों को सामाजिक न्याय दिलाने व उन्हें सशक्त बनाने की दिशा में उनमें विश्वास जगाने में मंत्रालय कामयाब हुआ है। मंत्रालय के अंतर्गत मद्यपान तथा नशीले पदार्थों के दुरुपयोग को रोकने वाला विभाग भी कार्य करता है, जो नशे के दुरूपयोग को रोकने के लिए राष्ट्रीय नीति पर बखूबी अमल कर रहा है।
मंत्रालय के केबिनेट स्तर के मंत्री थावर चंद गहलोत एवं राज्यमंत्री कृष्ण पाल गुर्जर एवं विजय सम्पाला हैं। उनके अथक प्रयासों से ही मंत्रालय एवं विभाग महज दो वर्षों में उचित दिशा पाने में सफल रहा है।

अनुसूचित जाति विकास

वर्ष २०१४-१५ से लेकर २०१५-१६ की अवधि में मंत्रालय ने विविध योजनाओं पर सक्रिय अमल किया। इनमें उद्यम पूंजी निधि योजना, साख संवर्धन गारंटी योजना, स्वच्छता उद्यमी योजना, स्वैच्छिक संगठनों को सहायता के वित्तीय मानकों में उर्ध्वमुखी संशोधन, ग्रीन बिजनेस योजना, डॉ. बाबासाहब आंबेडकर के लेखों एवं भाषणों को ब्रेल (अंग्रेजी) संस्करण के चार खंडों को जारी करना, डॉ. आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय सामाजिक न्याय केंद्र की दिल्ली में स्थापना, डॉ. आंबेडकर स्मारक का निर्माण, डॉ. आंबेडकर स्मृति डाक टिकट जारी करना आदि शामिल हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम के जरिए सुलभ ॠणों का वितरण तथा राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम के माध्यम से सुलभ ॠणों के अलावा प्रशिक्षणार्थियों को कौशल विकास प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया है। महिलाओं के लिए स्व-रक्षा कौशल के साथ वाणिज्यिक मोटर ड्राइविंग का भी प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की गई है, ताकि सफाई कर्मचारी महिलाओं को अन्य रोजगार के अवसर उपलब्ध हो सके। इस दौरान १०० से अधिक छात्रों को अमेरिका और ब्रिटेन का अध्ययन दौरा भी आयोजित किया गया। ये छात्र उन स्थानों पर गए जहां डॉ. आंबेडकर ने कभी अध्ययन किया था।
मंत्रालय की ओर से मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति, मैट्रिकपूर्व ९-१०वी के छात्रों के लिए छात्रवृत्ति, उत्कृष्ट श्रेणी शिक्षा, राष्ट्रीय ओवरसीज छात्रवृत्ति, अनुसूचित एवं अन्य पिछड़े वर्गों के छात्रों के लिए निःशुल्क कोचिंग, अनुसूचित जातियों के छात्रों की योग्यता का उन्नयन आदि योजनाएं चलाई जा रही हैं। इसके अलावा बाबू जगजीवनराम छात्रावास योजना के अंतर्गत बालिकाओं एवं बालकों के लिए छात्रावास संचालित किए जाते हैं। छात्रों की इन योजनाओं में खर्च कुल रकम एवं लाभार्थियों की संख्या को सारांश रूप से निम्न तालिका में देखा जा सकता है।
तालिका १

छात्रों के विकास पर कुल खर्च लाभार्थियों की संख्या
२०१४-१५  २०१५-१६  २०१४-१५ २०१५-१६
२५१६.५६ २७९२.२८(करोड़ रु.)  ७८.६०लाख ८८.७९लाख

इसके अलावा १८ छात्रावासों पर वर्ष २०१४-१५ एवं २०१५-१६ कुल ७१.१० करोड़ रु. खर्च किए गए तथा कुल ३८२८ छात्र लाभान्वित हुए। यही नहीं वर्ष १०१५-१६ में सफाई कामगारों के बच्चों के लिए मैट्रिकपूर्व छात्रवृत्ति योजना में २.४२ करोड़ रु. वितरित कर ३ लाख ३८ हजार ६९३ छात्रों को लाभ पहुंचा।

वर्ष २०१५ की जुलाई में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम की योजनाओं का लाभ उठाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों के लिए वार्षिक पारिवारिक आय ८१ हजार रु. से संशोधित कर ९८ हजार रु. एवं शहरी क्षेत्रों के लिए १ लाख ३ हजार रु. से संशोधित कर १ लाख २० हजार रु. कर दी गई।

