हिंदी विवेक : we work for better world...

परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने शिपिंग व्यवसाय में भारत की पैठ को मजबूत दावेदारी के साथ एक आम भारतीय के समक्ष प्रस्तुत किया है। मैंने स्वयं इसकी अनुभूति की है। शिपिंगव्यवसाय में मेरा भारत के बंदरगाहों से लेकर दुनिया के दूसरे किनारों पर खड़े समुद्री जहाजों पर कार्यरत भारतीयों से संवाद होता है।
‘मेरीटाइम इंडिया स्मार्ट अप्रैल २०१६’ ने प्रामाणिक तौर पर विश्व के सामने भारत का एक नया पक्ष रखा। नितिन गडकरी हमेशा से ही बड़े पैमाने पर पारदर्शिता एवं समय सीमा से कार्य करने के लिए जाने जाते हैं। शिपिंग क्षेत्र की विगत २ वर्ष की मूलभूत उपलब्धिया निम्नलिखित हैं-

नए विधान करें शिपिंग व्यवसाय सरल

१) अंतर्देशीय जल परिवहन: पिछले ३० सालों में सिर्फ ५ अंतर्देशीय जलमार्ग घोषित हुए थे। पेचीदा प्रक्रिया को सरल कर गत दो वर्षों में सरकार ने १०१ जलमार्गों को राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित करने का राजपत्र जारी किया।
२) टैरिफ अथॉरिटी फॉर मेजर पोर्ट को समाप्त करना: इससे मुख्य बंदरगाहों का ज्यादा उपयोग होगा और आय भी बढ़ेगी। मुख्य बंदरगाहों को अपने कार्यक्षेत्र में और खुलेपन से काम करने दिया जाएगा।
३) नया स्वरूप: मर्चेंट शिपिंग कानून १९५८ को नया और सरल स्वरूप दिया जाएगा। ४६१ बिंदुओं को २६१ बिंदुओं में सीमित कर व्यापार करने के लिए आसान राह बनाई जा रही है। पेचीदा नए करारनामे, जिनकी मान्यता समूचे विश्व के देशों ने स्वीकार की है, वे भी इसी २६१ बिंदुओं में जगह पाएंगे। परमाणु जहाजों और तीर्थयात्री जहाजों को इन बिंदुओं के अनुच्छेदों से बाहर रखा गया है।
४) आदर्श मैरीटाइम बोर्ड विधेयकः नौ तटवर्ती राज्यों में से सिर्फ ४ राज्यों में ही मैरीटाइम बोर्ड स्थापित है। राज्यों के लघु पोर्ट (भारत में अभी २०० से ज्यादा हैं और २०२५ तक ७०० होने का अनुमान है) सिर्फ व्यापार, पर्यटन ही नहीं बल्कि तट सुरक्षा के भी बंदोबस्त में काफी मददगार होंगे। ७५०० कि.मी तटों का स्वरूप इससे बदलेगा।

नई बंदरगाह परियोजनाएं

सागर (प.बंगाल), दुर्गापट्टनम (आंध्र), इनायम (तमिलनाडु),डहाणु (महाराष्ट्र) को विश्व स्तरीय मुख्य बंदरगाह बनाने में परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने गतिशीलता दिखाई है। २०१७ तक ये बंदरगाह भारत की अर्थ व्यवस्था को एक नया उछाल देंगे। ये बंदरगाह नवीनतम तकनीकों और नए आविष्कारों से लैस प्रौद्योगिकी की मिसाल होंगे।

इंडियन पोटर्स ग्लोबल प्रा.लि.विश्वस्तर पर काम करने की चाबहार (ईरान) और पैरा (बांग्लादेश)से शुरूआत कर रहा है। यह कदम अद्वितीय है। इससे भारत को आयात निर्यात के लिए नए गलियारे मिलेंगे और नए देशों से वाणिज्य व्यवहार की लाभप्रद परिस्थिति पैदा होगी।
चाबहार बंदरगाह के लिए ईरान से एक समझौता कर भारत ने पर्शियन खाड़ी में नए समीकरण जोड़ दिए हैं जिससे हमारे प्रतिद्वंद्वियों को अचरज हो रहा है। कूटनीति की दृष्टि से यह वन डे मैच में आखरी गेंद पर छक्का मार कर जीत हासिल करने के बराबर है।