अन्य पिछड़े वर्ग

वर्ष २०१४-१५ में अन्य पिछड़े वर्गों के लिए कई नई योजनाओं की शुरूआत की गई। इनमें नई राष्ट्रीय अध्येतावृत्ति, डॉ. आंबेडकर मैट्रिकोत्तर छात्रवृति, अन्य पिछड़े एवं आर्थिक रूप से पिछड़े विद्यार्थियों के लिए डॉ. आंबेडकर शैक्षिक ॠण पर सब्सिडी, विमुक्त, घुमन्तू और अर्ध-घुमन्तू जनजातियों के मैट्रिकोत्तर एवं मैट्रिकपूर्व छात्रों के लिए डॉ. आंबेडकर छात्रवृत्ति एवं नानाजी देशमुख के नाम पर छात्रावास योजना आदि शामिल हैं। पिछड़े वर्गों के कल्याण के लिए कार्यरत स्वयंसेवी संगठनों वित्तीय सहायता की योजना को संशोधित कर अधिक पारदर्शी बनाया गया। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम ने शिक्षा ॠण, महिलाओं के लिए विशेष योजना, छोटे किसानों एवं भूमिहीन कृषि मजदूरों के लिए योजना कार्यान्वित की। कौशल विकास कार्यक्रम भी चलाया गया। राष्ट्रीय विमुक्त, घुमन्तू और अर्ध-घुमन्तू जनजाति आयोग के अध्यक्ष के रूप में श्री भीकू रामजी इदाते एवं सचिव के रूप में श्रवण सिंह राठौड़ को नियुक्त किया गया।

निगम की प्रमुख उपलब्ध्यियां इस तरह हैं-

तालिका २

वितरण इकाई रु./करोड़ अवधि
संवितरण ६०१.९२ २०१४-१५
लाभार्थियों की संख्या ३,५४,८५१ से
कौशल विकास प्रशिक्षणार्थी २६४७६

२०१५-१६

 

 
एकीकृत वृद्धजन कार्यक्रम

इस योजना के तहत वर्ष २०१४-१५ में कुल २४८ स्वैच्छिक संगठनों की ३४१ परियोजनाओं को करीब १५ करोड़ रु. की सहायता प्रदान की गई। इसमें वरिष्ठ नागरिकों के लिए फिजियोथेरेपी क्लीनिक, वृद्ध विधवाओं के लिए बहु सुविधा देखभाल केंद्र जैसी कई नई योजनाएं शामिल हैं। वर्ष २०१५-१६ में स्वैच्छिक संगठनों को वितरण पूर्व वर्ष से बढ़ा कर २७.५८ करोड़ रु. हो गया। चार गैर-सरकारी संगठनों को क्षेत्रीय संसाधन एवं प्रशिक्षण केंद्र के रूप में नामित किया गया। वरिष्ठ नागरिकों के लिए ‘वयोश्रेष्ठ पुरस्कार’ पहली बार आरंभ किया गया। वरिष्ठ नागरिकों के लिए राष्ट्रीय नीति का मसौदा संशोधित कर पुनः परिचालित किया गया। गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने वाले वरिष्ठ नागरिकों के लिए सहायक यंत्रों एवं उपकरणों के वितरण का मसौदा पुनः परिचालित किया गया।

नशीली दवा निवारण

मंत्रालय ने मद्यपान एवं नशीले पदार्थ दुरुपयोग निवारण से सम्बंधित राष्ट्रीय नीति के लिए पहल शुरू कर दी है। नशा की प्रवृत्ति पर एक राष्ट्रीय सर्वेक्षण भी किया जा रहा है। नशीले पदार्थ दुरुपयोग निवारण की वर्तमान योजना के मानदण्डों को संशोधित किया गया। इस योजना के अंतर्गत २८५ गैर-सरकारी संगठनों को ३०.७४ करोड़ रु. की सहायता प्रदान की गई। पंजाव में २८ नए नशामुक्ति केंद्रों की स्थापना को स्वीकृती दी गई। राज्य में नेहरू युवा संगठन को विभिन्न जागरूकता अभियान जारी रखने को कहा गया है। राष्ट्रीय स्तर पर टोल-फ्री हेल्पलाइन १८००-११-००३१ भी शुरू की गई। ट्रांसजेंडर समुदाय की समस्याओं का अध्ययन करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया। निराश्रित व्यक्तियों/भिखारियों के संरक्षण, देखभाल तथा पुनर्वास योजना मसौदा मंजूर कर लिया गया है। राज्यों के लिए एक माडल विधान तैयार किया जा रहा है। राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के अंतर्गत शहरी बेघरों के लिए आश्रयों का अभिसरण मंत्रालय की निराश्रितों के लिए योजना के साथ करने के लिए उचित संशोधन किए गए।

आईटी एवं ई-कॉमर्स की पहल

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम विशिष्टीकृत कौशल विकास के लिए इन्क्यूबेशन केंद्रों की स्थापना हेतु आईआईटी, रोपड़ एवं आईआईएम के साथ सहयोग प्राप्त कर रहा है। ई-गवर्नेस की पहल के लिए एनसीटीआई से समझौता किया है। लाभार्थियों की बेव लिंक के लिए साफ्टवेयर भी विकसित किया जा रहा है। पिछड़े वर्ग के कारीगरों की सहायता के लिए निगम ई-कामर्स पोर्टल के साथ कारीगरों को लिंकेज प्रदान कर रहा है ताकि उन्हें उनके उत्पादों का उचित मूल्य प्राप्त हो सके।
इस तरह मंत्रालय आम लोगों को सामाजिक न्याय एवं निर्बलों को सबल बनाने के लिए पूरी सक्रियता से कार्यरत है।

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