बंदरगाहों का कार्य निष्पादन

१. प्रोजेक्ट उन्नतिः मुख्य बंदरगाहों की लागत एवं समय में सुधार के लिए अध्ययन किया जा रहा है। इसमें परिचालन, वित्तीय, मानव संसाधन एवं सक्षमता मानकों का अध्ययन करने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय सलाहकार की नियुक्ति की गई है। बंदरगाह से सम्बंधित सभी कार्यों का अध्ययन कर उसमें सुधार के उपाय इस अध्ययन से अपेक्षित है।
२. बंदरगाहों की क्षमता एवं माल ढुलाई में सुधारः मुख्य बंदरगाहों की क्षमता ३१ मार्च २०१४ को ८००.५२ एमटीपीए थी, जो मार्च २०१५ में ८७१.५२ एमटीपीए एवं मार्च २०१६ में ९६५.३६ एमटीपीए हो गई। ३४ पूंजीगत निवेश परियोजनाओं के जरिए २०१५-१६ में ९४ एमटी की अतिरिक्त क्षमता कायम हुई। एक वर्ष के कार्यकाल में हुआ यह क्षमता सुधार मुख्य बंदरगाहों के विकास में ऐतिहासिक है। वैश्विक स्तर पर मंदी के बावजूद माल ढुलाई में २०१४-१५ में ४.६५% एवं २०१५-१६ में ४.३% की वृद्धि हुई। कांडला बंदरगाह २०१५-१६ में १०० मिलियन टन माल ढुलाई करने वाला प्रथम बंदरगाह बन गया।

मुख्य बंदरगाहों की कुछ प्रमुख उपलब्धियां निम्नानुसार हैं-

• वर्ष २०१५-१६ में ३० पूंजीगत परियोजनाओं के जरिए ९४ एमटीपीए की अतिरिक्त क्षमता का निर्माण।
• वर्ष २०१५-१६ में ३० पूंजीगत परियोजनाओं के जरिए ९४ एमटीपीए की अतिरिक्त क्षमता का निर्माण।
• परिचालन लाभ २०१३-१४ के २७% के मुकाबले २०१५-१६ में ३९% हो गया। परिचालन लाभ २०१४-१५ के ३५९३ करोड़ रु. से ६७० करोड़ रु. बढ़ कर ४२६८ करोड़ रु. हो गया।
• कांडला बंदरगाह १०० मिलियन टन की ढुलाई करने वाला देश का पहला बड़ा बंदरगाह बन गया। उसकी क्षमता में २०% की वृद्धि हुई।
• जेएनपीटी बंदरगाह १००० करोड़ रु. का शुद्ध मुनाफा कमाने वाला प्रथम बंदरगाह बन गया। उसकी क्षमता में १२% सुधार हुआ।
• पारादीप बंदरगाह २०१५-१६ में २४ मिलियन टन की ढुलाई की और क्षमता में ३०% का सुधार किया।

प्रोजेक्ट ई-पोर्टः विश्व बैंक की ‘ईज ऑफ डुइंग बिजनेस’ रिपोर्ट के अनुसार जेएनपीटी बंदरगाह में जमाव कम करने एवं माल का तेजी से संवहन करने के कदम उठाए गए।
प्रोजेक्ट ग्रीन पोर्टः मुख्य बंदरगाहों को अधिक स्वच्छ व पर्यावरण अनुकूल बनाने यह परियोजना शुरू की गई। स्वच्छ भारत अभियान के तहत परिसर, सड़कों, शेड, वार्फ आदि की साफसफाई एवं प्रसाधन गृहों का सुधार किया गया। पर्यावरण की दृष्टि से प्रदूषण रोकने, मलनिस्सारण, कूड़े की व्यवस्था, नवीनीकरण ऊर्जा प्राप्त करने के उपाय किए गए।
स्मार्ट सिटीः देश के १२ मुख्य बंदरगाहों पर स्मार्ट सिटी विकसित करने की ५०,००० करोड़ रु. की योजना पर सरकार काम कर रही है। अगस्त २०१६ तक इसका अंतिम मास्टर प्लान तैयार करने का प्रस्ताव है।

आपकी प्रतिक्रिया...

Close Menu